26/09/2026
#ट्रेन में सफर करते समय आपने सीट की कुशनिंग पर जरूर ध्यान दिया होगा, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन सीटों के अंदर आखिर रुई क्यों नहीं भरी जाती? दरअसल, भारतीय रेलवे की यात्री ट्रेनों में सीट और बर्थ की कुशनिंग के लिए साधारण रुई की जगह खास तरह के फ्लेक्सिबल लोड-बेयरिंग पॉलीयुरेथेन यानी PU फोम का इस्तेमाल किया जाता है। RDSO यानी रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन ने पैसेंजर कोच की सीट और बर्थ में इस्तेमाल होने वाले PU फोम के लिए बाकायदा तकनीकी मानक तय किए हैं। इन मानकों में कुशन की मजबूती, आराम और आग से संबंधित सुरक्षा जैसी चीजों को शामिल किया गया है।
अब सवाल है कि रुई की जगह फोम ही क्यों? इसकी बड़ी वजह है टिकाऊपन और लगातार इस्तेमाल। ट्रेन की सीटों पर रोजाना बड़ी संख्या में यात्री बैठते हैं, इसलिए कुशनिंग मैटेरियल का बार-बार दबाव सहना और अपनी संरचना को बनाए रखना जरूरी है। वहीं रेलवे की मौजूदा तकनीकी जरूरतों में फोम को सीट और बर्थ के लिए निर्धारित किया गया है। इसके अलावा रेलवे ने कोचों में आग से सुरक्षा को लेकर भी नियम कड़े किए हैं। रेलवे के आधिकारिक दस्तावेज के मुताबिक सीट, बर्थ और उनके कुशनिंग मैटेरियल सहित कई furnishing materials के लिए fire-retardant properties पर जोर दिया गया है और इनकी specifications को समय-समय पर अपग्रेड किया जाता है।
यानी ट्रेन की सीट सिर्फ आराम के लिए बनाई गई कुशन नहीं है, बल्कि उसके पीछे आराम, मजबूती, लंबे समय तक इस्तेमाल और अग्नि सुरक्षा जैसी कई जरूरतों को ध्यान में रखकर मैटेरियल का चयन किया जाता है। RDSO के मानकों में PU फोम के लिए flame spread, smoke और heat release जैसे fire-safety parameters तक निर्धारित किए गए हैं। कुछ कोचों और specifications में PU फोम के अलावा निर्धारित मानकों के अनुरूप अन्य cushioning materials, जैसे silicon foam, का भी प्रावधान मिलता है।