25/07/2025
पुरुष भी तब सुकून से सो पता , जब उसे अपनी पसंदीदा स्त्री की छाँव मिलती , लेकिन स्त्री ये नहीं समझ पाती
कि पुरुष नींद का नहीं, सुकून का भूखा होता है।
पुरुष दिनभर की थकान से नहीं थकता,
वो थकता है, उस भावनात्मक खालीपन से,
जो उसे दुनिया की भीड़ में अकेला कर देता है।
और फिर एक दिन, जब कोई स्त्री बिना शर्त के
उसे सिर्फ समझने और थामने की कोशिश करती है,
तो वह उस छाँव में पहली बार सुकून की नींद पाता है।
उसके लिए वो बिस्तर नहीं बदलता,
बल्कि वो स्त्री बदल जाती है,
जो उसके सिरहाने हाथ फेरते हुए कहती है ,
मैं हूं न सब ठीक हो जाएगा,
स्त्रियाँ अक्सर सोचती हैं कि मर्द मजबूत होते हैं,
उन्हें सिर्फ शरीर चाहिए,
पर हक़ीक़त ये है कि पुरुष को जब भीतर से थामा जाए,
तो वो सारी दुनिया से लड़ सकता है ,
बस उस एक स्त्री की छाँव हो ।
समझदार स्त्री वही होती है, जो जानती है ,
पुरुष को जीतना हो तो उसके तन से नहीं,
उसके टूटे हुए मन से जुड़ो..💝😍🤞🫂