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प्रशिक्षण संगठन की सक्रियता और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का जब कॉकटेल हो जाता है तो युगों के रिकॉर्ड भी ध्वस्त हो जाते...
04/12/2020

प्रशिक्षण संगठन की सक्रियता और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का जब कॉकटेल हो जाता है तो युगों के रिकॉर्ड भी ध्वस्त हो जाते हैं इसकी बानगी देखने को मिली एमएलसी चुनाव में 48 साल का ओपी शर्मा राज अब ध्वस्त हो चुका है।
मेरठ सहारनपुर शिक्षक सीट पर पिछले 8 साल से माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष ओमप्रकाश शर्मा ने अपना सियासी किला मजबूत कर रखा था कोई भी उन्हें अभी तक नहीं हरा पाया लेकिन इस बार मिनी चाणक्य यानी सुनील बंसल की चुनावी रणनीति से पूरे उत्तर प्रदेश के एमएलसी चुनाव में बीजेपी की एकतरफा आंधी चलती दिखाई दी।
दरअसल शिक्षक और स्नातक एमएलसी चुनाव किसी और पार्टी को लड़ना ही नहीं आता था लेकिन शिक्षक संघ के अध्यक्ष ओपी शर्मा और स्नातक संघ के अध्यक्ष हेम सिंह पुंडीर इस सियासी चक्रव्यूह को रचने के महारथी थे इसी वजह से ओपी शर्मा का 48 साल और स्नातक में पुंडीर का 52 साल से ज्यादा वर्चस्व रहा।
भाजपा के मिनी चाणक्य सुनील बंसल ने इस बार बहुत ही बारीकी से एमएलसी चुनाव पर अपनी निगाह काबिज़ कर दी
बहुत ही संगठित तरीके से एमएलसी चुनाव की रूपरेखा तैयार की गई ठीक वैसे ही जैसे किसी बड़े चुनाव की तैयारी की जाती है।
इस चुनावी चौसर को जीतने के लिए सुनील बंसल ने सांसद पूर्व सांसद विधायक और जिन लोगों ने पूर्व में एमएलसी चुनाव जीते हैं उन लोगों को अपनी टीम में शामिल किया इसके अलावा कार्यकर्ताओं की एक विशेष टीम बनाई जिन्होंने एक जागरूकता अभियान चलाया उस जागरूकता अभियान की निगरानी में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के नेताओं को लगाया गया इसके अलावा उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ ने जिन सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बहुत ही अच्छे तरीके से ग्राउंड स्तर तक किया है योजनाओं का खूब प्रचार प्रसार किया गया शायद सरकार ने उतना प्रचार प्रसार उन योजनाओं का नहीं किया गया होगा जितना कि एमएलसी चुनाव में एक-एक घर तक यह बताने की कोशिश की गई कि भाजपा केवल वादे और दावे नहीं करती बल्कि उनका एग्जीक्यूशन भी भाजपा की जिम्मेदारी है और जब संगठन सक्रिय हो गया सरकारी योजनाएं बहुत ही शानदार तरीके से ग्राउंड पर सफल हो रही हैं और उसके बावजूद कोई चुनाव ना जाए यह तो असंभव लगता है।
भाजपा से एमएलसी मेरठ खंड की सीट से जीतने वाले श्री चंद खुद इस रणनीति के कायल हैं शुरुआत में उनको खुद विश्वास नहीं था कि जिस मैदान में वह कूद रहे हैं वहां उनकी विजय निश्चित है या नहीं लेकिन जैसे जैसे उन्होंने संगठन की सक्रियता देखी वैसे वैसे उनको अपनी जीत के बारे में पूर्ण विश्वास हो गया उत्तर प्रदेश में करीब 6 एमएलसी सीटों पर शिक्षक संघ का दबदबा रहता था लेकिन इस बार दबदबा भाजपा का है तीन एमएलसी सीटें लगभग क्लियर हो चुकी हैं।
भाजपा उत्तर प्रदेश के संगठन मंत्री सुनील बंसल हर चुनाव को बहुत गंभीरता से लेते हैं उन्हें मालूम था कि शिक्षक संघ की 6 एमएलसी सीटें और 5 स्नातक एमएलसी सीटों पर भाजपा को अगर अपना दबदबा स्थापित करना है तो उसकी तैयारी भी करनी होगी करीब 3 साल पहले कानपुर में इसका ट्रायल सुनील बंसल ने कर दिया था जिस शिक्षक एमएलसी सीट पर 52 साल से ओपी शर्मा गुट का कब्जा था उसे भाजपा ने जीत लिया था बस वही से मिनी चाणक्य सुनील बंसल ने तय कर लिया था कि 3 साल बाद जब इन सभी सीटों पर चुनाव होंगे तो वहां किस तरह से चुनावी चौसर सजानी और विजय पताका लहरानी है।
भाजपा के बारे में यह भी कहा जाता है की मुख्य चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी जाती है लेकिन जब बारी उपचुनावों की आती है तब इतनी मेहनत नहीं की जाती जिसकी वजह से भाजपा को उपचुनावों में कई बार करारी हार का सामना करना पड़ता है इसका ताजा उदाहरण उस वक्त देखने को मिला जब उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में सरकार बनी और खुद सीएम और डिप्टी सीएम अपने क्षेत्र के उपचुनाव हार गए।
जिस की प्रमुख वजह अति आत्मविश्वास और चुनाव में सक्रिय है ना होना मुख्य तौर पर था लेकिन भाजपा के संगठन मंत्री और मिनी चाणक्य सुनील बंसल ने इस बार के उपचुनावों में जिस तरह से संगठन को सक्रिय किया और सीएम की योजनाओं को ग्राउंड तक प्रचारित प्रसारित किया उसका नतीजा जीत के जश्न के रूप में देखने को मिला।
भाजपा के पूर्व अध्यक्ष अमित शाह जो कि वर्तमान में देश के ग्रह मंत्री हैं वह भी सुनील बंसल के इस हुनर से वाकिफ हैं इसीलिए उन्होंने अपने खास सुनील बंसल को उत्तर प्रदेश में भेजा था और बंसल ने भी शाह के विश्वास को डगमगाने नहीं दिया।
और अब शाह ने अपने मिनी चाणक्य सुनील बंसल को मिशन ममता पर भेजा है। आलाकमान को मालूम है कि *मिशन ममता (बंगाल)* की सफलता का राज संगठन की सक्रियता और उसके काम पर टिका है और इस फन में *सुनील बंसल* को महारत हासिल है। जातिगत सामाजिक तौर पर संगठन को कैसे मजबूत करना है इसका नमूना अब कश्मीर में देखने को मिलेगा फिलहाल उत्तर प्रदेश के एमएलसी चुनाव में जिस तरीके से भाजपा ने अपनी जीत का परचम लहराया है उससे सरकार और संगठन को एक बार फिर से खुश होने का मौका मिला है और यह भी सच है कि जब सरकार और संगठन मिलकर काम करते हैं तो उसके नतीजे निश्चित ही सुख देने वाले होते हैं।
देश में जब यूपीए वन और यूपीए-2 की सरकार थी तब सरकार और संगठन का झगड़ा सार्वजनिक था कांग्रेस और उस वक्त की सरकार में जुड़े जितने भी दल थे उनका सरकार से कोई तालमेल नहीं था उस वक्त भी कहा जा रहा था कि अगर सरकार और संगठन मिलकर काम नहीं करेंगे तो नतीजे उनके हक में नहीं होंगे एक यह भी मुख्य कारण है की देश की सबसे बड़ी और पुरानी पार्टी आज हाशिए पर जा रही है।

भारतीय जनता पार्टी में यह सबसे खास बात है कि सरकार और संगठन में अगर थोड़ी बहुत अनबन भी चल रही है तो चुनावों के वक्त वह दिखाई नहीं देती।

13/09/2019
12/09/2019

हरियाणा के झज्जर स्थित वर्ल्ड मेडिकल कॉलेज में चल रहा आंदोलन दिन प्रतिदिन उग्र होता जा रहा है, न तो कॉलेज प्रशासन झ....

11/09/2019

सुबह जिस कॉलेज के खिलाफ करते हैं भूख हड़ताल,
शाम को उसी कॉलेज के मैस में चुपके से खाना खाते हैं।
भाई कौन हैं ये लोग, ये लोग कहां से आते हैं?

CMO Haryana Aajtak Live PMO India Khabar IndiaTV Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad (ABVP)

10/09/2019
10/09/2019

जी हां यदि आप घर से कॉलेज की ओर निकले हैं तो जरूरी नहीं कि आप क्लासेज में ही जाएंगे, हो सकता है आपको रास्ते में ही कुछ महापुरुष मिल जाएं और आपको राजनीति या क्रांति की ओर ले जाएं। आजकल यह चलन में है, विद्यार्थी जाते तो कॉलेज पढ़ने हैं लेकिन वहां कुछ छात्रों की संगत में पढ़ाई एक अलग ही माहौल में चल देती है। जिसका जीता जागता उदाहरण है झज्जर का वर्ल्ड मेडिकल कॉलेज।मामला यह है कि नए सत्र में जब विद्यार्थियों से कॉलेज द्वारा निर्धारित फीस मांगी गई तो कुछ विद्यार्थियों के अंदर का क्रांतिकारी राजनेता जाग उठा और वह यह भूल गया कि वह कॉलेज में पढ़ने आया है क्रांति करने नहीं। लेकिन नियति और विवेक नेता बनने की ठान ले तो फिर भविष्य और पढ़ाई की चिंता किसे होती है? तो सब हाथ में तख्ती बैनर उठाएं चल देते हैं क्रांतिकारी बनने। इसी तरह झज्जर वर्ल्ड मेडिकल कॉलेज के 48 छात्र भी धरने पर बैठ गए। धरने की शुरुआत क्या हुई कि उनका आंदोलन राजनीतिक पार्टियों का पिकनिक स्पॉट बन गया और आजकल आलम यह है कि विद्यालय में पढ़ाई कम राजनीति की चर्चा ज्यादा हो रही है। इससे सिर्फ कॉलेज का माहौल ही नहीं बिगड़ा बल्कि पढ़ने वाले बाकी 102 छात्रों का भविष्य भी अधर में लटक गया, जिन्हें कॉलेज में पढ़ने का माहौल चाहिए था लेकिन कुछ छात्रों की मनमर्जी और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के चलते वह एक बुरे षड्यंत्र का शिकार हो गया। ऐसे में हम सबके सामने सोचने वाली बात यह है इन छात्रों की वजह से पीढ़ियों से चली आ रहे अच्छे छात्रों का नुकसान आखिर कब बंद होगा? इसीलिए आप भी सावधान रहिए क्या पता आपकी क्लासेज के रास्ते में भी कुछ ऐसे ही क्रांतिकारी मिल जाए और आपको पढ़ाई की वजह नेतागिरी में धकेल दें।

08/09/2019

झज्जर का वर्ल्ड मेडिकल कॉलेज आजकल सुर्खियों में बना हुआ है। वर्ल्ड मेडिकल कॉलेज में चल रही छात्र राजनीति आजकल अपने नए-नए खुलासों और घटनाओं के लिए चर्चा का केंद्र बनी हुई है। ऐसा ही एक अजीबोगरीब वाकया तब देखने को मिला जब आंदोलनरत छात्रों के विरोध में ही कॉलेज के अन्य नियमित छात्र सामने आ गए।
गौरतलब है कि पिछले कई दिनों से विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ आरोप लगाकर संस्थान के 58 छात्र हड़ताल पर बैठे हुए थे, जिनमें से 10 छात्र कुछ दिन बाद ही हड़ताल छोड़कर वापस अपनी पढ़ाई करने चले गए। लेकिन नया मोड़ तब आया जब कॉलेज में शांतिपूर्ण तरीके से पढ़ाई कर रहे 102 छात्रों ने आंदोलनरत छात्रों के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया। ये छात्र अपने हाथों में तख्ती बैनर लेकर कॉलेज को राजनीति से दूर रखने का अनुरोध करते नजर आए। संस्थान के नियमित छात्रों ने व्यक्त किया कि कुछ छात्रों की मनमानी के चलते पूरे संस्थान की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए। वे चाहते हैं कि कॉलेज में पढ़ाई का माहौल बना रहे क्योंकि यहां डॉक्टर बनने आए हैं,नेता नहीं। छात्रों द्वारा प्लेकार्ड और अन्य माध्यमों से संदेश दिए गए जिनमें साफ पढ़ा जा सकता है कि छात्र कॉलेज प्रांगण में चल रहे धरना प्रदर्शन और आंदोलन से काफी व्यथित हैं। वे बार-बार संस्थान को नियमित रूप से होने देने और अध्ययन और अध्यापन के कार्य को अनुशासित ढंग से चलने देने अनुरोध कर रहे हैं। प्रबंधन और छात्रों के बाद अब यह मामला छात्र बनाम छात्र हो गया है। इस पूरे घटनाक्रम में भले ही रोज नई-नई बातें सामने आ रही हो, लेकिन सार यही है कि अपने घर से डॉक्टर बनने आए छात्रों का भविष्य कुछ छात्रों की मनमानीऔर राजनीति के चलते एक गहरे अंधकार की तरफ बढ़ चुका है। कॉलेज में चल रही है उठापटक से हानि किसे होगी यह तो आने वाला भविष्य ही बताएगा लेकिन जो भी हो इस पूरे मामले ने छात्रों की मनमानी और राजनीति को लेकर बड़ा प्रश्न खड़ा कर दिया है।
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07/09/2019

झज्जर स्थित वर्ल्ड मेडिकल कॉलेज में तनातनी कम होने का नाम नहीं ले रही है. अब आंदोलनकारी छात्रों की गुंडागर्दी सामन...

05/09/2019

आज 5 सितंबर को संपूर्ण देश में भारत के द्वितीय राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के जन्मदिवस को शिक्षक दि....

ये है हमारे भविष्य के डॉक्टर बाबू
04/09/2019

ये है हमारे भविष्य के डॉक्टर बाबू

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