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01/09/2026

भिवानी में भड़के सफाई कर्मचारी। पुतला दहन के दौरान मौत से भी भयंकर मचाया हाहाकार।
fayar

दलित व पिछड़ा वर्ग का हितैषी बनने वाली सैनी सरकार के राज में 13 महीने से मजदूर कारीगर दर दर की ठोकरे खाने के लिए मजबूर ह...
01/09/2026

दलित व पिछड़ा वर्ग का हितैषी बनने वाली सैनी सरकार के राज में 13 महीने से मजदूर कारीगर दर दर की ठोकरे खाने के लिए मजबूर है।
🥹 बोर्ड में 7000 करोड़ रुपया जमा होने के बावजूद मजदूर कारीगरों की फर्जी बताकर लाभ से वंचित किया जा रहा है।
👉भाजपा नेता सुभाष चंद्रा का 22000 करोड़ का लोन 6.5 करोड़ लेकर माफ किया जा सकता है।

बेदी - सैनी लारे लपे बंद करो, पक्की नौकरी का प्रबंध करो।
01/09/2026

बेदी - सैनी लारे लपे बंद करो, पक्की नौकरी का प्रबंध करो।

भाजपा सरकार की सफाई कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ ग्रामीण सफाई कर्मचारियों का पंचायत मंत्री मतलौडा आवास पर महापड़ाव।
01/09/2026

भाजपा सरकार की सफाई कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ ग्रामीण सफाई कर्मचारियों का पंचायत मंत्री मतलौडा आवास पर महापड़ाव।

निर्माण मजदूरों का आंदोलन अखबारों की नजर से।
01/09/2026

निर्माण मजदूरों का आंदोलन अखबारों की नजर से।

भिवानी से छपी खबर
01/09/2026

भिवानी से छपी खबर

31/08/2026

नगरपालिका कर्मचारी संघ हरियाणा और हरियाणा अग्निशमन विभाग कर्मचारी यूनियन को मीटिंग का न्योता देकर यूनियन नेताओं से बदसलूकी—ये कैसी सरकार की बातचीत?
हरियाणा भवन के अंदर चल रही मीटिंग में सरकार के दलाल नेताओं के दुर्व्यवहार के खिलाफ मुर्दाबाद के नारों से पूरा माहौल गूंज उठा।बातचीत के नाम पर बुलाकर अगर कर्मचारियों के प्रतिनिधियों का अपमान किया जाएगा, तो जवाब भी उसी तेवर में मिलेगा।
यूनियन नेताओं का अपमान—नहीं सहेगा कर्मचारी!
सरकारी दलाली बंद करो!कर्मचारी एकता जिंदाबाद!
इंकलाब जिंदाबाद! ✊🔥

हरियाणा निवास में वार्ता या भाजपा कार्यकर्ता की दबंगई? दुर्व्यवहार पर भड़के कर्मचारी, गूंजे सरकार विरोधी नारेसमझौते लागू...
31/08/2026

हरियाणा निवास में वार्ता या भाजपा कार्यकर्ता की दबंगई? दुर्व्यवहार पर भड़के कर्मचारी, गूंजे सरकार विरोधी नारे

समझौते लागू करने के बजाय सरकार कर रही वार्ता का नाटक, दमन से नहीं टूटेगा कर्मचारियों का हौसला : शास्त्री

चंडीगढ़, 31 अगस्त।
हरियाणा सरकार और पालिका एवं फायर कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल के बीच हरियाणा निवास में चल रही वार्ता उस समय हंगामे में बदल गई, जब भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता राजकुमार वाल्मीकि द्वारा सफाई कर्मचारी यूनियन के नेताओं के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार, अभद्रता और डराने-धमकाने का प्रयास किया गया। इससे नाराज कर्मचारी नेताओं ने हरियाणा निवास में ही जोरदार नारेबाजी कर अपना विरोध दर्ज कराया।
नगरपालिका कर्मचारी संघ, हरियाणा एवं हरियाणा अग्निशमन विभाग कर्मचारी यूनियन ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार समाधान की मेज पर बैठने के बजाय वार्ता का स्वांग रचकर आंदोलन को लंबा खींचने की रणनीति पर चल रही है। एक तरफ बातचीत का दिखावा और दूसरी तरफ कर्मचारियों पर दमन—सरकार की यह दोहरी नीति अब कर्मचारियों के सामने पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है।
संघ नेताओं ने कहा कि सरकार अगर वार्ता के लिए बुलाती है तो फिर अपने ही बुलाए हुए कर्मचारियों के नेताओं को डराने-धमकाने और अपमानित करने की इजाजत किसे दी गई है? क्या हरियाणा निवास अब वार्ता का केंद्र है या सत्ता के दलालों की दबंगई दिखाने का अड्डा?
नगरपालिका कर्मचारी संघ, हरियाणा के राज्य प्रधान नरेश कुमार शास्त्री, महासचिव मांगे राम तिगरा तथा हरियाणा अग्निशमन विभाग कर्मचारी यूनियन के राज्य प्रधान राजेंद्र सिंह और महासचिव गुलशन भारद्वाज ने मुख्यमंत्री से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों को डराने की भूल न करे। जिन कर्मचारियों ने वर्षों तक शहरों की गंदगी उठाकर, सीवर साफ करके और आग के बीच जाकर जनता की सेवा की है, उन्हें धमकाकर आंदोलन से पीछे नहीं हटाया जा सकता।
संघ नेताओं ने कहा कि 13 मई को कर्मचारी संगठनों के साथ किए गए समझौते को लागू करने के बजाय सरकार अब अपने ही वादों से पलट रही है। इससे कर्मचारियों में सरकार के प्रति आक्रोश और अविश्वास लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कच्चे कर्मचारियों को पक्का किए बिना, सफाई एवं सीवर कार्य में ठेका प्रथा समाप्त किए बिना, नए पद सृजित कर रिक्त पदों पर नियमित भर्ती किए बिना तथा शहीद फायर कर्मचारियों रणवीर और भवी चंद शर्मा के परिवारों को न्याय दिए बिना कोई समझौता संभव नहीं है। स्वीकार की जा चुकी मांगों के लिखित आदेश भी तत्काल जारी किए जाएं। संघ नेताओं ने कहा कि सरकार चाहे जितनी बैठकें कर ले, जितने भी दबाव के हथकंडे अपना ले, कर्मचारियों की एकता और संघर्ष को नहीं तोड़ सकती। सरकार के पास दो ही रास्ते हैं—या तो समझौते लागू कर सम्मानजनक समाधान करे, या फिर आंदोलन की आग को और भड़काने की जिम्मेदारी खुद ले।
उन्होंने चेतावनी दी कि कर्मचारियों को डराने-धमकाने, बदनाम करने अथवा पुलिस बल के जरिए लोकतांत्रिक आंदोलन को कुचलने की कोशिश का हर स्तर पर पुरजोर विरोध किया जाएगा।

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