31/08/2026
॥ अनुरोध सह आध्यात्मिक सूचना॥
हम सभी शिव शिष्यों को विदित हो कि जब-जब युग का अवसान होता है, तब-तब धरा पर शिव के शिष्य का आविर्भाव होता है।
कलियुग में नवयुग अर्थात् शिवयुग के सृजनकर्ता, युगपुरुष, परम आदरणीय साहब श्री हरीन्द्रानंद जी का अवतरण विश्वगुरु भारत की पावन धरा पर 31 अक्टूबर 1948 को हुआ।
साहब श्री की सम्पूर्ण जीवन यात्रा एक ही महासंकल्प के लिए समर्पित रही कि
"जन-जन के हृदय में शिव को गुरु के रूप में स्थापित करना, ताकि सम्पूर्ण विश्व मानवता का हृदय शिव-प्रकाश से आलोकित हो उठे।"
हम सभी गुरुभाई-गुरुबहन उनके इस आध्यात्मिक संकल्प के साक्षी और सह-यात्री हैं।
यह शाश्वत सत्य है कि स्वयं भगवान शिव भी लीला हेतु शरीर धारण करते हैं और समय आने पर उसका परित्याग करते हैं। धरा धाम से उनका प्रस्थान ही "शिवलीन"होना है।
हमारे साहब श्री का 04 सितंबर 2022 को शिवलीन होना हम सभी के हृदय में गहरा शून्य और असीम वेदना दे गया। परन्तु साहब श्री का ही दिया हुआ महामंत्र हमें संबल देता है -"साधु कभी मरते नहीं, वे अपने लोगों के संकल्प में जीवित रहते हैं।"
साहब श्री की आत्मिक चाहत थी, है और अनंत तक रहेगी कि जन-जन का हृदय "शिव मेरे गुरु हैं" के आध्यात्मिक नाद से गूंजायमान हो। साहब-दीदी के साथ हम सभी इसके साक्षी बनें।
इसी हेतु हमारे आराध्य गुरुभ्राता साहब श्री की शिवलीन तिथि *04 सितंबर* को हम सभी गुरुभाई-गुरुबहन *"संकल्प दिवस"* के रूप में मनाते हैं और मनाते रहेंगे।
इस तिथि को हम सभी अपने-अपने गृह स्थान पर ही रहकर, अपने कार्यक्षेत्र में ही रहकर महागुरु महादेव एवं साहब-दीदी से सम्पूर्ण मानवता के अभ्युदय हेतु प्रार्थना करेंगे, ताकि हमारे भीतर का आध्यात्मिक संकल्प और अधिक दृढ़ हो।
इस दिन हम सभी यह आत्म-संकल्प लें:
आज के दिन कम से कम “एक नए व्यक्ति को”अपने गुरु, भगवान शिव से जोड़ेंगे।सामर्थ्य अनुसार “असहाय की सहायता”करेंगे।
“भूखे को भोजन”कराएँगे।“अनाथ बच्चों के चेहरे पर मुस्कान”लाने का प्रयास करेंगे।
“जल, जंगल, जमीन के संरक्षण”तथा बेजुबान प्राणियों और जन-सेवा का संकल्प लेंगे।
यही महागुरु महादेव और साहब-दीदी के श्रीचरणों में हमारी सच्ची कृतज्ञता होगी।
आप सभी से करबद्ध प्रार्थना है कि इस तिथि को किसी भी सभागार या मैदान में भीड़ वाले आयोजन से परहेज रखें।
मुख्यालय "उपवन, राँची"भी खुले में कोई सार्वजनिक आयोजन नहीं कर रहा है। अतः आप सभी से निवेदन है कि उक्त तिथि को उपवन, राँची की यात्रा से परहेज करें और अपने ही गृह/कार्यक्षेत्र में रहकर साहब श्री के उद्देश्य को अपनी ऊर्जा प्रदान करें।
पूर्व वर्षों की भाँति उपवन में उपस्थित रहने वाले गुरुभाई-बहनों द्वारा पुष्पांजलि अर्पित की जा सकेगी।
महागुरु महादेव की असीम दया और साहब-दीदी के आशीर्वाद की मंगलकामना के साथ।
शिव शिष्य अर्चित आनंद
आप्त सचिव,
(साहब श्री हरीन्द्रानंद).
उपवन मुख्यालय, राँची, झारखंड
#मनमेंमहादेव