25/08/2026
क्या भारतीय मीडिया अपनी विश्वसनीयता के गंभीर संकट से गुजर रहा है?
लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले मीडिया के सामने आज आर्थिक निर्भरता, कॉरपोरेट स्वामित्व, सरकारी विज्ञापन, राजनीतिक दबाव, फेक न्यूज़, नफरती सामग्री, TRP की होड़ और मीडिया ट्रायल जैसे कई गंभीर सवाल खड़े हैं।
‘मीडिया को दुरुस्त करने की चुनौती’ विषय पर बहुजन संवाद की इस विशेष चर्चा में सवाल उठेंगे—
मीडिया की आर्थिक और संपादकीय स्वतंत्रता कैसे सुनिश्चित हो?
मीडिया स्वामित्व में पारदर्शिता क्यों जरूरी है?
क्या मौजूदा स्व-नियामक संस्थाएं पर्याप्त प्रभावी हैं?
फेक न्यूज़ और मीडिया ट्रायल पर अंकुश कैसे लगे?
शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, किसान, पर्यावरण और ग्रामीण भारत के सवाल मुख्यधारा से क्यों गायब होते जा रहे हैं?
सोशल मीडिया और डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म की जवाबदेही क्या हो?
पत्रकारों को राजनीतिक और कॉरपोरेट दबाव से कैसे सुरक्षित किया जाए?
और सबसे बड़ा सवाल—मीडिया को सत्ता का प्रहरी कैसे बनाया जाए, सत्ता का प्रचारक नहीं?
� सहभाग
� प्रो. शिवाजी सरकार — वैश्विक विशेषज्ञ, दिल्ली
� डॉ. सलीम खान — वरिष्ठ पत्रकार, मुंबई
� प्रो. प्रदीप माथुर — वरिष्ठ पत्रकार, दिल्ली
� राहुल वी — संपादक, रोस्टर न्यूज़, तमिलनाडु
� डॉ. आनन्द प्रकाश तिवारी — कार्यक्रम संपादक, बहुजन संवाद
� संचालन: डॉ. सुनीलम — संस्थापक संपादक, बहुजन संवाद
� लोकतंत्र, मीडिया, संविधान और जनसरोकारों से जुड़े सवालों पर निर्भीक और गंभीर विमर्श के लिए ‘बहुजन संवाद’ को Subscribe करें। वीडियो को Like और Share करें तथा मीडिया की मौजूदा स्थिति पर अपनी राय Comment में जरूर लिखें।
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