25/06/2016
जीवन का अंतिम पथ है 'अंतिम संस्कार'
पर यहां शहर में शुक्रवार को इस संस्कार को शर्मसार करने वाला वो दृश्य दिखा कि जुबां से यहीं शब्द निकले हैं ... भगवान एेसी मौत किसी को मत देना।
ना कंधा, ना धार्मिक रस्म। गठरी में शव लपेटा,उठाया और कचरे की गाड़ी में पटका। श्मशान घाट पर पोटली खोली। लकड़ी के चंद टुकड़ों पर पटका।
आस-पास कुत्तों का मजमा, पर कोई हटाने वाला नही। आंखें तो तब शर्म से झुक गईं, जब एक कुत्ता आया और शव पा शौच कर गया। पर, अंतिम संस्कार की रस्म अदायगी वालों के चेहरे पर शिकन तक ना आई और टायर, केरोसीन से अग्नि दी और पल भर में सब छू मंतर हो गए।
दिल दहला देने और आत्मा को भीतर तक झकझोर देने वाला यह वाक्या है शहर की इंद्रा कॉलोनी के एक मकान से मंगलवार को बरामद हुई लावारिस लाश का है। शव की शिनाख्त नहीं होने पर पुलिस ने शुक्रवार को नगर परिषद के सहयोग से अंतिम संस्कार करवाने की व्यवस्था तो कर दी, लेकिन इसके बाद के दृश्य मानवता को शर्मसार करने वाले दिखाई पड़े।
शव को मोर्चरी से निकालने से लेकर अंतिम संस्कार तक की विधि जमादारों के भरोसे रही। मोर्चरी से शव को नगर परिषद के कचरा पात्र में पटककर श्मशान घाट लाया गया। शव काफी देर तक तो श्मशान घाट पर ही पड़ा रहा। इसके आसपास कुत्ते भी आ गए। इसमें एक कुत्ता तो शव पर शौच भी कर गया। बाद में जब जमादारों का ध्यान गया तो उन्होंने कुत्तों को भगाया।
इसके काफी देर बाद नगर परिषद् के इंस्पेक्टर ने लकडि़यों की व्यवस्था करवाई और उसी कचरा पात्र में भरकर लकडि़यां आई गर्इं। इसके बाद एक कार्मिक टायर लेकर और दूसरा डीजल। कुछ देर बाद मृत्यु शैय्या पर टायर लगाया और डीजल छिड़कने के बाद आग लगा दी और कर दिया अंतिम संस्कार।
अंतिम संस्कार तक में नहीं दिखी पुलिस
शव को मोर्चरी से निकालने से लेकर दाह संस्कार तक पुलिस का एक भी कार्मिक मौके पर मौजूद नहीं था। इतना ही नहीं मोर्चरी के बाहर भी पुलिसकर्मी नजर नहीं आए। पुलिस ने नगर परिषद को शव के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी सौंपकर इतिश्री कर दी। बाद में पुलिस ने देखा तक नहीं।
नहीं हैं स्थाई कार्मिक
जमादारों ने बतायाकि लावारिस शवों के अंतिम संस्कार करवाने के लिए नगर परिषद में स्थाई कार्मिक नहीं है। इसके चलते हमेशा अव्यवस्थाएं रहती हैं। अंतिम संस्कार के लिए कभी कोई कभी कोई जमादार आता है। इसके चलते परेशानी आती है।
यह गलत है
एेसा नहीं होना चाहिए। यह तो गलत है। पुलिसकर्मियों का मौके पर होना जरूरी है। लावारिस शव का अंतिम संस्कार तो पूरी विधिवत प्रक्रिया से होना चाहिए। अब भविष्य में एेसा नहीं हो, सभी थानाधिकारियों को पाबंद करेंगे। जिन पुलिसकर्मियों की लापरवाही रही है, उनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे।