News Sadan Tak

News Sadan Tak Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from News Sadan Tak, Begusarai.

असतो मा सद्गमय-जय जवान,जय किसान।राष्ट्रभक्ति ही मेरा धर्म है जहाँ सेवा, त्याग, तपस्या और कर्म समाहित हैं।
बिहार की ज़रूरत यही भक्ति है और मैं इसी बिहार की मिट्टी से हूँ।अगर तुम्हें ज़ंजीरें पर भरोसा हैं, तो बढ़ाओ उसे..हाँ, हाँ दुर्योधन ! बाँध मुझे!

02/09/2026

ए भाई.. पंद्रह दिन के लिए उधार मांगा तो सिर्फ ताने ..अभी आप मुझसे पैसे मांगकर शर्मिंदा क्यों कर रहे हैं ? अब मैं ना किसी को उधार पैंचा दूंगा ना लूंगा।

मुझे अपनी आंखों से आपकी मजबूरी दिखेंगी तो थोड़ा बहुत सहयोग करूंगा....वो भी ज्यादा से पांच सौ रूपए।

02/09/2026

बेगूसराय में वार्ड पार्षद और जिलाधिकारी का चिट्ठी के साथ कर रही है ठगी .. ग्रुप का नाम है भा/रत सरकार ?
कितने लोग फंसे हैं?

सिर्फ राजद का नाम आते ही गालियों की बौछार क्यों?(पूर्व सैनिक सह पत्रकार संतोष राय)ये प्रकाशन बेगूसराय के एक प्रतिष्ठित औ...
02/09/2026

सिर्फ राजद का नाम आते ही गालियों की बौछार क्यों?

(पूर्व सैनिक सह पत्रकार संतोष राय)
ये प्रकाशन बेगूसराय के एक प्रतिष्ठित और विश्वासप्राप्त चैनल “द बेगूसराय” का है। संपूर्ण सूत्र, तस्वीर और उदाहरण के साथ छोटा-सा संकलन है।

प्रकाशन में लिखा गया है—“बेगूसराय के चेरिया बरियारपुर प्रखंड की सकरवासा पंचायत के मुखिया और RJD प्रखंड अध्यक्ष सुरेंद्र राम उर्फ सुलो राम पर एक महिला को धमकाकर शारीरिक संबंध बनाने और मानसिक-शारीरिक शोषण के गंभीर आरोप लगे हैं।”

आगे प्रकाशन में ग्रामीणों द्वारा मुखिया को महिला के साथ आपत्तिजनक हालत में पकड़े जाने और पिटाई किए जाने का भी उल्लेख है। साथ ही वायरल वीडियो और बातचीत के 8 ऑडियो क्लिप का दावा किया गया है।

लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात—उसी प्रकाशन ने साफ-साफ यह भी लिखा है कि वायरल ऑडियो और लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष भी महत्वपूर्ण है।

मतलब खबर ने आरोप को फैसला नहीं बना दिया।

फिर सवाल यह है कि कमेंट सेक्शन में गालियों की बौछार क्यों?

सिर्फ इसलिए कि खबर में RJD का नाम आ गया?

भाई, खबर गलत है तो तथ्य लेकर आइए।
आरोप गलत है तो खंडन कीजिए।
वायरल ऑडियो फर्जी है तो जांच की मांग कीजिए।

लेकिन सवाल पूछने वाले को गाली क्यों?

मतलब हरे गमछे वाले अपराधियों के निशाने पर सिर्फ मैं नहीं, वह तमाम लोग हैं जो दो टूक बात करना जानते हैं।

मैं तो हमेशा कहता हूं—राजनीति में किसी दल का समर्थक होना अपराध नहीं है, लेकिन किसी दल के नाम पर गाली-गलौज को अपनी विचारधारा बना लेना निश्चित रूप से लोकतांत्रिक बहस नहीं है।

सोशल मीडिया आज हजारों लोगों की रोजी-रोटी है। पत्रकार, क्रिएटर और आम आदमी—सब अपनी बात रखने के लिए इसी मंच का इस्तेमाल कर रहे हैं।

लेकिन जैसे ही कोई असुविधाजनक सवाल पूछता है, तर्क खत्म और गालियां शुरू!

फौजी पत्रकार हूं।

सवाल पूछना आता है और सवाल का जवाब भी सुनना आता है।

लेकिन अब एक ही रास्ता दिखाई देता है—

"बस अब बस एक ही बिलकल्प है कि सभी संकलन में कमेंट को बंद कर दिया जाए"

क्योंकि जब तथ्य से जवाब देने की क्षमता खत्म हो जाए और गाली ही जवाब बन जाए, तब कमेंट बॉक्स बहस का मंच नहीं रहता—वह सिर्फ मानसिक दबाव बनाने का अड्डा बन जाता है।

02/09/2026

मुझे आज पता चला कि बेगूसराय के हजारों युवक सोशल मीडिया पर व्याकुल है... मतलब इतने कन्हैया कुमार?

शराबबंदी का सच और छोटे सरकार का ‘बकौध’—फौजी पत्रकार की नजर में बिहार का सिस्टम!(पूर्व सैनिक सह पत्रकार संतोष राय)हर बेबा...
02/09/2026

शराबबंदी का सच और छोटे सरकार का ‘बकौध’—फौजी पत्रकार की नजर में बिहार का सिस्टम!

(पूर्व सैनिक सह पत्रकार संतोष राय)
हर बेबाक और शिक्षा से तराशे गए सवाल को खामोश कर देते हैं छोटे सरकार!

आज सोशल मीडिया में गजब का टीआरपी है। बिहार में हजारों क्रिएटर का बेस है, किसी की रोजी-रोटी है, किसी की पहचान है और किसी का भविष्य इसी सोशल मीडिया से जुड़ा हुआ है।

लेकिन मैं हमेशा माननीय विधायक अनंत सिंह के हाव-भाव का विश्लेषण करता हूं। क्योंकि जिस बात को लोग घंटों घुमा-फिराकर बोलते हैं, छोटे सरकार उसे दो शब्द में ऐसा बोल जाते हैं कि पूरा सिस्टम नंगा दिखाई देने लगता है।

एक अनंत सिंह ही हैं जो दो टूक कह सकते हैं—“तोय नाय जानोही कि केतना शराबबंदी है?”

एकदम ठेठ मगही।
मतलब—तुम नहीं जानते हो कि बिहार में कितनी शराबबंदी है?

अब मतलब समझ गए होंगे आप!

लेकिन जब अवैध शराब से चार लोगों की मौत के मामले में छोटे सरकार घटनास्थल पर पहुंचे तो उनके चेहरे पर वही पुराना तेवर नहीं था। वहां शायद हाव-भाव भी जवाब दे गया।

मगही में कहें तो—बकौध लग गया!

यहीं से फौजी पत्रकार की कल्पना शुरू होती है।

शहंशाह का कोमल हृदय आखिर मजबूर भी तो है।

जिस परिवार में आज चूल्हा नहीं जल रहा, जिस घर में चार लाशें पड़ी हैं, उसी समाज के कुछ लोग कल तक अवैध शराब की खरीद-बिक्री में सहयोग करते रहे होंगे।

गरीबी, लालच, मजबूरी और शराबबंदी के बीच पिसता हुआ एक समाज।

सरकार ने कह दिया—जान जहरीली शराब से गई।

अंग्रेजी शराब के साथ पांच जाम के संकेत भी मिल रहे हैं।

अब सवाल यह है कि अगर चार लोग मर गए और पांच लोगों ने जाम लगाया था, तो पांचवां कौन था?

और कहीं ऐसा न हो कि कल उसी पांचवें व्यक्ति का नाम साजिशन हत्या में सामने आ जाए!

क्योंकि बिहार में जांच की रफ्तार और न्याय की उम्र—दोनों पर सवाल उठते रहे हैं।

न कोई त्वरित फॉरेंसिक व्यवस्था।
न मौके पर वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटाने की पर्याप्त व्यवस्था। न डॉग स्क्वायड की तत्काल कार्रवाई।

फिर जिसके साथ पुरानी दुश्मनी होगी, वही बली का बकरा बनेगा और मामला अदालत में जाएगा।

बेल के लिए तीन-चार साल की जद्दोजहद।

फिर गवाह बदलेंगे, साक्ष्य कमजोर होंगे, तारीख पर तारीख पड़ेगी और ऐसे मामलों में फैसला आएगा भी तो कब?

बीस साल बाद!
और तब तक क्या बचेगा?

कुछ कागज, कुछ बयान और एक परिवार की जिंदगी भर की तबाही।

फिर अदालत कहेगी—साक्ष्य के अभाव में बरी।

मामला दब जाएगा। लोग भूल जाएंगे।

लेकिन छोटे सरकार का वह बेबाक अंदाज और हाजिर जवाब शायद फिर किसी कैमरे के सामने सुनाई देगा—“तोय नाय जानोही कि केतना शराबबंदी है?”

यही बिहार है।

यहां शराबबंदी कागज पर कितनी है, यह सरकार जाने।

जमीन पर कितनी है, यह छोटे सरकार जाने।

और अवैध शराब से मरने वाले गरीब के घर का चूल्हा—वह परिवार जानता है।

फौजी पत्रकार बस इतना पूछता है—शराबबंदी अगर इतनी ही सख्त है, तो जहरीली शराब गरीब के घर तक पहुंचती कैसे है?

02/09/2026

कितना बड़ा राजनितिज्ञ है ये लेकिन इसको सरकार विरोध अन्य लोगों से चाहिए ?

वर्दी से डर कैसा? जब सवाल लोकतंत्र का हो, तो संग्राम रुकना नहीं चाहिए(पूर्व सैनिक सह पत्रकार संतोष राय)दुनिया में ख्याति...
02/09/2026

वर्दी से डर कैसा? जब सवाल लोकतंत्र का हो, तो संग्राम रुकना नहीं चाहिए

(पूर्व सैनिक सह पत्रकार संतोष राय)
दुनिया में ख्याति प्राप्त महान योद्धा और भारतीय सेना के पूर्व सेनाध्यक्ष फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ ‘सैम बहादुर’ ने एक बार कहा था—अगर कोई कहता है कि उसे मौत से डर नहीं लगता, तो या तो वह झूठ बोल रहा है या फिर वह गोरखा है।

यह बात गोरखा जवानों के अदम्य साहस और उनके हौसले की मिसाल के तौर पर कही गई थी। लेकिन भारतीय सेना के किसी भी सिपाही के लिए यह सिर्फ एक कथन नहीं, बल्कि वर्दी पहनकर खड़े होने वाले हर जवान के साहस का प्रतीक है।

अब आइए बिहार की बात करते हैं।

बिहार पुलिस का नेतृत्व एक आईपीएस अधिकारी के हाथों में होता है। उस वर्दी पर भी राष्ट्र और कानून के तमाम प्रतीक अंकित होते हैं। वह वर्दी किसी व्यक्ति की निजी ताकत नहीं, संविधान और कानून की जिम्मेदारी का प्रतीक है।

फिर सवाल यह है कि हमें उस वर्दी से डर क्यों लगता है?

डीजीपी विनय कुमार और बेगूसराय एसपी मनीष कुमार का नाम सुनते ही अगर कोई वकील अपना पैर पीछे खींचने लगे, तो सवाल पुलिस से ज्यादा उस व्यवस्था पर खड़ा होता है, जिसने वर्दी को भय का पर्याय बनने दिया।

कानून का काम डर पैदा करना नहीं, कानून का राज स्थापित करना है।

सरकार धराधर तबादले कर रही है। कुर्सियां बदल रही हैं। अधिकारियों के कार्यक्षेत्र बदल रहे हैं। प्रशासनिक फेरबदल लगातार हो रहे हैं। लेकिन अगर किसी अधिकारी के व्यवहार, कार्यशैली और मनमानी के खिलाफ शिकायतें सामने आती हैं और उन शिकायतों पर गंभीरता से सुनवाई नहीं होती, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।

आखिर शिकायत सुनने की व्यवस्था किसलिए है?

क्या वर्दी के भीतर बैठे अधिकारी इंसान नहीं भगवान है , सवाल पूछना अपराध है ?

क्या किसी अधिकारी के निर्णय पर कानूनी तरीके से आपत्ति दर्ज कराना अपराध है ?

और क्या न्याय मांगने वाला नागरिक इसलिए चुप हो जाए कि सामने किसी बड़े अधिकारी का नाम है?

मैं तो चुप होने वाला नहीं हूं।

मैंने सेना की वर्दी देखी है और उस वर्दी का सम्मान करना सीखा है। इसलिए पुलिस की वर्दी का भी सम्मान करता हूं। लेकिन सम्मान और भय में जमीन-आसमान का अंतर होता है।

वर्दी का सम्मान इसलिए होना चाहिए कि वह कानून की रक्षा करती है—इसलिए नहीं कि उसके सामने सवाल पूछने वाला डर जाए।

मेरा संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि उस मानसिकता के खिलाफ है जिसमें पद बड़ा होते ही सवाल छोटे हो जाते हैं और अधिकारी के सामने नागरिक की आवाज कमजोर समझी जाने लगती है।

तबादले होते रहें, कुर्सियां बदलती रहें, चेहरे बदलते रहें—लेकिन अगर सवाल जायज है तो सवाल वहीं रहेगा।

और जब तक सवाल का जवाब नहीं मिलता,
संग्राम भी नहीं रुकेगा।

01/09/2026

धन्यवाद 🙏🏻

01/09/2026

जरूरत मंदों के लिए मेरा नंबर 9631047796 फिर से...दम है तो तेजस्वी - लालू यादव अपना नंबर सार्वजनिक करें

Address

Begusarai
851211

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when News Sadan Tak posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to News Sadan Tak:

Shortcuts

Share