15/11/2025
प्रिय प्रशांत किशोर,
जब मैं यह ख़त लिखने बैठा हूँ, तब बाहर बिहार में जश्न का शोर है
लोग ढोल बजा रहे हैं, नारे लगा रहे हैं,
और भीतर मेरे मन में सिर्फ एक ही ख़्याल घूम रहा है
इस जीत की असल कहानी किसी ने नहीं लिखी…
पर मैं लिख रहा हूँ।
क्योंकि 2025 के इस चुनाव में
अगर किसी ने सबसे ज़्यादा पसीना बहाया है,
सबसे ज़्यादा किलोमीटर पैदल चला है,
सबसे ज़्यादा गालियाँ खाईं और फिर भी मुस्कुराया है,
तो वो तुम हो प्रशांत किशोर।
तुमने लोगों को पहली बार दिखाया
कि जात–धर्म से ऊपर भी राजनीति होती है।
तुमने मजमा नहीं लगाया,
तुमने दिमाग लगाया।
तुमने लोगों को सिखाया
कि जाति से पेट नहीं भरता,
रोज़गार से भरता है।
तुमने बताया
कि पलायन सिर्फ आँकड़ा नहीं,
बिहार के हर घर की चीख है।
तुमने नेताओं को मजबूर किया कि
वे पहली बार रोज़गार का मतलब समझें,
पहली बार पलायन को अपराध की तरह देखें,
पहली बार सड़कों पर जा कर जनता को सुनें।
कई जगह तुमने दबाव बनाया
और यही दबाव राजनीति में “जियोनुका” की तरह लगा।
जैसे खेत में पानी न जाए तो किसान नहर खोल देता है,
वैसे ही तुमने सरकार की गर्दन पकड़कर कहा
“काम करो नहीं तो जनता देख रही है।”
लोग क्या समझें
यह दबाव था या प्रेरणा।
पर असल बात यह है कि
जिस काम को सरकार 20 साल में नहीं कर सकी,
उसे तुमने 1 साल की जनसुराज यात्रा में करवा दिया।
सच कहूँ
अगर 2025 के चुनाव में सरकार जीती,
तो उसमें आधी जीत उनकी है…
और आधी तुम्हारी।
क्योंकि तुम वो दबाव बल बने
जिसने नीतियों को धक्का दिया,
जिसने मंत्रियों को हिलाया,
जिसने अफसरों को जगाया,
जिसने जनता को उम्मीद दी।
तुमने बिहार के लोगों को पहली बार एहसास कराया कि
राजनीति सिर्फ गादी की लड़ाई नहीं है
रोज़गार की भी लड़ाई है।
तुमने बताया कि
बिहार को जाति से ज़्यादा नौकरी चाहिए,
नारे से ज़्यादा नीयत चाहिए।
आज लोग कहते फिर रहे हैं
“बिहार जीता।”
पर मैं कहता हूँ
बिहार को तुमने जगाया।
और जो इंसान किसी प्रदेश को जगा दे,
वो सिर्फ चुनावी रणनीतिकार नहीं होता,
वो इतिहास लिखने वाला शख़्स होता है।
आज की इस जीत में
तुम्हारी मेहनत,
तुम्हारा संघर्ष,
तुम्हारी आवाज़,
और तुम्हारा दबाव
सब कुछ शामिल है।
कई बार सोचता हूँ,
अगर तुम न होते,
तो शायद यह चुनाव भी
पुरानी लकीरों पर चल जाता।
पर नहीं
इस बार बिहारी जागा है।
और उसे जगाने वाला
एक ही आदमी है तुम।
तुम्हारा एक शुभचिंतक,
जो बिहार को बदलते हुए देखकर
तुम्हारी भूमिका समझ गया।
— पोस्ट दीपक झा ( speeks_deepak ) जी के वॉल से।
#बिहार