16/12/2025
संक्रमण केवल जातिवाद का नहीं फैला है बल्कि उसके बाद क्षेत्रवाद भी आता है, जो जाट कह रहे कि ब्राह्मणों को हमारे से तकलीफ है या फलाँ हमें देखकर खुश नहीं वे एक बार ध्यान से देख लें
मैं कहता हूँ कि तुम (जाट) औरों के ऊपर आरोप बाद में लगाना पहले ये बताओ कि क्या तुम आपस में एक दूसरे को देखकर खुश हो ..??
उत्तर है कोई किसी को देखकर खुश नहीं, यहां सब को सब से तकलीफ है 😁
ये किसी बागड़ी जाट ने मेरी एक post के ऊपर प्रतिक्रिया दे रखी है कि हम देशवाली एक बागड़ी को आगे निकलता देखकर खुश नहीं 🙄
मतलब एक डिस्कशन को इसने बागड़ी और देशवाली का टच दे दिया, मैंने ढांढा न्यौळीवाळे के बारे में (जैसा मैं सोचता हूँ वैसा) लिखा तो इसने कह दिया कि हमें बागड़ी करके उससे दिक्कत है 😁
इस प्रदेश में यही दिक्कत है, ऐसा ही जब मैं मासूम शर्मा के बारे में लिखता था तो असंख्य ब्राह्मण योद्धा आकर टिप्पणी करते थे कि मासूम शर्मा ब्राह्मण है तो इस करके तुम जाटों को उससे दिक्कत है
मेरे गाँव में जाटों का हमारा दूसरा गोत्र बजाड़ है, मेरी सरपंची के कार्यकाल के दौरान अगर मैं किसी गलत काम में टोका टाकी कर देता था तो वो इक्कट्ठा होकर मेरे ऊपर आरोप लगाते थे कि बजाड़ गोत्र के होने की वजह से तू हमारे खिलाफ काम कर रहा है 😁
कितना आसान है ना इस तरह जाति धर्म क्षेत्र भाषा और गोत्र की आड़ पकड़ लेना ..??
और इस टिप्पणी करने वाले की profile lock है और ID का नाम भी ओरिजनल नहीं है
अब ये बागड़ी बहादुर की मर्दानगी देख लो कि इसे बागड़ी होने पर गर्व भी करना है लेकिन अपनी ओरिजनल आईडी से post पढ़कर इसने कमेंट फेक आईडी से किया 😁
कैसे कैसे नमूने पैदा हो रखे हैं बागड़ में 🙄
मैं इस बागड़ी भाई से पूछना चाहता हूं कि जब समाज की बहु औरतों को कोई सिंगर अपने गाने में पटोला सामान माळ खरबूजा पीलूरा गंडास कहकर बुलाए तो बागड़ में इस बात पर गर्व किया जाता है क्या ..??
और अगर बागड़ी होने की वजह से ही किसी गायक पर गर्व करना है तो फिर गुलजार छानीवाला जब अपनी महबूबा को लाड्डो कहकर गाना गा रहा था तो तब भी तुमने ये सोचकर उसे सामाजिक स्वीकृति दे डाली थी कि गाना गाने वाला अपना बागड़ी भाई है ..??
वाह वाह क्या गजब सोच है
ऐसे बहादुर बागड़ी को तो लाल किले से सम्मानित किया जाना चाहिए
बाकी बागड़वादी भाई ! आप जो भी हो, कमेंट अपनी आईडी से ही किया करो, ताकि सबको पता चले कि आप कोई दब्बू कमजोर व कायर बागड़ी नहीं बल्कि एक बहादुर बागड़ी हो
जैसे जाट के घर से जन्म लेते ही सब अपने आपको देवता समझने लग जाते हैं उसी तरह आप बागड़ में जन्म लेते ही खुद को देवता समझना शुरू कर दो
और देशवालियों को उनकी औकात दिखा दो
वैसे एक बात क्लियर कर दूँ, माईग्रेशन होकर मकड़ौली में हमारे गोत्र (पुनिया) वालों का आगमन बाद में हुआ था और हमारे बुजुर्ग अलग अलग गाँव से होते हुए यहां आए थे, लेकिन चूंकि वे आए थे हिसार की तरफ से ही तो यहां मकड़ौली वाले भी हमें बागड़ी ही कहते हैं 😁
गजबे सिस्टम है सुमित मकड़ौली copi