18/09/2025
1857 की क्रांति के जनक गोंडवाना के अपनी जान समर्पित करने वाले, जिनकी गाथा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। ये थे – गोंड राजा शंकर शाह मरावी और उनके पुत्र कुंवर रघुनाथ शाह।
शंकर शाह गढ़ा-मंडला राज्य के गोंड राजवंश से संबंध रखते थे। अंग्रेजों ने सत्ता छीन ली, पर उनके हृदय में मातृभूमि के प्रति प्रेम और स्वाधीनता की ज्वाला सदा प्रज्वलित रही। उनके पुत्र रघुनाथ शाह बचपन से ही साहसी और क्रांतिकारी विचारों के धनी थे।
1857 की क्रांति जब उत्तर भारत से लेकर मध्य भारत तक फैली, तब शंकर शाह और रघुनाथ शाह ने भी गोंडवाना की जनता को संगठित कर आज़ादी की लड़ाई का बिगुल फूँका। वे कविताओं और गीतों के माध्यम से कहते थे –
"देश की माटी पुकार रही है, अंग्रेजों को खदेड़ो, स्वराज लाओ।"
अंग्रेज इस क्रांतिकारी चेतना से भयभीत हो उठे। उन्होंने षड्यंत्र का आरोप लगाकर दोनों को गिरफ्तार किया। और 18 सितंबर 1857 को जबलपुर में उन्हें तोप के सामने बाँध दिया गया। देखते ही देखते दोनों वीरों का शरीर मिट्टी में मिल गया, परंतु उनका बलिदान अमर हो गया।
आज, 18 सितंबर का दिन हमें यह स्मरण कराता है कि स्वतंत्रता का मार्ग बलिदान से होकर गुजरता है। शंकर शाह और रघुनाथ शाह का जीवन हमें प्रेरणा देता है कि –
"स्वतंत्रता कोई उपहार नहीं, बल्कि त्याग और साहस से अर्जित धरोहर है।"
आइए, हम सब मिलकर इन महान बलिदानियों को शत्-शत् नमन करें और संकल्प लें कि उनके सपनों का भारत – स्वाभिमानी, न्यायपूर्ण और आत्मनिर्भर स्वतंत्र गोंडवाना राज्य हम सब मिलकर बनाएंगे।
जय गोंडवाना!
जोहार गोंडवाना!