11/07/2026
30 जनवरी 1971: जब 'गंगा' विमान का अपहरण हुआ और दक्षिण एशिया की राजनीति बदल गई
30 जनवरी 1971 की सर्द सुबह श्रीनगर हवाई अड्डे पर सामान्य गतिविधियाँ चल रही थीं। उसी दिन इंडियन एयरलाइंस का फॉकर F-27 विमान 'गंगा' श्रीनगर से जम्मू के लिए उड़ान भरने वाला था। यात्रियों के बीच दो युवा भी मौजूद थे—हाशिम कुरैशी और अशरफ कुरैशी। देखने में वे आम यात्रियों जैसे लग रहे थे, लेकिन उनके इरादे कुछ और थे।
विमान ने उड़ान भरी और कुछ ही देर बाद दोनों युवकों ने अचानक हथियार और ग्रेनेड दिखाकर विमान पर कब्ज़ा कर लिया। उन्होंने पूरे विमान को अपने नियंत्रण में लेते हुए पायलट को आदेश दिया कि विमान को पाकिस्तान ले जाया जाए। यात्रियों और चालक दल में भय का माहौल फैल गया।
पायलट ने बताया कि विमान में इतना ईंधन नहीं है कि वह रावलपिंडी तक पहुँच सके। काफी बातचीत के बाद निर्णय हुआ कि विमान को लाहौर उतारा जाए। ईंधन कम होने के कारण यही सबसे सुरक्षित विकल्प था।
जब विमान पाकिस्तान के लाहौर हवाई अड्डे पर पहुँचा तो पहले वहाँ के अधिकारी भी असमंजस में थे। कुछ समय की बातचीत के बाद विमान को उतरने की अनुमति दे दी गई। सुरक्षा बलों ने विमान को चारों ओर से घेर लिया और मीडिया भी बड़ी संख्या में वहाँ पहुँच गया।
अपहरणकर्ताओं ने घोषणा की कि वे कश्मीरी आंदोलन से जुड़े हैं और भारत से अपने साथियों की रिहाई चाहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी मांगें पूरी होने तक विमान और यात्री उनके नियंत्रण में रहेंगे।
उधर भारत में इस घटना से हड़कंप मच गया। प्रधानमंत्री कार्यालय, सुरक्षा एजेंसियाँ और विमानन अधिकारी लगातार स्थिति पर नज़र रखे हुए थे। भारत सरकार ने साफ कर दिया कि वह दबाव में आकर कैदियों को रिहा नहीं करेगी।
पाकिस्तान में इस घटना को शुरुआत में प्रचार का विषय बनाया गया। अपहरणकर्ताओं के समर्थन में नारे लगाए गए और उन्हें कश्मीरी आंदोलन के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश हुई। कुछ समय बाद यात्रियों को सुरक्षित विमान से उतार दिया गया और भारत वापस भेज दिया गया।
इसके बाद 2 फ़रवरी 1971 को अपहरणकर्ताओं ने लाहौर हवाई अड्डे पर खड़े 'गंगा' विमान में पेट्रोल छिड़ककर उसे आग के हवाले कर दिया। कुछ ही देर में पूरा विमान जलकर राख हो गया। इस दृश्य को दुनिया भर के समाचार माध्यमों ने प्रसारित किया।
हालाँकि घटना यहीं समाप्त नहीं हुई। बाद में पाकिस्तान ने स्वयं हाशिम कुरैशी और उसके साथियों पर संदेह जताया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पाकिस्तान का आरोप था कि यह पूरा प्रकरण उसके खिलाफ राजनीतिक प्रभाव डालने वाला साबित हुआ।
इस विमान अपहरण का सबसे बड़ा रणनीतिक परिणाम यह हुआ कि भारत ने पाकिस्तान के ऊपर से भारतीय विमानों की उड़ानें रोक दीं। इससे पश्चिमी और पूर्वी पाकिस्तान के बीच हवाई संपर्क पर गंभीर असर पड़ा। उसी वर्ष दिसंबर 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान यह निर्णय भारत के लिए सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया।
आज भी 'गंगा' विमान अपहरण भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास की सबसे चर्चित विमान अपहरण घटनाओं में गिना जाता है। इस घटना को लेकर कई तरह के दावे और सिद्धांत सामने आए हैं, जिनमें खुफिया एजेंसियों की भूमिका से जुड़े आरोप भी शामिल हैं। लेकिन उन दावों की आधिकारिक और निर्णायक पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। इसलिए स्थापित तथ्यों और अपुष्ट दावों के बीच अंतर करना आवश्यक है।