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खबर प्रतापगढ़ :बारिश में भरभराकर गिरा गरीब परिवार का कच्चा मकान,जतिन कुमार चतुर्वेदी बाल-बाल बचा परिवार; खुले आसमान के नी...
16/08/2026

खबर प्रतापगढ़ :बारिश में भरभराकर गिरा गरीब परिवार का कच्चा मकान,

जतिन कुमार चतुर्वेदी

बाल-बाल बचा परिवार; खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर,

हीरागंज बाजार। लगातार हो रही बारिश के बीच रविवार सुबह करीब 5 बजे एक गरीब परिवार का कच्चा मकान भरभराकर धराशायी हो गया। गनीमत रही कि परिवार के सभी सदस्य मकान के ठीक बगल में सो रहे थे, जिससे बड़ा हादसा होने से टल गया। हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

बताया जा रहा है कि संगीता देवी और विनोद विश्वकर्मा, वार्ड नंबर 5, माधव नगर, पंचायत हीरागंज बाजार के रहने वाले हैं। करीब 10 दिन पहले ही उनके कच्चे मकान का कुछ हिस्सा गिर गया था। इसके बाद भी परिवार किसी तरह उसी के आसपास रहने को मजबूर था। रविवार सुबह हुई बारिश ने मकान का बचा हुआ हिस्सा भी गिरा दिया।

मकान पूरी तरह गिर जाने के बाद परिवार के सामने अब सबसे बड़ी समस्या सिर छिपाने की है। पीड़ित परिवार पन्नी डालकर खुले में रहने को मजबूर है। आरोप है कि घटना के बाद अभी तक प्रशासन की ओर से कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर परिवार का हाल जानने तक नहीं आया। न तो तत्काल आर्थिक सहायता मिली और न ही रहने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई।
ग्रामीणों का कहना है कि जब पंचायत और प्रशासन के पास गरीब परिवारों के लिए आवास एवं आपदा राहत जैसी व्यवस्थाएं हैं, तो ऐसे जरूरतमंद परिवार को मदद के लिए आखिर कब तक इंतजार करना पड़ेगा? बारिश के इस मौसम में खुले आसमान के नीचे बच्चों और परिवार के साथ रात गुजारना किसी बड़ी मुसीबत से कम नहीं है।
प्रतापगढ़ में कुछ दिन पहले हुई दर्दनाक घटना में एक ही परिवार के छह लोगों की मौत ने प्रशासनिक तैयारियों और जर्जर मकानों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे। ऐसे में इस घटना के बाद प्रशासन की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय समय रहते पीड़ित परिवार की सुध ली जाए।
अब देखना यह है कि इस खबर के सामने आने के बाद प्रशासन कब तक हरकत में आता है और बेघर हुए इस गरीब परिवार को आवास, आर्थिक सहायता तथा सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाता है।

खबर लखनऊ :उत्तर प्रदेश से चयनित डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’ को ‘लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड-2026’ से सम्मानित किया गय...
16/08/2026

खबर लखनऊ :उत्तर प्रदेश से चयनित डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’ को ‘लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड-2026’ से सम्मानित किया गया

जतिन कुमार चतुर्वेदी

लखनऊ, उत्तर प्रदेश। प्रख्यात कवि, लेखक, साहित्यकार, समाजसेवी एवं भारतीय सेना के सेवानिवृत्त अधिकारी डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’ (विद्यावाचस्पति, विद्यासागर) को एसएचएमवी फाउंडेशन, हैदराबाद द्वारा प्रतिष्ठित ‘लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड-2026’ से सम्मानित किया गया है। फाउंडेशन की चयन समिति ने उत्तर प्रदेश से डॉ. मिश्र को इस सम्मान के लिए सर्वश्रेष्ठ व्यक्तित्व के रूप में चयनित किया।
डॉ. कर्नल मिश्र को यह सम्मान भारतीय सेना में उनकी उत्कृष्ट राष्ट्रसेवा, हिन्दी भाषा के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार, निरंतर साहित्य सृजन तथा समाज सेवा के क्षेत्र में उनके दीर्घकालीन, उल्लेखनीय एवं प्रेरणादायी योगदान के लिए प्रदान किया गया है।

डॉ. गुंडाल विजय कुमार ने दी बधाई,
एसएचएमवी फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. गुंडाल विजय कुमार ने डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’ को बधाई देते हुए कहा, “डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’ ने भारतीय सेना में रहते हुए राष्ट्र की सेवा की और सेवानिवृत्ति के बाद भी हिन्दी भाषा, साहित्य एवं समाज सेवा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में निरंतर योगदान दिया है। उनका जीवन देश सेवा, साहित्य साधना और सामाजिक दायित्व के प्रति समर्पण का प्रेरणादायी उदाहरण है।”
उन्होंने कहा कि डॉ. मिश्र के दीर्घकालीन योगदान एवं उपलब्धियों को ध्यान में रखते हुए फाउंडेशन की चयन समिति ने उन्हें उत्तर प्रदेश से सर्वश्रेष्ठ व्यक्तित्व के रूप में चयनित कर ‘लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड-2026’ से सम्मानित करने का निर्णय लिया। उन्होंने डॉ. मिश्र के स्वस्थ, सक्रिय एवं यशस्वी जीवन की कामना भी की।
साहित्य एवं समाज सेवा में उल्लेखनीय योगदान,,
डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’ को इससे पूर्व भी तीन मानद डॉक्टरेट उपाधियों सहित काशी हिन्दी विद्यापीठ द्वारा भारत गौरव मानद सम्मान, विद्यावाचस्पति, विद्यासागर, साहित्य रत्न एवं साहित्य शिरोमणि जैसी प्रतिष्ठित मानद उपाधियों से सम्मानित किया जा चुका है। साहित्य एवं समाज सेवा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें अब तक 900 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान, प्रशस्ति-पत्र एवं प्रमाण-पत्र प्राप्त हो चुके हैं।
उनकी ‘आदित्यायन’ श्रृंखला के अंतर्गत अब तक 11 काव्य संग्रह और दो लेख संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त उनकी रचनाएँ 100 से अधिक साझा काव्य-संकलनों में प्रकाशित हुई हैं और विभिन्न समाचार-पत्रों एवं पत्रिकाओं में नियमित रूप से प्रकाशित होती रही हैं। उनके पाँच अन्य काव्य एवं लेख संग्रह प्रकाशनाधीन हैं।
डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’ का नाम ओएमजी बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है। यह उपलब्धि उनके साहित्यिक एवं सामाजिक योगदान को मिली विशिष्ट पहचान को रेखांकित करती है।
एसएचएमवी फाउंडेशन ने कहा कि डॉ. कर्नल मिश्र जैसे व्यक्तित्व नई पीढ़ी के लिए राष्ट्र सेवा, हिन्दी प्रेम, साहित्य साधना और समाज सेवा के प्रति समर्पण की प्रेरणा हैं।
— एसएचएमवी फाउंडेशन, हैदराबाद
संस्थापक: डॉ. गुंडाल विजय कुमार

खबर प्रतापगढ़ :थाने से चंद कदमों की दूरी पर हरे-भरे शीशम के पेड़ों पर चला आरा, प्रशासन और वन विभाग की भूमिका पर उठे सवालप...
15/08/2026

खबर प्रतापगढ़ :थाने से चंद कदमों की दूरी पर हरे-भरे शीशम के पेड़ों पर चला आरा, प्रशासन और वन विभाग की भूमिका पर उठे सवाल

पवन पांडे

बाघराय/प्रतापगढ़। सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर सामने आ रही है। बाघराय थाना क्षेत्र के ग्राम सभा मलावा छजईपुर में कथित तौर पर हरे-भरे शीशम के पेड़ों की कटान का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि पेड़ों को काटकर धराशायी किया जा रहा है, जबकि घटनास्थल थाना क्षेत्र से कुछ ही दूरी पर बताया जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश में हरियाली बढ़ाने और बड़े पैमाने पर पौधरोपण को लेकर लगातार जोर दे रहे हैं, तब बाघराय क्षेत्र में हरे-भरे पेड़ों की कथित कटान आखिर किसकी शह पर हो रही है?
स्थानीय लोगों के बीच इस मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या जिम्मेदार अधिकारियों और वन विभाग के कर्मचारियों को इसकी जानकारी नहीं है, या फिर शिकायतों के बावजूद मामले पर ध्यान नहीं दिया जा रहा?
यदि पेड़ों की कटान बिना आवश्यक अनुमति के हो रही है, तो यह जांच का गंभीर विषय है। स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, मौके का निरीक्षण और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि वन विभाग और प्रशासन इस मामले में कब तक संज्ञान लेते हैं और क्या मौके पर जांच कर हरे पेड़ों की कटान की वास्तविकता सामने लाते हैं।
सवाल सीधा है—जब पेड़ बचाने और लगाने की मुहिम जोर-शोर से चल रही है, तो बाघराय में हरे-भरे पेड़ों पर आरा चलने की खबर पर जिम्मेदार विभाग कब जागेगा?

प्रतापगढ़ :बरेली दौरे पर अर्पित सर्वेश, वैदिक गणित विशेषज्ञ डी.एन. मिश्रा से महत्वपूर्ण भेंट जतिन कुमार चतुर्वेदी  साहित्...
13/08/2026

प्रतापगढ़ :बरेली दौरे पर अर्पित सर्वेश, वैदिक गणित विशेषज्ञ डी.एन. मिश्रा से महत्वपूर्ण भेंट

जतिन कुमार चतुर्वेदी

साहित्य, शिक्षा और बौद्धिक विमर्श के क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुके विश्व रिकॉर्डधारी एवं सुप्रसिद्ध साहित्यकार अर्पित सर्वेश इन दिनों बरेली जनपद के दौरे पर हैं। इसी क्रम में उनकी मुलाकात बरेली जिले के सुप्रसिद्ध शिक्षक एवं वैदिक गणित के पुरोधा डी.एन. मिश्रा से हुई। दोनों के बीच हुई यह विशेष मुलाकात शिक्षा, गणितीय चिंतन और विद्यार्थियों में तार्किक क्षमता के विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित रही।

डी.एन. मिश्रा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विद्या भारती एवं प्राथमिक शिक्षक संघ से जुड़े शैक्षिक कार्यों के लिए जाने जाते हैं। वैदिक गणित के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ वे विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने तथा उनमें गणितीय एवं तार्किक क्षमता विकसित करने के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। वे ‘प्रतियोगिता गणित’ तथा ‘प्रतियोगिता तर्कशक्ति’ जैसी पुस्तकों के लेखक हैं।
मुलाकात के दौरान अर्पित सर्वेश और डी.एन. मिश्रा ने इस बात पर विस्तार से विचार-विमर्श किया कि विद्यार्थियों के बीच गणित को केवल एक विषय के रूप में नहीं, बल्कि तार्किक सोच, समस्या-समाधान क्षमता और बौद्धिक विकास के प्रभावी माध्यम के रूप में कैसे प्रस्तुत किया जा सकता है। वैदिक गणित की पारंपरिक विधियों और आधुनिक शिक्षा पद्धतियों के बीच बेहतर समन्वय को लेकर भी दोनों के बीच सार्थक संवाद हुआ।
इस अवसर पर अर्पित सर्वेश ने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा में गणित और तर्कशास्त्र की अत्यंत समृद्ध विरासत रही है। आवश्यकता इस बात की है कि इस विरासत को आधुनिक शिक्षा और नई पीढ़ी की आवश्यकताओं से जोड़ा जाए। उन्होंने विद्यार्थियों में गणित के प्रति रुचि पैदा करने तथा रचनात्मक एवं तार्किक चिंतन को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

अर्पित सर्वेश ने डी.एन. मिश्रा के शैक्षिक योगदान की सराहना करते हुए कहा, “मिश्रा जी के ज्ञान, अनुभव और मार्गदर्शन से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को लाभ मिल रहा है। बरेली जनपद के लिए यह गौरव की बात है कि यहां डी.एन. मिश्रा जैसे समर्पित शिक्षक और वैदिक गणित के जानकार मौजूद हैं। उनके साथ बिताया प्रत्येक पल मेरे लिए स्मरणीय है और मैं इस मुलाकात को अपने जीवन के अच्छे पलों में शामिल करता हूं।”
उन्होंने कहा कि किसी शिक्षक का वास्तविक योगदान केवल पुस्तकों या कक्षाओं तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह विद्यार्थियों के सोचने, समझने और आगे बढ़ने की दिशा को प्रभावित करता है। ऐसे शिक्षकों का अनुभव और मार्गदर्शन आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण धरोहर है।

वहीं, डी.एन. मिश्रा ने अर्पित सर्वेश के साहित्यिक एवं बौद्धिक कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि युवा पीढ़ी को शिक्षा, साहित्य और भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ना वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि साहित्य और शिक्षा के बीच संवाद समाज में सकारात्मक वैचारिक वातावरण तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
बरेली दौरे के दौरान हुई यह मुलाकात साहित्य, शिक्षा और भारतीय ज्ञान परंपरा के सुंदर संगम के रूप में सामने आई। दोनों के बीच हुआ संवाद इस विचार को मजबूत करता है कि जब साहित्यिक दृष्टि, शिक्षक का अनुभव और भारतीय ज्ञान परंपरा एक मंच पर आती है, तो नई पीढ़ी के लिए ज्ञान, विचार और संभावनाओं के नए द्वार खुलते हैं।

खबर गुजरात :राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने वाला जयंतीभाई को बनाया गुजरात का प्रदेश सचिवजतिन कुमार चतुर्वेदी गुजरात के वरि...
13/08/2026

खबर गुजरात :राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने वाला जयंतीभाई को बनाया गुजरात का प्रदेश सचिव

जतिन कुमार चतुर्वेदी

गुजरात के वरिष्ठ समाजसेवी हैं वाला जयंतीभाई।

प्रयागराज। राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं भ्रष्टाचार नियंत्रण ब्यूरो ने गुजरात के वरिष्ठ समाजसेवी वाला जयंतीभाई को गुजरात का प्रदेश सचिव मनोनीत किया है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष गोपाल शर्मा ने उपरोक्त जानकारी देते हुए बताया कि वाला जयंतीभाई का पूरा जीवन सामाजिक सेवा कार्यों के प्रति समर्पित रहा है। संगठन को विश्वास है कि वाला जयंतीभाई के गुजरात का प्रदेश सचिव बनने के बाद गुजरात में मानवाधिकार संरक्षण, भ्रष्टाचारमुक्त भारत व सामाजिक सेवा कार्य अभियान को तेज गति मिलेगी।

हंडौर-डीह संपर्क मार्ग की बदहाली पर ग्रामीणों में आक्रोश, मुख्यमंत्री से सड़क मरम्मत और पूर्व शिकायतों की जांच की मांगजत...
11/08/2026

हंडौर-डीह संपर्क मार्ग की बदहाली पर ग्रामीणों में आक्रोश, मुख्यमंत्री से सड़क मरम्मत और पूर्व शिकायतों की जांच की मांग

जतिन कुमार चतुर्वेदी

प्रतापगढ़। विकासखंड लक्ष्मणपुर की ग्राम सभा हंडौर-डीह में जहीर मार्केट से सुन्नी जामा मस्जिद हंडौर-डीह तक हंडौर-डाड़ी संपर्क मार्ग का लगभग एक किलोमीटर हिस्सा लंबे समय से बेहद जर्जर एवं खस्ताहाल होने के कारण ग्रामीणों, विद्यार्थियों और आमजन के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। सड़क की बदहाली को लेकर ग्रामीणों एवं ग्राम प्रधान द्वारा संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को कई बार अवगत कराए जाने के बावजूद धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई न होने का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है और कार्यवाही केवल कागजों तक सीमित दिखाई दे रही है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीणों, छोटे-छोटे बच्चों, विद्यार्थियों, बाइक एवं साइकिल सवारों तथा अन्य वाहनों का आवागमन इसी मार्ग से होता है, जिसके चलते जर्जर सड़क पर हादसे का खतरा बना रहता है। बरसात के दौरान स्थिति और भी गंभीर हो जाती है तथा आवागमन बेहद कठिन हो जाता है। ग्रामीणों ने बताया कि यह संपर्क मार्ग कई प्रमुख राजमार्गों को जोड़ता है, जिससे इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है। सड़क की समस्या को लेकर समस्त ग्रामवासियों की ओर से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को प्रार्थना पत्र भेजकर जहीर मार्केट से सुन्नी जामा मस्जिद तक के लगभग एक किलोमीटर हिस्से का स्थलीय निरीक्षण कराकर तत्काल गुणवत्तापूर्ण मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण कराने की मांग की गई है। साथ ही पूर्व में की गई शिकायतों पर संबंधित विभाग द्वारा की गई कागजी एवं जमीनी कार्यवाही की निष्पक्ष जांच, किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा लापरवाही अथवा गलत रिपोर्ट पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई तथा संभावित बड़े हादसे को रोकने के लिए तत्काल सुरक्षात्मक कदम उठाने की मांग की गई है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से मामले को जनहित एवं आमजन की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय मानते हुए संबंधित विभाग को तत्काल कार्रवाई के निर्देश देने और की गई कार्रवाई से ग्रामीणों को अवगत कराने की मांग की है।

बाबा घुश्मेश्वरनाथ धाम के लिए निकली कावड़ यात्राजतिन कुमार चतुर्वेदी  हंडौर भारद्वाजपुरम् गांव से श्रद्धालुओं की टोली रव...
09/08/2026

बाबा घुश्मेश्वरनाथ धाम के लिए निकली कावड़ यात्रा

जतिन कुमार चतुर्वेदी

हंडौर भारद्वाजपुरम् गांव से श्रद्धालुओं की टोली रविवार को बाबा घुश्मेश्वरनाथ के जलाभिषेक के लिए कावड़ यात्रा पर निकली।सत्यम तिवारी, जगन्नाथ दुबे, राहुल दुबे, सूरज दुबे, श्यैम शंकर दुबे समेत अन्य श्रद्धालु यात्रा में शामिल रहे।श्रद्धालु गांव से होते हुए मानिकपुर स्थित मां गंगा के पावन तट पर पहुंचेंगे। वहां गंगा स्नान करने के बाद कावड़ में पवित्र जल भरकर बाबा घुश्मेश्वरनाथ धाम के लिए रवाना होंगे। धाम पहुंचकर श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। कावड़ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह नजर आया। यात्रा के दौरान हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों से माहौल भक्तिमय बना रहा।

आज भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष डाॅ रोहित मिश्रा का अगई बार्डर से कार्यकर्ताओं के हुजूम ने लगातार लगभग 55 क...
07/08/2026

आज भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष डाॅ रोहित मिश्रा का अगई बार्डर से कार्यकर्ताओं के हुजूम ने लगातार लगभग 55 कि0मी तक किया भव्य स्वागत, स्वागत की इस कड़ी में भाजपा जिलाध्यक्ष आशीष श्रीवास्तव ने अपने सातों मोर्चो अंशुमान सिंह युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष और सभी वरिष्ठ नेताओं के साथ स्वागत कर आगे बढ़ाया छोटे सरकार ने रानीगंज कैथौला में अवधेश विद्या निकेतन के पास सुरेश कुमार सिंह पंकज गाना इन्दिरा चैक पर ओंम प्रकाश गुड्डू एवं शुभम सिंह ने पूर्णाशू ओझा मनीष त्रिपाठी ने एसबीएम कॉलेज लालगंज पहाड़पुर में देवदत्त शुक्ला सागर सुंदर पुर बाजार में देवेश त्रिपाठी सुजीत त्रिपाठी ने लीलापुर मोड़ पर प्रतिभा सिंह क्षेत्रीय कोषाध्यक्ष रमेश पटेल ने रानीगंज अजगरा में नीरज अग्रहरि मनोज सिंह ने मोहनगंज में विक्रम सिंह ने सुखपाल नगर मोड़ पर सदर विधायक राजेंद्र मौर्य रजनीश शुक्ला ने सिटी मोड़ पर विक्रम प्रताप सिंह ने भाजपा कार्यालय पर सगरा मोड पर राहुल ओझा अष्टभुजा नगर मोड़ पर आशुतोष त्रिपाठी सुनील दुबे सभासद मीरा भवन चौराहा पर धीरज सिंह चौक पर सुधांशू मिश्रा दिन्नू सिंह ने अपने साथियों के साथ भव्य स्वागत किया इसके उपरांत हादीहाल पहुंचे जहां उनका गर्मजोशी से स्वागत समारोह हुआ

खबर लखनऊ :विश्व स्तनपान सप्ताह(1-7 अगस्त) पर विशेषपरिवार और कार्यालय का साथ मिला तो छह माह तक करा सकीं केवल स्तनपानजतिन ...
07/08/2026

खबर लखनऊ :विश्व स्तनपान सप्ताह(1-7 अगस्त) पर विशेष
परिवार और कार्यालय का साथ मिला तो छह माह तक करा सकीं केवल स्तनपान

जतिन कुमार चतुर्वेदी

30 वर्षीय शगुन (परिवर्तित नाम), जो एक निजी कॉलेज में शिक्षिका हैं, ने बेटे के जन्म के बाद पहले छह माह तक केवल माँ का दूध (एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग-ईबीएफ) पिलाने का संकल्प लिया था लेकिन मातृत्व अवकाश समाप्त होने का समय नजदीक आते ही परिवार ने शिशु को बोतल से दूध देने की सलाह देनी शुरू कर दी। बच्चे के बार-बार रोने को माँ के दूध की कमी समझा जाने लगा, जिससे उनका आत्मविश्वास प्रभावित हुआ।
शगुन ने चिकित्सक डॉ. गीतांजलि से सलाह ली। उन्होंने परिवार को समझाया कि पहले छह माह तक माँ के दूध के अलावा किसी अन्य आहार या पानी की जरूरत नहीं होती तथा आवश्यकता पड़ने पर स्तनदूध निकालकर सुरक्षित रखा जा सकता है। इसके बाद पति ने बच्चे की देखभाल में जिम्मेदारी निभाई, सास ने केवल स्तनपान का समर्थन किया और कार्यालय ने फ्लेक्सिबल वर्किंग आवर्स की सुविधा दी। शगुन कहती हैं, "जब परिवार, डॉक्टर और कार्यालय तीनों ने साथ दिया, तब मुझे लगा कि यह सिर्फ मेरी नहीं, बल्कि पूरे सहयोगी तंत्र की जिम्मेदारी है।"
शगुन की कहानी बताती है कि पहले छह माह तक केवल स्तनपान तभी संभव है, जब माँ को परिवार, स्वास्थ्यकर्मियों और कार्यस्थल का पूरा सहयोग मिले।
विश्व स्तनपान सप्ताह (1–7 अगस्त) की इस वर्ष की थीम "Breastfeeding for a Sustainable Start in Life: Strengthen What Works" इसी सहयोगी तंत्र को मजबूत करने का संदेश देती है। वहीं इन्फैंट मिल्क सब्स्टीट्यूट्स (IMS) अधिनियम, 1992 शिशु पोषण से जुड़ी सही और वैज्ञानिक जानकारी परिवारों तक पहुँचाने तथा फार्मूला मिल्क के भ्रामक प्रचार पर रोक लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कामकाजी महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश के बाद केवल स्तनपान जारी रखना आसान नहीं होता। कार्यस्थल पर सहयोग की कमी, घरेलू जिम्मेदारियाँ और परिवार से मिलने वाली अलग-अलग सलाह इसे चुनौतीपूर्ण बना देती हैं। ऐसे में जरूरत माँ को दोष देने की नहीं, बल्कि उसे आवश्यक सहयोग देने की है।
निजी कंपनी की प्रमुख कीर्ति बताती हैं कि उनकी कंपनी में कई महिलाएँ कार्यरत हैं, जिनमें कुछ छोटे बच्चों की माताएँ भी हैं। ऐसी महिलाओं को आवश्यकता के अनुसार लचीले कार्य घंटे दिए जाते हैं, ताकि वे शिशु की देखभाल और काम के बीच बेहतर संतुलन बना सकें। कई माताएँ घर से निकलने से पहले स्तनदूध निकालकर उसे रेफ्रिजरेटर में सुरक्षित रखती हैं, जिसे उनकी अनुपस्थिति में परिवार का कोई सदस्य शिशु को पिला देता है। वह कहती हैं, "यदि कार्यस्थल माताओं की जरूरतों को समझते हुए सहयोगी माहौल उपलब्ध कराए, तो वे बिना तनाव के केवल स्तनपान जारी रख सकती हैं। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और कार्य के प्रति उनका जुड़ाव भी मजबूत होता है।"
क्वीन मेरी अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अंजू अग्रवाल बताती हैं कि अधिकांश माताएँ छह माह तक केवल स्तनपान कराना चाहती हैं, लेकिन चुनौती उनकी इच्छा नहीं बल्कि परिस्थितियाँ होती हैं। उनका कहना है कि जब परिवार और कार्यस्थल दोनों का सहयोग मिलता है, तो माताओं के लिए पहले छह माह तक केवल स्तनपान कराना संभव हो जाता है। यदि पति और परिवार के अन्य सदस्यों को भी परामर्श का हिस्सा बनाया जाए, तो सही सलाह व्यवहार में उतरना आसान हो जाता है। उनके अनुसार IMS Act परिवारों तक शिशु पोषण से जुड़ी प्रमाण-आधारित और निष्पक्ष जानकारी पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
वीरांगना अवन्तीबाई जिला महिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सलमान खान कहते हैं कि यदि कोई माँ केवल स्तनपान नहीं करा पा रही है, तो उसकी परिस्थितियों को समझना जरूरी है। उनके अनुसार क्रेच, स्तनपान या स्तनदूध निकालने के लिए सुरक्षित स्थान, दूध सुरक्षित रखने की सुविधा, लचीले कार्य घंटे और स्तनपान अवकाश जैसी व्यवस्थाएँ कामकाजी माताओं के लिए बेहद मददगार हैं। उन्होंने बताया कि यूपीटीएसयू जैसे संस्थानों में क्रेच की व्यवस्था है, जिससे माताएँ कार्य के दौरान भी आवश्यकता पड़ने पर शिशु को स्तनपान करा सकती हैं।
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पियाली भट्टाचार्य बताती हैं कि जन्म के पहले घंटे में स्तनपान शुरू करना और पहले छह माह तक केवल माँ का दूध पिलाना शिशु के लिए सबसे लाभकारी है। इससे शिशु को संपूर्ण पोषण मिलता है, संक्रमण का खतरा कम होता है और उसके शारीरिक, मानसिक व बौद्धिक विकास की मजबूत नींव पड़ती है। साथ ही माँ में प्रसवोत्तर रक्तस्राव तथा स्तन और डिम्बग्रंथि कैंसर का खतरा भी कम होता है।
विश्व स्तनपान सप्ताह का संदेश स्पष्ट है कि पहले छह माह तक केवल स्तनपान सुनिश्चित करना केवल माँ की नहीं, बल्कि परिवार, समुदाय, स्वास्थ्य व्यवस्था और कार्यस्थल की साझा जिम्मेदारी है। जब परिवार का साथ, कार्यस्थल का सहयोग, स्वास्थ्य सेवाओं का मार्गदर्शन और सही जानकारी एक साथ मिलती है, तभी हर शिशु को जीवन की सबसे स्वस्थ शुरुआत माँ के दूध से मिल पाती है।

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