27/11/2025
https://www.instagram.com/p/DRkTP9Rkh_S/?igsh=OHRrbHQ2aTkwNndn
साधु समाज के लिए आत्मचिंतन: क्या राजनीति का कद धर्म से बड़ा हो गया है?
सादर हरि ॐ 💐
आज सोशल मीडिया पर एक तस्वीर देखकर हृदय अत्यंत व्यथित है। यह पोस्ट विशेषकर साधु समाज के लिए है। संतों से करबद्ध निवेदन है कि अपनी गरिमा, संत सभ्यता और भगवा की आन-बान-शान को इतना न गिराएं कि राजनेताओं के चरणों में बैठना पड़े।
तस्वीर में दिखाई दे रहा दृश्य चिंतनीय है। एक बुजुर्ग साधु, जो जगद्गुरु शंकराचार्य जी की दिव्य परंपरा और जूना अखाड़े से जुड़े हैं तथा समदड़ी के प्राचीन मठ के मठाधीश हैं, वे जमीन पर बैठे हैं। वहीं, राजनेता अपने मद में इतने अंधे हैं कि उन्हें सनातन संस्कृति और परंपरा का भी भान नहीं रहा और वे कुर्सियों पर विराजमान हैं।
मंच पर महंत पूज्य श्री दयाराम जी भी ऊपर आसन पर विराजमान हैं। वे बड़े संत हैं, किन्तु उन्हें भी विचार करना चाहिए था कि उनके साथी संत, जो "भेख भगवान" का स्वरूप हैं, वे नीचे क्यों बैठे हैं?
क्या हम ऐसे ही समाज का मार्गदर्शन करेंगे? यदि धर्मगुरुओं और संतों के साथ ही ऐसा भेदभाव और व्यवहार होगा, तो यह संपूर्ण साधु समाज के लिए गंभीर चिंतन का विषय है।
संतों को अपनी गरिमा स्वयं बचानी होगी।
🙏 निवेदक:
श्री गोस्वामी युवा टीम फाउंडेशन
*यह ज्यादा से ज्यादा शेयर करें सभी साधु संतों तक पहुंचाएं*
*भगवा का सम्मान करें*