Bahujan Sanvad

Bahujan Sanvad बहुजन वंचितों का अपना मिडिया

25/08/2026

क्या भारतीय मीडिया अपनी विश्वसनीयता के गंभीर संकट से गुजर रहा है?
लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले मीडिया के सामने आज आर्थिक निर्भरता, कॉरपोरेट स्वामित्व, सरकारी विज्ञापन, राजनीतिक दबाव, फेक न्यूज़, नफरती सामग्री, TRP की होड़ और मीडिया ट्रायल जैसे कई गंभीर सवाल खड़े हैं।
‘मीडिया को दुरुस्त करने की चुनौती’ विषय पर बहुजन संवाद की इस विशेष चर्चा में सवाल उठेंगे—
मीडिया की आर्थिक और संपादकीय स्वतंत्रता कैसे सुनिश्चित हो?
मीडिया स्वामित्व में पारदर्शिता क्यों जरूरी है?
क्या मौजूदा स्व-नियामक संस्थाएं पर्याप्त प्रभावी हैं?
फेक न्यूज़ और मीडिया ट्रायल पर अंकुश कैसे लगे?
शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, किसान, पर्यावरण और ग्रामीण भारत के सवाल मुख्यधारा से क्यों गायब होते जा रहे हैं?
सोशल मीडिया और डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म की जवाबदेही क्या हो?
पत्रकारों को राजनीतिक और कॉरपोरेट दबाव से कैसे सुरक्षित किया जाए?
और सबसे बड़ा सवाल—मीडिया को सत्ता का प्रहरी कैसे बनाया जाए, सत्ता का प्रचारक नहीं?
� सहभाग
� प्रो. शिवाजी सरकार — वैश्विक विशेषज्ञ, दिल्ली
� डॉ. सलीम खान — वरिष्ठ पत्रकार, मुंबई
� प्रो. प्रदीप माथुर — वरिष्ठ पत्रकार, दिल्ली
� राहुल वी — संपादक, रोस्टर न्यूज़, तमिलनाडु
� डॉ. आनन्द प्रकाश तिवारी — कार्यक्रम संपादक, बहुजन संवाद
� संचालन: डॉ. सुनीलम — संस्थापक संपादक, बहुजन संवाद

� लोकतंत्र, मीडिया, संविधान और जनसरोकारों से जुड़े सवालों पर निर्भीक और गंभीर विमर्श के लिए ‘बहुजन संवाद’ को Subscribe करें। वीडियो को Like और Share करें तथा मीडिया की मौजूदा स्थिति पर अपनी राय Comment में जरूर लिखें।

#मीडिया_को_दुरुस्त_करो #लोकतंत्र #पत्रकारिता #मीडिया #बहुजनसंवाद

� New to streaming or looking to level up? Check out StreamYard and get ₹740 discount! �

25/08/2026

महाराष्ट्र में सरकारी और मराठी माध्यम के स्कूलों की स्थिति तथा शिक्षा बजट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की टिप्पणी ने सरकारी प्राथमिकताओं पर महत्वपूर्ण बहस छेड़ दी है।
धुले जिले में एक स्कूल के कार्यक्रम में जस्टिस वराले ने नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ और उससे जुड़ी परियोजनाओं पर प्रस्तावित हजारों करोड़ रुपये के खर्च का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि इसका केवल 0.1 प्रतिशत हिस्सा भी शिक्षा के लिए उपलब्ध कराया जाता, तो धन की कमी से प्रभावित करीब 100–125 मराठी माध्यम स्कूलों को बचाने में मदद मिल सकती थी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें कुंभ या विकास परियोजनाओं पर होने वाले खर्च से आपत्ति नहीं है। उनका मूल सवाल प्राथमिकताओं और शिक्षा के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने का था।
जब सरकारी स्कूल भवन, स्वच्छता, तकनीकी सुविधाओं और अन्य बुनियादी संसाधनों की कमी से जूझ रहे हों, तब सवाल महत्वपूर्ण है—
क्या शिक्षा को सरकारी खर्च में वह प्राथमिकता मिल रही है जिसकी बच्चों के भविष्य के लिए जरूरत है?
इसी मुद्दे का विश्लेषण इस वीडियो में।

� शिक्षा, संविधान, सामाजिक न्याय और जनहित के सवालों पर तथ्यपरक और बेबाक चर्चा के लिए चैनल को Subscribe करें। वीडियो पसंद आए तो Like और Share करें तथा अपनी राय Comment में जरूर लिखें।

#सरकारीस्कूल #शिक्षाबजट #शिक्षाबचाओ #स्कूलठीककरो

� New to streaming or looking to level up? Check out StreamYard and get ₹740 discount! �

24/08/2026

क्या हिमाचल प्रदेश अत्यधिक खतरनाक कीटनाशकों से मुक्त होने वाला पहला हिमालयी राज्य बन सकता है?
केंद्र सरकार द्वारा पैराक्वाट डाइक्लोराइड (Paraquat Dichloride) पर प्रतिबंध के प्रस्ताव के बाद अत्यधिक खतरनाक कीटनाशकों के इस्तेमाल, किसानों की सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण को लेकर महत्वपूर्ण बहस तेज हो गई है।
इसी गंभीर विषय पर हिमालय नीति अभियान के संयोजक गुमान सिंह से बातचीत कर रहे हैं डॉ. सुनीलम।
चर्चा में प्रमुख सवाल—
पैराक्वाट जैसे अत्यधिक विषैले कीटनाशकों पर प्रतिबंध क्यों जरूरी है?
किसानों और खेतिहर मजदूरों के स्वास्थ्य पर इनका क्या प्रभाव पड़ता है?
मोनोक्रोटोफॉस, क्लोरपाइरीफॉस, कार्बोफ्यूरान, जिंक फॉस्फाइड और ग्लाइफोसेट को लेकर क्या चिंताएं हैं?
हिमाचल के जलस्रोतों, मिट्टी और जैव विविधता पर रासायनिक खेती का क्या असर पड़ रहा है?
क्या राज्य सरकार अत्यधिक खतरनाक कीटनाशकों के विरुद्ध अलग से कार्रवाई कर सकती है?
प्राकृतिक खेती किसानों के लिए कितना व्यावहारिक विकल्प है?
क्या हिमाचल HHP-Free Himalayan State बनने की दिशा में पहल कर सकता है?
किसान, खेती, पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से जुड़े इस महत्वपूर्ण संवाद को पूरा देखें और अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें।
नोट: चर्चा में उल्लिखित कीटनाशकों के स्वास्थ्य प्रभाव, कानूनी स्थिति और प्रस्तावित प्रतिबंध संबंधी दावे संबंधित सरकारी अधिसूचनाओं/वैज्ञानिक साक्ष्यों के संदर्भ में देखे जाने चाहिए।

� किसान, पर्यावरण, जनस्वास्थ्य और जनसरोकार के मुद्दों पर ऐसी तथ्यपरक और बेबाक चर्चाओं के लिए बहुजन संवाद को Subscribe करें। वीडियो को Like, Share और Comment करें तथा इसे किसानों और पर्यावरण के सवालों से जुड़े लोगों तक जरूर पहुंचाएं।

#किसान #कीटनाशक #प्राकृतिकखेती #पर्यावरण #जनस्वास्थ्य #बहुजनसंवाद

� New to streaming or looking to level up? Check out StreamYard and get ₹740 discount! �

24/08/2026

सप्ताह की बात – बहुजन संवाद
� हर सोमवार | � शाम 6 बजे | LIVE
देश-दुनिया की प्रमुख सामयिक घटनाओं पर
गहन, तथ्य आधारित और बहुजन दृष्टिकोण से विश्लेषण।
इस साप्ताहिक कार्यक्रम में हम उठाते हैं वे सवाल,
जिन पर मुख्यधारा अक्सर चुप रहती है।
� इस एपिसोड में मिलेगा —
� हफ्ते के सबसे अहम मुद्दों पर बहुजन नजरिया
� किन घटनाओं पर रही तीखी बहस, किन पर छाया सन्नाटा
� आपके हक़, अधिकार और संविधान से जुड़ी ज़रूरी बातें
� राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और जन आंदोलनों का विश्लेषण
� यह सिर्फ न्यूज़ नहीं — आपके हक़ की बात है।
� देखिए, सोचिए और सवाल कीजिए।
� आपसे अपील
अगर आप चाहते हैं कि बहुजन आवाज़ और बुलंद हो —
� अभी Bahujan Samvad YouTube चैनल को Subscribe करें
� वीडियो को Like करें
� दोस्तों के साथ Share करें
� Bell Icon दबाएँ ताकि हर सोमवार शाम 6 बजे का कार्यक्रम आप मिस न करें।

#बहुजनसंवाद #सप्ताहकीबात


#बहुजनदृष्टिकोण

� New to streaming or looking to level up? Check out StreamYard and get ₹740 discount! �

23/08/2026

क्या SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची को शुद्ध करने की प्रक्रिया है, या इसके जरिए बड़ी संख्या में नागरिकों के मताधिकार पर संकट पैदा हो रहा है?
मतदाता सूची से नाम हटाए जाने, नागरिकता संबंधी दस्तावेजों, गरीबों, प्रवासी मजदूरों, दलितों, आदिवासियों, महिलाओं और अन्य वंचित तबकों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
इन्हीं महत्वपूर्ण सवालों पर बहुजन संवाद में डॉ. सुनीलम की तारा राव से विशेष बातचीत।
इस चर्चा में जानिए—SIR की प्रक्रिया और उसके प्रावधान क्या हैं? मतदाता को अपना नाम सुरक्षित रखने के लिए क्या करना चाहिए? क्या दस्तावेजों की जटिलता मताधिकार में बाधा बन सकती है? चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी क्या है? और लोकतंत्र में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार की रक्षा क्यों जरूरी है?
� प्रसारण : रात्रि 8 बजे
� बहुजन संवाद
अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें और इस महत्वपूर्ण चर्चा को अधिक से अधिक लोगों तक साझा करें।

� लोकतंत्र, संविधान, चुनाव, सामाजिक न्याय और जनता के अधिकारों से जुड़े सवालों पर तथ्यपरक और बेबाक विमर्श के लिए ‘बहुजन संवाद’ को Subscribe करें और Bell Icon दबाएं।

#मताधिकार #डॉसुनीलम #मतदातासूची #लोकतंत्र #संविधान #बहुजनसंवाद

� New to streaming or looking to level up? Check out StreamYard and get ₹740 discount! �

23/08/2026

बहुजन संवाद की विशेष श्रृंखला — “सप्ताह का व्यक्तित्व”
इस सप्ताह हमारे साथ हैं डॉ. मीरा मिश्रा—एक ऐसा व्यक्तित्व जिनकी यात्रा विज्ञान, साहित्य, अनुवाद, सामाजिक सरोकार और पर्यावरण चेतना को एक साथ जोड़ती है।
कानपुर में जन्मी, उत्तर प्रदेश के बलिया से जुड़ी और पटना, बिहार को अपना प्रमुख कर्मक्षेत्र बनाने वाली डॉ. मीरा मिश्रा ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से रसायनशास्त्र में M.Sc. एवं PhD की शिक्षा प्राप्त की। दिल्ली और पटना में सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं में कार्य करते हुए उन्होंने सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर निरंतर लेखन किया।
कहानी, कविता और वैचारिक आलेखों के साथ उनकी विशेष रुचि अनुवाद कर्म में भी रही है। उन्होंने क्रांतिकारी चे ग्वेवारा की ‘बोलीविया डायरी’ सहित तीन पुस्तकों का हिंदी अनुवाद किया है। उनकी कहानियां और कविताएं हंस, कथा, इन्द्रधनुष, आह्वान सहित विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं।
इस विशेष बातचीत में जानिए—एक विज्ञान की विद्यार्थी साहित्य और सामाजिक सरोकारों की दुनिया तक कैसे पहुंचीं? चे ग्वेवारा के लेखन ने उन्हें किस तरह प्रभावित किया? विज्ञान और साहित्य के बीच क्या रिश्ता है? पर्यावरण संकट को वे किस दृष्टि से देखती हैं? और आज के सामाजिक-राजनीतिक दौर में एक लेखक की जिम्मेदारी क्या होनी चाहिए?
� डॉ. मीरा मिश्रा से बातचीत:
� डॉ. सुनीलम — संस्थापक संपादक, बहुजन संवाद
� डॉ. आनंद प्रकाश तिवारी — कार्यक्रम संपादक, बहुजन संवाद।

� देश के ऐसे व्यक्तित्वों की जीवन-यात्रा, विचार और संघर्ष को करीब से जानने के लिए ‘बहुजन संवाद’ को Subscribe करें। वीडियो को Like और Share करें तथा Bell Icon दबाना न भूलें।

#डॉमीरामिश्रा #सप्ताहकाव्यक्तित्व #इलाहाबादविश्वविद्यालय #साहित्य #कविता #कहानी #पर्यावरण #सामाजिकसरोकार #बहुजनसंवाद

� New to streaming or looking to level up? Check out StreamYard and get ₹740 discount! �

22/08/2026

‘स्कूल ठीक करो’ अभियान को लेकर राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। CJP संस्थापक अभिजीत दीपके द्वारा सरकारी स्कूलों की स्थिति सामने लाने और उनके सोशल ऑडिट की मांग को लेकर चलाए जा रहे अभियान के बीच राजस्थान में स्कूल परिसरों में बाहरी लोगों के प्रवेश तथा बिना अनुमति फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, इंटरव्यू और लाइव स्ट्रीमिंग पर पाबंदियां चर्चा में हैं।
राजस्थान सरकार का कहना है कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, गरिमा और निजता की रक्षा के लिए अनुमति संबंधी नियम जरूरी हैं। दूसरी ओर CJP और विपक्ष सवाल उठा रहे हैं कि क्या इन नियमों के जरिए सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति जनता के सामने आने से रोकी जा रही है?
विवाद उस समय और बढ़ गया जब जयपुर के रामपुरा-कंवरपुरा क्षेत्र में स्कूल पहुंचे CJP नेता आशुतोष रांका और उनके साथियों के साथ मारपीट तथा वाहनों में तोड़फोड़ की खबर सामने आई।
विपक्ष ने घटना की निंदा करते हुए भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने भाजपा कार्यकर्ताओं की संलिप्तता की पुष्टि से इनकार किया है और कहा है कि स्थानीय लोगों ने बाहरी लोगों के स्कूलों में हस्तक्षेप का विरोध किया।
इस पूरे विवाद के बीच बड़े सवाल—
� सरकारी स्कूलों की स्थिति का सोशल ऑडिट क्यों नहीं होना चाहिए?
� क्या नागरिकों और पत्रकारों को सरकारी स्कूलों की बदहाली दिखाने का अधिकार है?
� बच्चों की Privacy और सार्वजनिक जवाबदेही के बीच संतुलन कैसे बने?
� CJP कार्यकर्ताओं पर हमला किसने किया और जिम्मेदारी किसकी है?
� क्या ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शिक्षा व्यवस्था पर एक बड़े राजनीतिक संघर्ष का रूप ले रहा है?
देखिए इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर विशेष चर्चा बहुजन संवाद में।
� सरकारी शिक्षा, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और जनता के बुनियादी सवालों पर तथ्यपरक एवं बेबाक विमर्श के लिए ‘बहुजन संवाद’ को Subscribe करें। वीडियो को Like और Share करें तथा Comment में बताएं—सरकारी स्कूलों का सोशल ऑडिट होना चाहिए या नहीं?

#स्कूल_ठीक_करो #सरकारीस्कूल #शिक्षा #बहुजनसंवाद

� New to streaming or looking to level up? Check out StreamYard and get ₹740 discount! �

22/08/2026

हरिशंकर परसाई की 102वीं जयंती पर बहुजन संवाद की विशेष चर्चा
22 अगस्त 1924 को मध्यप्रदेश के होशंगाबाद (अब नर्मदापुरम) जिले के जमानी गांव में जन्मे हरिशंकर परसाई ने हिंदी व्यंग्य को नई ऊंचाई और सामाजिक-राजनीतिक चेतना दी। उनकी कलम ने सत्ता, भ्रष्टाचार, अवसरवाद, धार्मिक-सामाजिक पाखंड, नौकरशाही और मध्यवर्गीय दोहरेपन पर लगातार प्रहार किया।
आज उनकी 102वीं जयंती पर सबसे बड़ा सवाल है—
यदि हरिशंकर परसाई आज जीवित होते तो वे आज के भारत को किस नजर से देखते?
क्या वे सत्ता और व्यवस्था पर पहले से भी अधिक तीखा व्यंग्य लिखते?
क्या सोशल मीडिया और राजनीतिक ध्रुवीकरण के दौर में उनकी कलम को बर्दाश्त किया जाता?
और यह धारणा क्यों सुनाई देती है कि “परसाई आज होते तो जेल में होते”?
इन्हीं सवालों के साथ उनकी रचनाओं, वैचारिक दृष्टि, मार्क्सवादी प्रभाव और आज के राजनीतिक-सामाजिक संदर्भ में उनकी प्रासंगिकता पर बहुजन संवाद की विशेष चर्चा।
प्रसारण: 22 अगस्त 2026 | शाम 6 बजे
सहभाग:
� शैलेंद्र कुमार — राष्ट्रीय सचिव, भारतीय जन नाट्य संघ
� डॉ. आनन्द प्रकाश तिवारी — कार्यक्रम संपादक, बहुजन संवाद
� संचालन: डॉ. सुनीलम — संस्थापक संपादक, बहुजन संवाद

� सत्ता से सवाल, समाज की पड़ताल और साहित्य-संस्कृति के जनपक्षीय विमर्श के लिए ‘बहुजन संवाद’ को Subscribe करें, Bell Icon दबाएं और इस चर्चा को अधिक से अधिक साझा करें।

#हरिशंकरपरसाई #परसाई #व्यंग्य #परसाईजयंती #साहित्य #मार्क्सवाद #अभिव्यक्तिकीआजादी #लोकतंत्र #सत्तासेसवाल #बहुजनसंवाद

� New to streaming or looking to level up? Check out StreamYard and get ₹740 discount! �

21/08/2026

बहुजन संवाद | विशेष अंतरराष्ट्रीय विमर्श
विषय: जम्मू-कश्मीर पर ट्रंप की नजर!
� 21 अगस्त 2026 | � रात 8 बजे
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर (Sergio Gor) के जम्मू-कश्मीर दौरे और कश्मीर को भारत का “महत्वपूर्ण हिस्सा” बताए जाने के बाद नई कूटनीतिक बहस शुरू हो गई है। पाकिस्तान ने इस बयान पर औपचारिक विरोध दर्ज कराया है।
क्या यह केवल अमेरिकी राजदूत की टिप्पणी है या कश्मीर को लेकर ट्रंप प्रशासन की नीति में बदलाव का संकेत? क्या अमेरिका अपनी यात्रा सलाह में भी बदलाव करेगा? भारत-अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों और दक्षिण एशिया की बदलती राजनीति पर इसका क्या असर पड़ सकता है?
बहुजन संवाद में इन्हीं सवालों पर विशेष चर्चा—
� प्रो. ए. के. पाशा — वैश्विक मामलों के विशेषज्ञ
� डॉ. संदीप पांडेय — रेमन मैग्सेसे पुरस्कार प्राप्त
� डॉ. सलीम खान — वरिष्ठ पत्रकार, मुंबई
� अयाज अहमद — वरिष्ठ पत्रकार, कश्मीर
� डॉ. आनन्द प्रकाश तिवारी — कार्यक्रम संपादक, बहुजन संवाद
� संचालन: डॉ. सुनीलम — संस्थापक संपादक, बहुजन संवाद
चर्चा के प्रमुख सवाल: सर्जियो गोर के बयान के वास्तविक मायने क्या हैं? पाकिस्तान ने इतनी तीखी प्रतिक्रिया क्यों दी? क्या अमेरिकी कश्मीर नीति सचमुच बदल रही है? और ट्रंप प्रशासन की दक्षिण एशिया रणनीति में भारत, पाकिस्तान और कश्मीर की जगह क्या होगी?
� सब्सक्रिप्शन लाइन
भारत ही नहीं, दुनिया की राजनीति को सत्ता के दावों से आगे जाकर समझने के लिए ‘बहुजन संवाद’ को Subscribe करें। वीडियो Like–Share करें और ऐसे बेबाक विमर्श के लिए Bell Icon जरूर दबाएं।
� हैशटैग
#बहुजनसंवाद
थंबनेल के लिए सबसे असरदार छोटी लाइन:
“कश्मीर पर ट्रंप का नया दांव?”
नीचे: “अमेरिकी बयान से पाकिस्तान नाराज़!”

� New to streaming or looking to level up? Check out StreamYard and get ₹740 discount! �

21/08/2026

देश में महंगाई के बीच अब शक्कर की कीमतों में तेज उछाल आम उपभोक्ताओं की जेब पर भारी पड़ रहा है। हाल के दिनों में खुदरा और थोक बाजार में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। सरकार ने भी बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए स्टॉक लिमिट और 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात जैसे कदम उठाए हैं।
लेकिन बड़े सवाल अब भी कायम हैं—
आखिर शक्कर इतनी महंगी क्यों हो रही है?
क्या बाजार में कृत्रिम कमी पैदा की गई?
चीनी मिलों को बढ़ी कीमतों से कितना फायदा हो रहा है?
क्या बढ़े हुए मुनाफे में गन्ना किसानों की हिस्सेदारी बढ़ेगी?
एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के बढ़ते इस्तेमाल का चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर क्या असर है?
और महंगाई रोकने में सरकार की नीतियां कितनी प्रभावी हैं?
इन्हीं सवालों और चीनी की मूल्य वृद्धि के पूरे अर्थशास्त्र को समझने के लिए देखिए बहुजन संवाद की विशेष परिचर्चा।
� वक्ता—
� प्रो. अरुण कुमार — सुप्रसिद्ध अर्थशास्त्री
� राजन क्षीरसागर — गन्ना क्षेत्र के प्रख्यात किसान नेता
� डॉ. सुनीलम — राष्ट्रीय अध्यक्ष, किसान संघर्ष समिति
� डॉ. आनन्द प्रकाश तिवारी — कार्यक्रम संपादक, बहुजन संवाद
यह चर्चा सिर्फ शक्कर के बढ़ते दाम की नहीं, बल्कि उस सवाल की भी है कि बढ़ती कीमत का लाभ आखिर किसान, मिल मालिक और उपभोक्ता के बीच किस तरह बंट रहा है?

� जनता, किसान, मजदूर और बहुजन समाज से जुड़े आर्थिक-सामाजिक सवालों पर तथ्यपरक और बेबाक विमर्श के लिए “बहुजन संवाद” को Subscribe करें। वीडियो को Like और Share करें तथा अपनी राय Comment में जरूर लिखें।

#चीनी_कीमत #शक्कर_महंगी #महंगाई #गन्नाकिसान #किसान #बहुजनसंवाद

� New to streaming or looking to level up? Check out StreamYard and get ₹740 discount! �

Address

Shyamnagar
Begumganj
464881

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Bahujan Sanvad posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Bahujan Sanvad:

Shortcuts

Share