31/08/2026
हरियाणा निवास में वार्ता या भाजपा कार्यकर्ता की दबंगई? दुर्व्यवहार पर भड़के कर्मचारी, गूंजे सरकार विरोधी नारे
समझौते लागू करने के बजाय सरकार कर रही वार्ता का नाटक, दमन से नहीं टूटेगा कर्मचारियों का हौसला : शास्त्री
चंडीगढ़, 31 अगस्त।
हरियाणा सरकार और पालिका एवं फायर कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल के बीच हरियाणा निवास में चल रही वार्ता उस समय हंगामे में बदल गई, जब भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता राजकुमार वाल्मीकि द्वारा सफाई कर्मचारी यूनियन के नेताओं के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार, अभद्रता और डराने-धमकाने का प्रयास किया गया। इससे नाराज कर्मचारी नेताओं ने हरियाणा निवास में ही जोरदार नारेबाजी कर अपना विरोध दर्ज कराया।
नगरपालिका कर्मचारी संघ, हरियाणा एवं हरियाणा अग्निशमन विभाग कर्मचारी यूनियन ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार समाधान की मेज पर बैठने के बजाय वार्ता का स्वांग रचकर आंदोलन को लंबा खींचने की रणनीति पर चल रही है। एक तरफ बातचीत का दिखावा और दूसरी तरफ कर्मचारियों पर दमन—सरकार की यह दोहरी नीति अब कर्मचारियों के सामने पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है।
संघ नेताओं ने कहा कि सरकार अगर वार्ता के लिए बुलाती है तो फिर अपने ही बुलाए हुए कर्मचारियों के नेताओं को डराने-धमकाने और अपमानित करने की इजाजत किसे दी गई है? क्या हरियाणा निवास अब वार्ता का केंद्र है या सत्ता के दलालों की दबंगई दिखाने का अड्डा?
नगरपालिका कर्मचारी संघ, हरियाणा के राज्य प्रधान नरेश कुमार शास्त्री, महासचिव मांगे राम तिगरा तथा हरियाणा अग्निशमन विभाग कर्मचारी यूनियन के राज्य प्रधान राजेंद्र सिंह और महासचिव गुलशन भारद्वाज ने मुख्यमंत्री से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों को डराने की भूल न करे। जिन कर्मचारियों ने वर्षों तक शहरों की गंदगी उठाकर, सीवर साफ करके और आग के बीच जाकर जनता की सेवा की है, उन्हें धमकाकर आंदोलन से पीछे नहीं हटाया जा सकता।
संघ नेताओं ने कहा कि 13 मई को कर्मचारी संगठनों के साथ किए गए समझौते को लागू करने के बजाय सरकार अब अपने ही वादों से पलट रही है। इससे कर्मचारियों में सरकार के प्रति आक्रोश और अविश्वास लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कच्चे कर्मचारियों को पक्का किए बिना, सफाई एवं सीवर कार्य में ठेका प्रथा समाप्त किए बिना, नए पद सृजित कर रिक्त पदों पर नियमित भर्ती किए बिना तथा शहीद फायर कर्मचारियों रणवीर और भवी चंद शर्मा के परिवारों को न्याय दिए बिना कोई समझौता संभव नहीं है। स्वीकार की जा चुकी मांगों के लिखित आदेश भी तत्काल जारी किए जाएं। संघ नेताओं ने कहा कि सरकार चाहे जितनी बैठकें कर ले, जितने भी दबाव के हथकंडे अपना ले, कर्मचारियों की एकता और संघर्ष को नहीं तोड़ सकती। सरकार के पास दो ही रास्ते हैं—या तो समझौते लागू कर सम्मानजनक समाधान करे, या फिर आंदोलन की आग को और भड़काने की जिम्मेदारी खुद ले।
उन्होंने चेतावनी दी कि कर्मचारियों को डराने-धमकाने, बदनाम करने अथवा पुलिस बल के जरिए लोकतांत्रिक आंदोलन को कुचलने की कोशिश का हर स्तर पर पुरजोर विरोध किया जाएगा।