PASI SAMAJ EKTAA

PASI SAMAJ EKTAA यह ग्रुप पासी समाज के हित के लिए बनाया ?

यह GRUOP पासी समाज के हित के लिए बनाया गया है।पासी समाज एकता का उद्देश्य किसी जाति व धर्म विशेष को नुकसान या विरोध करना नही हैं, बल्कि हमारा उद्देश्य स्वजातिय बंधुओं को एकत्रित(एकजुट)अथवा सक्रिया करना है।

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✦पासी समाज के लिए सूचना✦
पासी समाज एक मार्शल क़ाॅम हैं।यह बहादुर,लड़ाकू तथा स्वाभिमानी शासक जाति हैं। पासी समाज अपनी चुप्पी और मौन को तोड़ जुर्म अन्याय और अत्याचार के खिलाफ लड़े।शिक्षा को अपने अपमान शोषण और जलालत से मुक्ति का हथियार बनाएं,अपने बच्चों को सम्मान गरिमा पूर्ण एवं खुशहाल जीवन दे, राजनीति में अपना प्रतिनिधित्व दे,जो जातियां दृढ़तापूर्वक अपनी पहचान बनाने में ना काम रहीं,वे अपने आप को राजनीतिक और आर्थिक भागीदारी से वंचित महसूस कर रही हैं,इसलिए वर्तमान में एक होकर हम सभी को राजनीति में भागीदारी करनी चाहिए।

31/01/2026
एक बार इस चैनल पर जाके इस गीत को सुने और अपना प्यार दे।2 फरवरी 2026 महाराजा छीता पासी जी की जयती के अवसर के लिए एक छोटा ...
25/01/2026

एक बार इस चैनल पर जाके इस गीत को सुने और अपना प्यार दे।

2 फरवरी 2026

महाराजा छीता पासी जी की जयती के अवसर के लिए एक छोटा सा गीत जरूर सुने और शेयर करें।

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पासी शिरोमणि महाराजा बिजली पासीराजा बिजली पासी कन्नौज के राजा जयचन्द के समकालीन थे। इस तथ्य की पुष्टि लगभग सभी इतिहासकार...
25/01/2026

पासी शिरोमणि महाराजा बिजली पासी

राजा बिजली पासी कन्नौज के राजा जयचन्द के समकालीन थे। इस तथ्य की पुष्टि लगभग सभी इतिहासकार करते हैं। कन्नौज के राजा जयचन्द का शासन काल सन् 1170-94 ई. तक था। इस प्रकार राजा बिजली पासी का शासन काल भी ग्यारहवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में था।

लखनऊ जिला मुख्यालय से आठ कि.मी. दक्षिण में स्थित बंगला बाजार को पार कर बिजनौर कस्बे की ओर जाने वाली सड़क के दाहिनी ओर एक विशाल किले के अवशेष मिट्टी और कहीं-कहीं लखौरी ईंटों के टीले के रूप में दिखाई देते हैं। यह ऐतिहासिक स्थान बारहवीं शताब्दी के पराक्रमी महाराजा बिजली पासी की कीर्ति का मूक साक्षी है। यह किला पूर्व से पश्चिम 210 मीटर और उत्तर से दक्षिण 280 मीटर परिसर में कुल 58800 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला हुआ है और अब एक संरक्षित क्षेत्र है।

उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन विभाग के द्वारा प्रकाशित अभिलेखों के अनुसार," महाराजा बिजली पासी का राज्य 148 वर्ग मील लखनऊ और उसके आसपास के क्षेत्रों में फैला हुआ था। उक्त क्षेत्र के प्रशासन के लिए उन्होंने पहले अपनी मां के नाम विजनागढ़ का निर्माण कराया जो कालान्तर में बिजनौरगढ़ हो गया। उनकी मां का नाम विजना और पिता का नाम नटवा था। विजनौर से लगभग 3 कि.मी. उत्तर की ओर उन्होंने अपने पिता के सम्मान में नटवागढ़ का निर्माण कराया। पुनः राज्य के विस्तार के साथ उन्होंने उस किले से 3 कि.मी. और उत्तर की ओर उस विशाल किले का निर्माण कराया जिसे अब महाराजा बिजली पासी का किला कहा जाता है। महाराजा बिजली पासी के उपर्युक्त तीन किलों के अतिरिक्त नौ किले और थे जिनके नाम थे, माती किला, परवर पश्चिम किला, कल्ली पश्चिम किला, पुराना किला, भटगांव किला, औरांव किला, दादूपुर किला, ऐन किला और पिपरसण्ड किला। इनमें नटवा, माती, परवर पश्चिम तथा कल्ली पश्चिम किलों के अवशेष आज भी टीलों के रूप में मौजूद हैं। महाराजा बिजली पासी के द्वारा बनवाये गये इन 12 किलों के निर्माण से यह ज्ञात होता है कि राजा बिजली पासी स्थापत्य कला में कितने निपुण थे। इन बारह किलों की श्रृंखला का निर्माण कर उन्होंने एक ऐसे चक्रव्यूह की रचना की थी कि कोई भी दुश्मन उनकी सत्ता को नुकसान न पहुंचा सके। महाराजा बिजली पासी के किले का चित्र अंग्रेज कर्नल डी.एस.हाडसन नें 1857 ई. में अपने हाथ से किले के पास बैठकर बनाया था। इस किले की भव्यता देखते ही बनती थी।

11वीं-12वीं शताब्दी में सम्पूर्ण उत्तरी भारत में अराजकता छाई हुई थी। एक ओर देशी राजे एक दूसरे से युद्ध लड़ने में अपनी शक्ति का क्षय कर रहे थे, दूसरी ओर यहाँ की आपसी फूट का लाभ उठाते हुए विदेशियों के आक्रमण तेज हो गये थे। ऐसा उल्लेख मिलता है कि कन्नौज के राजा जयचन्द ने महाराजा बिजली पासी से कर देने के लिए कहा। राजा बिजली पासी ने किसी प्रकार का कोई कर देने से साफ इंकार कर दिया। इससे रूष्ट होकर जयचन्द ने अपनी सेना महाराजा बिजली पासी को हराने और अपनी शर्तें मनवाने के लिए भेजी। लेकिन पराक्रमी राजा बिजली पासी की सेनाओं ने राजा जयचन्द की सेनाओं को परास्त कर खदेड़ दिया। यह वही क्षत्रिय राजा थे जिन्होंने अपने मतलब के लिए विदेशी आक्रमणकारी मुहम्मद गोरी को भारतवर्ष में अपने दुश्मनों को पराजित करने के लिए आमंत्रित किया था। महाराजा बिजली पासी के हाथों पराजित होने के बाद राजा जयचन्द अत्यन्त कुपित हुआ और उसने ऐन-केन-प्रकरणेन राजा बिजली पासी को पराजित करने की चाल चली। उसने महोबा के सरदार आल्हा-ऊदल, जो बानापार हीरोजै के रूप में मशहूर लड़ाकू थे, से सम्पर्क किया और उनसे राजा बिजली पासी के हाथों अपनी पराजय का बदला लेने की संधि की। आल्हा-ऊदल ने अपने साले जोगा आदि को महाराजा बिजली पासी को हराने के लिए एक विशाल सेना के साथ भेजा। महाराजा बिजली पासी और आल्हा-ऊदल की सेना जो जोगा के नेतृत्व में लड़ाई लड़ रही थी के मध्य घमासान युद्ध हुआ। इस युद्ध में आल्हा-ऊदल के साले जोगा की भीषण पराजय हुई। इस पराजय से आल्हा-ऊदल तिलमिला गये और उन्होंने अपनी सेनाओं को संगठित कर महाराजा बिजली पासी पर हमला बोल दिया। लखनऊ से सटे गांजर के मैदान में ( यह स्थान आज गजरिया फार्म के नाम से प्रसिद्ध है।) राजा बिजली पासी और आल्हा-ऊदल की सेनाओं के मध्य लम्बे समय तक भयंकर युद्ध हुआ। कुछ विद्वान मानते है कि इसी गांजर की लड़ाई में वर्ष 1194 में महाराजा बिजली पासी वीरगति को प्राप्त हो गये थे।

जबकि कुछ का मानना है कि महाराजा बिजली पासी ने आल्हा-ऊदल को परास्त कर दिया था। आल्हा-ऊदल अपनी अवशेष सेना के साथ बाराबंकी की ओर पलायन कर गये। जहां से राजा देवामाती पासी ने आल्हा-ऊदल को खदेड़ा और वे भाग कर अपनी राजधानी महोबा पहुंच गये।

सीतापुर के निर्माता महाराजा छीता पासीउत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रकाशित सीतापुर गजेटियर वाल्यूम ग्स् के पेज 214 पर अंकित...
19/01/2026

सीतापुर के निर्माता महाराजा छीता पासी
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रकाशित सीतापुर गजेटियर वाल्यूम ग्स् के पेज 214 पर अंकित है कि सीतापुर जिले का प्राचीन नाम छितियापुर था। छितियापुर नाम महाराजा छीता पासी के नाम पर पड़ा है जिन्होंने छितियापुर को बसाया था। महाराजा छीता पासी कन्नौज के राजा जयचन्द्र के समकालीन थे। महाराजा छीता पासी के किले का भग्नावशेष आज के सीतापुर जिले के पूर्वी छेार पर सीतापुर, लखनऊ राजमार्ग पर प्लाई उड फैक्ट्री के पास आज भी उनकी शौर्य गाथा का जीता-जागता प्रमाण है।

‘छितियापुर‘ नाम का यह अचंल महाराजा छीता पासी के समय से मुगलों के शासन काल तक लगातार चलता रहा। अंग्रेजी शासन काल में सीतापुर का नामकरण हुआ। सीतापुर को मुख्यालय बनाने से पूर्व अंग्रेज अपनी शासन व्यवस्था मल्लापुर से चलाते थे, किन्तु मल्लापुर में आने वाली प्राकृतिक आपदाओं से तंग आकर उन्होंने कालान्तर में सीतापुर को ही अपनी प्रशासनिक व्यवस्था का केन्द्र बना लिया। तभी से छितियापुर का नाम बदल कर सीतापुर हो गया।

महाराजा छीता पासी के कुशल शासन प्रणाली और उनके राज्य की खुशहाली को देख कर कन्नौज का राजा जयचन्द जल उठा। उसने महाराजा छीता पासी को अपनी अधीनता स्वीकार करने का संदेश भेजा। लेकिन महाराजा छीता पासी ने ऐसा करने से इन्कार कर दिया। इससे कुपित होकर जयचन्द ने महोबा के सामन्त आल्हा एवं ऊदल से एक संधि कर ली कि किसी भी तरह छल-बल से राजा छीता पासी के राज्य पर कब्जा कर लिया जाये। आल्हा एवं ऊदल ने अचानक धोखे से राजा छीता पासी के राज्य पर हमला कर दिया। इस छल-बल की लड़ाई में राजा छीता पासी वीरगति को प्राप्त हो गये। कालान्तर में यह इलाका क्षत्रियों एवं मुसलमान शासकों के हाथ होते हुए अंग्रेजों के कब्जे में आ गया। अंग्रेजों ने मल्लापुर को अपनी प्रशासनिक व्यवस्था का केन्द्र बनाया लेकिन बाद में उसे बदल कर सीतापुर ले आये। यही सीतापुर, छितियापुर का परिवर्तित नाम है।

महाराजा छीता पासी का किला उचित रख-रखाव और देख-भाल के अभाव में मिट्टी के टीले के रुप में लखनऊ से सीतापुर जाने वाले राजमार्ग पर नगर के प्रवेश के पहले प्लाई उड फैक्ट्री के पास स्थित है। इसके एक भाग को काट कर रेलवे लाइन का विस्तार किया गया है। दक्षिण की ओर राजमार्ग का रास्ता निकाल दिया गया है। थोड़ा हिस्सा जो बचा है उस पर सुचौना देवी का एक छोटा सा मंदिर स्थित है, जो महाराजा छीता पासी की अराध्य देवी थीं। इस स्थल के पूर्वी भाग पर जो सरकारी अभिलेखों में बंजर अंकित है, एक व्यापारी ने पेट्रोल पंप लगा लिया है। किले के भग्नावशेष पर महाराजा छीता पासी की मूर्ति को लगाने के अनेकानेक प्रयास हुये। बमुश्किल तमाम प्रदेश सरकार के 20 सूत्रीय कार्यक्रम के अध्यक्ष माननीय श्री राजेन्द्र गुप्त ने महाराजा छीता पासी की एक मूर्ति स्थापित करायी। लेकिन किले के पूर्वी छोर पर स्थित पेट्रोल पंप के मालिक ने उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया है। अभिलेखों में यह स्थल बंजर अंकित है, लेकिन पेट्रोल पंप का मालिक कहता है कि उसने अंग्रेजी शासनकाल में यह जमींन खरीदी थी। चूंकि यह स्थान दलितों के सम्मान और शौर्य का प्रतीक है, इस कारण सरकार की ओर से इस स्थगन आदेश को निरस्त कराने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। अखिल भारतीय पासी समाज (पंजीकृत) के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री आर. ए. प्रसाद, राष्ट्रीय महासचिव श्री रामकृपाल और पासी सेवा संस्थान के अध्यक्ष तथा अखिल भारतीय पासी समाज, सीतापुर के अध्यक्ष श्री लालजी भार्गव एवं उनके सहयोगियों के द्वारा महाराजा छीता पासी के किले पर लगातार कार्यक्रम किये जा रहे है और किले को व्यापारी के चंगुल से मुक्त कराने का निरन्तर प्रयास भी कर रहे हैं।

कड़ा किले के राजा कड़ेदीन पासी पासी कौशांबी के निर्माता थे मशहूर कड़ा किला
18/01/2026

कड़ा किले के राजा कड़ेदीन पासी पासी कौशांबी के निर्माता थे

मशहूर कड़ा किला

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30/12/2025

#पासी

25/12/2025

25 दिसम्बर 2025 महाराजा बिजली पासी के जयती को लेकर माननीय मुख्यमंत्री मोदी जी ने क्या कहा हैं।
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