23/02/2026
भुज जाना मेरे लिए कोई नयी कहानी पढ़ने जैसा है
बहुत दिनो से बचपन बहुत याद आ रहा हैं , ऊपर से मैने ये श्रीमान- श्रीमती, शरारत, ऑफिसऑफिस जैसे कुछ सीरियस और देख लिये मैने तो ,मुझे 90s थोड़ा याद आया और मेरा ध्यान इन सीरियल के इंटीरियर में था बहुत ज़्यादा न दीवारों पर गहरे रंग न बहुत ज़्यादा इलेक्ट्रॉनिक सामान। लोग आपस में जो बाते करते हैं। फिर में अपने आस पास ये खोजने लगा। पर मुंबई में ये कैसे संभव है और ग्वालियर जहां से हूँ वहां पर भी सब बदल गया क्यूंकि में ये भूल गया था में 2025 में 20 साल पुराना शहर ढूंढ रहा था। नाटक की वजह से अलग अलग शहर में जाने का मौका मिल जाता हैं।
कल ही भुज (गुजरात) होकर आया। मुझे बस ये पता था यहां लगान की शूटिंग हुई है या इसके आस पास कही। जब मैं जा रहा था तो सोच रहा था। शो करूगा और सोऊंगा मुम्बई में सोने को कम मिल पाता है क्योंकि। पर जब हम जैसे ही भुज पहुंचे। सुबह 10 बजे के आस पास,बहुत धूप हो गई थी। हम वहां बस स्टैंड के पास रुके थे। थोड़ा सुस्त शहर है क्योंकि होटल के बाहर रुको पहले होटल की सुनो ये होटल आज भी 2010 के होटलो की याद दिलाता है। बस यहां पलंग होगा, फैन होगा,AC भी होगा,tv भी होगा पर इसकी कोई गारंटी नहीं है कि इसमें सब चलेगा। यहां दिन में लोग अपनी दुकानें बंद करके सोने चले जाते हैं यहां धुप, दीवारों पर पपड़ी उपट रही थी, मैने ध्यान दिया मैं यही तो खोज रहा था उन टीवी सीरियल में अपने शहर में पर 2026 में भुज में मिला। क्योंकि 2001 में जो भूकंप आया था उससे ये शहर उजड़ गया था ऐसा इन लोगों का कहना है।
अगले दिन हम शहर देखने निकले सुबह 10 बजे चिलचिलाती धूप और पोहा खाया , चाय पी पता नहीं ये शहर मै खराब चाय मिलती ही नहीं हैं। मैने पैसे देते समय कहा मस्त चाय है अंकल तो पास वाले पान वाले ने हंसते हुए कहा ये आदमी भी मस्त है। चाय वाले चंद्रकांत और पान वाले यूसुफ को खिलखिलाता देख कर एक मन में हंसी सी आयी।
एक जगह देखा एक इलेक्ट्रिक चीजों की दुकान खुली थी।पास की साड़ी वाला अपनी दुकान खुली छोड़ कर पहले आधा घंटे, पास वाली दुकान पर बात करता है फिर अपनी दुकान पर आकर बैठते है। काम शुरू करते हैं। एक रोड पर चाय वाले भैया से भी बात हुई उन्होंने बोला मैं भी बंबई रहा हूँ 35 साल यहां गुजराती ही ज़्यादातर बोली जाती हैं हिन्दी भी बोलते है तो अपने दांतों को थोड़ा दवाकर बात करते हैं। यहां भी बूढ़े लोग दिन में मिलते हैं । यहां आज भी फोटो स्टूडियो है जो लगभग बड़े शहरों मे बंद हो चुके हैं।
आगे अगली पोस्ट में लिखता हूँ।