27/10/2025
बेशक पत्रकारिता में कई ऐसे पत्रकार और अखबार हैं जो आरोपी और विक्टिम का धर्म और जाति देख कर तय करते हैं खबर को किस पेज पर छापना है, कितना बड़ा छापना है और आरोपी की फोटो छापना है या उसको छुपा देना है
अक्सर तो भयानक क्राइम को इस तरह की हेडलाइन के साथ छापा जाता है जैसे फलां पर आरोप और जांच जारी, जिससे क्राइम सीरियस न लगे, मगर आरोपी किसी दूसरे धर्म समुदाय का हो तो ऐसी सनसनीखेज खबर बनाई जाती है कि बगैर कंफर्मेशन या किसी प्रोब के, एक दावे की बुनियाद पर इंसीडेंट को नृशंस और आरोपी को नराधम लिख दिया जाता है
और ऐसा माहौल बना दिया जाता है कि कोर्ट में केस जाने से पहले और किसी फैसले या जांच से पहले, उसका क्रिमिनल होना साबित कर दिया जाता है और इस तरह उस खबर से शहर और इलाके में ऐसी नफरत फैला दी जाती है कि उसके घर वाले उसके लिए एक लफ्ज़ भी खुल कर नहीं बोल पाते कि अदालत की क्या जरूरत है अगर तुम बेगुनाही या गुनाहगार साबित होने का मौका ही नहीं दोगे और अपनी मर्जी से किसी बड़े क्रिमिनल के लिए 'आए, गए, हैं और थे' लिख कर इज्जत बढ़ाओगे जबकि दूसरे केस में एक आदमी को सिर्फ दावे की बुनियाद पर ही क्रिमिनल, संदिग्ध और न जाने क्या क्या लिख कर उसके बारे में 'था, आया, गया' लिख कर उसको समाजी तौर पर टारगेट भी करोगे
इंतहा ये है कि हाथ पैर तोड़ देना, पैर में गोली मार देना और इस तरह के एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल और एनकाउंटर को सपोर्ट करते हैं, ये लोग किसी समाज को भी नहीं बचा सकते, ये जाति और धर्म के डिफरेंस के हिसाब से हर इंसीडेंट को देखते हैं और बेहद शर्मनाक बात ये है कि ऐसे लोग मीडिया में भरे पड़े हैं
पहली बात इस दर्जा घटिया लोग हैं कि अपने जाती और धर्म के आदमी क्राइम करेगा तो उस खबर को इस तरह पूछ करेंगे कि वह जिला लेवल पर रह जाए, स्टेट कैपिटल तक पहुंचे भी तो एक कॉलम और न आरोपी की तस्वीर हो, बल्कि सारे सुबूत और लाइव फुटेज होने के बाद भी खबर ही नहीं छापेंगे और दूसरे धर्म का आदमी हो तो उस खबर को इतना सनसनीखेज बना दो कि वह कई दिन फॉलो और देश के संविधान और कानून के खिलाफ जा कर हुई कार्रवाई को जस्टिफाय करेंगे
मध्य प्रदेश में काफी ऐसे रिपोर्टर हैं, कुछ उत्तर प्रदेश में हैं और उन्होंने पत्रकारिता ही नहीं इंसानियत और हर सिविलाइज्ड नॉर्म को तोड़ा है, इनका नाम और लिस्ट अब छापना जरूरी है, सबसे ज्यादा ये हरकत मध्य प्रदेश के दो अखबार करते हैं और इनके अलावा कई राज्यों से प्रकाशित एक और अखबार करता है
ये कहीं किसी टैलेंट को न रखने वाले और नफरत से बजबजाते ज़हन सिर्फ गंदगी फैलाने के माहिर हैं, ये इतनी चालाकी से ऐसी हरकत करते हैं कि पत्रकारिता मेंभी दूसरी बीट पर काम करने वाले धोखा खा जाते हैं और इनकी रिपोर्टिंग को सही मान लेते हैं
Journalism Hall of Shame में इंडक्शन के लिए अब इनका नाम प्रोपोज किया जाएगा ताकि घृणित मानसिकता वाले और समाज को बांटने वाले लोग किस तरह ये हरकतें करते हैं, पता चले, सबसे बड़ा इशू ये है कि ये मुद्दों से भी डायवर्ट करते हैं और लॉ एंड ऑर्डर को ले कर जो खबरें छापते हैं वहां जर्नलिज्म को मिसयूज करते हैं
ये हर केस देखते हैं और इंतजार करते हैं कब इनके मतलब का केस आए, मतलब जिसमें फलां नाम वाला इंसान हो और उसी दिन ये जुनून के साथ, पिल पड़ते है, यानी ये पत्रकारिता में सिर्फ इसलिए आए हैं या लाए गए हैं कि सौ केस देखना और अगर नाम आरोपियों के X कटेगरी के हों तो न्यूज़ इगनोर कर देना, ड्रॉप कर देना या डाइल्यूट कर देना, वरना Y कटेगरी हो तो जांच से पहले ही उसका नाम, फोटो और हेडलाइन में सनसनी बना कर और उसके नाम को इस तरह छाप दो कि अदालत पहुंचने से पहले ही उसका एनकाउंटर हो जाए और मीडिया के बनाए माहौल की वजह से लोग इस को सही सजा कह कर जस्टिफाय करने लगें
आम तौर पर हेडलाइन में सीधे लिख दिया जाता है कि फलां ने मर्डर या बलात्कार किया और खबर के अंदर कहीं कथित लिख दिया जाता है, जांच और सुबूत या अदालत के फैसले से पहले ही लिखा जाता है कि फलां ने रेप किया और गिरफ्तार हुआ, यानी उसका क्राइम से सीधा लिंक बना दिया मगर नाम और सरनेम देख कर उन पर आरोप लिख कर ये बताया जाता है कि ये तो सिर्फ आरोप है, तो ये दोहरा कैरेक्टर हिंदी पत्रकारिता में आम है
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