Sifarnama By Shahab Khan

Sifarnama By Shahab Khan ज़हन में मौजूद ख़्यालात और मुल्क और दुनिया के मौजूदा हालात को मज़ामीन, कहानियों और शेर-ओ-शायरी के ज़रिये ज़ाहिर करने की कोशिश का नाम है ''सिफ़रनामा''

ज़हन में मौजूद ख़्यालात और मुल्क और दुनिया के मौजूदा हालात को मज़ामीन (Article), कहानियों (Story)और शेर-ओ-शायरी (Poetry) के ज़रिये ज़ाहिर करने की कोशिश का नाम है ''सिफ़रनामा''।

यहाँ आप पढ़ सकते हैं मुख़्तलिफ़ मौज़ूआत पर लिखे मज़ामीन (Article), ख़्यालात, कहानियाँ (Story), शायरी (Poetry), किताबों पे तब्सरे (Book Review) के साथ और भी बहुत कुछ ...

16/02/2026

मेरी किताब "ग़ज़ा डायरी" पर देश के सबसे भरोसेमंद न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म TheWire.in  में लेख प्रकाशित हुआ था।दिल से शुक्रिया ...
09/02/2026

मेरी किताब "ग़ज़ा डायरी" पर देश के सबसे भरोसेमंद न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म TheWire.in में लेख प्रकाशित हुआ था।
दिल से शुक्रिया The Wire की पूरी टीम का, जिन्होंने मेरी किताब को अपने प्रतिष्ठित प्लेटफॉर्म पर जगह दी।

Gaza Diary - Audio Book Chapter 01ग़ज़ा डायरी - एक बच्ची की जंग, उम्मीद और जज़्बे की कहानी
08/02/2026

Gaza Diary - Audio Book Chapter 01
ग़ज़ा डायरी - एक बच्ची की जंग, उम्मीद और जज़्बे की कहानी


‘ग़ज़ा डायरी’ सिर्फ़ एक किताब नहीं, बल्कि एक ज़िंदा दस्तावेज़ है, उन अनकहे दर्द , उम्मीदों, और सपनों का आईना जो ग़ज़.....

Gaza Diary Audio Book in Hindi/Urdu | ग़ज़ा डायरी - एक बच्ची की जंग, उम्मीद और जज़्बे की कहानी
07/02/2026

Gaza Diary Audio Book in Hindi/Urdu | ग़ज़ा डायरी - एक बच्ची की जंग, उम्मीद और जज़्बे की कहानी

‘ग़ज़ा डायरी’ सिर्फ़ एक किताब नहीं, बल्कि एक ज़िंदा दस्तावेज़ है, उन अनकहे दर्द , उम्मीदों, और सपनों का आईना जो ग़ज़.....

01/02/2026


01/02/2026


सोचिए। अगर उर्दू अदब के दो अज़ीम नाम। मिर्ज़ा ग़ालिब और अल्लामा इक़बाल। एक ही महफ़िल में आमने सामने होते।इश्क़ और फ़लसफ़...
31/01/2026

सोचिए। अगर उर्दू अदब के दो अज़ीम नाम। मिर्ज़ा ग़ालिब और अल्लामा इक़बाल। एक ही महफ़िल में आमने सामने होते।
इश्क़ और फ़लसफ़ा। ख़ुदी और तजुर्बा। शिकायत और इंक़लाब।
यह वीडियो एक ख़याली मुलाक़ात है। जहाँ ग़ालिब की नफ़ासत। और इक़बाल के इंक़लाब की आग। एक दूसरे से बात करती है।
इस पेशकश में आप पाएँगे। उर्दू शायरी का जादू। ख़यालों की टकराहट। और अदब की रूह से निकली आवाज़।
अगर आपको उर्दू शायरी। अदब। और गहरे ख़याल पसंद हैं। तो यह वीडियो आपके लिए है।
#ग़ालिब #इक़बाल

सोचिए। अगर उर्दू अदब के दो अज़ीम नाम। मिर्ज़ा ग़ालिब और अल्लामा इक़बाल। एक ही महफ़िल में आमने सामने होते।इश्क़ और ...

31/01/2026

8 साल पहले मैंने 2018 में ये आर्टिकल (व्यंग्य) लिखा था, क्या पिछले 8 सालों में कुछ हालत बदले हैं?
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रुपया, अर्थव्यवस्था, महंगाई और राजनीति - व्यंग्य
शाम को बाहर घूमने निकला तो देखा कि सामने से दुबला पतला कमज़ोर सा कोई शख्स लड़खड़ाता हुआ चला आ रहा है। क़रीब पहुंचा तो देखा उसकी हालत बहुत ज़्यादा ख़राब थी। थके और लड़खड़ाते क़दमों के साथ वो बड़ी ही मुश्किल से चल पा रहा था। मैंने उससे पूछा भाई कौन हो तुम ? तुम्हारी इतनी बुरी हालत क्यों है ? उसने बिना नज़रें उठाये धीमी और मायूसी से भरी आवाज़ में जवाब दिया ''रुपया'' ।
उसका एक शब्द में दिया जवाब मेरी समझ में नहीं आया मैंने फिर पूछा कौन हो तुम ? तुम्हारा नाम क्या है ?
उसने मायूसी भरी नज़रों से मेरी तरफ देखा और फिर कहा ''में रुपया हूँ'' वही रुपया जिसे हासिल करने के लिए इंसान रात-दिन भाग दौड़ में लगा हुआ है। वही रुपया जिसे ''करेंसी'' भी कहा जाता है।
मैंने कहा सच सच बताओ तुम कौन हो ? तुम रुपया तो हो ही नहीं सकते। तुम बहरूपिये हो जो खुद को रुपया बता रहा है। लोग कहते हैं रुपये में बड़ी ताक़त होती है और तुम्हारी हालत से तो लग रहा जैसे अभी हॉस्पिटल के वेंटीलेटर से उठकर चले आ रहे हो।
मेरी बात सुनकर रुपये के चेहरे की उदासी बढ़ गई। पहले उसने आसमान की तरफ देखा और फिर मुझसे नज़रें मिलते हुए कहने लगा ''मैं बढ़ती महंगाई के बोझ से दबा जा रहा हूँ, मुद्रास्फीति (Inflation) बढ़ने के कारण मेरी हालत पहले जैसी नहीं रही, डॉलर के मुक़ाबले में कमज़ोर होता जा रहा हूँ। ये कहते कहते रुपये का चेहरा रुंआसा सा हो गया।
मैंने कहा सरकार तो विकास के दावे कर रही है लेकिन फिर तुम्हारी हालत इतनी ख़राब क्यों है ?
रुपये ने कहा सरकार की बात मत करो उन्हें तो आदत है ''मन की बात'' करने की, हक़ीक़त में हालत क्या है या तो वो जानना नहीं चाहते या फिर जनता को बताना नहीं चाहते। आओ मेरे साथ तुम्हें हक़ीक़त से रूबरू करवाता हूँ। इतना कहकर मुझे अपने पीछे आने का इशारा किया। रुपये ने धीमे और लड़खड़ाते क़दमों से आगे बढ़ना शुरू किया में भी उसके पीछे पीछे चलने लगा।
थोड़ी दूर चलकर हम एक जगह पहुंचे। वह एक महिला खड़ी हुई थीं, जो देखने में बहुत कमज़ोर लग रही थीं और लाठी के सहारे से खड़ी हुई थीं। उन्हें देखकर मैंने रुपये से पूछा ये कौन है ? रुपये ने कहा इन्हे इन्हे नहीं पहचाना ? ये देश की ''अर्थव्यस्था'' हैं।
मैं अर्थव्यस्था की ऐसी हालत देखकर हैरान हो गया। मैंने कहा ये कैसे हो सकता है ? देश इतनी तरक़्क़ी कर रहा है, लगातार विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है ऐसे में अर्थव्यस्था की हालत ऐसी कैसे हो सकती है ?
अर्थव्यस्था ने जवाब दिया रुपये की क़ीमत लगातार गिरती जा रही है, जीडीपी की दर घटकर 6.2 प्रतिशत हो गई है, ऊपर से कालेधन के कारण लगातार नुकसान झेलना पड़ रहा, लोग बैंक के करोड़ों रुपये खाकर विदेश भाग रहे हैं, नोटबंदी (Demonetization) का सबसे ज़्यादा असर तो मेरे ऊपर ही पड़ा है ऐसे में मेरी ये हालत तो होनी ही थी।
मैंने कहा लेकिन सरकार का कहना है की देश आर्थिक रूप से मज़बूत हुआ है और मीडिया भी यही कह रहा है। अर्थव्यस्था ने जवाब दिया मीडिया और सरकार की बात ही मत करो वो हक़ीक़त नहीं बताएँगे।
अभी हम यह बात कर ही रहे थे की अचानक सामने से काला धुंआ उठने लगा। जब धुंआ छटा तो देखा एक बहुत ही बड़ा और भयानक सा आदमी नज़र आ रहा है, जिसने काले कपडे पहने हैं, उसका चेहरा भी काला है, वो हमारी और देखकर ज़ोर ज़ोर से हस रहा है।
मैने पूछा कौन हो तुम ? उसने जवाब दिया ''कालाधन''। मैंने कहा अच्छा तो तुम ही हो वो कालधन, तुम्हे पता भी है देश में जो ये इतनी सारी परेशानियां हैं उसकी एक बहुत बड़ी वजह तुम भी हो। तुम्हारे ऊपर लगाम लगाकर उन सभी परेशानियों को काफी हद तक काम किया जा सकता है। देश में हुई नोटबंदी (Demonetization) की सबसे बड़ी वजह भी तुम ही थे, नोटबंदी (Demonetization) तुम पर लगाम लगाने के लिए की गई थी और तुम अभी भी आज़ाद घूम रहे हो, तुम्हे पता भी है नोटबंदी (Demonetization) की वजह से देश की आम जनता को कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ा था, लगभग 100 से भी ज़्यादा लोगों की मौत हो गई थी। सब कुछ तुम्हारी वजह से हुआ और तुम्हे इससे कोई खास फ़र्क़ ही नहीं पड़ा।
मेरी बात सुनकर वो मंदमंद मुस्कुराने लगा। उसे मुस्कुराते देखकर मुझे गुस्सा आया और मैंने कहा अच्छा हुआ जो तुम खुद ही सामने आ गए अब तुम्हारी खैर नहीं, अब तुम नहीं बच सकते।
मेरी बात सुनकर कालेधन ने ज़ोरदार ठहाका लगाया और कहने लगा मुझे कौन पकड़ेगा ? अगर मुझे पकड़ना इतना आसान होता तो कब का पकड़ा गया होता, उद्योपति, राजनेता, अधिकारी, सेलेब्रटी सब से मेरी दोस्ती है तुम मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते। इतना कहकर एक और ज़ोरदार ठहाका लगाकर वहां से गायब हो गया। मैंने रूपये और अर्थव्यस्था की तरफ देखा दोनों के चेहरे पर मायूसी थी। अचानक आसमान से बिजली सी गिरी, और उसमे से लम्बे शरीर वाली एक भनायक सी आकृति निकलकर सामने आई, उसे देखते ही रुपया लड़खड़ा सा गया और उसके चेहरे का रंग सफ़ेद हो गया उसके चेहरे पर खौफ नज़र आने लगा।
मैंने भयानक सी आकृति से पूछा तुम कोन हो ? और तुम्हे देखकर रुपया इतना डर क्यों गया है ? उसने जवाब दिया में ''महंगाई'' हूँ, मेरे सामने रुपये की ऐसी हालत तो होनी ही थी। उसे देखकर मेरे सब्र का बांध टूट गया और मैंने कहा तुमने हमारा जीना हराम कर रहा है। हर दिन बढ़ती जाती हो, तुम्हारी वजह से गरीब मर रहे हैं, माध्यम वर्ग के लोग कितने मुश्किल हालात से गुज़र रहे हैं तुम्हें इसका अंदाजा भी है ?
महंगाई ने कहा इसमें मेरा कोई दोष नहीं नहीं है, मेरा तो काम ही लगातार बढ़ते रहना, इसमें मुझे दोष मत दो। तुम्हे क्या लगता है जनता की सारी परेशानियों की वजह सिर्फ मैं हूँ ?
मैंने कहा हाँ। महंगाई ने कहा ये तुम्हारी ग़लतफ़हमी है, हर समस्या पर क़ाबू किया जा सकता है चाहे वो महंगाई, कालाधन, रुपये की कमज़ोरी हो, गिरती अर्थव्यवस्था हो या चाहे कोई भी छोटी बड़ी समस्या हो सब पर काबू किया जा सकता है। मैंने पुछा ऐसे कैसे होगा ? महंगाई ने कहा उसके लिए सही नीतियां बनाकर उनका ईमानदारी से पालन करना होगा, राजनेताओं को हर चीज़ में अपना राजनैतिक फायदा छोड़कर सबसे पहले देश और जनता के फायदे के बारे में सोचना होगा तभी हर समस्या का समाधान होगा।
मैंने कहा बात तो तुम्हारी सही है, रुपये और अर्थव्यस्था ने भी मेरी हाँ में हाँ मिलते हुई अपनी अपनी सहमति जताई।
हम बात कर ही रहे थे की सामने से ''राजनीति'' आती दिखाई दी, उसके पीछे पीछे ''साम्प्रदायिकता'', ''जातिवाद'', ''अवसरवाद'', ''भ्रष्टाचार'' भी चले आ रहे थे। क़रीब आते ही राजनीती ने कहा तुम सब चिंता मत करो मैं हूँ न सब ठीक हो जायेगा। इतनी देर में ''साम्प्रदायिकता'', ''जातिवाद'', ''अवसरवाद'', ''भ्रष्टाचार'' भी राजनीती के कंधे से कन्धा मिलकर खड़े गए।
मैंने रुपये और अर्थव्यस्था की तरफ देखा दोनों के चेहरे पर मायूसी से भरी ख़ामोशी थी, महंगाई की तरफ देखा तो वो और बढ़कर आसमान छू रही थी और राजनीति हमारी और देखकर मंदमंद मुस्कुरा रही थी।
✍️शहाब ख़ान 'सिफ़र'
#व्यंग्य #सिफ़र #रुपया #अर्थव्यवस्था #महंगाई #राजनीति

एक ख़्याल: सोचिए, अगर उर्दू अदब के दो अज़ीम शायर, मिर्ज़ा  #ग़ालिब और अल्लामा  #इक़बाल की मुलाक़ात होती तो क्या होता? इस...
27/12/2025

एक ख़्याल: सोचिए, अगर उर्दू अदब के दो अज़ीम शायर, मिर्ज़ा #ग़ालिब और अल्लामा #इक़बाल की मुलाक़ात होती तो क्या होता? इस वीडियो में हम आपको एक ख़याली मुलाक़ात के ज़रिए इन दोनों शायरों की शायरी, उनके ख़यालात और उनकी शख़्सियत का जादू पेश करने की कोशिश कर रहे हैं।

Ek Khyal : Sochiye, agar Urdu Adab ke do Azeem Shayar, Mirza Ghalib aur Allama Iqbal ki Mulaqat hoti to kya hota? Is video mein hum aapko ek Khyali Mulaqat k...

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