Lalit Mukesh Sharma

Lalit Mukesh Sharma जिंदगी के सफर पर निकला एक गुमनाम मुसाफ़िर ... 👣

15/11/2025

प्रिय प्रशांत किशोर,

जब मैं यह ख़त लिखने बैठा हूँ, तब बाहर बिहार में जश्न का शोर है
लोग ढोल बजा रहे हैं, नारे लगा रहे हैं,
और भीतर मेरे मन में सिर्फ एक ही ख़्याल घूम रहा है
इस जीत की असल कहानी किसी ने नहीं लिखी…
पर मैं लिख रहा हूँ।

क्योंकि 2025 के इस चुनाव में
अगर किसी ने सबसे ज़्यादा पसीना बहाया है,
सबसे ज़्यादा किलोमीटर पैदल चला है,
सबसे ज़्यादा गालियाँ खाईं और फिर भी मुस्कुराया है,
तो वो तुम हो प्रशांत किशोर।

तुमने लोगों को पहली बार दिखाया

कि जात–धर्म से ऊपर भी राजनीति होती है।
तुमने मजमा नहीं लगाया,
तुमने दिमाग लगाया।
तुमने लोगों को सिखाया
कि जाति से पेट नहीं भरता,
रोज़गार से भरता है।
तुमने बताया
कि पलायन सिर्फ आँकड़ा नहीं,
बिहार के हर घर की चीख है।

तुमने नेताओं को मजबूर किया कि
वे पहली बार रोज़गार का मतलब समझें,
पहली बार पलायन को अपराध की तरह देखें,
पहली बार सड़कों पर जा कर जनता को सुनें।

कई जगह तुमने दबाव बनाया

और यही दबाव राजनीति में “जियोनुका” की तरह लगा।
जैसे खेत में पानी न जाए तो किसान नहर खोल देता है,
वैसे ही तुमने सरकार की गर्दन पकड़कर कहा
“काम करो नहीं तो जनता देख रही है।”

लोग क्या समझें
यह दबाव था या प्रेरणा।
पर असल बात यह है कि
जिस काम को सरकार 20 साल में नहीं कर सकी,
उसे तुमने 1 साल की जनसुराज यात्रा में करवा दिया।

सच कहूँ

अगर 2025 के चुनाव में सरकार जीती,
तो उसमें आधी जीत उनकी है…
और आधी तुम्हारी।

क्योंकि तुम वो दबाव बल बने
जिसने नीतियों को धक्का दिया,
जिसने मंत्रियों को हिलाया,
जिसने अफसरों को जगाया,
जिसने जनता को उम्मीद दी।

तुमने बिहार के लोगों को पहली बार एहसास कराया कि
राजनीति सिर्फ गादी की लड़ाई नहीं है
रोज़गार की भी लड़ाई है।

तुमने बताया कि
बिहार को जाति से ज़्यादा नौकरी चाहिए,
नारे से ज़्यादा नीयत चाहिए।

आज लोग कहते फिर रहे हैं
“बिहार जीता।”
पर मैं कहता हूँ
बिहार को तुमने जगाया।

और जो इंसान किसी प्रदेश को जगा दे,
वो सिर्फ चुनावी रणनीतिकार नहीं होता,
वो इतिहास लिखने वाला शख़्स होता है।

आज की इस जीत में
तुम्हारी मेहनत,
तुम्हारा संघर्ष,
तुम्हारी आवाज़,
और तुम्हारा दबाव
सब कुछ शामिल है।

कई बार सोचता हूँ,
अगर तुम न होते,
तो शायद यह चुनाव भी
पुरानी लकीरों पर चल जाता।

पर नहीं
इस बार बिहारी जागा है।
और उसे जगाने वाला
एक ही आदमी है तुम।

तुम्हारा एक शुभचिंतक,
जो बिहार को बदलते हुए देखकर
तुम्हारी भूमिका समझ गया।

— पोस्ट दीपक झा ( speeks_deepak ) जी के वॉल से।

#बिहार

15/11/2025

प्रशांत किशोर जी के लिए —

डियर प्रशांत जी आप इतनी अथक परिश्रम के बावजूद चुनाव भले हार गए हो लेकिन बिहारियों की सोई चेतना जागने में ज़रूर सफ़ल हुए हैं। बिहार में एकतरफ जहां कट्टा, अरबा/ उसना भात , दस हजार रुपए, फ़्री के चीज़ों का अंबार लगा हुआ था वहां आपने इंडस्ट्री की बात की, पलायन की बात की, बेरोजगारी की बात की। अब ये बात हम बिहारियों को समझ में नहीं आया इसमें आपकी कोई ग़लती नहीं है। ग़लती का खामियाजा हमेशा से बिहारी उठाते आए है और आगे भी उठाएंगे। बिहार एक ऐसा जगह जहां कोई मुद्दे की बात करना उचित भी नहीं समझता वहां आपने हर अपनी बात फैक्ट के साथ , डेटा के साथ सही आंकड़ों के साथ पेश किया बाबजूद किसी की समझ में नहीं आया। पर आपके कोशिश को सलाम है। एक बात और कहना ये है कि नेताओं से कुछ नहीं सीखने को मिलता है पर ये बात ठसक के साथ कह सकता हूँ कि जब जब आपका इंटरव्यूज़ सुना या आपको कही बोलते सुना हमें अच्छी ज्ञान प्राप्त हुआ, सीखने को मिला। अंत में वही टीस हो जाती है कि इतना मेहनत के बावजूद दो चार सीट भी नसीब नहीं होना कितना पीड़ादायक है। शायद ही कोई नया इतना प्रयास देखने के बाद बिहार को सुधारने का जिम्मा फिर से उठाए।
बाकी आपके लिए सोहन लाल द्विवेदी जी की ये पंक्ति समर्पित है —

नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है
आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

आपसे आग्रह है कि आप बिहार न छोड़ें।

राजद की जगह यदि आप नेतृत्व संभालें और भाजपा तथा जनसुराज जैसी पार्टियाँ पक्ष और विपक्ष की स्वस्थ राजनीति करें, तो राज्य का भला होगा।

#बिहार

🤌🏻
17/04/2025

🤌🏻

नौकरियां बुरी नहीं हैं,
वो बस कीमत मांगती है।
हमारा घर, हमारे अपने,
छीन लेती है, दूर कर देती है।

पहले खुशियों के पल,
अब यादों में ढुल गये।
दूर हूँ, पर कॉल पर बात,
अब खलिपन में खोये हैं।

पैसे मिलते हैं, लेकिन समझ नहीं आता,
किस बात की कुर्बानी चाहती है।
नौकरीयां बुरी नहीं,
वो बस कीमत मांगती है।

घर, परिवार, खुशियाँ,
सब कुछ कुर्बानी कर देती है।
लेकिन पैसे तो मिलते हैं,
क्या यह कुर्बानी है?

नौकरियां बुरी नहीं,
वो बस कीमत मांगती है।
हमारा समय, हमारा प्यार,
सब कुछ कुर्बानी कर देती है।

-Hritik Raj🍁

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╱/ ╰┛🌺

🤌🏻
10/12/2024

🤌🏻

रील पर अर्धनग्न नृत्य करती हुई लड़कियों मे,
वो साहित्य प्रेमी लड़कियाँ कहीं खो सी गई है..❤️🌻

02/12/2024

शहर मे साँस लेना भी जहरीला होते जा रहा है,
गाँव आज भी अपना अस्तित्व बचाए हुए है..❤️🌻

02/12/2024

एक उम्र के बाद लड़कों से खैरियत कौन पूछता हैं,
कोई नौकरी का पूछता है कोई सैलरी का पूछता है..❤️🌻

22/11/2024
05/11/2024

🍀🪐🪧 Dear Self,
Stop waiting for:
• The perfect travel buddy
• Everyone's schedule to align
• Someone to validate your choices
Start:
• Taking yourself on adventures
• Creating memories solo
• Living on your own timeline
Life's too precious to wait for a full party to start celebrating. Be your own company.
Make your own memories. Write your own story.

Life doesn't wait for anyone to join us before it starts unfolding. We often put our dreams, adventures, and even simple joys on hold, waiting for someone else to be ready, to agree, or to go along with us. The most fulfilling journey begins when you realize that you are enough. You are your own best company, and the memories you create with yourself are just as meaningful.
So stop waiting. Take that trip, start that project, celebrate those small victories-just for you. Enjoy the freedom to live on your own terms, write your own story, and cherish the adventures you embark on solo. You're capable of making every moment count, exactly as you are.

❤️
05/11/2024

❤️

My dream 😍

17/09/2024

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