PASI SAMAJ EKTAA

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PASI SAMAJ EKTAA यह ग्रुप पासी समाज के हित के लिए बनाया ?

यह GRUOP पासी समाज के हित के लिए बनाया गया है।पासी समाज एकता का उद्देश्य किसी जाति व धर्म विशेष को नुकसान या विरोध करना नही हैं, बल्कि हमारा उद्देश्य स्वजातिय बंधुओं को एकत्रित(एकजुट)अथवा सक्रिया करना है।

✦नियम✦
☞(१)इस ग्रुप के तोर और तारिके का ख्याल रखे।

☞(२)इस ग्रुप मे कोई भी ऐसा पोस्ट ना करे जिससे हिन्दू-मुस्लिम को ठेस पहुंचे.,और किसी भी Comment section में गाली-गलौज व अपशब्द का प्रयोग बिल्कुल ही ना करे।

☞(३)ग्रुप मे कोई भी अपना व्यक्तिगत फोटो भी पोस्ट ना करे। (जैसे,सेल्फी व फॅमिली फोटो,या फिर किसी भी प्रकार का दृश्य।)

☞(४)इस पर ऐसा पोस्ट करें जो समाज के हित के लिए हो। (जैसे कि,विशेष सुचना व समाचार जो पासी समाज के हित के लिए हो।)

✦पासी समाज के लिए सूचना✦
पासी समाज एक मार्शल क़ाॅम हैं।यह बहादुर,लड़ाकू तथा स्वाभिमानी शासक जाति हैं। पासी समाज अपनी चुप्पी और मौन को तोड़ जुर्म अन्याय और अत्याचार के खिलाफ लड़े।शिक्षा को अपने अपमान शोषण और जलालत से मुक्ति का हथियार बनाएं,अपने बच्चों को सम्मान गरिमा पूर्ण एवं खुशहाल जीवन दे, राजनीति में अपना प्रतिनिधित्व दे,जो जातियां दृढ़तापूर्वक अपनी पहचान बनाने में ना काम रहीं,वे अपने आप को राजनीतिक और आर्थिक भागीदारी से वंचित महसूस कर रही हैं,इसलिए वर्तमान में एक होकर हम सभी को राजनीति में भागीदारी करनी चाहिए।

12/08/2026

वायरल वीडियो का असली सच 😱 (क्या सच में देवी का अपमान हुआ?) सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर लोग दावा कर रहे हैं कि स्टेज पर मां काली का अपमान किया गया है। लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है! पहली बात: स्टेज पर कोई महिला नहीं, बल्कि स्किन-टाइट कॉस्ट्यूम और डार्क बॉडी पेंट किए हुए एक पुरुष कलाकार है। दूसरी बात: यह मां काली नहीं, बल्कि दस महाविद्याओं में से एक ‘मां छिन्नमस्तिका’ का अत्यंत पवित्र और उग्र स्वरूप है, जो कामदेव और रति के ऊपर खड़ी हैं। यह कोई फूहड़ डांस नहीं, बल्कि ‘दस महाविद्याओं’ पर आधारित एक शानदार नृत्य-नाटिका का दृश्य है। आधी-अधूरी क्लिप देखकर भड़कने से पहले अपने धर्म और शास्त्रों को सही से जानें! इस सच्चाई को हर उस इंसान तक पहुंचाएं जो गलत जानकारी फैला रहा है। वीडियो को शेयर करें! 🙏🚩

Jay ho maharaja Bijli Pasi ki
26/07/2026

Jay ho maharaja Bijli Pasi ki

20/07/2026
राजा डिंगुर पासी (Raja Dingur Pasi) अवध (उत्तर प्रदेश) के एक महान और पराक्रमी पासी राजा थे। उन्होंने देश और धर्म की रक्ष...
20/07/2026

राजा डिंगुर पासी (Raja Dingur Pasi) अवध (उत्तर प्रदेश) के एक महान और पराक्रमी पासी राजा थे।
उन्होंने देश और धर्म की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया था।

राजा डिंगुर पासी के बारे में मुख्य ऐतिहासिक बिंदु निम्नलिखित हैं:
कार्यक्षेत्र: उनका मुख्य शासन क्षेत्र और किला वर्तमान समय के अमेठी और आसपास के क्षेत्रों में स्थित था。वीरता और संघर्ष: इतिहास की लोक-कथाओं और मौखिक परंपराओं के अनुसार, राजा डिंगुर पासी ने बाहरी आक्रमणकारियों और विदेशी ताकतों के खिलाफ डटकर मुकाबला किया।

बलिदान: मातृभूमि की रक्षा के लिए लड़ते हुए उन्होंने एक भीषण युद्ध में अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया था。पासी राजवंश में राजा डिंगुर पासी जैसे कई शूरवीर राजा हुए हैं, जिन्होंने अवध क्षेत्र (जैसे लखनऊ, बाराबंकी और अमेठी) पर शासन किया और अपनी वीरता से क्षेत्र की रक्षा की।

क्या आप राजा डिंगुर पासी से जुड़ी लोक-कथाओं, पासी राजवंश के अन्य राजाओं, या इस ऐतिहासिक क्षेत्र के बारे में कुछ और विस्तार से जानना चाहते हैं?

राजा कंस पासी (समयकाल: 980-1031 ईस्वी) अवध क्षेत्र (उत्तर प्रदेश) के एक प्रतापी नागवंशी राजा थे, जिनकी राजधानी लखनऊ के प...
16/07/2026

राजा कंस पासी (समयकाल: 980-1031 ईस्वी) अवध क्षेत्र (उत्तर प्रदेश) के एक प्रतापी नागवंशी राजा थे, जिनकी राजधानी लखनऊ के पास कसमंडी (कंसमंडी) थी। 11वीं सदी में उन्होंने सैयद सालार मसूद गाजी के आक्रमण के खिलाफ अपनी मातृभूमि और संस्कृति की रक्षा करते हुए कैथौली (खतौली) के युद्ध में वीरगति प्राप्त की थी।

गजेटियर ऑफ द प्रोविंस ऑफ अवध' (1877) और 'लखनऊ गजेटियर' (1904) जैसे ब्रिटिशकालीन अभिलेखों में स्पष्ट रूप से दर्ज है कि कसमंडी क्षेत्र राजा कंस की गद्दी और उनके राज्य का हिस्सा था।

इस विषय पर पासी भाइयों को कुछ कहना हैं, ये अंडे में से निकला नया चूजा हम पासी समाज को  कुछ बताना चाहता हैं कि हमने अपने ...
14/07/2026

इस विषय पर पासी भाइयों को कुछ कहना हैं, ये अंडे में से निकला नया चूजा हम पासी समाज को कुछ बताना चाहता हैं कि हमने अपने बाप को पैदा किया हैं 😡
इस के हर प्रोफाइल पर जाके देखिए इसने तो हमारा इतिहास डाल रखा है देखिए और बताइए इस नीच बालक के साथ क्या किया जाए?

पासवान समाज की आवाज
पासी एकता मंच अयोध्या
अखिल भारतीय पासी महासभा
सूरज पासी
सूरज पासी
राष्ट्रीय पासी सेना
अखिल भारतीय पासी महासभा ऑफिशियल
कन्हैया पासवान राष्ट्रीय उपाध्यक्ष

पासियों की 'सुअर सेना': परंपरा, सुरक्षा और स्वाभिमान की अनोखी विरासत

📝 Description:
क्या वास्तव में पासी समुदाय में सुअर पालन केवल एक व्यवसाय था, या इसका संबंध सुरक्षा और रक्षा से भी था? कुछ ऐतिहासिक विवरणों और सामाजिक अध्ययनों में सुअर पालन को पासी समुदाय का पारंपरिक व्यवसाय बताया गया है। वहीं, "सुअर सेना" जैसी अवधारणाएँ लोककथाओं और सामाजिक परंपराओं में भी मिलती हैं। इतिहास और लोकविश्वास के बीच अंतर को समझना आवश्यक है। आइए तथ्यों और स्रोतों के आधार पर इस विषय को जानें।

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महाराज माहे पासी :-चौदहवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में, जब दिल्ली पर सुल्तान फिरोजशाह तुगलक का शासन काल था, उस समय रायबरे...
14/07/2026

महाराज माहे पासी :-

चौदहवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में, जब दिल्ली पर सुल्तान फिरोजशाह तुगलक का शासन काल था, उस समय रायबरेली जनपद के ऊंचाहार नगर पालिका से थोड़ी दूर पर गोड़वा रोहनियाँ नामक स्थान पर एक छोटा सा गणराज्य था जिसके शासक थे माहे पासी। माहे पासी एक पराक्रमी योद्धा थे। उनमें अपार संगठन शक्ति थी। उन्होंने अपने बल पर एक बलशाली सेना इकट्ठा की और गोड़वा रोहनियाँ में अपना स्वतंत्र राज्य खड़ा किया। उन्होंने नेवारी के राजा को युद्ध में परास्त किया था। इस जीत से उनको नेवारी राज्य का एक बहुत बड़ा भू-भाग मिला था।

महान योद्धा और लखनऊ नगर के संस्थापक, नागवंशी समाज के वीर शिरोमणि, महाराजा लाखन पासी जी
11/07/2026

महान योद्धा और लखनऊ नगर के संस्थापक, नागवंशी समाज के वीर शिरोमणि, महाराजा लाखन पासी जी

महाराजा लाखन पासी लखनऊ के राजा थे, जिन्होंने कई सालों तक यहाँ शासन किया। सैयद सलार मसूद गाजी ने धोखे से होली के दिन लखनऊ...
11/07/2026

महाराजा लाखन पासी लखनऊ के राजा थे, जिन्होंने कई सालों तक यहाँ शासन किया। सैयद सलार मसूद गाजी ने धोखे से होली के दिन लखनऊ पर आक्रमण किया और महाराजा लाखन पासी ने भीषण युद्ध किया। महाराजा लाखन पासी के गर्दन पर किसी ने पीछे से तलवार से हमला किया और उनका सर धड़ से अलग गिर गया। जहाँ पर सिर गिरा, वहाँ का नाम सरकटा पड़ा। इसी युद्ध में लखनऊ निर्माता लाखन पासी वीर गति को प्राप्त हुए। आगे चलकर लखनऊ के नवाब आशफउधौला ने 1775 ई. में लखनऊ को अवध की राजधानी बनायी थी। अवध के शासकों ने लखनऊ को अपनी राजधानी बनाकर इसे समृद्ध किया, लेकिन बाद के नवाब विलासी और निकम्मे साबित हुए। आगे चलकर लॉर्ड डलहौजी ने अवध का अधिग्रहण कर ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया। 1850 में अवध के अन्तिम नवाब वाजिद अली शाह ने ब्रिटिश अधीनता स्वीकार कर ली।

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