01/06/2026
खगड़िया में प्रशासनिक चमक-दमक के बीच खून से लाल हुई रात, एक परिवार पर टूटा कहर
(पूर्व सैनिक सह पत्रकार संतोष राय)
उत्तर, पूर्व और मध्य बिहार को जोड़ने वाला ऐतिहासिक जिला खगड़िया आज भी सात नदियों के बीच अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। बाढ़, विस्थापन, पिछड़ेपन और सीमित संसाधनों के बावजूद यहां के लोग अपनी मेहनत और संघर्ष से जीवन को आगे बढ़ाते हैं। लेकिन जब प्रशासन का अधिक ध्यान मंचों, उद्घाटनों और सार्वजनिक आयोजनों पर दिखाई दे और दूसरी ओर आम नागरिक सुरक्षा के लिए तरसते रहें, तब सवाल उठना स्वाभाविक है।
खगड़िया के चौथम थाना क्षेत्र अंतर्गत करुआमोड़, जो दशकों से अपने प्रसिद्ध पेड़ा उद्योग के कारण पूरे बिहार में पहचान रखता है, रविवार की देर रात एक दिल दहला देने वाली घटना का गवाह बना। घर में घुसकर अपराधियों ने एक ही परिवार के चार लोगों पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। इस हमले में गंभीर रूप से घायल रचना कुमारी की अस्पताल ले जाने के दौरान मौत हो गई, जबकि परिवार के अन्य सदस्य जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं।
करुआमोड़ केवल एक बाजार नहीं, बल्कि सहरसा, मधेपुरा और सीमांचल जाने वाले लाखों यात्रियों की पहचान है। यहां के पेड़े की मिठास वर्षों से बिहार की संस्कृति का हिस्सा रही है। लेकिन अब उसी इलाके में घरों के भीतर घुसकर लोगों पर जानलेवा हमले होने लगे हैं, जो कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
खगड़िया में हाल के दिनों में आपसी विवाद, क्षेत्रीय संघर्ष और आपराधिक घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में आम लोगों का सवाल है कि यदि अपराधी घर में घुसकर परिवारों को निशाना बनाएंगे, तो नागरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?
रचना कुमारी की मौत केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि उस व्यवस्था के लिए चेतावनी है जिसे यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी नागरिक अपने ही घर में असुरक्षित महसूस न करे। घटना की निष्पक्ष जांच, दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना प्रशासन की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए।
खगड़िया की जनता को कार्यक्रमों की चमक से अधिक कानून का राज चाहिए, क्योंकि विकास का पहला आधार सुरक्षा होती है।
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