28/02/2026
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कलानौर कलां से डोभ भाली के बीच दोहरीकरण का कार्य पूरा हो गया और रेलवे ने इस section पर 90 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ट्रेनों को चलाने की भी अनुमति दे दी हालांकि ट्रायल 121 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से हुआ था लेकिन सुरक्षा दृष्टि से ट्रेनों के संचालन की गति 90 किलोमीटर प्रति घंटा तक ही रखी गई है ।
इस ट्रायल के दौरान बीकानेर मंडल के बड़े-बड़े अधिकारी यहां मौजूद थे और इस क्षेत्र पर 90 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार की अनुमति के बाद मीडिया बड़े-बड़े शब्दों में कह रही है कि इससे ट्रेनों की गति बढ़ेगी और अधिक ट्रेन इस रूट पर चल सकेंगी ।
लेकिन क्या किसी ने रेलवे अधिकारियों को वास्तविकता से अवगत कराया या क्या रेलवे अधिकारियों को यह नहीं पता था कि पिछले कई सालों से लगातार भिवानी से रोहतक जाने वाली ट्रेनों की गति घटाई जा रही है और समय सारणी बिगाड़ी जा रही है । कुछ ट्रेनों को भिवानी सिटी से भी कर दिया गया लेकिन फिर भी वह ट्रेन यात्रियों का समय नहीं बचा पाई पिछली कुछ समय सारणियों में तो इस रूट के साथ बहुत ही भेदभाव किया गया ।
बीकानेर से हरिद्वार जाने वाली हरिद्वार एक्सप्रेस को भिवानी से रोहतक के बीच 20 मिनट धीमा कर दिया गया जिसकी वजह से अब इस ट्रेन की गति कलानौर से रोहतक के बीच लगभग 13.69 किलोमीटर प्रति घंटा की है जो की एक ई रिक्शा के बराबर है पहले इस रूट पर गोरखधाम एक्सप्रेस भिवानी से रोहतक के बीच 50 मिनट का समय लेती थी आज वह ट्रेन सिर्फ कलानौर से रोहतक के बीच जाने में ही 1 घंटे का समय ले रही है जबकि यह दोनों ट्रेन कलानौर से रोहतक के बीच नॉन स्टॉप है इसी तरीके से पहले हिसार दिल्ली पैसेंजर की जगह चलने वाले सिरसा एक्सप्रेस भिवानी से रोहतक 1 घंटे में पहुंचा देती थी आज हिसार–दिल्ली पैसेंजर कलानौर से रोहतक के बीच ही 52 मिनट का समय ले रही है भिवानी से दिल्ली सुबह 5:05 पर चलने वाली पैसेंजर ट्रेन की जगह चलाई गई तिलक ब्रिज दिल्ली ट्रेन को पहले 5:05 की जगह 5:00 किया गया और उसके बाद उसको 4:50 पर कर दिया गया जबकि उसका दिल्ली पहुंचने का समय वही रहा और अब यात्रियों को पहले के मुकाबले 15 मिनट का और अधिक समय लगने लगा, कुछ ऐसा ही हल किसान एक्सप्रेस,कालिंदी एक्सप्रेस और भिवानी रोहतक रूट पर चलने वाली पैसेंजर ट्रेनों का भी है ।
कोरोना के बाद इस रूट पर पैसेंजर ट्रेनों की समय सारणी ये तरह की गई कि ये ट्रेनें एक्सप्रेस ट्रेनों के पीछे-पीछे चल रही है कुल मिलाकर उनकी प्रासंगिकता कम होती जा रही है जैसे रोहतक से भिवानी के बीच 2:00 बजे पैसेंजर ट्रेन चलती थी जिसमें बहुत से यात्री यात्रा करते थे लेकिन उसकी समय सारणी बदलकर उसे ट्रेन को किसान एक्सप्रेस के बिल्कुल पीछे-पीछे कर दिया गया ऐसे ही भिवानी से शाम को 4:00 बजे रोहतक के लिए पैसेंजर ट्रेन चलती थी उस ट्रेन को हटाकर अब गोरखधाम एक्सप्रेस के पीछे-पीछे कर दिया गया है इसकी वजह से भिवानी से रोहतक के बीच सुबह 10:00 बजे की पैसेंजर ट्रेन के बाद शाम को सीधे 6:33 पर गोरखधाम एक्सप्रेस ही है मतलब 8 घंटे के बीच कोई ट्रेन नहीं है पहले शाम को 4:00 बजे या ट्रेन चलती थी तो कुछ राहत होती थी ।
एक और मुख्य समस्या इन पैसेंजर ट्रेनों का रोहतक से चलने वाली अन्य ट्रेनों के साथ जुड़ाव नहीं होना है कई बार तो पैसेंजर ट्रेन रोहतक आउटर पर खड़ी रहती है और रोहतक से दिल्ली जाने वाली ट्रेन निकल जाती है जबकि भिवानी से चलने वाली पैसेंजर ट्रेनों का रोहतक से दिल्ली जाने वाली ट्रेनों के साथ जुड़ाव होना चाहिए ताकि लोग इन ट्रेनों में दिल्ली तक के सफर की योजना बना सके ।
मुख्य भेदभाव भिवानी से रोहतक दोहरीकरण में हुआ है दोहरीकरण के समय भिवानी से डोभ भाली ब तक का ही दोहरीकरण किया जा रहा है डोभ भाली से रोहतक के बीच के क्षेत्र का दोहरीकरण नहीं किया जा रहा। माना की डोभ भाली से रोहतक के बीच का क्षेत्र उत्तर रेलवे के अंतर्गत आता है और डोभ भाली से भिवानी के बीच का क्षेत्र उत्तर पश्चिम रेलवे के अंतर्गत आता है लेकिन रोहतक से भिवानी पूरा रूट तो भारतीय रेलवे के अंतर्गत ही है इसमें 5 से 7 किलोमीटर के ट्रैक को छोड़ना इस पूरे रूट के साथ भेदभाव है ।
दिल्ली से भिवानी रूट पर चलने वाली मुख्य ट्रेन नई दिल्ली–हिसार पैसेंजर लगातार लेट रहती है यात्रियों ने कई बार इस मुद्दे को रेलवे के समक्ष उठाया लेकिन उस ट्रेन का लेट होना लगातार जारी है उसके स्थान पर पहले चलने वाले सिरसा एक्सप्रेस अपने समय की पाबंदी के लिए जानी जाती थी जिसकी वजह से उसमें अनेकों दैनिक यात्री सफर करते थे ।
आज भिवानी से दैनिक यात्रियों की संख्या लगातार कम होती जा रही है यात्री मजबूर होकर दिल्ली और आसपास के क्षेत्र में महंगे घर लेकर रहने को मजबूर है जिससे दिल्ली और आसपास के क्षेत्र पर जनसंख्या का दबाव भी बढ़ता है और लोगों की जेब भी ढीली हो रही है ।
और यह सब रेलवे की गलत समय सारणी, लगातार धीमी की जा रही ट्रेनें और लेट होती ट्रेनों की वजह से हो रहा है ।
उम्मीद करते हैं कि इस दोहरीकरण के बाद इस रूट पर ट्रेनों की गति सुधारी जा सकेगी और समय सारणी को भी ग्रस्त किया जा सकेगा ।
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