Bhojpuri - भोजपुरी

Bhojpuri - भोजपुरी लक्ष्य है एक सजग सशक्त समाज के निर्माण के लिए निरंतर प्रयत्न करना . सामाजिक सहयोग से बनता है समाज।

मेरा लक्ष्य है एक सजग सशक्त समाज के निर्माण के लिए निरंतर प्रयत्न करना . सामाजिक सहयोग से बनता है समाज। जब हम अपने संपर्क में आने वाले हर धर्म, जाति, आर्थिक स्थिति और व्यवसाय के लोगो के साथ उनके सुख, दुःख और चुनौतियों मे साथ खड़े होते हैं तो हम एक सशक्त समाज का परिचय देते हैं। बड़ी बड़ी नहीं इन छोटी छोटी बातो से बनता है एक सशक्त समाज।

11/09/2026

अंधेरे में उजाला: पूर्णिया के दंपती का मरणोपरांत नेत्रदान बना मिसाल

Rajiv Tewari

पूर्णिया जिले के एक दंपती ने शोक की घड़ी में भी समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई और मरणोपरांत अपनी आंखें दान कर एक ऐसी मिसाल पेश की जो न केवल जिले में पहली बार है, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक है।

एक संकल्प, दो बार निभाया गया
2024 में पत्नी विभा देवी का निधन हुआ। परिवार ने उस समय मरणोपरांत नेत्रदान का फैसला किया। अब, हाल ही में, पति श्रीकृष्ण मोहन प्रसाद साह का भी निधन हो गया। परिवार ने फिर से नेत्रदान की सहमति दी, जिससे वे जिले के इतिहास में पहले ऐसे दंपती बन गए जिन्होंने मरणोपरांत अपनी आंखें दान कीं।

दधीचि देहदान समिति के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि जिले के इतिहास में यह पहला अवसर है जब किसी दंपती (पति-पत्नी दोनों) ने मरणोपरांत अपनी आंखें दान कर समाजसेवा और दृष्टिदान की इतनी बड़ी नजीर पेश की है।

परिवार का साहस और सामाजिक संदेश
परिवार के सदस्यों — पुत्र पवन कुमार साह, पुत्रवधू प्रीति देवी और अन्य रिश्तेदारों — ने शोक की इस घड़ी में भी समाज सेवा का संकल्प निभाया। उन्होंने पारंपरिक रूढ़ियों और मान्यताओं को पीछे छोड़कर यह साबित कर दिया कि मौत के बाद भी इंसान दूसरों के लिए रोशनी का स्रोत बन सकता है।

पूर्व सांसद संतोष कुशवाहा सहित कई गणमान्य नागरिकों ने परिवार को नमन किया और उनकी सराहना की। कुशवाहा ने कहा कि यह परिवार पूरे सीमांचल के लिए मिसाल है, और उम्मीद जताई कि इससे अन्य लोग भी प्रेरित होंगे।

नेत्रदान का महत्व
नेत्रदान के माध्यम से दो लोगों की आंखों में रोशनी लौट सकती है। अंधकारमय जीवन जी रहे लोगों के लिए यह दान किसी वरदान से कम नहीं है। पूर्णिया के इस दंपती ने साबित कर दिया कि इंसान की असली विरासत उसकी संपत्ति नहीं, बल्कि उसके द्वारा किए गए नेक काम होते हैं।

दान केवल जीवित रहते ही नहीं, बल्कि मृत्यु के बाद भी किया जा सकता है। अगर हर परिवार इस तरह का संकल्प ले, तो हजारों लोगों की जिंदगी रोशन हो सकती है।

Photos: Shri Krishna Mohan Prasad Sah and his late wife, Smt. Vibha Devi.

11/09/2026

बारिश ने छीना आशियाना, इंसानियत ने दिया नया घर—प्रतापगढ़ की दिल छू लेने वाली कहानी

Rajiv Tewari

60 वर्षीय लालता प्रसाद पांडेय लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे हैं। उनकी गृहस्थी पहले से ही आर्थिक संघर्ष के दौर से गुजर रही थी। ऊपर से लगातार हुई मूसलाधार बारिश ने उनके कच्चे मकान को पूरी तरह ढा दिया। मकान गिरते ही उनका सारा सामान, अनाज, कपड़े, बर्तन और सबसे जरूरी दवाइयां मलबे में दब गईं। परिवार के सामने अब रहने और इलाज दोनों का गंभीर संकट खड़ा हो गया।

मकान ढहने के बाद कैंसर पीड़ित बुजुर्ग और उनका परिवार तिरपाल तानकर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए। लगातार बारिश के बीच परिवार की परेशानी और बढ़ गई। ग्रामीणों के मुताबिक घटना की सूचना स्थानीय प्रशासन को दे दी गई थी, लेकिन तत्काल सरकारी मदद नहीं मिल सकी थी।

अखबार की सुर्खियां बनीं वजह
जब यह खबर स्थानीय अखबारों और सोशल मीडिया पर छपी, तो लोगों की मदद के लिए दौड़ शुरू हो गई। स्थानीय ग्रामीण और समाजसेवी तुरंत मौके पर पहुंचे। जेसीबी और मजदूरों की मदद से मलबा हटाने का काम शुरू हुआ। लोगों ने न केवल राहत सामग्री जुटाई, बल्कि भविष्य के लिए ठोस योजना भी बनाई।

विप्र सेवा सुरक्षा और एकता मंच के कार्यकर्ताओं ने 64 दानदाताओं के माध्यम से सीधे पीड़ित परिवार के खाते में 37 हजार रुपये की सहायता राशि भेजी। परिवार ने सभी दानदाताओं का आभार जताया।

दूर से आया सहारा, मुंबई का उद्योगपति बना मसीहा
परिवार के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह सामने आई कि इलाके के परानूपुर निवासी और मुंबई के उद्योगपति आनंद पाण्डेय ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया। आनंद पाण्डेय ने पीड़ित परिवार से फोन पर बातचीत की और उनकी स्थिति की जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने परिवार के लिए पक्का मकान बनवाने की जिम्मेदारी लेने की बात कही। इतना ही नहीं, उन्होंने परिवार की 21 वर्षीय बेटी की शादी का पूरा खर्च उठाने का भी जिम्मा लिया।

यह वादा न केवल परिवार के लिए राहत की किरण बना, बल्कि पूरे समाज के लिए यह संदेश भी कि जब लोग मिलकर काम करें, तो बड़ी से बड़ी मुसीबत भी टल सकती है।

जब बुजुर्ग की आंखों में लौटी चमक
लालता प्रसाद का कहना है कि वे पहले ही कैंसर के इलाज के लिए संघर्ष कर रहे थे, और अब मकान गिरने से उनकी परेशानियां और बढ़ गई थीं। लेकिन अब, जब इतने लोगों ने मदद का हाथ बढ़ाया है, तो उन्हें उम्मीद है कि वे जल्द ही सामान्य जीवन जी पाएंगे।

यह कहानी सिखाती है असली इंसानियत
यह कहानी हमें यह सिखाती है कि इंसानियत अभी जिंदा है। जब कोई मुसीबत में होता है, तो समाज के लोग अगर एकजुट होकर मदद करें, तो कोई भी समस्या असंभव नहीं रह जाती। प्रतापगढ़ का यह उदाहरण अन्य इलाकों के लिए भी प्रेरणा हो सकता है।

जब अखबारों और सोशल मीडिया ने इस दर्दनाक स्थिति को उजागर किया, तो दूर-दूर से लोग मदद के लिए आगे आए। यह साबित करता है कि मीडिया की शक्ति केवल खबरें दिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में परिवर्तन लाने का एक सशक्त माध्यम भी बन सकती है।

नई शुरुआत की ओर कदम
अब जब मदद के हाथ आगे बढ़ चुके हैं, तो उम्मीद है कि लालता प्रसाद पांडेय और उनका परिवार जल्द ही एक सुरक्षित और स्थायी आश्रय पा लेंगे। पक्का मकान बनने तक परिवार को अस्थायी व्यवस्था में रहना होगा, लेकिन समाज के सहयोग से यह संकट का समय भी आसानी से गुजर जाएगा।

यह कहानी हम सभी के लिए एक संदेश है कि जब हम एकजुट होकर किसी की मदद करते हैं, तो न केवल उस व्यक्ति का जीवन बदलता है, बल्कि पूरा समाज अधिक संवेदनशील और मानवीय बनता है।

 Avinash Mishra
11/09/2026

Avinash Mishra

बारिश ने छीना आशियाना, इंसानियत ने दिया नया घर—प्रतापगढ़ की दिल छू लेने वाली कहानी

Rajiv Tewari

60 वर्षीय लालता प्रसाद पांडेय लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे हैं। उनकी गृहस्थी पहले से ही आर्थिक संघर्ष के दौर से गुजर रही थी। ऊपर से लगातार हुई मूसलाधार बारिश ने उनके कच्चे मकान को पूरी तरह ढा दिया। मकान गिरते ही उनका सारा सामान, अनाज, कपड़े, बर्तन और सबसे जरूरी दवाइयां मलबे में दब गईं। परिवार के सामने अब रहने और इलाज दोनों का गंभीर संकट खड़ा हो गया।

मकान ढहने के बाद कैंसर पीड़ित बुजुर्ग और उनका परिवार तिरपाल तानकर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए। लगातार बारिश के बीच परिवार की परेशानी और बढ़ गई। ग्रामीणों के मुताबिक घटना की सूचना स्थानीय प्रशासन को दे दी गई थी, लेकिन तत्काल सरकारी मदद नहीं मिल सकी थी।

अखबार की सुर्खियां बनीं वजह
जब यह खबर स्थानीय अखबारों और सोशल मीडिया पर छपी, तो लोगों की मदद के लिए दौड़ शुरू हो गई। स्थानीय ग्रामीण और समाजसेवी तुरंत मौके पर पहुंचे। जेसीबी और मजदूरों की मदद से मलबा हटाने का काम शुरू हुआ। लोगों ने न केवल राहत सामग्री जुटाई, बल्कि भविष्य के लिए ठोस योजना भी बनाई।

विप्र सेवा सुरक्षा और एकता मंच के कार्यकर्ताओं ने 64 दानदाताओं के माध्यम से सीधे पीड़ित परिवार के खाते में 37 हजार रुपये की सहायता राशि भेजी। परिवार ने सभी दानदाताओं का आभार जताया।

दूर से आया सहारा, मुंबई का उद्योगपति बना मसीहा
परिवार के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह सामने आई कि इलाके के परानूपुर निवासी और मुंबई के उद्योगपति आनंद पाण्डेय ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया। आनंद पाण्डेय ने पीड़ित परिवार से फोन पर बातचीत की और उनकी स्थिति की जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने परिवार के लिए पक्का मकान बनवाने की जिम्मेदारी लेने की बात कही। इतना ही नहीं, उन्होंने परिवार की 21 वर्षीय बेटी की शादी का पूरा खर्च उठाने का भी जिम्मा लिया।

यह वादा न केवल परिवार के लिए राहत की किरण बना, बल्कि पूरे समाज के लिए यह संदेश भी कि जब लोग मिलकर काम करें, तो बड़ी से बड़ी मुसीबत भी टल सकती है।

जब बुजुर्ग की आंखों में लौटी चमक
लालता प्रसाद का कहना है कि वे पहले ही कैंसर के इलाज के लिए संघर्ष कर रहे थे, और अब मकान गिरने से उनकी परेशानियां और बढ़ गई थीं। लेकिन अब, जब इतने लोगों ने मदद का हाथ बढ़ाया है, तो उन्हें उम्मीद है कि वे जल्द ही सामान्य जीवन जी पाएंगे।

यह कहानी सिखाती है असली इंसानियत
यह कहानी हमें यह सिखाती है कि इंसानियत अभी जिंदा है। जब कोई मुसीबत में होता है, तो समाज के लोग अगर एकजुट होकर मदद करें, तो कोई भी समस्या असंभव नहीं रह जाती। प्रतापगढ़ का यह उदाहरण अन्य इलाकों के लिए भी प्रेरणा हो सकता है।

जब अखबारों और सोशल मीडिया ने इस दर्दनाक स्थिति को उजागर किया, तो दूर-दूर से लोग मदद के लिए आगे आए। यह साबित करता है कि मीडिया की शक्ति केवल खबरें दिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में परिवर्तन लाने का एक सशक्त माध्यम भी बन सकती है।

नई शुरुआत की ओर कदम
अब जब मदद के हाथ आगे बढ़ चुके हैं, तो उम्मीद है कि लालता प्रसाद पांडेय और उनका परिवार जल्द ही एक सुरक्षित और स्थायी आश्रय पा लेंगे। पक्का मकान बनने तक परिवार को अस्थायी व्यवस्था में रहना होगा, लेकिन समाज के सहयोग से यह संकट का समय भी आसानी से गुजर जाएगा।

यह कहानी हम सभी के लिए एक संदेश है कि जब हम एकजुट होकर किसी की मदद करते हैं, तो न केवल उस व्यक्ति का जीवन बदलता है, बल्कि पूरा समाज अधिक संवेदनशील और मानवीय बनता है।

10/09/2026
हिंदी अर्थ: जब कोई व्यक्ति चल रही बात या मौके से बिल्कुल अलग (बेमतलब की) बात करने लगे। यानी, विषय कुछ और हो और बात कुछ औ...
10/09/2026

हिंदी अर्थ: जब कोई व्यक्ति चल रही बात या मौके से बिल्कुल अलग (बेमतलब की) बात करने लगे। यानी, विषय कुछ और हो और बात कुछ और ही की जाए।

Avinash Mishra

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