23/05/2026
अब पहले जैसा कुछ भी महसूस नहीं होता…
ना लोगों की भीड़ अच्छी लगती है, ना हर किसी को अपनी बातें बताने का मन करता है। शायद खुद को समझने के लिए थोड़ा अकेला होना ज़रूरी था। 🌙
इन दिनों मैं खामोशी में सुकून ढूँढ रही हूँ। रात की ठंडी हवा, शांत आसमान और धीमा संगीत अब किसी इंसान से ज़्यादा अपना लगता है। कुछ भरोसे टूटे, कुछ लोग बदल गए… लेकिन उन्हीं चीज़ों ने मुझे खुद के करीब ला दिया।
पहले हर रिश्ता बचाने की कोशिश करती थी, अब खुद को खोने से डर लगता है। धीरे-धीरे सीख रही हूँ कि हर जवाब लोगों में नहीं, कभी-कभी अपनी तन्हाई में भी मिल जाता है। Healing loud नहीं होती… वो चुपचाप अंदर से इंसान को मजबूत बनाती है। 🤍
अब अकेलापन दर्द नहीं देता, सुकून देता है।
“खुद से जुड़ जाना भी एक खूबसूरत जीत है।”