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पुरुष भी तब सुकून से सो पता , जब उसे अपनी पसंदीदा स्त्री की छाँव मिलती , लेकिन स्त्री ये नहीं समझ पातीकि पुरुष नींद का न...
25/07/2025

पुरुष भी तब सुकून से सो पता , जब उसे अपनी पसंदीदा स्त्री की छाँव मिलती , लेकिन स्त्री ये नहीं समझ पाती
कि पुरुष नींद का नहीं, सुकून का भूखा होता है।

पुरुष दिनभर की थकान से नहीं थकता,
वो थकता है, उस भावनात्मक खालीपन से,
जो उसे दुनिया की भीड़ में अकेला कर देता है।

और फिर एक दिन, जब कोई स्त्री बिना शर्त के
उसे सिर्फ समझने और थामने की कोशिश करती है,
तो वह उस छाँव में पहली बार सुकून की नींद पाता है।

उसके लिए वो बिस्तर नहीं बदलता,
बल्कि वो स्त्री बदल जाती है,
जो उसके सिरहाने हाथ फेरते हुए कहती है ,
मैं हूं न सब ठीक हो जाएगा,

स्त्रियाँ अक्सर सोचती हैं कि मर्द मजबूत होते हैं,
उन्हें सिर्फ शरीर चाहिए,
पर हक़ीक़त ये है कि पुरुष को जब भीतर से थामा जाए,
तो वो सारी दुनिया से लड़ सकता है ,
बस उस एक स्त्री की छाँव हो ।

समझदार स्त्री वही होती है, जो जानती है ,
पुरुष को जीतना हो तो उसके तन से नहीं,
उसके टूटे हुए मन से जुड़ो..💝😍🤞🫂

20/07/2025
औरत अपना जिस्म लुटाकर मर्द को अपना बनाने की कोशिश करती है, और मर्द अपनी जेब खर्च करता है बस औरत का साथ पाने के लिए...ये ...
08/06/2025

औरत अपना जिस्म लुटाकर मर्द को अपना बनाने की कोशिश करती है, और मर्द अपनी जेब खर्च करता है बस औरत का साथ पाने के लिए...

ये रिश्ता अक्सर प्रेम का कम और सौदेबाज़ी का ज़्यादा बन जाता है...
क्योंकि जहां औरत समझती है कि उसकी नज़दीकियाँ किसी को बाँध लेंगी,
वहीं मर्द ये सोचता है कि उसका खर्चा, उसकी कमाई,
उसकी काबिलियत किसी को रोक लेगी...

लेकिन सच्चाई ये है —
ना जिस्म किसी को रोक सकता है,
और ना ही पैसा किसी को हमेशा के लिए बाँध सकता है!

रिश्ते सिर्फ तब टिकते हैं,
जब न ज़रूरत हो जिस्म की,
न गिनती हो पैसों की,
बल्कि हो सिर्फ एक सच्चा मन से मन का जुड़ाव।

वरना...
जिस्म बदलते देर नहीं लगती,
और जेब खाली होते ही साथ छूट जाता है...

पुरुष तब  #सुकून से सो पाया, जब उसे अपनी  #पसंदीदा स्त्री की छाँव मिली, लेकिन स्त्री ये नहीं समझ पाई कि पुरुष नींद का नह...
07/06/2025

पुरुष तब #सुकून से सो पाया, जब उसे अपनी #पसंदीदा स्त्री की छाँव मिली, लेकिन स्त्री ये नहीं समझ पाई
कि पुरुष नींद का नहीं, सुकून का भूखा होता है।

🧍‍♂️ पुरुष दिनभर की थकान से नहीं थकता,
वो थकता है उस भावनात्मक खालीपन से,
जो उसे दुनिया की भीड़ में अकेला कर देता है।

और फिर एक दिन, जब कोई स्त्री बिना शर्त के
उसे सिर्फ समझने और थामने की कोशिश करती है,
तो वह उस छाँव में पहली बार सुकून की नींद पाता है।

🌙 उसके लिए वो बिस्तर नहीं बदलता,
बल्कि वो स्त्री बदल जाती है,
जो उसके सिरहाने हाथ फेरते हुए कहती है –
"मैं हूं न… सब ठीक हो जाएगा!"

👩 स्त्रियाँ अक्सर सोचती हैं कि मर्द मजबूत होते हैं,
उन्हें सिर्फ शरीर चाहिए…
पर हक़ीक़त ये है कि पुरुष को जब भीतर से थामा जाए,
तो वो सारी दुनिया से लड़ सकता है —
बस उस एक स्त्री की छाँव में।

✍️ समझदार वही होती है, जो जानती है —
पुरुष को जीतना हो तो उसके तन से नहीं,
उसके टूटे मन से जुड़ो…❤️🤗😍

05/06/2025

शूद्रों के पास सच में कला है ये महाभारत में कृष्ण का रोल करने बाले..........…

05/06/2025

भाई साहब 100,%हिन्दू होने के बाद भी हिन्दू धर्म खतरे में

पुरुष तब सुकून से सो पाया, जब उसे अपनी पसंदीदा स्त्री की छाँव मिली, लेकिन स्त्री ये नहीं समझ पाई कि पुरुष नींद का नहीं, ...
05/06/2025

पुरुष तब सुकून से सो पाया, जब उसे अपनी पसंदीदा स्त्री की छाँव मिली, लेकिन स्त्री ये नहीं समझ पाई
कि पुरुष नींद का नहीं, सुकून का भूखा होता है।

🧍‍♂️ पुरुष दिनभर की थकान से नहीं थकता,
वो थकता है उस भावनात्मक खालीपन से,
जो उसे दुनिया की भीड़ में अकेला कर देता है।

और फिर एक दिन, जब कोई स्त्री बिना शर्त के
उसे सिर्फ समझने और थामने की कोशिश करती है,
तो वह उस छाँव में पहली बार सुकून की नींद पाता है।

🌙 उसके लिए वो बिस्तर नहीं बदलता,
बल्कि वो स्त्री बदल जाती है,
जो उसके सिरहाने हाथ फेरते हुए कहती है –
"मैं हूं न… सब ठीक हो जाएगा!"

👩 स्त्रियाँ अक्सर सोचती हैं कि मर्द मजबूत होते हैं,
उन्हें सिर्फ शरीर चाहिए…
पर हक़ीक़त ये है कि पुरुष को जब भीतर से थामा जाए,
तो वो सारी दुनिया से लड़ सकता है —
बस उस एक स्त्री की छाँव में।

✍️ समझदार वही होती है, जो जानती है —
पुरुष को जीतना हो तो उसके तन से नहीं,
उसके टूटे मन से जुड़ो…

औरत अपना जिस्म लुटाकर मर्द को अपना बनाने की कोशिश करती है, और मर्द अपनी जेब खर्च करता है बस औरत का साथ पाने के लिए...ये ...
04/06/2025

औरत अपना जिस्म लुटाकर मर्द को अपना बनाने की कोशिश करती है, और मर्द अपनी जेब खर्च करता है बस औरत का साथ पाने के लिए...

ये रिश्ता अक्सर प्रेम का कम और सौदेबाज़ी का ज़्यादा बन जाता है...
क्योंकि जहां औरत समझती है कि उसकी नज़दीकियाँ किसी को बाँध लेंगी,
वहीं मर्द ये सोचता है कि उसका खर्चा, उसकी कमाई,
उसकी काबिलियत किसी को रोक लेगी...

लेकिन सच्चाई ये है —
ना जिस्म किसी को रोक सकता है,
और ना ही पैसा किसी को हमेशा के लिए बाँध सकता है!

रिश्ते सिर्फ तब टिकते हैं,
जब न ज़रूरत हो जिस्म की,
न गिनती हो पैसों की,
बल्कि हो सिर्फ एक सच्चा मन से मन का जुड़ाव।

वरना...
जिस्म बदलते देर नहीं लगती,
और जेब खाली होते ही साथ छूट जाता है...
...... ....✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️gori Choudhary 🥰

23/05/2025
23/05/2025
23/05/2025

नेहा राठोर का बहुत बड़ा बयान मोदी के बारे में.......

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