30/05/2026
मशहूर शायर और गजलकार बशीर बद्र अब इस दुनिया में नहीं रहे. भोपाल के एक अस्पताल में, 91 साल की उम्र में उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली. पढ़िए बशीर बद्र के कुछ सबसे मशहूर शेर.
उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे
जब कभी हम दोस्त हो जाएं तो शर्मिंदा न हों
हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है
जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से
ये नए मिज़ाज का शहर है ज़रा फ़ासले से मिला करो
तुम्हें ज़रूर कोई चाहतों से देखेगा
मगर वो आंखें हमारी कहाँ से लाएगा
ये फूल मुझे कोई विरासत में मिले हैं
तुम ने मिरा कांटों भरा बिस्तर नहीं देखा
तुम मुझे छोड़ के जाओगे तो मर जाऊंगा
यूं करो जाने से पहले मुझे पागल कर दो
सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा
इतना मत चाहो उसे वो बेवफ़ा हो जाएगा
मैं चुप रहा तो और ग़लत-फ़हमियां बढ़ीं
वो भी सुना है उस ने जो मैं ने कहा नहीं
न जी भर के देखा न कुछ बात की
बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की
बशीर बद्र
(15 फरवरी 1935-28 मई 2026)