15/06/2026
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत क्लस्टर बनाकर किसानों को दिया जाएगा लाभ
नैनो यूरिया व नैनो डीएपी के छिड़काव पर मिलेगा 50 प्रतिशत अनुदान
जिले में नैनो यूरिया के 482 एवं नैनो डीएपी के 337 हैक्टर में आयोजित होगे प्रदर्शन
भीलवाडा, 15 जून। राज्य सरकार के बजट घोषणा की अनुपालना में वर्ष 2026-27 में जिले में नैनों उर्वरकों को बढ़ावा देने के उध्देश्य से नैनो यूरिया व नैनो डीएपी के उपयोग हेतु अधिक से अधिक कृषकों को प्रेरित करने हेतु 50 प्रतिशत अनुदान पर नैनो यूरिया व नैनो डीएपी का छिड़काव कर कृषकों को लाभान्वित किया जायेगा,जिसमें अनुदान डीबीटी के माध्यम से सीधे किसानों के खाते में दिया जायेगा।
कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक विनोद कुमार जैन ने बताया कि कृषि आयुक्तालय जयपुर द्वारा नैनो उर्वरकों के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं,इनके अनुसार खरीफ और रबी दोनों सीजन में इन नैनो उर्वरकों के छिड़काव पर किसानों को 50 प्रतिशत का अनुदान दिया जाएगा इसका मुख्य उद्देश्य पारंपरिक रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करना, मिट्टी की सेहत सुधारना और किसानों की उत्पादन लागत को कम करना है।
इस अभियान को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत राज्यभर में क्लस्टर के आधार पर संचालित किया जाएगा। जिले को नैनो यूरिया को 482 हैक्टर एवं नैनो डीएपी के 337 हैक्टर में स्प्रे कराने के लक्ष्य प्राप्त हुए है।
सहायक निदेशक डा. धीरेन्द्र सिंह राठौड के अनुसार नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के खेतों में छिड़काव के लिए आधुनिक तकनीकों की प्राथमिकता दी जाएगी। किसान अपने स्तर पर ट्रैक्टर माउंटेड स्प्रेयर, बैटरी ऑपरेटेड स्प्रेयर, नैपरीक स्पे या अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक की व्यवस्था कर सकेंगे। सरकार की और से लागत की कुल राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा सीधे अनुदान के रूप में देय होगी, जबकि शेष 50 प्रतिशत राशि का वहन स्वयं किसान को करना होगा। योजना के तहत प्रति हेक्टेयर लागत का निर्धारण भी वैज्ञानिक तरीके से किया गया है, नैनी यूरिया और डीएपी का स्प्रे फसलों में प्रति हेक्टेयर 2.5 बोतल नैनो खादों के एक छिड़काव की सिफारिश की गई है। नैनो यूरिया के उपयोग के लिए प्रति हेक्टेयर कुल लागत 2000 रुपए निर्धारित की गई है, जिस पर 1000 रुपए का अनुदान मिल जाएगा। वहीं, नैनो डीएपी के लिए प्रति हेक्टेयर कुल लागत 2900 रुपए तय की गई है, जिस पर किसानों को 1450 रुपए की वित्तीय सहायता दी जाएगी।
कृषि अधिकारी कजोड़ मल गुर्जर ने बताया कि फसलों के वैज्ञानिक चक्र के अनुस्वार रबी में गेहूं, जौ, सरसों, चना, जीरा और खरीफ में बाजरा, मक्का, सोयाबीन, मूंगफली दोनों प्रत्येक किसान के लिए प्रदर्शन क्षेत्र की सीमा 0.4 हेक्टेयर से लेकर अधिकतम 10 हेक्टेयर तक निर्धारित की गई है ताकि छोटे और सीमांत किसानों को इसका सर्वाधिक लाभ मिल सके। इस पूरी प्रक्रिया की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि खेतों में किए जाने वाले छिड़काव कृषि पर्यवेक्षक और सहायक कृषि अधिकारी की निगरानी में होगा एवं भौतिक सत्यापन के बाद अनुदान की राशि का भुगतान कृषकों के खाते में किया जायेगाा , योजना के तहत स्थानीय स्तर पर न्यूनतम 10 किसानों का एक प्रदर्शन क्लस्टर बनाया जाएगा।