16/08/2026
शिवकृपा का महान चमत्कार ही है यह, 😄
कम न आँकें इन समर्पित शिवभक्तों की ताकत,
अपरिमित शक्तियों और दैवीय ऊर्जाओं से भरपूर हैं ये,
रग-रग में शिवत्व संचरित होता है इनमें,
धरती पर शिव के साक्षात् गण ही हैं ये समर्थ शैव साधक
पूरी दुनिया इनके चमत्कारों की कायल है। ये दिव्य आत्माएं जब ध्यान में होती हैं, दम भरती हैं, तब भगवान भोलेनाथ से सीधा साक्षात्कार होता है।
उस समय इनकी पांचभौतिक देह धरती पर जरूर होती है लेकिन आत्मा कैलास के शिखर पर रमण करते हुए भगवान भोलेनाथ के सान्निध्य में रहती है।
जब ये बम-बम भोले, अलख निरंजन, हर-हर महादेव, जय भोलेनाथ आदि के गगनभेदी उद्घोष करते हैं तब जहां तक इनकी आवाज पहुंचती है वहां तक सुनने वाले हर किसी भक्त को शिवजी की कृपा का अनुभव होता है।
इनके दर्शन करने मात्र से ही शिवजी की कृपा प्राप्त हो जाती है।
इसी तरह जो विप्रश्रेष्ठ शिवभक्त भंग आदि का प्रसाद ग्रहण कर रूद्राभिषेक या शिवार्चन करते हैं, उनमें भी शिवत्व का भरपूर समावेश रहता है।
ख़ासकर महाशिवरात्रि, श्रावण मास, सोमवार को इनके रोम-रोम से शिवत्व झरता है, लेकिन इस सत्य और तथ्य से अनभिज्ञ हम अज्ञानी लोग इनकी कृपा पाने से वंचित रह जाते हैं। यह हमारे पूर्वजन्मों के पापों और दुर्भाग्य का ही परिणाम है अन्यथा पारस पत्थर की खान होने के बावजूद हम लोहा ही बने हुए हैं, तो यह हमारी ही गलती है, किसी और को इसके लिए दोष नहीं देना चाहिए।
इन्हें सामान्य शिवभक्त समझने की भूल कभी न करें, ये साक्षात शिव अवतार ही होते हैं जब वैदिक ऋचाओं, शैव मंत्रों, रूद्रार्चन, स्तोत्र पाठ आदि में रमे हुए रहकर शिवार्चन करते हैं, शिव के भजनों में रमे रहते हैं और जब ये उच्चस्वर में गाते हैं - भोला ने भांग ज भावै है बिजू काईं काम न आवै रै....।
इस प्रकार के समस्त सिद्ध, तपस्वी शिवभक्तों के श्रीचरणों में कोटि-कोटि प्रणाम।