07/02/2026
ढाणी टगरिया (जिसे स्थानीय लोग अक्सर 'डाणी' या 'टगरिया की ढाणी' भी कहते हैं) बीसलपुर और देवली के पास का वह क्षेत्र है जिसका संबंध अंग्रेजों के समय के एक कड़े संघर्ष से रहा है।
यहाँ अंग्रेजों के साथ जो हुआ था, वह इतिहास और लोककथाओं का मिला-जुला हिस्सा है। मुख्य रूप से यहाँ लगान (Tax) और जमीन के कब्जे को लेकर टकराव हुआ था:
1. अंग्रेजों का विरोध और घेराबंदी
कहा जाता है कि अंग्रेज अधिकारी जब इस क्षेत्र में राजस्व (Tax) वसूलने और जमीन की पैमाइश (नाप-जोख) करने आए, तो ढाणी टगरिया के ग्रामीणों ने उन्हें गांव में घुसने से मना कर दिया था। उस समय यह क्षेत्र जंगलों और पहाड़ियों से घिरा था, जिसका फायदा उठाकर ग्रामीणों ने अंग्रेजों का रास्ता रोका।
2. 'कर' (Tax) को लेकर विवाद
आपने पहले पूछा था कि कर कब बुलाया गया था। दरअसल, अंग्रेजों ने इस क्षेत्र पर 'जबरन कर' थोप दिया था।
जब ग्रामीण कर नहीं दे पाए, तो अंग्रेज सेना ने ढाणी पर हमला बोला था।
स्थानीय कहानियों के अनुसार, अंग्रेजों ने ग्रामीणों के पशुओं को हांकने और अनाज जब्त करने की कोशिश की थी, जिसके जवाब में ग्रामीणों ने उन पर हमला कर दिया।
3. अंग्रेजों की वापसी या हार
स्थानीय स्तर पर यह बात प्रचलित है कि:
टगरिया के लोगों ने अंग्रेजों के खिलाफ छापामार रणनीति अपनाई।
अंग्रेज अधिकारी यहाँ की भौगोलिक स्थिति (पहाड़ और नाले) को समझ नहीं पाए और उन्हें भारी प्रतिरोध का सामना करना पड़ा।
अंततः, अंग्रेजों को यहाँ से पीछे हटना पड़ा या उन्होंने इस गांव के लिए कर की शर्तों में ढील दी।
4. बीसलपुर बांध और वर्तमान
बीसलपुर बांध बनने के बाद यह पूरा इलाका बदल गया। ढाणी टगरिया का काफी हिस्सा और वहां के पुराने कच्चे रास्ते अब बांध के डूब क्षेत्र में आ चुके हैं। आज वहां केवल पुरानी यादें और कुछ अवशेष ही बचे हैं।
क्या आप उस घटना के बारे में पूछ रहे हैं जब वहां किसी अंग्रेज अधिकारी को बंधक बनाया गया था या वहां कोई गोलाबारी हुई थी? अगर आपको कोई खास नाम याद हो, तो बताएं।