29/05/2026
बिग ब्रेकिंग: नीट-2026 पेपर लीक का सबसे बड़ा पर्दाफाश, 8 महीने पहले ही बन गया था प्लान
देश के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम नीट-2026 (NEET-UG) को लेकर एक बेहद सनसनीखेज और बड़ा खुलासा हुआ है। लाखों मेडिकल एस्पिरेंट्स के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले पेपर लीक माफियाओं का एक ऐसा जाल सामने आया है, जिसने जांच एजेंसियों से लेकर पूरे देश को हिलाकर रख दिया है।
इस पूरे काले कारोबार की स्क्रिप्ट आज या कल नहीं, बल्कि परीक्षा से पूरे 8 महीने पहले यानी पिछले साल दीपावली के आस-पास ही लिख दी गई थी। राजस्थान से शुरू हुआ यह मामला अब महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली तक फैल चुका है।
45 लाख की डील और 'गेस पेपर' का बड़ा धोखा
जांच एजेंसियों से मिली जानकारी के मुताबिक, जयपुर के जमवारामगढ़ के रहने वाले दो भाइयों—दिनेश बिवाल और मांगीलाल बिवाल ने इस पेपर को हासिल करने के लिए माफियाओं के साथ 45 लाख रुपये में सौदा किया था। परीक्षा से पहले एडवांस के तौर पर 30 लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया गया था।
माफिया गिरोह ने इन भाइयों को पूरी गारंटी दी थी कि उनके द्वारा दिए जा रहे पेपर (जिसे पुलिस से बचने के लिए 'गेस पेपर' कोडनेम दिया गया था) से कम से कम 143 प्रश्न सीधे मुख्य परीक्षा में आएंगे। हालांकि, जब असली परीक्षा हुई तो उसमें करीब 120 से 130 प्रश्न ही मैच हुए। यही वजह रही कि प्रश्नों की संख्या कम होने के कारण माफिया तक डील की बाकी रकम (15 लाख रुपये) नहीं पहुंच सकी।
महाराष्ट्र से राजस्थान: कैसे पहुंचा लीक पेपर?
जांच के दौरान इस पेपर लीक के पूरे रूट और नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जो कई राज्यों से जुड़ा है:
पहला लिंक: सबसे पहले महाराष्ट्र के अहिल्याबाई नगर के रहने वाले धनंजय नाम के युवक ने इस पेपर को नासिक (महाराष्ट्र) निवासी शुभम खैरनार तक पहुंचाया। शुभम खैरनार खुद पुणे में चिकित्सा (BAMS/MBBS) की पढ़ाई कर रहा है।
दूसरा लिंक: शुभम खैरनार ने इस गोपनीय पेपर को हरियाणा के रहने वाले यश यादव को सौंप दिया।
तीसरा लिंक: यश यादव ने राजस्थान के सीकर में रहकर नीट की तैयारी की थी। इसी दौरान वह जयपुर के जमवारामगढ़ के बिवाल भाइयों (दिनेश और मांगीलाल बिवाल) के संपर्क में आया और उन्हें इस लीक पेपर का सौदा ऑफर किया।
लाखों की डील और आखिरी दिनों में 2-2 हजार में बिका पेपर
शुरुआत में जिस पेपर के लिए 45 लाख रुपये की भारी-भरकम डील की गई थी, वह परीक्षा के ठीक पहले पूरी तरह आउट ऑफ कंट्रोल हो गया। बिवाल भाइयों ने अपने कुछ करीबी छात्रों को यह पेपर देने की योजना बनाई थी, लेकिन परीक्षा से महज 2 दिन पहले यह पेपर टेलीग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए लीक हो गया। देखते ही देखते यह लीक पेपर कौड़ियों के भाव यानी सिर्फ 2,000-2,000 रुपये में सैकड़ों छात्रों के मोबाइल स्क्रीन तक पहुंच गया।
सीकर के फिजिक्स टीचर की सतर्कता से हुआ भंडाफोड़
इस पूरे रैकेट का भंडाफोड़ तब हुआ जब सीकर के एक नामचीन कोचिंग संस्थान में पढ़ाने वाले फिजिक्स के टीचर के पास एक छात्र और दूसरे टीचर के माध्यम से यह कथित 'गेस पेपर' पहुंचा। जब टीचर ने सवालों की गंभीरता को देखा, तो उन्होंने परीक्षा के अगले ही दिन यानी 4 मई को सीकर के उद्योग नगर थाने में इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई।
इसके बाद मामले की शिकायत नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) तक पहुंची। एनटीए ने गंभीरता दिखाते हुए केंद्रीय खुफिया एजेंसी आईबी (Intelligence Bureau) के साथ इनपुट शेयर किए। राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने जब जांच की कमान संभाली, तो परत-दर-परत इस पूरे सिंडिकेट का खुलासा होता चला गया।
मामले में अब तक की बड़ी कार्रवाई: CBI के पास केस, आरोपी रिमांड पर
पेपर लीक की कड़ियों को जोड़ते हुए जांच एजेंसियों ने नासिक से मास्टरमाइंड शुभम खैरनार, जयपुर से दिनेश बिवाल और मांगीलाल बिवाल, और सीकर से राकेश मंडवरिया समेत कई आरोपियों को हिरासत में लिया है। शुभम खैरनार ने अपनी पहचान छुपाने के लिए अपना लुक और हेयरस्टाइल तक बदल लिया था, लेकिन तकनीकी सर्विलांस और पुरानी तस्वीरों की मदद से उसे दबोच लिया गया।
जयपुर में जज धर्मेंद्र कुमार शर्मा के दुर्गापुरा स्थित निवास पर इन 4 मुख्य संदिग्ध आरोपियों को पेश किया गया, जहां कोर्ट ने मामले की गंभीरता और देशव्यापी नेटवर्क को देखते हुए चारों आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर भेज दिया है। अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां खंगालने और मुख्य सरगना तक पहुंचने के लिए मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दिया गया है, जो इस केस में एफआईआर दर्ज कर आगे की जांच कर रही है।
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