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mr_milan_damor भील कबीला 🏹
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29/01/2026

Celebrating my 4th year on Facebook. Thank you for your continuing support. I could never have made it without you. 🙏🤗🎉

29/05/2024

लाइट नहीं आने से खास समस्या तो नई नई शादी हुई उनकी है बाकी हम कुंवारों को तो लाइट की जरूरत सिर्फ मोबाइल चार्ज करने के लिए हैं बाकी पूरा साल भर नी आए तो कोई दिक्कत नहीं😂🙈

18/05/2024

राहुल से तो पूछ लिया की कब शादी करोगे,
🌶️
कभी हीरालाल से भी पूछ लो कि बीवी को वापिस घर कब लाओगे?

समय कभी खराब नहीं होता वो तो अपनी गति अनुसार चलता रहता है, हमारे जीवन में सुख दुख के उतार चढ़ाव आतें रहते हैंहमें धैर्य ...
12/12/2022

समय कभी खराब नहीं होता वो तो अपनी गति अनुसार चलता रहता है, हमारे जीवन में सुख दुख के उतार चढ़ाव आतें रहते हैं
हमें धैर्य के साथ अपना काम करते रहना होगा , जय #कुदरत

#आदिवासी_समाज (समुदाय) विश्वदृष्टि मे 🌿🍃 ,
प्रकृति व आदिवासी समुदाय एक दूसरे के प्रति पूरूक है अर्थात एक सिक्के के दो पहलू है
प्रकृति व्यापकतम मे प्राकृतिक, भौतिक, या पदार्थिय जगत या ब्राह्मण है
प्रकृति और आदिवासी के बीच अटुट रिश्ता है, पारंपरिक रूप से आदिवासी न सिर्फ प्रकृति पर निर्भर व आश्रित रहे है बल्कि उसकी रक्षा करते आये है, आदिवासी समाज ने इस बात को बहुत पहले ही समझ लिया था कि मनुष्य को अगर अगली पीढ़ी के लिए एक बेहतर दुनिया बचा के रखना है तो उन्हें पर्यावरण की रक्षा करनी होगी

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक दुनिया में लगभग 37 करोड़ आदिवासी रहते हैं, भारत में 705 जनजातियों मे बटे है जो 8.6 प्रतिशत के लगभग है
भारत में आदिवासियों को कई धर्मों में कनवर्टेड कर दिया या स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन कर दिया है जिसके .पीछे अनेकों कारण हो सकते हैं फिर भी आदिवासी अपने कल्चर को मन से नहीं भुला है व #प्रकृतिवादी विचारों को महत्व देते हैं। पेड़ पौधे, पहाड़, नदियां, चांद, सूरज की पूजा करते हैं
अर्थात पर्यावरण को सुरक्षित रखना ही प्रकृति शक्ति है के विचारों को महत्व देते है,
आदिवासीकारण इस धरती के पूराने साथी कहा जाए तो भी कोई अतिशयोक्ति नहीं
जिन्होंने प्रकृति को मां समान समझा व जल, जंगल, जमीन की रक्षार्थ प्राण भी न्योछावर किये, जंगल ही उनके उनका परिवार है, जंगली जानवरों को भी वे अपने परिवार का अटूट हिस्सा मानते है
प्रकृति से प्राप्त संसाधनों से ही वे अपना जीवन निर्वाह करते हैं लेकिन प्रकृति से उतना ही लेते हैं जितना की जरूरत होती है, साथ ही वृक्षारोपण करना, बागवानी फल पैदा करना आदि सामंजस्य बनाए रखते हैं
औधोगिकरण व तकनीकी युग से पहले तक पर्यावरण की स्थिति बहुत सुरक्षित थी लेकिन विज्ञान के युग मे पर्यावरण का बुरी तरह खनन किया, उद्योगपतियों ने अपने नीजी स्वार्थ के चलते आदिवासियों को बेदखल कर जंगल की जगह बडे़ बडे प्लांटस स्थापित किए, कम्पनियां खोली, वक्त बदल गया, वक्त के साथ साथ आदिवासियों का रहन सहन भी बदल गया लेकिन आदिवासियों का जल, जंगल, जमीन के प्रति लगाव कम नहीं हुआ है, आज भी आदिवासियों के क्षेत्रों मे पर्यावरण हरा भरा है
पालो व फलो में देख सकते हैं।
🌹जोहार जय आदिवासी 🏹

08/12/2022

धर्मशास्त्रों में जो इंसान गलत काम करता है उसे मार देने का ही उदाहरण लिखा हुआ मिलता है...
आदिवासी न्याय प्रणाली में व्यक्ति में सुधार की हरसंभव कोशिश होती हैं, अंगभंग या हत्या दो बहुत दूर की बात है...
धर्मशास्त्र महान है या आदिवासी न्याय प्रणाली??
बताइए

।। आदिवासियों के पास बोरे भर-भर कर पैसे नही होते इनके पास सिर्फ अपनी जीविका चलाने के लिए महुएँ के फुँल आदि रहते हैं........
07/03/2022

।। आदिवासियों के पास बोरे भर-भर कर पैसे नही होते इनके पास सिर्फ अपनी जीविका चलाने के लिए महुएँ के फुँल आदि रहते हैं........आदिवासी पूर्ण रूप से प्रकृति पर निर्भर है ।

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कृपया एक बार पूरा लेख जरूर पढ़िए, उसके बाद कमेंट कीजिए।चाहे कमेंट नहीं करोगे तो भी चलेगा , लेकिन लेख जरूर पढ़िये।साल था 19...
07/03/2022

कृपया एक बार पूरा लेख जरूर पढ़िए,
उसके बाद कमेंट कीजिए।

चाहे कमेंट नहीं करोगे तो भी चलेगा ,
लेकिन लेख जरूर पढ़िये।

साल था 1993, जगह थी सूडान।
फोटोग्राफर को पुलित्ज़र अवार्ड मिला। पर चार महीने बाद उसने आत्महत्या कर- ली।
पता है आपको आत्म हत्या का कारण क्या था ?*

दरअसल यह एक दर्दनाक तस्वीर थी जिसमें एक गिद्ध एक भूख से तड़फती बच्ची के मरने का इंतजार कर रहा था !

फोटोग्राफर ने यह मार्मिक तस्वीर खींची जो बहुत बड़ी खबर बनकर छपी थी। सबसे प्रतिष्ठित सम्मान मिलने के बाद वह फोटोग्राफर बहुत खुश था, लेकिन 4 महीने बाद उसके पास एक फोन आया, एक पाठक ने पूछा कि आखिर उस बच्चे का क्या हुआ ?
उसको गिद्ध ने खा लिया ?
क्या वह मर गया ?

फोटोग्राफर ने जवाब दिया कि मुझे नहीं पता, मैं यह तस्वीर खींच कर चला गया। जिस पर पाठक ने उस फोटोग्राफर को कहा कि*
*आपको पता है उस दिन इस बच्चे के पास एक गिद्ध नहीं बल्कि दो गिद्ध थे।

पहला गिद्ध जो उस भूखी बच्ची के मरने का इंतजार कर रहा था, ताकि उसको खा कर भूख मिटाए।

दूसरा वह गिद्ध था जिसने इस बच्चे के दु:ख को भुनाया और दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित अवार्ड जीता।

आपने आखिर उसे बचाने का प्रयास क्यों नहीं किया ?

इन सवालों के बाद उस फोटोग्राफर ने आत्महत्या कर ली।

वास्तव में यही हालात वर्तमान में आज भी हो रहा है... गरीबो, बेरोजगारों , जरूरतमंदों का मज़ाक उड़ाया जा रहा है ,
फोटो खींची जा रही है ,
राजनीति खूब हो रही है लेकिन जो वास्तविक मदद हक, अधिकार, सम्मान, होनी चाहिए , वह मदद नहीं हो पा रही....
सिर्फ बड़ी बड़ी फोटो .......में ही मदद हो रही है।
आज TSP रोस्टर लागू करके आदिवासियों के प्रतिनिधित्व को खत्म कर दिया है, जिम्मेदार लोगों के मुहँ से उस रोस्टर के बारे 1 शब्द भी नहीं निकल रहा ......
इस रोस्टर के कारण प्रतापगढ़ जिले में पुलिस भर्ती 2019 में 55 आदिवासी नोकरी लगने से वंचित रह गए।
और तृतीय श्रेणी अध्यापक भर्ती 2021 लेवल-1 में प्रतापगढ़ जिले में 90 आदिवासी (ST) शिक्षित बेरोजगार उनके आँखों के सामने नोकरी लगने से वंचित रह जायेंगें, लेकिन वो अपने मुँह से 1 बार भी ऊ तक नहीं करेंगे।
2019 में 55 आदिवासी के गले कटते देखते रहे ,इसी तरह से 2022 में 90 आदिवासियों के गले करते देखते रहेंगे लेकिन उन 90 ST लोंगो के न्याय के लिए कुछ नहीं बोलेंगे।------
बाकी आप समझदार हो समझ गए होंगे.....

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08/02/2022

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08/02/2022
30/01/2022

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