Samvad News

Samvad News ज़िंदगी से संवाद. हमारी दुनिया के ऐसे लोगों की कहानियाँ जो अपने बारे में कभी कुछ नहीं कहते हैं.

05/06/2026

चंबा-कांगड़ा में भूकंप के झटके
चंबा। चंबा और कांगड़ा में शुक्रवार की रात 10:04 बजे भूकंप का तेज झटका महसूस किया गया. करीब तीन सेकेंड तक धरती कांपती रही. रिक्टर स्केल पर चंबा में भूकंप की तीव्रता 5.0 और कांगड़ा में 4.3 बताई गई है. अभी किसी नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन लोग डर के मारे अपने-अपने घरों से बाहर निकल कर खुली जगहों पर इकट्ठा हो गए हैं.

05/06/2026

'पीटरहाफ' में एक पूरी सुबह, शिमला से संवाद न्यूज़ के साथी शरद मौर्य का डिस्पैच...

मेरे फोन की घड़ी में सुबह के पांच बजकर तीन मिनट हो रहे हैं. प्राणेश जी के खर्राटे कमरे में अब भी गूंज रहे हैं. मेरी नींद तो 2:05 पर ही खुल गई थी. उनके खर्राटों की वजह से नहीं. किसी गुजरी और नापसंद सी याद ने मुझे झकझोरा था. वह घटना, वह याद ... मैं उबरने या उससे पीछा छुड़ाने की कोशिश कहिए, फोन पर स्क्रोल करता रहा. यह मैं कभी बहुत देर कर नहीं पाया. आज भी नहीं. होटल पीटरहाफ के नीम अंधेरे कमरे में इस छोर से उस छोर तक भटकती मेरी निगाह ने अचानक पाया कि बिस्तर के ठीक सामने की खिड़की से उजाला सा मुझे घूर रहा है. मेरा चौंकना लाजिम था. क्योंकि कुछ पल पहले उसी खिड़की के पार दूर पहाड़ी तक का शून्य अंधेरे से भरा था. तस्दीक या शायद तसल्ली के लिए मैंने दाएं उस खिड़की की ओर नजर दौड़ाई जो छोटी सी बाल्कनी में खुलती है. खिड़की से लगा बाल्कनी में जाने के लिए दरवाजा भी है. आधे खुले परदों की वजह से नजर ने पाया उजाले की वही आंखें मुझे वहां से भी घूर रही हैं. उजाले की इतनी भी आंखें हो सकती हैं ....मुझे अपनी सोच ने हैरान किया. असमय उठा देने वाली कुरूप सी वह याद अब कुतूहल में बदल चुकी थी. दूर पहाड़ी पर टिमटिमाते बिजली के बल्ब अब भी रोशन बिंदुओं की तरह चमक रहे थे. जैसे उन पहाड़ियों का श्रृंगार कर रहे हों. कुतूहल मुझे बाल्कनी में ले जाने पर आमादा थी पर मैं जानता था जरा भी खटपट प्राणेश जी के खर्राटों में खलल बन सकती है. उनकी आंख भी खुल सकती है. फिर भी खिड़कियों से झांकती उजली आंखों के आकर्षण से भला कब तक बचता. नींद तो पहले ही तिरोहित हो चुकी थी. प्राणेश जी को भनक न लगे इस एहतियात के साथ बिस्तर से उठा. दबे पांव दरवाजे तक पहुंचा. दरवाजे के खुलने में बाधक उसके बिल्कुल करीब रखे हीटर को धीरे से कुछ और दूर किया. दरवाजे की सिटकनी कम से कम आवाज करे, भरपूर सावधानी के साथ नीचे खिसकाई. सिटकनी थी, उसे किसी के सोने-जागने की परवाह तो थी नहीं, सो धीमी आवाज में ही आखिर उसकी चीख निकल ही पड़ी. यही कौशल अब मुझे बाहर की जाली वाले दरवाजे के साथ दिखाना पड़ा. बहरहाल, मैं बाल्कनी में आ चुका था. सारा राज खुल गया. वह आंखें भर न थीं, भोर के उजाले का अस्तित्व दूर पहाड़ी से लेकर होटल की जड़ तक फैला था. उजाले से ऊपर घने काले और कहीं ग्रे कलर के बादलों की मोटी परत छाई थी. सिहरा देने वाली बयार भी गुनगुना रही थी. कल दिन में एक घंटे में हुई करीब 33 मिलीमीटर बारिश जो हुई थी. मौसम विभाग के अनुमान में तो आज भी बादलों का मूड वैसा ही रहने का है. प्रकृति की अनन्य सुंदरता हर ओर फैली है. अब तक तो अनजानी चिड़ियों की आवाजें भी बैकग्राउंड म्यूजिक की तरह बजने लगी थीं. मंत्रमुग्ध मन किसी रंगमंच पर मानो हर पल बदल रहे रंगदीपन के कौशल का चितेरा बना हुआ था.
सारी दुनिया में मशहूर सुबहे-बनारस को सालों देखते और जीती आईं आंखें हिमाचल की धरती पर उतरती इस सुबह की मादक चाल पर सम्मोहित थीं. यह तंद्रा टूटी तो फोन फोटो और वीडियो बनाने के काम आ गया.
हां, मुझे लगा कि बनारस में रहते हम इतने मस्त क्यों थे. राजेंद्र प्रसाद घाट से नाव लेकर गंगा पार जाना, तैरना और निकलने से पहले वापस घाट पर आकर प्रणाम के साथ सूरज के स्वागत के लिए मौजूद रहना. यह सब इतनी ऊर्जा से भर देता था कि सारे काम करते हुए भी पूरा दिन हंसी-ठिठोली से भरा रहता. शायद प्रकृति से दूरी ही बुरी यादों को इतना साहस दे जाती है कि वे गहरी नींद में भी हमें झकझोर कर उठा पाती हैं. काश! कंक्रीट के जंगलों में रहते हुए भी हम सुबह के स्वागत के गीत गा सकते.... शायद शहरी अवसादों का यह इलाज प्रकृति ने हम सभी के लिए उपलब्ध करा रखा है. फिर भी हमारा हाल कुछ ऐसा है-
अब बू-ए-गुल न बादे- सबा मांगते हैं लोग
वो हब्स है कि लू की दुआ मांगते हैं लोग

नई दिल्ली | मालवीय नगर के हौजरानी इलाक़े के लेमन ग्रीन रेस्टोरेंट में बुधवार को सवेरे लगी भीषण आग से अब तक बीस लोगों की ...
03/06/2026

नई दिल्ली | मालवीय नगर के हौजरानी इलाक़े के लेमन ग्रीन रेस्टोरेंट में बुधवार को सवेरे लगी भीषण आग से अब तक बीस लोगों की मौत हो चुकी है, 37 लोग घायल हैं. रेस्टोरेंट में आग की ख़बर पाकर दमकल की 10 गाड़ियां मौक़े पर पहुंचीं. काफ़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका.

पिछली सदी के फ़िल्मी संगीत की एक खनकदार आवाज़ सुमन कल्याणपुर के निधन से ख़ामोश हो गई. भारतीय संगीत ने अपनी शालीन और दिलकश...
31/05/2026

पिछली सदी के फ़िल्मी संगीत की एक खनकदार आवाज़ सुमन कल्याणपुर के निधन से ख़ामोश हो गई. भारतीय संगीत ने अपनी शालीन और दिलकश आवाज़ों में से एक को खो दिया है.

शायर बशीर बद्र नहीं रहे. अरसे से अस्वस्थ चल रहे बशीर बद्र का आज भोपाल में आख़िरी सांस ली. वह 91 साल के थे.
28/05/2026

शायर बशीर बद्र नहीं रहे. अरसे से अस्वस्थ चल रहे बशीर बद्र का आज भोपाल में आख़िरी सांस ली. वह 91 साल के थे.

पोस्टकार्ड | कानपुरगंगा दशहराफ़ोटो | रमाशंकर सिंह
25/05/2026

पोस्टकार्ड | कानपुर
गंगा दशहरा

फ़ोटो | रमाशंकर सिंह

जश्न-ए-सहर |  ज़रा इस मंज़र की कल्पना कीजिए. आप एक किताब के लोकार्पण समारोह में बैठे हैं. किताब, हिंदुस्तान के बीसवीं सद...
24/05/2026

जश्न-ए-सहर | ज़रा इस मंज़र की कल्पना कीजिए. आप एक किताब के लोकार्पण समारोह में बैठे हैं. किताब, हिंदुस्तान के बीसवीं सदी के बड़े शायर की उर्दू जीवनी का अंग्रेज़ी अनुवाद है. हॉल में उनकी लिखी फ़िल्मी और ग़ैर-फ़िल्मी ग़ज़लें धीमे-धीमे तैर रही हैं. बड़े से मंच के दोनों ओर लगी बड़ी एलईडी स्क्रीन पर एक संजीदा चेहरा बार-बार उभरता है. एक ऐसा चेहरा जिसमें एक साथ कई पहचानें बसी हैं—उर्दू का शायर, एक सिख, ऊँचे ओहदे का अफ़सर, और दो दुश्मन मुल्कों के बीच मोहब्बत का पुल बन जाने वाला विरला इंसान.

कुँवर महेंद्र सिंह बेदी 'सहर' की शख़्सियत और शायरी के जश्न वाली किताब 'जश्न-ए-सहर' के बारे में राजिंदर अरोड़ा का कॉलम आप संवाद न्यूज़ पर पढ़ सकते हैं.

कुँवर महेन्द्र सिंह बेदी ‘सहर’ की यादों की किताब जश्न-ए-सहर को पढ़ना दरअसल बीसवीं सदी के भारत की भावनात्मक यात्रा .....

बुकर सम्मान | ताइवान की लेखिका यांग शुआंग-ज़ी के उपन्यास 'ताइवान ट्रैवलॉग' को 2026 का अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार मिला ...
20/05/2026

बुकर सम्मान | ताइवान की लेखिका यांग शुआंग-ज़ी के उपन्यास 'ताइवान ट्रैवलॉग' को 2026 का अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार मिला है. मूल रूप से मंदारिन चीनी भाषा में लिखी गई इस किताब का अंग्रेजी में अनुवाद लिन किंग ने किया है.
मंदारिन चीनी भाषा में लिखी गई यह पहली किताब है जिसे बुकर सम्मान मिला है.
यह उपन्यास 1930 के दशक के औपनिवेशिक ताइवान की पृष्ठभूमि में एक जापानी उपन्यासकार की ताइवान की पाक कला यात्रा से जुड़ी एक काल्पनिक प्रेम कहानी है, जिसमें एक जापानी लेखिका और उसकी स्थानीय ताइवानी दुभाषिया के बीच के जटिल रिश्ते का बयान है.

पुस्तक अंश | दास्तान-ए-गुरुदत्तगुरु बेकार था. घर में परेशानियाँ ही परेशानियाँ थीं. पूरे एक साल तक गुरु धक्के खाता रहा—उस...
20/05/2026

पुस्तक अंश | दास्तान-ए-गुरुदत्त

गुरु बेकार था. घर में परेशानियाँ ही परेशानियाँ थीं. पूरे एक साल तक गुरु धक्के खाता रहा—उसको कहीं काम नहीं मिला…न असिस्टेंट का, न फ़िल्म बनाने का. घर में तंगी और तनाव…बॉम्बे से जी घबरा रहा था मगर कोलकाता जा नहीं सकता था क्योंकि वहाँ बहुत भीषण दंगा-फ़साद चल रहा था. कहानियाँ लिख-लिखकर इधर-उधर भेजता था, ख़ासकर ‘इलस्ट्रेटेड वीकली’ में, मगर सिर्फ़ रिजेक्शन लेटर्स ही हाथ लगते थे. आत्माराम के साथ मिलकर उसने माटुंगा में किताब की दुकान तक खोलने का क़स्द किया मगर उसके लिए भी सरमाया चाहिए था, जो नापैद था.

पूरा अंश संवाद न्यूज़ पर पढ़ सकते हैं.


दोस्तानगो महमूद फ़ारूक़ी की ताज़ा दास्तान गुरुदत्त के बारे में है. राजकमल प्रकाशन ने उनकी यह दास्तान किताब की शक्....

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