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16/09/2026
15 सितंबर को 2605 श्रद्धालु मणिमहेश रवानाहोली–गौरीकुंड हेलीटैक्सी से 65 और कलाह मार्ग से 40 श्रद्धालुओं ने की यात्राघोघड...
15/09/2026

15 सितंबर को 2605 श्रद्धालु मणिमहेश रवाना
होली–गौरीकुंड हेलीटैक्सी से 65 और कलाह मार्ग से 40 श्रद्धालुओं ने की यात्रा

घोघड़, भरमौर, 15 सितंबर 2026: श्री मणिमहेश यात्रा-2026 के तहत मंगलवार को शाम 6 बजे तक लगभग 2500 श्रद्धालु हड़सर से पैदल यात्रा मार्ग के माध्यम से पवित्र मणिमहेश कैलाश के दर्शन के लिए रवाना हुए।

उपमंडल अधिकारी (नागरिक) भरमौर अजय कुमार सिंह ने यह जानकारी देते हुए बताया कि मंगलवार को होली से गौरीकुंड के लिए संचालित हेलीटैक्सी सेवा के माध्यम से 65 श्रद्धालुओं ने मणिमहेश कैलाश की यात्रा की।

उन्होंने बताया कि होली–मणिमहेश वाया कलाह पैदल यात्रा मार्ग से भी श्रद्धालुओं की आवाजाही जारी है। मंगलवार को शाम 4 बजे तक इस मार्ग से 40 श्रद्धालु पवित्र मणिमहेश कैलाश की ओर रवाना हुए।

प्रशासन द्वारा यात्रा के विभिन्न मार्गों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही और उपलब्ध सुविधाओं की निगरानी लगातार की जा रही है।

शिव चेलों ने शुरू की श्रद्धालुओं को मणिमहेश यात्रा की अनुमति देने की प्रक्रिया, 18 सितम्बर को डल झील पार करने की निभाएंग...
15/09/2026

शिव चेलों ने शुरू की श्रद्धालुओं को मणिमहेश यात्रा की अनुमति देने की प्रक्रिया, 18 सितम्बर को डल झील पार करने की निभाएंगे सदियों पुरानी परंपरा

घोघड़, भरमौर, 15 सितम्बर : मणिमहेश यात्रा-2026 के तहत भगवान शिव के भक्त त्रिलोचन के वंशज एवं सचूईं गांव के शिव चेले मंगलवार को भरमौर स्थित 84 मंदिर प्राँगण पहुंचे। पारंपरिक वेशभूषा और धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुरूप शिव चेलों के आगमन से भरमौर की पावन धरती पर धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण बन गया। चौरासी मंदिर परिसर में पहुंचने के बाद शिव चेलों ने 84 मंदिरों की विधिवत परिक्रमा की तथा आगामी दो दिनों तक चौरासी मंदिर में प्रवास कर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू की।

शिव चेला समिति सचूईं के सचिव उत्तम भारद्वाज ने बताया कि सिवे चेले 17 सितम्बर को भरमौर से मणिमहेश के लिए प्रस्थान करेंगे और हड़सर में पूजा करने के बाद धणछो में रात्री ठहराव करेंगे। उन्होंने कहा कि 18 सितम्बर दोपहर को शिव चेले पवित्र मणिमहेश डल झील पहुंचकर सदियों से चली आ रही डल झील पार करने की धार्मिक परंपरा का विधिवत निर्वहन करेंगे। उन्होंने कहा कि सचूईं के शिव चेले पीढ़ियों से चली आ रही धार्मिक परंपराओं, लोक आस्था और सांस्कृतिक विरासत के महत्वपूर्ण वाहक हैं।

मूल स्वरूप को बनाए रखना जरूरी : वकील भारद्वाज

शिव चेला वकील भारद्वाज ने कहा कि मणिमहेश यात्रा की सैकड़ों वर्षों की परंपरा में समय के साथ कई परिवर्तन हुए हैं, लेकिन इसके मौलिक धार्मिक स्वरूप को बनाए रखा गया है। उन्होंने मणिमहेश यात्रा मार्ग पर हो रहे निर्माण कार्यों के दौरान वैज्ञानिक मानकों का ध्यान रखने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि मणिमहेश मार्ग के कुछ स्थानों पर निर्माण कार्यों के कारण भूस्खलन की प्रक्रिया शुरू हुई है।

उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि यात्रा मार्ग से गुजरते समय पेड़-पौधों और घास को न तोड़ें। श्रद्धालु अनजाने में दुर्लभ पौधों की पत्तियां और टहनियां तोड़ देते हैं, जिससे क्षेत्र के कई औषधीय पौधों के अस्तित्व पर खतरा पैदा हो रहा है। वकील भारद्वाज वन विभाग से सेवानिवृत्त वन परिक्षेत्र अधिकारी रह चुके हैं।

परंपराएं इतिहास का जीवंत दस्तावेज : प्रकाश चंद

इस अवसर पर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान कर रहे शिव चेले एवं सेवानिवृत्त जीव विज्ञान प्रवक्ता प्रकाश चंद भारद्वाज ने कहा कि परंपराओं के निर्वहन से भले ही प्रत्यक्ष रूप से कोई भौतिक लाभ न हो, लेकिन ये परंपराएं हमारे इतिहास का जीवंत दस्तावेज होती हैं। उन्होंने कहा कि गद्दी समुदाय के इतिहास से जुड़े प्राचीन लिखित दस्तावेज सीमित होने के कारण मौखिक परंपराओं और धार्मिक रीतियों को जीवित रखना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

उन्होंने कहा कि आज भले ही मणिमहेश यात्रा के लिए शिव चेलों से अनुमति लेने की परंपरा के बारे में सभी श्रद्धालुओं को जानकारी न हो, लेकिन इस परंपरा को जीवित रखना गद्दी समुदाय की प्राचीन रीतियों और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने के लिए आवश्यक है।

वरदान से जुड़ी है अनुमति की परंपरा

मान्यता के अनुसार, सचूईं गांव के शिव भक्त त्रिलोचन को भगवान शिव का वरदान प्राप्त था कि मणिमहेश यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को उनके वंशजों द्वारा आशीर्वाद एवं अनुमति प्रदान की जाएगी और उनकी मनोकामना पूर्ण होगी। इसी लोकमान्यता के चलते स्थानीय तथा भद्रवाही श्रद्धालु सदियों से सचूईं के शिव चेलों से आशीर्वाद, अनुमति और मार्गदर्शन प्राप्त कर मणिमहेश यात्रा करते आए हैं।

शिव चेलों का भरमौर आगमन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि क्षेत्र की प्राचीन धार्मिक मान्यताओं, लोक आस्था और गद्दी समुदाय की समृद्ध विरासत का जीवंत प्रतीक माना जाता है।

एड्स जागरूकता कार्यक्रम में विद्यार्थियों को एचआईवी/एड्स के कारण, बचाव, उपचार और भ्रांतियों के बारे में किया जागरूकघोघड़...
15/09/2026

एड्स जागरूकता कार्यक्रम में विद्यार्थियों को एचआईवी/एड्स के कारण, बचाव, उपचार और भ्रांतियों के बारे में किया जागरूक

घोघड़, भरमौर, 15 सितंबर 2026 : श्री जय कृष्ण गिरी पब्लिक हाई स्कूल, भरमौर में एड्स जागरूकता सप्ताह के तहत मंगलवार को जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सिविल अस्पताल भरमौर से एड्स नियंत्रण समिति के काउंसलर पवन कुमार ने मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया।

पवन कुमार ने विद्यार्थियों और अध्यापक वर्ग को एचआईवी/एड्स के कारणों, लक्षणों, बचाव, उपचार तथा इससे जुड़ी भ्रांतियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जागरूकता अभियान 12 अगस्त से शुरू होकर 12 अक्टूबर तक चलेगा। अभियान के तहत क्षेत्र के विभिन्न स्कूलों में विद्यार्थियों और आम लोगों को एचआईवी/एड्स के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित रक्त चढ़ना, संक्रमित सुई या सिरिंज का इस्तेमाल तथा संक्रमित मां से बच्चे में संक्रमण एचआईवी के प्रमुख संक्रमण मार्ग हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि संक्रमित व्यक्ति के साथ साथ बैठने, हाथ मिलाने, गले मिलने, साथ खाना खाने अथवा एक ही कक्षा में पढ़ने से एचआईवी नहीं फैलता।

उन्होंने विद्यार्थियों से सुरक्षित व्यवहार अपनाने, रक्त की जांच सुनिश्चित करने, स्टेराइल अथवा डिस्पोजेबल सुई-सिरिंज का प्रयोग करने तथा आवश्यकता होने पर समय पर एचआईवी जांच और चिकित्सकीय परामर्श लेने का आह्वान किया।

उपचार के संबंध में उन्होंने बताया कि एचआईवी का वर्तमान में पूर्ण इलाज उपलब्ध नहीं है, लेकिन एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) के माध्यम से वायरस को नियंत्रित किया जा सकता है। नियमित उपचार से संक्रमित व्यक्ति लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जी सकता है और संक्रमण के प्रसार का जोखिम भी कम किया जा सकता है।

उन्होंने विद्यार्थियों से इस जानकारी को अपने परिवार और समाज तक पहुंचाने की अपील करते हुए कहा कि एचआईवी/एड्स से डरने के बजाय सही जानकारी और जागरूकता को अपनाना आवश्यक है।

विद्यालय के मुख्याध्यापक राजीव शर्मा ने कहा कि एचआईवी के संक्रमण के कारणों और बचाव के उपायों की जानकारी होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। संक्रमित व्यक्ति के प्रति सम्मान, सहयोग और संवेदनशीलता का व्यवहार करना समाज की जिम्मेदारी है।

15/09/2026

मणिमहेश यात्रा पर भरमौर पहुंचे भद्रवाही श्रद्धालु, हैलिपैड में जमाया आसन

15/09/2026

MANIMAHESH YATRA weather Update

मणिमहेश यात्रा दलों ने भरमौर हैली में स्थापित कीं देव छड़ियां; चौरासी मंदिर में कल होगी पारंपरिक ‘न्हौण की जातर’घोघड़, भ...
14/09/2026

मणिमहेश यात्रा दलों ने भरमौर हैली में स्थापित कीं देव छड़ियां; चौरासी मंदिर में कल होगी पारंपरिक ‘न्हौण की जातर’

घोघड़, भरमौर, 14 सितंबर 2026 : श्री मणिमहेश यात्रा-2026 के अंतिम चरण में राधाष्टमी स्नान के लिए श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु भरमौर मुख्यालय और मणिमहेश पहुंच रहे हैं। इसी कड़ी में सोमवार को जम्मू-कश्मीर के डोडा, रामबन, भद्रवाह और किश्तवाड़ सहित विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु भरमौर पहुंचे।

जम्मू-कश्मीर से पहुंचे कई यात्रा दलों ने भरमौर स्थित हेलिपैड में अपनी देव छड़ियां स्थापित कर पारंपरिक डेरा जमा लिया है। मणिमहेश यात्रा ट्रस्ट डोडा के अध्यक्ष जगदीश ठाकुर तथा ग्राम पंचायत शरेना, जिला डोडा के छड़ी संचालक एवं यात्रा दल अध्यक्ष उत्तम सिंह गोतवाल ने देव छड़ियां स्थापित करने के बाद कहा कि पिछले वर्ष प्राकृतिक आपदा के कारण मणिमहेश यात्रा के लिए अनुमति नहीं मिल पाई थी और उन्हें चम्बा जिला मुख्यालय से ही लौटना पड़ा था।

उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष की प्राकृतिक आपदा में भरमौर और चम्बा की सड़कों को भारी नुकसान पहुंचा था, लेकिन जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के प्रयासों से सड़क मार्ग को काफी हद तक पुनर्स्थापित कर दिया गया है। इससे इस वर्ष यात्रा के दौरान कहीं भी यह आभास नहीं हो रहा कि इन मार्गों को एक वर्ष पहले भारी क्षति पहुंची थी।

यात्रा दल अध्यक्षों ने एसडीएम भरमौर अजय कुमार सिंह की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि भद्रवाही छड़ियों के स्वागत और सम्मान के लिए प्रशासन की ओर से विशेष प्रबंध किए गए, जो सराहनीय हैं। उन्होंने कहा कि भरमौर के लोगों और प्रशासन का भद्रवाही श्रद्धालुओं के प्रति स्नेह एवं सम्मान दोनों राज्यों के लोगों के बीच संबंधों को और मजबूत कर रहा है।

चौरासी मंदिर में कल होगी ‘न्हौण की जातर’

जगदीश ठाकुर ने बताया कि मंगलवार को उनके दल के श्रद्धालु भरमाणी माता मंदिर में स्नान करने के बाद भरमौर के चौरासी मंदिर प्रांगण में भद्रवाह की पारंपरिक ‘ढेकू’ (कुड) नृत्य प्रस्तुति देंगे। इसके बाद वे मणिमहेश यात्रा के अगले पड़ाव की ओर रवाना होंगे।

गौरतलब है कि भद्रवाही श्रद्धालु मणिमहेश रवाना होने से पहले चौरासी मंदिर परिसर में अपनी संस्कृति की प्रस्तुति देते हुए पारंपरिक जातर (मेले) का आयोजन करते हैं। इस दौरान श्रद्धालु बांसुरी के सुरों और ढोल की ताल पर सामूहिक रूप से पारंपरिक ढेकू नृत्य करते हैं। स्थानीय लोग भद्रवाही श्रद्धालुओं की इस जातर को ‘न्हौण की जातर’ के नाम से संबोधित करते हैं और पूरे वर्ष इस पारंपरिक आयोजन का बेसब्री से इंतजार करते हैं।

हेलिपैड पर बढ़ी भीड़, हेली टैक्सी सेवा अस्थायी रूप से प्रभावित

भद्रवाही श्रद्धालुओं के यात्रा दलों द्वारा भरमौर हेलिपैड में डेरा जमाए जाने के बाद भरमौर से गौरीकुंड के लिए हेली टैक्सी सेवा सोमवार दोपहर बाद अस्थायी रूप से बंद हो गई। हेली टैक्सी सेवा अब श्रद्धालुओं के हेलिपैड से हटने के बाद ही सामान्य रूप से बहाल होने की संभावना है।

यात्रा के आगामी चार दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या में भारी बढ़ोतरी होने की संभावना जताई जा रही है। राधाष्टमी स्नान को लेकर मणिमहेश और भरमौर में श्रद्धालुओं की बढ़ती आमद के साथ यात्रा का अंतिम चरण अब चरम की ओर बढ़ रहा है।

मणिमहेश यात्रा 2026: आज 2985 श्रद्धालु मणिमहेश दर्शन के लिए रवानाघोघड़, भरमौर, 14 सितम्बर 2026 : श्री मणिमहेश यात्रा-202...
14/09/2026

मणिमहेश यात्रा 2026: आज 2985 श्रद्धालु मणिमहेश दर्शन के लिए रवाना

घोघड़, भरमौर, 14 सितम्बर 2026 : श्री मणिमहेश यात्रा-2026 के तहत सोमवार को भी पवित्र मणिमहेश धाम एवं कैलाश पर्वत के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही जारी रही। शाम 6 बजे तक करीब 2800 श्रद्धालु हड़सर से पैदल यात्रा मार्ग के माध्यम से कैलाश दर्शन के लिए रवाना हुए।
एसडीएम भरमौर अजय कुमार सिंह ने बताया कि यात्रा के तहत हड़सर से मणिमहेश की ओर श्रद्धालुओं के जाने का क्रम लगातार जारी है।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए भरमौर से गौरीकुंड तक हेली टैक्सी सेवा भी संचालित की जा रही है। अनुसंधान अधिकारी एवं नोडल ऑफिसर हेली टैक्सी अतुल शर्मा ने बताया कि सोमवार को कुल 36 हवाई उड़ानें संचालित हुईं। इनमें भरमौर से गौरीकुंड के लिए 180 श्रद्धालुओं ने हेली टैक्सी सेवा का लाभ उठाया।
वहीं, होली से मणिमहेश वाया कलाह पैदल यात्रा मार्ग से भी श्रद्धालुओं की आवाजाही जारी है। एसडीएम अजय कुमार सिंह के अनुसार सोमवार को शाम 4 बजे तक इस वैकल्पिक मार्ग से 5 श्रद्धालु पवित्र मणिमहेश कैलाश की ओर रवाना हुए।

14/09/2026

इन यात्रियों से 20-20 रुपए की वसूली क्यों ?

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