Sawrup sai

Sawrup sai Pooniya ka tala (gida) balotra

01/06/2025

8 जून को #नागौर की धरती से संदेश जाएगा कि इतिहास में भी #सामंतवादी ताकतों से #जाट और किसान समाज ने टक्कर ली और सर्वसमाज को सामंतवादी सोच से आजादी दिलाई ,अब फिर से इतिहास दोहराने का समय आ गया है कुछेक सामंतवादी सोच के असामाजिक तत्व बार - बार किसी न किसी समाज के खिलाफ आंदोलन लेकर खड़े हो जाते हैं और छोटी जातियों छोटे समाजों को डरा धमकाकर अपनी सामंती सोच थोपने का प्रयास करते हैं , इससे पहले गुर्जर - यादव - ब्राह्मण - दलित - मीणा सहित हर समाज को दबाने का प्रयास कर चुके हैं लेकिन अबकी बार इन सामंतवादी ताकतों ने जाट किसान समाज को ललकारा है और उत्तर भारत का हर समाज 8 जून को नागौर में नजर गड़ाए हुए हैं कि इस बार जाट और किसान समाज कैसा जवाब पेश करता है ?
ून_नागौर_चलो

29/05/2025

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री, प्रखर स्वतंत्रता सेनानी और किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।

हनूमान बेनिवाल क़ा ख़ौफ़ प्रताप नगर जयपुर तेजाजी महाराज की मूर्ति खंडित करने वाले सिद्धार्थ सिंह को पुलिस ने किया गिरफ्त...
29/03/2025

हनूमान बेनिवाल क़ा ख़ौफ़ प्रताप नगर जयपुर तेजाजी महाराज की मूर्ति खंडित करने वाले सिद्धार्थ सिंह को पुलिस ने किया गिरफ्तार..! मूर्ति खण्डित करने के कारणों का पुलिस कर रही पता ..! 🚩

जयपुर के प्रताप नगर इलाके में श्री वीर तेजाजी महाराज की मूर्ति को तोड़े जाने की घटना अत्यंत शर्मनाक है।यह न केवल एक धार्...
29/03/2025

जयपुर के प्रताप नगर इलाके में श्री वीर तेजाजी महाराज की मूर्ति को तोड़े जाने की घटना अत्यंत शर्मनाक है।

यह न केवल एक धार्मिक प्रतीक पर हमला है, बल्कि उन लाखों-करोड़ों लोगों की आस्था को चोट पहुंचाने वाला कृत्य भी है, जो श्री वीर तेजाजी को अपना आराध्यदेव मानते हैं।

इस तरह की असामाजिक हरकतें समाज में तनाव और अशांति पैदा करने का कारण बन सकती हैं।

प्रशासन और सरकार से आग्रह है कि इस घटना की गहन जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। ताकि भविष्य में कोई भी जन भावनाओं को ठेस पहुंचाने का दुस्साहस न कर सके।

CMO Rajasthan CMO Rajasthan Bhajanlal Sharma Rajasthan Polic

25/03/2025
आज की तस्वीर ❤️❤️❤️❤️ #फिल्मों के बारे में दस अज्ञात तथ्य1. 1888 में बनी पहली फिल्म "राउंडे गार्डन सीन" थी जिसे फ्रेंच आ...
24/03/2025

आज की तस्वीर ❤️❤️❤️❤️

#फिल्मों के बारे में दस अज्ञात तथ्य

1. 1888 में बनी पहली फिल्म "राउंडे गार्डन सीन" थी जिसे फ्रेंच आविष्कारक लुइस ले प्रिंस द्वारा निर्देशित किया गया था।

2. "द स्क्व मैन" 1911 में ऑस्कर एपफेल और सेसिल बी द्वारा निर्देशित पहली हॉलीवुड फिल्म थी। डेमिल।

3. पहली 3डी फिल्म "द पावर ऑफ लव" थी 1922 में नेट जी द्वारा निर्देशित। देव्रिच और हैरी के. फेरल।

4. 1927 में एलन क्रॉसलैंड द्वारा निर्देशित ध्वनि के साथ पहली फिल्म "द जैज़ सिंगर" थी।

5. "एम्बियन" 2016 में बनी सबसे लंबी फिल्म थी, जिसका निर्देशन एंडर्स वेबर्ग ने किया था, जिसमें 720 घंटे रनटाइम था।

6. "एवेंजर्स: एंडगेम" 2019 में एंथनी और जो रूसो द्वारा निर्देशित सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्म है।

7. एकल फिल्म द्वारा जीते गए सर्वोच्च अकादमी पुरस्कारों में से 11, 1959 में "बेन-हूर" द्वारा, 1997 में "टाइटैनिक" और 2003 में "द लॉर्ड ऑफ द रिंग्स: द रिटर्न ऑफ द किंग" द्वारा प्राप्त हुए।

8. कंप्यूटर-जनरेटेड इमेज (सीजीआई) को फीचर करने वाली पहली फिल्म "वेस्टवर्ल्ड" थी जो 1973 में माइकल क्रिचटन द्वारा निर्देशित थी।

9. स्पीड कैप्चर तकनीक का उपयोग करने वाली पहली फिल्म "द लॉर्ड ऑफ द रिंग्स: द फैलोशिप ऑफ द रिंग" थी 2001 में पीटर जैक्सन द्वारा निर्देशित।

10. कीनू रीव्स "द मैट्रिक्स" त्रयी के लिए $250 मिलियन वेतन के साथ अब तक का सबसे अधिक भुगतान करने वाला अभिनेता है। #फिल्मों के बारे में दस अज्ञात तथ्य

1. 1888 में बनी पहली फिल्म "राउंडे गार्डन सीन" थी जिसे फ्रेंच आविष्कारक लुइस ले प्रिंस द्वारा निर्देशित किया गया था।

2. "द स्क्व मैन" 1911 में ऑस्कर एपफेल और सेसिल बी द्वारा निर्देशित पहली हॉलीवुड फिल्म थी। डेमिल।

3. पहली 3डी फिल्म "द पावर ऑफ लव" थी 1922 में नेट जी द्वारा निर्देशित। देव्रिच और हैरी के. फेरल।

4. 1927 में एलन क्रॉसलैंड द्वारा निर्देशित ध्वनि के साथ पहली फिल्म "द जैज़ सिंगर" थी।

5. "एम्बियन" 2016 में बनी सबसे लंबी फिल्म थी, जिसका निर्देशन एंडर्स वेबर्ग ने किया था, जिसमें 720 घंटे रनटाइम था।

6. "एवेंजर्स: एंडगेम" 2019 में एंथनी और जो रूसो द्वारा निर्देशित सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्म है।

7. एकल फिल्म द्वारा जीते गए सर्वोच्च अकादमी पुरस्कारों में से 11, 1959 में "बेन-हूर" द्वारा, 1997 में "टाइटैनिक" और 2003 में "द लॉर्ड ऑफ द रिंग्स: द रिटर्न ऑफ द किंग" द्वारा प्राप्त हुए।

8. कंप्यूटर-जनरेटेड इमेज (सीजीआई) को फीचर करने वाली पहली फिल्म "वेस्टवर्ल्ड" थी जो 1973 में माइकल क्रिचटन द्वारा निर्देशित थी।

9. स्पीड कैप्चर तकनीक का उपयोग करने वाली पहली फिल्म "द लॉर्ड ऑफ द रिंग्स: द फैलोशिप ऑफ द रिंग" थी 2001 में पीटर जैक्सन द्वारा निर्देशित।

10. कीनू रीव्स "द मैट्रिक्स" त्रयी के लिए $250 मिलियन वेतन के साथ अब तक का सबसे अधिक भुगतान करने वाला अभिनेता है। कॉमेडी वीडियो 😆
मजेदार वीडियो































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22/03/2025

सामाजिक दृष्टि से (राजनीति से हटकर) मुझे यह पोस्ट सबसे अच्छी लगी , आप सब की क्या राय है जरुर रखें :-
सामाजिक कार्यक्रमों में आगंतुक मेहमानों को #साफा (पगड़ी) बंधवाकर उनका सम्मान करने का रिवाज अभी नया-नया है इसलिए यह कुरीति नहीं प्रतीत हो रहा है। परंतु मेरी दृष्टि में यह एक बहुत बड़ी कुरीति है।
अपने घर आए मेहमानों में भेदभाव बढ़ाने वाला यह रिवाज मेजबान पक्ष को प्रतिक्षण मेहमानों के नाप तौल के असमंजस में डाले रखता है। मेजबान पक्ष की एक छंटनी टीम पूरे समय इस गणित में लगी रहती है कि किसे साफा बंधाएं और किसे नहीं... ❓

हम जानते हैं कि इस रिवाज में मेजबान पक्ष अक्सर कुछ गिने-चुने मेहमानों को ही साफे बंधवाता है। जिसमें विशेषकर बड़े राजनेताओं को साफा बंधवाना तो अब लगभग अनिवार्य सा हो गया है। यहीं से नाप तौल की उलझन खड़ी हो जाती है कि कौन बड़ा राजनेता है और कौन छोटा…? क्योंकि वर्तमान या निवर्तमान सांसद विधायक प्रधान सरपंच उप सरपंच तक के जनप्रतिनिधियों के अतिरिक्त राजनीतिक दलों के छोटे से छोटे पदाधिकारी भी राजनेता होते हैं। मेजबान पक्ष के लोग इन राजनेताओं में से छांटने की उलझन से निकल ही नहीं पाते हैं कि कोई अधिकारी आ धमकते हैं। अधिकारियों में से भी छोटे-बड़े का नाप तौल IAS,RAS से लेकर ग्राम विकास अधिकारी तक में करना पड़ रहा है। कुछ लोग इसमें भी पे ग्रेड या वेतनमान वाला स्तर घुसेड़ देते हैं।

इस प्रकार सामाजिक कार्यक्रमों में आजकल बड़े नेताओं और अधिकारियों से लेकर छात्र नेता तक काफी लोग साफा बंधवाने की अपेक्षा लेकर आने लगे हैं। हर कोई आते ही तत्काल मेजबान पक्ष की साफा बंधवाने संबंधी छंटनी टीम का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट करने में लग जाता है…

साफा बंधवाने की आशा में बार-बार आसन बदलने और दाएं-बाएं देखने वाले ऐसे मेहमान तो पूरे समय इस छंटनी टीम की उलझनें बढ़ाए रखते हैं। जबकि कुछ संकोची स्वभाव के मेहमान बेचारे पदाधिकारी होते हुए भी चुपचाप खा-पीकर निकल जाते हैं।

ऊंच-नीच और छोटे-बड़े का बहुत अधिक ध्यान रखने के बावजूद हर कार्यक्रम में छोटे-बड़े के निर्धारण में बहुत सी गलतियां रह जाती है। जब साफा बंधवाकर सम्मानित हुए लोग सोशल मीडिया पर अपने सम्मानित होने संबंधी फोटो प्रसारित करते हैं तब पता चलता है कि यहां आयोजकों ने इनसे अधिक महत्वपूर्ण मेहमानों को छोड़कर इनका सम्मान करके बहुत बड़ी ग़लती की है।

इस प्रकार इस नवोदित कुरीति में और भी अनेक विसंगतियां हैं इसलिए स्वाभाविक है कि मेरे जैसे अनेक लोग धीरे-धीरे इसके विरोध में हो जाएंगे।

मेरी दृष्टि में सामाजिक कार्यक्रमों में जिस प्रकार विशेष आवश्यकता वाले दिव्यांगो और रुग्ण स्त्री-पुरुषों को छोड़कर सभी मेहमानों के लिए एक समान भोजन पानी की व्यवस्था की जाती है ठीक उसी प्रकार मान-सम्मान की भी एक समान व्यवस्था ही होनी चाहिए।
जबकि इस नए-नवेले रिवाज में "ठावी-ठावी टोपियां और बाकी के लंगोट" वाला सिस्टम भी नहीं है।
बड़े राजनेता तो शाम तक कार की डिक्की भरकर साफे घर लेकर पहुंचते हैं।
निश्चित है कि इन साफों को कोई राजनेता बांधने में काम नहीं लेता है। ये साफे वापस औने-पौने दामों में साफा हाउस में चले जाते हैं। अर्थात मंदिरों में चढ़ने वाले नारियलों की तरह इन साफों का सर्कूलेशन भी नेताओं और साफा हाउस के बीच वर्षों तक चलता रहता है। जिस प्रकार मंदिरों के आसपास नारियल बेचने वाले पुजारियों के संपर्क में रहते हैं ठीक उसी प्रकार साफा हाउस वाले भी साफे घर पर लाने वाले बड़े राजनेताओं के घर वालों के संपर्क में रहते हैं।

वैसे इन साफों को राजनेता तो क्या कोई आम आदमी भी बांधने में काम नहीं लेता है। परंतु साल में आठ-दस साफे घर पर ला पाने वालों से साफा हाउस वाले भी संपर्क नहीं कर पाते हैं और ये साफे किसी कोने में पड़े पड़े यूं ही बेकार हो जाते हैं।
सामाजिक कार्यक्रमों में साफे बंधवाने का यह रिवाज आजकल इतना अधिक बढ़ गया है कि कार्यक्रम में राजनेता के आते ही बहुत से लोग नेताजी को साफा बंधवाने की जुगत में लग जाते हैं। ये लोग नेताजी को साफा बंधवाने के लिए परिवार के मुखिया से खुसर-पुसर भी करने लग जाते हैं... यदि उसने साफे मंगवाए नहीं हो तो इधर-उधर से साफे की व्यवस्था भी कर देते हैं परंतु नेता को खाली नहीं जाने देते...

खैर जो भी हो…

यह रिवाज यदि इसी गति से बढ़ता गया तो धीरे-धीरे राजनेताओं या अधिकारियों को तो अंत्येष्टि में आने पर भी साफे बंधवाने पड़ेंगे।

अतः...
यदि 100-200 मेहमानों को साफा बंधवाना ठीक नहीं है तो एक भी मेहमान को साफा बंधवाना ठीक नहीं है चाहे वह कितना ही बड़ा राजनेता क्यों न हो...
#कॉपी_पेस्ट शिवनारायण इनाणियां भाकरोद

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