PPP Rprit

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23/07/2026

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20/07/2026

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17/07/2026

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अस्पताल की पाँचवीं मंज़िल (भाग–1)✍️ Writer: PPP Rprit⚠️ रात 2:13 बजे अगर किसी बंद मंज़िल से लिफ्ट अपने-आप खुल जाए... क्य...
17/07/2026

अस्पताल की पाँचवीं मंज़िल (भाग–1)
✍️ Writer: PPP Rprit

⚠️ रात 2:13 बजे अगर किसी बंद मंज़िल से लिफ्ट अपने-आप खुल जाए... क्या आप अंदर जाने की हिम्मत करेंगे? 👻😱
पूरी कहानी पढ़ें... लेकिन अकेले मत पढ़ना! 😈

रात के ठीक 2:13 बजे शहर के सबसे पुराने अस्पताल में नई नर्स रिया की ड्यूटी लगी थी।
सब कुछ सामान्य था... तभी ICU के बाहर लगा पुराना लिफ्ट अपने-आप चलने लगा।
"टिंग..."
लिफ्ट का दरवाज़ा खुला।
अंदर कोई नहीं था...
लेकिन डिस्प्ले पर साफ लिखा था...
"5th Floor"
रिया चौंक गई।
उसे याद आया कि इस अस्पताल की पाँचवीं मंज़िल पिछले 12 साल से बंद है।
कहा जाता था कि वहाँ आग लगने से कई मरीज और एक डॉक्टर की मौत हो गई थी।
डर के बावजूद रिया ने लिफ्ट बंद करने की कोशिश की...
लेकिन दरवाज़ा बंद नहीं हुआ।
अचानक लिफ्ट के अंदर से किसी औरत की धीमी आवाज़ आई...
"मुझे... नीचे ले चलो..."
रिया का गला सूख गया।
उसने हिम्मत करके अंदर देखा...
वहाँ अब भी कोई नहीं था।
लेकिन फर्श पर गीले पैरों के निशान दिखाई देने लगे...
जैसे कोई अदृश्य इंसान अभी-अभी लिफ्ट से बाहर निकला हो।
वे निशान सीधे अस्पताल के अँधेरे कॉरिडोर की ओर जा रहे थे...
रिया डरते-डरते उनके पीछे चल पड़ी।
कॉरिडोर के आख़िर में एक कमरा था...
कमरा नंबर 513।
दरवाज़े पर मोटी जंग लगी हुई थी।
जैसे ही उसने हैंडल छुआ...
अंदर से किसी ने ज़ोर से दरवाज़ा पीटना शुरू कर दिया।
धड़ाम... धड़ाम... धड़ाम...
और फिर...
एक फटी हुई आवाज़ आई—
"दरवाज़ा मत खोलना... वो मेरे पीछे खड़ी है..."
रिया के हाथ काँपने लगे...
क्योंकि कमरे के दरवाज़े पर लगी धूल में अचानक किसी ने उँगली से लिखा...
"मैं तुम्हारे पीछे हूँ..."
रिया धीरे-धीरे पीछे मुड़ी...
और जो उसने देखा...
उसकी चीख पूरे अस्पताल में गूँज उठी...
(भाग–1 समाप्त)
👉 अगर भाग–2 पढ़ना है, तो Comment में लिखें: "भाग–2 जल्दी लाओ।"

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काली चुनरी वाली औरतउत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव में एक पुरानी हवेली थी। लोग कहते थे कि वहां शाम ढलने के बाद कोई नहीं ...
14/07/2026

काली चुनरी वाली औरत

उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव में एक पुरानी हवेली थी। लोग कहते थे कि वहां शाम ढलने के बाद कोई नहीं जाता। जो भी गया, वह या तो बीमार होकर लौटा, या फिर कभी वापस नहीं आया।

गांव का एक युवक, अर्जुन, इन बातों पर विश्वास नहीं करता था। एक रात उसने अपने दोस्तों से शर्त लगा ली कि वह अकेले उस हवेली में पूरी रात बिताएगा।

रात के ठीक बारह बजे अर्जुन टॉर्च लेकर हवेली में पहुंचा। हवेली के अंदर घना अंधेरा था। टूटी हुई खिड़कियों से हवा सीटी बजाती हुई अंदर आ रही थी। अचानक ऊपर की मंजिल से किसी के पायल की धीमी-धीमी आवाज आने लगी...

छन... छन... छन...

अर्जुन ने सोचा कोई मजाक कर रहा होगा। वह सीढ़ियां चढ़ने लगा।

जैसे ही वह ऊपर पहुंचा, सामने एक लंबा गलियारा था। गलियारे के अंत में एक औरत खड़ी थी। उसने काली चुनरी ओढ़ रखी थी और उसके लंबे बाल जमीन तक लटक रहे थे। उसका चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था।

अर्जुन ने हिम्मत करके पूछा,"कौन हो तुम?"

औरत ने कोई जवाब नहीं दिया। वह धीरे-धीरे पीछे की ओर चलने लगी। अर्जुन उसके पीछे गया।

अचानक पूरी हवेली में सन्नाटा छा गया।

पायल की आवाज बंद हो गई।

अर्जुन ने टॉर्च की रोशनी उस औरत पर डाली...

लेकिन वहां कोई नहीं था।

तभी उसके कान के बिल्कुल पास किसी ने फुसफुसाकर कहा—

"मुझे ढूंढ रहे हो...?"

अर्जुन का शरीर कांप उठा। उसने पीछे मुड़कर देखा...

वही औरत उसके बिल्कुल पीछे खड़ी थी।

इस बार उसका चेहरा दिखाई दे रहा था।

उसकी आंखें पूरी तरह काली थीं। होंठों पर अजीब-सी मुस्कान थी। उसके चेहरे पर इंसानों जैसा कोई भाव नहीं था।

डर के मारे अर्जुन सीढ़ियों की ओर भागा।

लेकिन सीढ़ियां गायब थीं।

अब हवेली का हर दरवाजा बंद हो चुका था।

चारों तरफ सिर्फ एक ही आवाज गूंज रही थी—

"अब तुम भी यहीं रहोगे..."

अर्जुन पूरी ताकत से मुख्य दरवाजे की ओर भागा।

दरवाजा खुल गया।

वह बिना पीछे देखे गांव की ओर दौड़ पड़ा।

सुबह गांव वालों ने उसे हवेली के बाहर बेहोश पाया।

जब उसे होश आया तो उसके बाल सफेद हो चुके थे।

उसने कांपती आवाज में सिर्फ इतना कहा—

"अगर रात के बारह बजे किसी सुनसान जगह पर पायल की आवाज सुनाई दे... तो कभी पीछे मत देखना..."

उस दिन के बाद अर्जुन ने कभी उस रात के बारे में कुछ नहीं बताया।

लेकिन आज भी...

हर अमावस्या की रात...

उस हवेली से पायल की आवाज आती है।

और कहते हैं...

जो उस आवाज का पीछा करता है...

वह फिर कभी पहले जैसा लौटकर नहीं आता

PPP Rprit ✍️
✍️

Jay Jagannath ⭕❕⭕🙏 PPP Rprit
13/07/2026

Jay Jagannath ⭕❕⭕🙏
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Jay Jagannath ⭕❕⭕🙏 PPP Rprit
13/07/2026

Jay Jagannath ⭕❕⭕🙏
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13/07/2026

जय जगन्नाथ ⭕❕⭕🙏
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 #चांदी_की_पायलकुछ इच्छाएँ इतनी छोटी होती हैं कि उन्हें पूरा करने में पूरी ज़िंदगी लग जाती है... और कभी-कभी किस्मत उन्हे...
12/07/2026

#चांदी_की_पायल

कुछ इच्छाएँ इतनी छोटी होती हैं कि उन्हें पूरा करने में पूरी ज़िंदगी लग जाती है... और कभी-कभी किस्मत उन्हें पूरा होने का मौका भी नहीं देती।
इस कहानी को पढ़ते समय अगर आपकी आँखें नम हो जाएँ, तो एक बार अपनी माँ को ज़रूर गले लगा लेना। ❤️😢

✍️ Writer: PPP Rprit

बनारस के एक छोटे से गाँव में देवकी अपनी सात साल की बेटी गुड़िया के साथ रहती थी। वर्षों पहले उसके पति का देहांत हो चुका था। घर चलाने के लिए देवकी लोगों के घरों में झाड़ू-पोछा और बर्तन धोने का काम करती थी। बड़ी मुश्किल से दो वक्त की रोटी जुटा पाती, लेकिन अपनी बेटी की मुस्कान के लिए हर दर्द सह लेती थी।

गुड़िया बहुत चंचल और मासूम थी। जब भी वह गाँव के जमींदार की बेटी के पैरों में चमचमाती चांदी की पायल देखती, उसकी आँखें खुशी से चमक उठतीं। वह दौड़कर अपनी माँ से कहती

"माँ, जब मेरे पैरों में भी चांदी की पायल होगी ना... तब मैं पूरे घर में छम-छम करके नाचूँगी। मुझे भी पायल ला दो ना..."

देवकी मुस्कुरा देती, लेकिन उसकी मुस्कान के पीछे बेबसी छिपी होती। वह अपनी रूखी हथेलियों को देखती और गुड़िया को सीने से लगा लेती। उसी दिन उसने मन ही मन ठान लिया कि चाहे कितनी भी मेहनत करनी पड़े, वह अपनी बेटी की यह छोटी-सी इच्छा ज़रूर पूरी करेगी।

उसने पहले से दोगुना काम करना शुरू कर दिया। जहाँ पहले तीन घरों में काम करती थी, अब छह घरों में काम करने लगी। कई रातें वह खुद भूखी सो जाती, अपनी फटी साड़ी बार-बार सिलकर पहनती, लेकिन हर महीने थोड़ा-थोड़ा पैसा बचाकर एक छोटे से डिब्बे में रखती जाती।

पूरे दो साल की अथक मेहनत और अनगिनत त्याग के बाद आखिर वह दिन आ ही गया। उसके पास इतने पैसे जमा हो गए कि वह अपनी गुड़िया के लिए चांदी की एक सुंदर-सी पायल खरीद सके।

सुनार की दुकान से पायल लेकर लौटते समय देवकी का मन खुशी से भर उठा। वह रास्ते भर सोचती रही कि जब गुड़िया के पैरों में यह पायल बाँधेगी, तब उसकी बेटी कितनी खुश होगी... उसकी छम-छम से पूरा घर गूँज उठेगा।

लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

जैसे ही वह अपनी गली में पहुँची, उसने देखा कि उसके घर के बाहर लोगों की भीड़ लगी हुई है। चारों ओर सन्नाटा और रोने की आवाज़ें थीं।

देवकी का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। उसके हाथ से पायल की पोटली छूटकर ज़मीन पर गिर गई।

वह भागती हुई घर के अंदर पहुँची...

और वहाँ जो देखा, उसने उसकी पूरी दुनिया उजाड़ दी।

उसकी मासूम गुड़िया सफेद कफ़न में लिपटी, हमेशा के लिए शांत पड़ी थी।

कुछ घंटे पहले स्कूल से लौटते समय सड़क पार करते हुए एक तेज़ रफ्तार ट्रक ने उसे टक्कर मार दी थी। लोगों ने बचाने की बहुत कोशिश की, लेकिन अस्पताल पहुँचने से पहले ही उसकी साँसें थम चुकी थीं।

देवकी की आँखों से आँसू भी जैसे रूठ गए थे। वह बिना कुछ बोले अपनी बेटी के ठंडे पड़ चुके पैरों के पास बैठ गई।

काँपते हाथों से उसने ज़मीन पर गिरी हुई चांदी की पायल उठाई...

और बहुत प्यार से अपनी गुड़िया के पैरों में बाँध दी।

पायल की छन... छन... पूरे कमरे में गूँज उठी...

लेकिन उस आवाज़ को सुनने वाली गुड़िया अब इस दुनिया में नहीं थी।

देवकी ने अपनी बेटी के पैरों को सीने से लगाकर फूट-फूटकर कहा—

"देख गुड़िया... तेरी माँ तेरे लिए चांदी की पायल ले आई... उठ ना मेरी बच्ची... बस एक बार... सिर्फ एक बार छम-छम करके नाचकर दिखा दे..."

लेकिन गुड़िया अब कभी नहीं उठी।

कमरे में सिर्फ देवकी की सिसकियाँ थीं...

और उस चांदी की पायल की बेबस छन-छन...

जो हमेशा के लिए खामोश हो चुकी थी।

#चांदी_की_पायल #हिंदी_कहानी #माँ_का_प्यार #दिल_छू_लेने_वाली_कहानी

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