Technocity India

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Technocity, is one of India's most reputed multimedia companies, providing international quality services in web-site design & hosting and video production & editing. Technocity specializing in high quality bespoke web-design, Advertisement and Multimedia solutions. Technocity provides expert solutions in all areas of web, broadcast, film and CD. Its our belief that quality in a service organizati

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With our wide ranging skills and expertise we are able to offer fully integrated solutions, whatever your needs, whether you are a non-profit organization or a multi-million pound business. All our products are designed from the ground up, fully tailored to the individual requirements of each of our customers. High performance, cost-effective solutions...
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भारत सरकार ने स्वास्थ्य के खतरों को देखते हुए Nimesulide 100mg से ज्यादा वाली (निमेसुलाइड) की गोलियों और इससे संबंधित कई...
01/01/2026

भारत सरकार ने स्वास्थ्य के खतरों को देखते हुए Nimesulide 100mg से ज्यादा वाली (निमेसुलाइड) की गोलियों और इससे संबंधित कई फार्मुलों पर प्रतिबंध लगा दिया है।

- केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने निमेसुलाइड की 100mg से ज्यादा वाली खुराक को स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण मानते हुए इसके उत्पादन और बिक्री पर रोक लगा दी है।

- विशेषज्ञों के अनुसार इस दवा के इस्तेमाल से लिवर (जिगर) को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है, जिस कारण दुनिया के कई अन्य देशों में यह पहले से ही बैन है।

- इसके दुष्प्रभावों को देखते हुए बच्चों के लिए इसका उपयोग पहले ही बहुत कम कर दिया गया था, लेकिन अब इस बड़ी डोज़ पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।

यदि आप दर्द या बुखार के लिए निमेसुलाइड (100mg) से ज्यादा का उपयोग करते थे, तो तुरंत रुकें और अपने डॉक्टर से सलाह लेकर कोई अन्य सुरक्षित विकल्प चुनें। बिना डॉक्टरी सलाह के कोई भी दवा न खाएं।

जनहित में जारी — इस पोस्ट को अधिक से अधिक Share करें ताकि लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ न हो।

हैप्पी न्यू ईयर 2026! 🎉✨नए साल का इतिहास जितना पुराना है, उतना ही दिलचस्प भी। दुनिया में नया साल मनाने की परंपरा हज़ारों ...
01/01/2026

हैप्पी न्यू ईयर 2026! 🎉✨
नए साल का इतिहास जितना पुराना है, उतना ही दिलचस्प भी। दुनिया में नया साल मनाने की परंपरा हज़ारों साल पुरानी है, लेकिन इसकी तारीखें हमेशा से 1 जनवरी नहीं थीं।
इतिहास की एक झलक: नया साल मनाने की परंपरा लगभग 4,000 साल पुरानी है, जिसकी शुरुआत प्राचीन बेबीलोन से हुई थी। तब लोग इसे मार्च के महीने में मनाते थे। लेकिन साल 46 ईसा पूर्व में जूलियस सीजर ने 1 जनवरी को नए साल का दिन तय किया।

🇮🇳 भारत में शुरुआत: भारत में 1 जनवरी को नया साल मनाने का चलन ब्रिटिश काल के दौरान शुरू हुआ। आज यह दिन हम सभी के लिए खुशियां बांटने और नई शुरुआत करने का एक वैश्विक उत्सव बन चुका है।

भले ही हम अलग-अलग कैलेंडर मानते हों, लेकिन हर "नया साल" उम्मीद और बदलाव का संदेश लेकर आता है। 🌟

आप सभी को नए साल की ढेरों शुभकामनाएं! आशा है कि यह साल आपके जीवन में सुख, समृद्धि और ढेर सारी खुशियां लेकर आए। 🥂🎊

मुर्गी या अंडा, पहले कौन आया? विज्ञान ने ढूंढ लिया जवाब! 🐔🥚सदियों पुरानी इस पहेली को लेकर हमेशा बहस होती रही है, लेकिन अ...
26/12/2025

मुर्गी या अंडा, पहले कौन आया? विज्ञान ने ढूंढ लिया जवाब! 🐔🥚

सदियों पुरानी इस पहेली को लेकर हमेशा बहस होती रही है, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इसका स्पष्ट जवाब दे दिया है। ताजा शोध के मुताबिक, दुनिया में पहले 'मुर्गी' आई थी, अंडा नहीं।

कैसे सुलझी यह गुत्थी?
वैज्ञानिकों ने पाया कि अंडे के सख्त छिलके के निर्माण के लिए ओवोक्लीडिन-117 (OC-17) नामक प्रोटीन की आवश्यकता होती है। हैरानी की बात यह है कि यह प्रोटीन केवल मुर्गी के अंडाशय (O***y) में ही बनता है।

खास बात यह है कि बिना इस प्रोटीन के अंडे का छिलका बन ही नहीं सकता। चूंकि यह प्रोटीन सिर्फ मुर्गी के शरीर में पाया जाता है, इसलिए यह साफ है कि पहले मुर्गी आई और उसके बाद अंडे की उत्पत्ति हुई।

इस खोज ने सालों से चली आ रही उलझन को खत्म कर दिया है। अब अगर कोई आपसे पूछे, तो आपके पास वैज्ञानिक जवाब तैयार है!

टाइप-C पोर्ट सिर्फ चार्जिंग के नहीं ये काम भी कर सकते है 👇क्या आपने कभी सोचा है कि आपके फोन का टाइप-C पोर्ट सिर्फ चार्ज ...
25/12/2025

टाइप-C पोर्ट सिर्फ चार्जिंग के नहीं ये काम भी कर सकते है 👇

क्या आपने कभी सोचा है कि आपके फोन का टाइप-C पोर्ट सिर्फ चार्ज करने तक ही सीमित नहीं है? दरअसल टाइप-C एक यूनिवर्सल स्टैंडर्ड है और यही एक पोर्ट आपके स्मार्टफोन को कई कामों का उस्ताद बना सकता है—बस सही तरीके से इस्तेमाल करना आना चाहिए।

फोन को बना लें पावर बैंक
अगर चार्जर पास नहीं है, तो टाइप-C to C केबल से आप अपने फोन से ईयरबड्स या दूसरे छोटे डिवाइस चार्ज कर सकते हैं। इमरजेंसी में यह फीचर बहुत काम आता है।

डेटा ट्रांसफर सुपर फास्ट
दो फोन को टाइप-C to C केबल से जोड़कर बड़ी फाइलें बिना रुकावट और तेज़ी से ट्रांसफर की जा सकती हैं। न इंटरनेट चाहिए, न ऐप—सीधा और भरोसेमंद तरीका।

फोन को लैपटॉप जैसा इस्तेमाल करें
टाइप-C पोर्ट में OTG/ब्लूटूथ डोंगल लगाकर कीबोर्ड और माउस कनेक्ट करें। लंबा ईमेल लिखना हो या स्क्रीन टूट गई हो—माउस-कीबोर्ड से काम आराम से हो जाएगा।

टीवी पर फिल्में और सीरीज स्ट्रीम करें
HDMI to Type-C केबल से फोन को टीवी से जोड़ें और स्क्रीन मिररिंग के जरिए फिल्में, वेब सीरीज और वीडियो बड़े स्क्रीन पर देखें।

वायर्ड ईयरबड्स का बेहतरीन साउंड
3.5mm जैक न होने पर भी टाइप-C ईयरबड्स या टाइप-C to 3.5mm डोंगल से हाई-क्वालिटी ऑडियो का मज़ा लें—खासतौर पर म्यूज़िक और गेमिंग के लिए।

21/12/2025

जिन्हें गुणो की पहचान नहीं है उनकी प्रशंसा से डरो,और जिन्हें गुणों की जानकारी है उनके मौन से डरो !!!

अब अनजान कॉल्स की टेंशन खत्म! 📵✨Jio ने भारत में अपनी नई CNAP (Caller Name Presentation) सर्विस लाइव कर दी है। अब जब भी आ...
19/12/2025

अब अनजान कॉल्स की टेंशन खत्म! 📵✨
Jio ने भारत में अपनी नई CNAP (Caller Name Presentation) सर्विस लाइव कर दी है। अब जब भी आपको किसी अनजान नंबर से फोन आएगा, तो आपकी स्क्रीन पर उस व्यक्ति का वही असली नाम दिखाई देगा जो उसके KYC (आधार कार्ड) में दर्ज है।

इस सर्विस की खास बातें:

- असली पहचान: अब कोई अपना नाम बदलकर आपको परेशान नहीं कर पाएगा।
- सुरक्षा: फर्जी कॉल्स और स्कैम (Scams) से बचने में बड़ी मदद मिलेगी।
- KYC आधारित: स्क्रीन पर वही नाम आएगा जो सिम कार्ड लेते समय दस्तावेजों में दिया गया था।

अब Truecaller जैसे थर्ड-पार्टी ऐप्स की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि नेटवर्क खुद आपको सही जानकारी देगा। 👍

क्या आपको लगता है कि सुरक्षा के लिहाज से यह एक अच्छा कदम है? कमेंट्स में अपनी राय जरूर दें! 👇

Tiny Robots, Big Future! 🤖Scientists from the University of Pennsylvania and the University of Michigan have achieved a ...
17/12/2025

Tiny Robots, Big Future! 🤖

Scientists from the University of Pennsylvania and the University of Michigan have achieved a major breakthrough in microrobotics. They have developed sub-millimeter robots, as small as a grain of rice, that can sense, compute, and act completely on their own — without any external control.

🔬 These robots are powered by CMOS technology, the same tech used in computer chips, allowing them to include:

Onboard processors, Sensors, Photovoltaic power cells

📊 In lab tests, the microrobots independently made decisions and adjusted their movements across 56 trials, marking a huge step beyond earlier robots that relied on bulky external systems.

💡 Why this matters:

Enables mass production — hundreds of robots can be built on a single chip

Lower cost & complexity

Robots can be digitally programmed and reprogrammed even after manufacturing

🌍 Potential applications include:

Targeted medical treatments, Precision manufacturing, Environmental monitoring

This innovation could redefine how robots work at the microscopic level — bringing science fiction closer to reality.

छोटे रोबोट, बड़ा भविष्य!यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया और यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के वैज्ञानिकों ने माइक्रोरोबोटिक्स के क्षे...
17/12/2025

छोटे रोबोट, बड़ा भविष्य!

यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया और यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के वैज्ञानिकों ने माइक्रोरोबोटिक्स के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने ऐसे सब-मिलीमीटर रोबोट विकसित किए हैं, जो चावल के दाने जितने छोटे हैं और बिना किसी बाहरी नियंत्रण के खुद सोचकर काम कर सकते हैं।

🔬 ये रोबोट CMOS तकनीक पर आधारित हैं, जो आमतौर पर कंप्यूटर चिप्स में इस्तेमाल होती है। इसी तकनीक से इनमें शामिल किए गए हैं:
- प्रोसेसर
- सेंसर
- सोलर (फोटोवोल्टिक) पावर सिस्टम

प्रयोगशाला में किए गए 56 परीक्षणों के दौरान इन माइक्रोरोबोट्स ने अपने आसपास के वातावरण को समझते हुए अपने मूवमेंट खुद बदले — यह तकनीक पुराने रोबोट सिस्टम्स से कहीं आगे है, जिन्हें बाहरी कंट्रोल की ज़रूरत पड़ती थी।

इस खोज की खास बातें:
- एक ही चिप पर सैकड़ों रोबोट बनाए जा सकते हैं
- लागत और तकनीकी जटिलता में भारी कमी
- रोबोट्स को बनाने के बाद भी डिजिटल रूप से प्रोग्राम और री-प्रोग्राम किया जा सकता है

संभावित उपयोग:
- चिकित्सा क्षेत्र में सटीक इलाज
- उन्नत मैन्युफैक्चरिंग
- पर्यावरण निगरानी और संरक्षण

यह खोज माइक्रो-लेवल रोबोट्स को लेकर हमारी सोच ही बदल सकती है और भविष्य की तकनीक को नई दिशा दे सकती है।

नोकिया के पूर्व सीईओ ने अपने आख़िरी भाषण में एक ऐसी बात कही जिसने पूरी टेक और बिजनेस इंडस्ट्री को झकझोर दिया:“We didn’t ...
16/12/2025

नोकिया के पूर्व सीईओ ने अपने आख़िरी भाषण में एक ऐसी बात कही जिसने पूरी टेक और बिजनेस इंडस्ट्री को झकझोर दिया:

“We didn’t do anything wrong… but somehow, we still lost.”

यह कथन सिर्फ नोकिया की कहानी नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति और बिजनेस की कड़वी सच्चाई है जो बदलती दुनिया और डिजिटल युग में भी पुराने तरीकों और पारंपरिक रणनीतियों पर अड़ा रहता है।

आज का बाज़ार और सफलता का मंत्र बहुत स्पष्ट है— गलती न करना अब पर्याप्त नहीं है। समय के साथ बदलना, नया सीखना (Learning & Unlearning), और निरंतर सुधार (Continuous Improvement) ही सस्टेनेबल ग्रोथ की कुंजी है। जो नवाचार (Innovation) से डर गया, वह रेस में पीछे छूट गया। जिसने बदलाव को अपनाया, वही मार्केट लीडर बना।

नोकिया इसलिए नहीं हारा कि उसने हार मान ली, बल्कि इसलिए क्योंकि उसने तकनीकी परिवर्तन (Technological Change) और उपभोक्ता मांग (Consumer Demand) के अनुसार खुद को समय रहते अनुकूलित (Adaptation) नहीं किया। यह व्यावसायिक सबक (Business Lesson) आज हर उद्यमी (Entrepreneur) और प्रोफेशनल के लिए एक अनिवार्य सीख है।

जो पैदा ही दुखी होने के लिए हुए है..
15/12/2025

जो पैदा ही दुखी होने के लिए हुए है..

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