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असतो मा सद्गमय-जय जवान,जय किसान।राष्ट्रभक्ति ही मेरा धर्म है जहाँ सेवा, त्याग, तपस्या और कर्म समाहित हैं।
बिहार की ज़रूरत यही भक्ति है और मैं इसी बिहार की मिट्टी से हूँ।अगर तुम्हें ज़ंजीरें पर भरोसा हैं, तो बढ़ाओ उसे..हाँ, हाँ दुर्योधन ! बाँध मुझे!

खगड़िया में प्रशासनिक चमक-दमक के बीच खून से लाल हुई रात, एक परिवार पर टूटा कहर(पूर्व सैनिक सह पत्रकार संतोष राय)उत्तर, प...
01/06/2026

खगड़िया में प्रशासनिक चमक-दमक के बीच खून से लाल हुई रात, एक परिवार पर टूटा कहर

(पूर्व सैनिक सह पत्रकार संतोष राय)

उत्तर, पूर्व और मध्य बिहार को जोड़ने वाला ऐतिहासिक जिला खगड़िया आज भी सात नदियों के बीच अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। बाढ़, विस्थापन, पिछड़ेपन और सीमित संसाधनों के बावजूद यहां के लोग अपनी मेहनत और संघर्ष से जीवन को आगे बढ़ाते हैं। लेकिन जब प्रशासन का अधिक ध्यान मंचों, उद्घाटनों और सार्वजनिक आयोजनों पर दिखाई दे और दूसरी ओर आम नागरिक सुरक्षा के लिए तरसते रहें, तब सवाल उठना स्वाभाविक है।

खगड़िया के चौथम थाना क्षेत्र अंतर्गत करुआमोड़, जो दशकों से अपने प्रसिद्ध पेड़ा उद्योग के कारण पूरे बिहार में पहचान रखता है, रविवार की देर रात एक दिल दहला देने वाली घटना का गवाह बना। घर में घुसकर अपराधियों ने एक ही परिवार के चार लोगों पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। इस हमले में गंभीर रूप से घायल रचना कुमारी की अस्पताल ले जाने के दौरान मौत हो गई, जबकि परिवार के अन्य सदस्य जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं।

करुआमोड़ केवल एक बाजार नहीं, बल्कि सहरसा, मधेपुरा और सीमांचल जाने वाले लाखों यात्रियों की पहचान है। यहां के पेड़े की मिठास वर्षों से बिहार की संस्कृति का हिस्सा रही है। लेकिन अब उसी इलाके में घरों के भीतर घुसकर लोगों पर जानलेवा हमले होने लगे हैं, जो कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

खगड़िया में हाल के दिनों में आपसी विवाद, क्षेत्रीय संघर्ष और आपराधिक घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में आम लोगों का सवाल है कि यदि अपराधी घर में घुसकर परिवारों को निशाना बनाएंगे, तो नागरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?

रचना कुमारी की मौत केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि उस व्यवस्था के लिए चेतावनी है जिसे यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी नागरिक अपने ही घर में असुरक्षित महसूस न करे। घटना की निष्पक्ष जांच, दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना प्रशासन की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए।

खगड़िया की जनता को कार्यक्रमों की चमक से अधिक कानून का राज चाहिए, क्योंकि विकास का पहला आधार सुरक्षा होती है।

#खगड़िया #करुआमोड़ #बिहार_समाचार #न्याय_दो #कानून_व्यवस्था #रचना_कुमारी

01/06/2026

आप अपनी राय दिजिए.... क्या ऐसे शिक्षा मिलती है बिहार में और जमीन के कारोबार का पर्दाफाश

एक साल से निवेदन, फिर 15 दिन की मोहलत... आखिर सरकारी बंगले पर इतना राजनीतिक ड्रामा क्यों?"(पूर्व सैनिक सह पत्रकार संतोष ...
01/06/2026

एक साल से निवेदन, फिर 15 दिन की मोहलत... आखिर सरकारी बंगले पर इतना राजनीतिक ड्रामा क्यों?"

(पूर्व सैनिक सह पत्रकार संतोष राय)

बिहार सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री आवास खाली करने के लिए कोई रातों-रात कार्रवाई नहीं की। यह मामला कोई अचानक पैदा नहीं हुआ। एक वर्ष से अधिक समय पहले नोटिस और अल्टीमेटम दिया जा चुका था। सरकार चाहती तो प्रशासनिक शक्ति का प्रयोग कर तत्काल आवास खाली करा सकती थी, जैसा देश के अन्य राज्यों में कई बार देखा गया है।

दिल्ली के 10 जनपथ में जब सरकारी नियम लागू हुए तो चिराग पासवान का सामान भी बाहर कर दिया गया था। वहां किसी ने लोकतंत्र खतरे में होने का शोर नहीं मचाया। बिहार सरकार ने इसके विपरीत संयम दिखाया और 15 दिनों की अतिरिक्त मोहलत दे दी।

सवाल यह है कि जब सरकार ने समय दे दिया तो फिर सड़क पर उतरकर माहौल बनाने की जरूरत क्या थी? अगर मामला कानूनी है तो उसका जवाब कानून और दस्तावेजों से दिया जाना चाहिए, भीड़ और नारेबाजी से नहीं।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस के कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से सलाह दी कि सरकारी आवास खाली कर देना चाहिए। फिर उसी मंच पर अब्दुल बारी सिद्दीकी को बैठाकर आखिर कौन-सा संदेश दिया जा रहा है? क्या यह कानून के पालन का समर्थन है या राजनीतिक सहानुभूति जुटाने का प्रयास?

राजद के वरिष्ठ नेता मंगनी लाल मंडल भी इस मुद्दे को लेकर सक्रिय हैं। बिहार बेरोजगारी, पलायन, शिक्षा, स्वास्थ्य और किसानों की समस्याओं से जूझ रहा है, लेकिन ऐसा लगता है कि कुछ नेताओं के लिए सबसे बड़ा मुद्दा सरकारी बंगला ही रह गया है।

सरकारी आवास किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं होता। पद जाता है तो सुविधाएं भी जाती हैं। यही व्यवस्था है, यही नियम है। नियम सबके लिए समान होना चाहिए, चाहे वह सामान्य नागरिक हो या पूर्व मुख्यमंत्री।

रितु जायसवाल को गाली क्यों? क्या पार्टी बदलना अपराध है?(पूर्व सैनिक सह पत्रकार संतोष राय)बिहार की चर्चित समाजसेवी Ritu J...
01/06/2026

रितु जायसवाल को गाली क्यों? क्या पार्टी बदलना अपराध है?

(पूर्व सैनिक सह पत्रकार संतोष राय)

बिहार की चर्चित समाजसेवी Ritu Jaiswal आज सोशल मीडिया पर गालियों का निशाना बनी हुई हैं। सवाल है कि आखिर उनका गुनाह क्या है?

क्या उन्होंने कोई घोटाला किया? कोई अपराध किया? या फिर उनका सबसे बड़ा अपराध सिर्फ इतना है कि उन्होंने राजनीतिक दल बदल लिया और भाजपा में शामिल हो गईं?

भारतीय राजनीति में दल बदलना कोई नई घटना नहीं है। सांसद, विधायक, मंत्री और बड़े-बड़े नेता अपने राजनीतिक भविष्य के अनुसार दल बदलते रहे हैं। राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीति में ऐसे उदाहरणों की लंबी सूची है। बिहार की राजनीति में भी कई नेताओं ने समय-समय पर अलग-अलग दलों का दामन थामा है।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि रितु जायसवाल को कभी Tejashwi Yadav के साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों में देखा गया, यहां तक कि राखी बांधने की तस्वीरें भी चर्चा में रही हैं। उस समय वे सम्मानित थीं। लेकिन आज राजनीतिक रास्ता बदलते ही वही लोग उन्हें अपशब्दों से नवाज रहे हैं।

लोकतंत्र में मतभेद होना स्वाभाविक है। किसी के फैसले की आलोचना कीजिए, राजनीतिक बहस कीजिए, लेकिन गाली-गलौज किस बात की?

राजनीति में यह दोहरा मापदंड क्यों? जब कोई नेता अपनी सुविधा के अनुसार पार्टी बदले तो वह रणनीति कहलाती है, लेकिन जब कोई महिला ऐसा करे तो उसके खिलाफ अपमानजनक अभियान चलाया जाए?

बिहार की जनता यह भी जानती है कि राजनीति में रिश्ते और समीकरण समय के साथ बदलते रहते हैं। इसलिए किसी के दल बदलने को लेकर असहमति हो सकती है, लेकिन व्यक्तिगत अपमान लोकतांत्रिक संस्कृति को मजबूत नहीं करता।

आज आवश्यकता इस बात की है कि राजनीतिक कार्यकर्ता और समर्थक तर्क से जवाब दें, गाली से नहीं। किसी भी बड़े नेता की पहचान उसके समर्थकों की भाषा और व्यवहार से भी होती है।

रितु जायसवाल के निर्णय से सहमत या असहमत हुआ जा सकता है, लेकिन एक महिला समाजसेवी के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किसी भी राजनीतिक संस्कृति के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जा सकता।

राजनीति में विरोध कीजिए, लेकिन सम्मान की मर्यादा बनाए रखिए। लोकतंत्र बहस से चलता है, गाली से नहीं।

खगड़िया में पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल: गरीब महिला ने डीआईजी से लगाई न्याय की गुहार(पूर्व सैनिक सह पत्रकार संतोष राय)खगड़...
01/06/2026

खगड़िया में पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल: गरीब महिला ने डीआईजी से लगाई न्याय की गुहार

(पूर्व सैनिक सह पत्रकार संतोष राय)

खगड़िया जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बेलदौर थाना क्षेत्र की एक गरीब महिला ने पुलिस पर मारपीट और दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) को लिखित आवेदन देकर न्याय की मांग की है।

महिला का आरोप है कि वह अपने घर पर मौजूद थी, तभी पुलिस पहुंची और बिना पर्याप्त कारण बताए उसके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि उसे शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया, जिससे वह मानसिक और शारीरिक रूप से आहत हुई। महिला ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।

आवेदन की प्रति से स्पष्ट है कि पीड़िता ने विधिवत शिकायत दर्ज कराई है और मामले को उच्च पुलिस अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया है। अब यह जिम्मेदारी प्रशासन की है कि वह शिकायत की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई को सामने लाए।

भारत का संविधान हर नागरिक को सम्मान और न्याय का अधिकार देता है। यदि किसी व्यक्ति पर अपराध का संदेह भी हो, तब भी कानून पुलिस को मनमानी या अत्याचार की अनुमति नहीं देता। विशेष रूप से महिलाओं से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।

यह मामला केवल एक महिला का नहीं, बल्कि उस विश्वास का भी है जो आम जनता पुलिस और प्रशासन पर करती है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में किसी गरीब, कमजोर या असहाय नागरिक को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े। वहीं यदि जांच में आरोप गलत सिद्ध होते हैं, तो तथ्य भी जनता के सामने आने चाहिए।

मांगें:

1. डीआईजी स्तर से निष्पक्ष जांच कराई जाए।

2. महिला का चिकित्सीय परीक्षण और बयान दर्ज किया जाए।

3. जांच पूरी होने तक संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की समीक्षा की जाए।

4. जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

न्याय व्यवस्था की असली ताकत इसी में है कि गरीब की आवाज भी उतनी ही गंभीरता से सुनी जाए जितनी किसी प्रभावशाली व्यक्ति की। अब निगाहें प्रशासन पर हैं कि वह इस शिकायत को कितनी संवेदनशीलता और निष्पक्षता से देखता है।

दाखिल-खारिज के नाम पर घूसखोरी! पूर्णिया में राजस्व कर्मचारी ₹10 हजार रिश्वत लेते गिरफ्तारनिगरानी विभाग की कार्रवाई से मच...
01/06/2026

दाखिल-खारिज के नाम पर घूसखोरी! पूर्णिया में राजस्व कर्मचारी ₹10 हजार रिश्वत लेते गिरफ्तार

निगरानी विभाग की कार्रवाई से मचा हड़कंप, जमीन संबंधी कार्यों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर फिर उठे सवाल

आलेख:

बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला जारी है। पूर्णिया जिले के नगर प्रखंड में निगरानी विभाग की टीम ने राजस्व कर्मचारी रूपक कुमार को ₹10,000 रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि जमीन के दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पूरी करने के एवज में आवेदक से घूस की मांग की गई थी।

शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने मामले का सत्यापन कराया। आरोप सही पाए जाने पर जाल बिछाया गया और राजस्व कर्मचारी को रिश्वत की रकम लेते हुए धर दबोचा गया। गिरफ्तारी के बाद उसे पूछताछ के लिए अपने साथ ले जाया गया।

राजस्व विभाग लंबे समय से भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर चर्चा में रहा है। जमीन की मापी, दाखिल-खारिज, लगान रसीद और अन्य राजस्व संबंधी कार्यों में आम लोगों को अक्सर दलालों और रिश्वतखोरी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यह कार्रवाई एक बार फिर विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है।

सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात करती है, लेकिन लगातार हो रही गिरफ्तारियां यह संकेत देती हैं कि जमीनी स्तर पर अभी भी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की बड़ी चुनौती मौजूद है।

#भ्रष्टाचार #निगरानी_विभाग #पूर्णिया #बिहार_न्यूज #दाखिल_खारिज #घूसखोरी #संतोष_राय

बिहार की प्रतिभा का धमाल, बिहार के लाल ने किया कमाल!(पूर्व सैनिक सह पत्रकार संतोष राय)बिहार की धरती ने एक बार फिर देश को...
01/06/2026

बिहार की प्रतिभा का धमाल, बिहार के लाल ने किया कमाल!

(पूर्व सैनिक सह पत्रकार संतोष राय)
बिहार की धरती ने एक बार फिर देश को अपना लोहा मनवाया है। गया जिले से जुड़ी पृष्ठभूमि रखने वाले प्रतिभाशाली छात्र शुभम कुमार ने देश की सबसे कठिन इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में इतिहास रच दिया है।

📚 JEE Main 2026 में शुभम कुमार ने 295/300 अंक प्राप्त कर 100 परसेंटाइल हासिल किया और ऑल इंडिया रैंक 6 (AIR 6) प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने अपनी प्रतिभा का और बड़ा परिचय देते हुए JEE Advanced 2026 में 360 में से 330 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक 1 (AIR 1) प्राप्त की और पूरे देश में प्रथम स्थान हासिल किया।

परीक्षा परिणाम

परीक्षा स्कोर / परसेंटाइल प्राप्त रैंक

JEE Main 2026 100 परसेंटाइल (295/300 अंक) AIR 6
JEE Advanced 2026 330/360 अंक AIR 1

सफलता की कहानी

शुभम कुमार का परिवार साधारण पृष्ठभूमि से आता है। उनके पिता हार्डवेयर व्यवसाय से जुड़े हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद शुभम ने अपनी मेहनत, अनुशासन और निरंतर अभ्यास के दम पर यह मुकाम हासिल किया। उन्होंने राजस्थान के कोटा स्थित Allen Career Institute में रहकर अपनी तैयारी पूरी की।

भविष्य का लक्ष्य

देश में प्रथम स्थान प्राप्त करने के बाद शुभम की इच्छा है कि वे Indian Institute of Technology Bombay से कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग (CSE) में बी.टेक करें और तकनीक के क्षेत्र में भारत का नाम और ऊंचा करें।

बिहार के इस होनहार बेटे ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या अमीर परिवार की मोहताज नहीं होती। मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के बल पर कोई भी छात्र देश की सबसे बड़ी परीक्षा में शीर्ष स्थान हासिल कर सकता है।

बिहार के लाल शुभम कुमार को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ। 🇮🇳🎓🌹

बलिया में सुशासन या माफियाराज ? विदा हुआ दुराचारी रिश्वतखोर (पूर्व सैनिक सह पत्रकार संतोष राय)बिहार विधानसभा चुनाव से पू...
01/06/2026

बलिया में सुशासन या माफियाराज ? विदा हुआ दुराचारी रिश्वतखोर

(पूर्व सैनिक सह पत्रकार संतोष राय)
बिहार विधानसभा चुनाव से पूर्व , पूर्व विधायक डॉ. संजीव कुमार और भूमाफियाओं के गठजोड़ से विकास कुमार राय को बलिया थाना लाया गया। चूंकि बलिया की जनता जानती है कि भ्रष्टाचार और सांठगांठ की राजनीति किस तरह काम करती है, इसलिए शुरू से ही सवाल उठते रहे।

चर्चा रही कि पूर्व विधायक से बीस लाख मिले, लेकिन विकास कुमार राय की भूख करोड़ों की थी। जानीपुर का वेश्याघर फिर से खुला, बलिया का माहौल 80-90 के दशक की ओर लौटता दिखाई दिया। अपराधियों के हौसले बुलंद हुए, बस स्टैंड के नाम पर वसूली का खेल शुरू हुआ, भूमाफियाओं और शराब माफियाओं पर कमीशन तय हुआ। पूरा तंत्र किसी बांगड़ बिल्ले की सरपरस्ती में चलता हुआ नजर आया।

दुर्भाग्य यह रहा कि मैं लगातार आवाज उठाता रहा। मुझे जेल भेजा गया, लेकिन जेल के भीतर से भी मैं विभाग से लेकर मंत्रालय तक संपर्क करता रहा। इसके बावजूद बलिया के अधिकांश सामाजिक कार्यकर्ता मौन साधे रहे। मंचों पर इंकलाब जिंदाबाद के नारे गूंजते रहे, लेकिन जमीन पर कोई संघर्ष दिखाई नहीं दिया।

नतीजा यह हुआ कि करोड़ों की कमाई कर यह व्यवस्था बलिया से विदा हो गई। अब बलिया थाना में नए अधिकारी आए हैं। जनता की नजर उन पर है। देखना यह है कि पुराने कारोबार की गाड़ी फिर उसी पटरी पर दौड़ती है या बलिया में सचमुच कानून का राज और सुशासन स्थापित होता है।

बलिया अब तमाशा नहीं देखेगा। जनता सब जानती है, सब समझती है और समय आने पर हिसाब भी करती है।

सचिन ने रास्ता बनाया था, वैभव उस पर बुलेट ट्रेन दौड़ा रहा है!(पूर्व सैनिक सह पत्रकार संतोष राय)क्रिकेट के इतिहास में ऐसा...
01/06/2026

सचिन ने रास्ता बनाया था, वैभव उस पर बुलेट ट्रेन दौड़ा रहा है!

(पूर्व सैनिक सह पत्रकार संतोष राय)

क्रिकेट के इतिहास में ऐसा बहुत कम हुआ है कि 15 साल का कोई लड़का मैदान पर उतरे और विपक्षी कप्तानों की नींद उड़ा दे। लेकिन आज जिस अंदाज में वैभव सूर्यवंशी बल्लेबाजी कर रहे हैं, उसे देखकर लगता है कि यह लड़का सिर्फ क्रिकेट नहीं खेल रहा, बल्कि पूरे टूर्नामेंट को हाइजैक कर चुका है।

एक दौर था जब दुनिया के क्रिकेट पर Wasim Akram और Waqar Younis का खौफ था। उनकी रफ्तार, स्विंग और यॉर्कर के सामने बड़े-बड़े बल्लेबाज घुटने टेक देते थे। उसी दौर में एक किशोर लड़के ने दुनिया को बताया कि डर नाम की भी कोई चीज नहीं होती। वह लड़का था Sachin Tendulkar।

बाद में दुनिया ने ऑस्ट्रेलिया के महान तेज गेंदबाज Glenn McGrath का दौर भी देखा, जिनकी लाइन-लेंथ के सामने बल्लेबाज गलती करने को मजबूर हो जाते थे। सचिन ने उस चुनौती को भी स्वीकार किया और अपनी महानता साबित की।

मुझे आज भी वह समय याद है जब क्रिकेट प्रेमी Shoaib Akhtar और सचिन के बीच मुकाबले का इंतजार करते थे। 1999 में Eden Gardens में पहली टक्कर में शोएब अख्तर ने सचिन को बोल्ड कर दिया था। लेकिन महान खिलाड़ी हार का हिसाब रखते हैं। 2003 विश्व कप में सचिन ने उसी शोएब अख्तर की रफ्तार को सीमा रेखा के बाहर भेजकर दुनिया को जवाब दे दिया।

लेकिन वैभव सूर्यवंशी का तेवर कुछ अलग दिखाई देता है।

ऐसा लगता है जैसे यह लड़का हर गेंदबाज को एक ही संदेश देकर मैदान में उतरता है—"तुम्हारा नाम बड़ा हो सकता है, लेकिन गेंद मुझे ही खेलनी है।"

इसकी सबसे डरावनी बात रन नहीं है। सबसे डरावनी बात है इसका आत्मविश्वास। जिस निरंतरता के साथ यह बड़े-बड़े गेंदबाजों की योजना, लाइन-लेंथ और रणनीति को ध्वस्त कर रहा है, वह असाधारण है।

चाहे नई गेंद हो या पुरानी। पावरप्ले हो या डेथ ओवर। स्पिनर हो या तेज गेंदबाज। इसका गियर सिर्फ एक जगह अटका हुआ दिखता है—अटैक।

क्रिकेट ने कई महान बल्लेबाज देखे हैं। लेकिन 15 साल की उम्र में इस स्तर का आत्मविश्वास और निडरता बहुत कम देखने को मिली है। कई दिग्गजों का शुरुआती करियर उठाकर देख लीजिए, इतनी बेखौफ बल्लेबाजी दुर्लभ है।

और यही कारण है कि वैभव को देखकर मुझे क्रिकेट के अमर पुरुष Don Bradman की याद आती है। तुलना आँकड़ों की नहीं है, तुलना उस मानसिकता की है जिसमें खिलाड़ी सामने वाले के नाम से नहीं, सिर्फ खेल से प्रभावित होता है।

बस भगवान से एक ही प्रार्थना है—इस बच्चे को किसी की नजर न लगे। चोटों से दूर रहे। मेहनत और अनुशासन बनाए रखे।

क्योंकि अगर यह ऐसे ही आगे बढ़ता रहा, तो क्रिकेट की रिकॉर्ड बुक में एक नया अध्याय लिखा जाएगा।

सचिन ने रास्ता बनाया था।

वैभव सूर्यवंशी उस रास्ते पर बुलेट ट्रेन दौड़ाने की तैयारी में दिख रहे हैं।

आपकी राय क्या है?

क्या वैभव सूर्यवंशी 15 साल की उम्र में उतने ही विस्फोटक दिखाई दे रहे हैं जितने कभी सचिन दिखाई दिए थे, या अभी ऐसी तुलना करना जल्दबाज़ी होगी?

बेगूसराय को मिलेगा मंत्रिमंडल में बड़ा प्रतिनिधित्व? सियासी गलियारों में बढ़ी हलचल(पूर्व सैनिक सह पत्रकार संतोष राय)बिहा...
01/06/2026

बेगूसराय को मिलेगा मंत्रिमंडल में बड़ा प्रतिनिधित्व? सियासी गलियारों में बढ़ी हलचल

(पूर्व सैनिक सह पत्रकार संतोष राय)
बिहार की राजनीति में इन दिनों मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। पटना के राजनीतिक गलियारों से लेकर जिला मुख्यालयों तक एक ही सवाल तैर रहा है कि आखिर मुख्यमंत्री की टीम में इस बार किन नए चेहरों को जगह मिलेगी और किन क्षेत्रों को राजनीतिक संतुलन के तहत प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।

त्रिस्तरीय पंचायती राज चुनाव से पहले संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को कई राजनीतिक जानकार जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं। ऐसे में बेगूसराय का नाम भी प्रमुखता से चर्चा में आ गया है। जिले के राजनीतिक कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या इस बार बेगूसराय को मंत्रिमंडल में अतिरिक्त प्रतिनिधित्व मिलेगा?

चर्चाओं के केंद्र में दो प्रमुख नाम बताए जा रहे हैं। पहला नाम तेघड़ा विधानसभा से विधायक रजनीश कुमार का है, जबकि दूसरा नाम बछवाड़ा विधानसभा से पूर्व मंत्री सुरेंद्र मेहता का लिया जा रहा है। दोनों नेताओं का अपना राजनीतिक अनुभव, संगठन में पकड़ और समर्थकों का मजबूत आधार माना जाता है।

राजनीतिक सूत्रों की मानें तो इस बार मंत्रिमंडल विस्तार में क्षेत्रीय संतुलन पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है। बेगूसराय को लेकर भी कई तरह की संभावनाएं व्यक्त की जा रही हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर अब तक किसी नाम की पुष्टि नहीं हुई है और अंतिम निर्णय शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर ही होना है।

दिलचस्प बात यह है कि पिछली बार बेगूसराय को जो प्रतिनिधित्व मिला था, उसमें बाद में बदलाव भी देखने को मिला। ऐसे में जिले के लोगों की नजरें एक बार फिर पटना पर टिकी हुई हैं। क्या बेगूसराय का राजनीतिक कद बढ़ेगा? क्या जिले को एक से अधिक मंत्री पद का प्रतिनिधित्व मिलेगा? या फिर सारा गणित अंतिम समय में बदल जाएगा?

फिलहाल सस्पेंस बरकरार है। राजनीतिक हलकों में चर्चाएं हैं, समर्थकों के अपने-अपने दावे हैं, लेकिन असली तस्वीर मंत्रिमंडल विस्तार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही साफ होगी।

बेगूसराय से आपकी पसंद कौन है? तेघड़ा के रजनीश कुमार या बछवाड़ा के सुरेंद्र मेहता, अथवा कोई तीसरा चेहरा? राजनीति में कई बार जो नाम सबसे कम चर्चा में होता है, वही अंतिम सूची में सबसे ऊपर निकल आता है। इसलिए इंतजार कीजिए, बिहार की राजनीति में अगले कुछ दिन काफी दिलचस्प रहने वाले हैं।

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