Vijay mat

Vijay mat *मप्र-छत्तीसगढ़ से प्रकाशित
*दैनिक समाचार पत्र समूह *

28/03/2026

फेसबुक पर vijay mat पेज को फॉलो करेंगे तो रोचक वीडियो, न्यूज़ देखने को मिलेगी।

27/03/2026

*शहडोल की चम्बल पर ऐतिहासिक जीत*
MPCA एसएम खान अंडर 18 वनडे डिवीजन क्रिकेट टूर्नामेंट में शहडोल ने चम्बल को 10 विकेट से पराजित कर इतिहास रचा।
शिवसागर यादव 93* और अविनाश सिंह ने बनाए 65 * रन ।

27/03/2026

अर्ज किया है -

हम सच्चे दोस्त हैं व्यापारी नहीं,
रिश्तों की करते खरीदारी नहीं,
हर हाल में सीखा है खुश रहना,
भरोसा है तो करेंगे गद्दारी नहीं।
(2)
दोस्ती तुमसे है रुतबे से नहीं,
रूतबे से मेरी होती यारी नहीं,
न जाने रुतबेदार हैं कितने देखे,
हम तो दरबार के दरबारी नहीं।
(3)
यकीन मानिए "अजेय"यकी है अगर ,
हॉर्मुज में रुक जाएं वो जहाज नहीं,
चलते है सीना तान हो बेफिक्र कहीं,
किसी फायदे के हम मोहताज नहीं।।
- विजय शुक्ला ' अजेय'

26/03/2026

राहुल गांधी ने जब पूछा- मप्र के सीएम Dr Mohan Yadav कैसा कर रहे हैं ? कांग्रेस दिग्गजों ने जो कहा उसे सुन दंग रह गए । 2028 के चुनाव में भाजपा का चेहरा कौन ?
CM Madhya Pradesh PMO India
Report by Vijay Shukla

28/02/2026

बड़ी खबर
मप्र में निगम मण्डलों पर नियुक्तियों का मामला फ़िलहाल टला। बीजेपी अध्यक्ष बोले- जल्दबाज़ी किस बात की

27/02/2026

कोर्ट द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal को क्लीन चिट मिलने पर मप्र कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री ने दिया बड़ा बयान

20/02/2026

Former indian cricketer Rajesh Chauhan best Advise

पूर्व भारतीय क्रिकेटर राजेश चौहान ने सचिन,धोनी के बारे में कही बड़ी बात  https://youtu.be/DTQGoBnb2ag?si=KzVkdAsgusX7QCF6...
20/02/2026

पूर्व भारतीय क्रिकेटर राजेश चौहान ने सचिन,धोनी के बारे में कही बड़ी बात
https://youtu.be/DTQGoBnb2ag?si=KzVkdAsgusX7QCF6

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14/02/2026

क्रिकेट खेल ही कुछ ऐसा है ...
*Chief secretory Of MP Anurag jain enjoying cricket*
मप्र के मुख्य सचिव का अंदाज जरा हटकर
CM Madhya Pradesh Jyotiraditya M Scindia PMO India Rohit Sharma IAS Association

14/02/2026

मनीष सिंह को पुनः जनसम्पर्क आयुक्त क्यों बनाया ?

- चुनावों में अखबारों की निर्णायक भूमिका बढ़ेगी, एआई ने घटाई इलेक्ट्रॉनिक, सोशल मीडिया की साख

विजय शुक्ला,भोपाल। राज्य सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर व्यापक फेरबदल करते हुए कई आईएएस अधिकारियों को नई जिम्मेदारियाँ सौंपी हैं। इस कदम को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर अहम माना जा रहा है। क्योंकि वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले मप्र में त्रिस्तरीय पंचायतों के चुनावों की कड़ी परीक्षा से मोहन सरकार को गुजरना पड़ेगा। इस लिहाज से सरकार की जनता में लोकप्रियता बढाने पर खास ध्यान देने की आवश्यकता होगी। और इस कार्य को अंजाम देने के लिए मुख्यमंत्री को तीसरी बार जनसम्पर्क विभाग में बड़ा परिवर्तन करना पड़ा क्योंकि निवर्तमान आयुक्त दीपक सक्सेना मुख्यमंत्री की कसौटियों पर खरा नहीं उतर पा रहे थे। अंततः मुख्यमंत्री ने दो बार आयुक्त रह चुके वरिष्ठ आईएएस अफसर मनीष सिंह को इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए चुना है। बतौर आयुक्त मनीष सिंह का कार्यकाल थोड़ा सख्त जरूर रहा लेकिन सरकार को इससे फायदा भी मिला । उन्होंने हर कसौटी पर खुद को खरा साबित करके दिखाया है इसीलिए उन्हें मुख्यमंत्री पुनः जनसम्पर्क विभाग लेकर आए हैं। दरअसल, जनसंपर्क विभाग मुख्यतः मुख्यमंत्री, जनता और मीडिया के बीच समन्वय स्थापित करने वाला एक अहम विभाग होता है। समाचार पत्र के मालिकों एवं पत्रकारों से तालमेल बनाकर चलना एक चुनौती भरा कार्य होता है। क्योंकि मीडिया किसी भी सरकार की छवि को बनाने और मिटाने की बड़ी कड़ी होता है। दोनो ही मामलों में मनीष सिंह काफी निपुण हैं। पिछले दो साल से मुख्यमंत्री मोहन यादव जनसम्पर्क आयुक्त पद पर अपनी पसंद के अफसर लेकर अवश्य आये लेकिन असन्तुष्ट रहे। कहा जाता है कि अपने छात्र जीवन के साथी रहे जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना को जिन अपेक्षाओं के साथ जनसम्पर्क लेकर आये उनसे भी निराशा ही हाथ लगी हालांकि लगातार किये गए परिवर्तनों से जनसम्पर्क विभाग के मातहत कर्मचारी अधिकारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। उनकी निष्ठा पर प्रश्नचिन्ह उठाये गए। कईयों को इधर से उधर किया गया।
मीडिया खुश रहे यह हर सरकार की कोशिश होती है। इसलिए मीडिया के विज्ञापनों के लिए सरकार बजट में प्रावधान करती है। एआई और दीपफेक जैसे सोशल प्लेटफार्म की गिरती विश्वनीयता को देखते हुए प्रिंट मीडिया यानी अखबारों की भूमिका अब हर तरह के चुनावों में बड़ी खास हो गई है। इसलिए इसे साधकर चलना होगा। जिले से प्रकाशित अखबारों पर सरकार को विशेष फोकस करके चलना चाहिए। क्योंकि ग्रामीण अंचलों में इनकी पकड़ ज्यादा असरदार होती है। इसके दो प्रमुख कारण हैं। पहला ज़्यादातर मध्यम अखबार के दाम सस्ते होने से लोग इन्हें ख़रीद लेते हैं जबकि 200-300 रुपये प्रतिमाह वाले अखबारों को नहीं खरीद पाते। दूसरा बड़े अखबारों को सरकार मैनेज करके चलती है जिससे उन पर लोगों को भरोसा भी कम होता है।
क्यों हटाये गए दीपक सक्सेना ?
दीपक सक्सेना एक सुलझे हुए अच्छे अफसरों में गिने जाते हैं। जबलपुर कलेक्टर रहते फीस वृद्धि को लेकर प्रायवेट स्कूलों के विरुद्ध की गई उनकी कार्रवाई से वे चर्चा में आये। लोगों ने उनके कदम की सराहना की। पहली बार किसी कलेक्टर ने निजी स्कूलों की दादागिरी पर शिकंजा कसा। उन्हें इसका ईनाम मोहन यादव ने दिया और जनसम्पर्क आयुक्त बनाकर भोपाल ले आये। लेकिन यहां सक्सेना ने मीडिया की वर्किंग को समझने में भूल कर दी। मुख्यमंत्री की ब्रांडिंग के लिए जारी होने वाले विज्ञापनों में बढ़ोतरी की जगह कटौती शुरू कर दी गई। अखबारों को विज्ञापन के बदले इम्पेक्ट फीचर्स छापने की शर्त रख दी गई और गिने चुने अखबारों और न्यूज़ चैनलों को ही ऑब्लाइज किया जाने लगा। जबकि जनसम्पर्क विभाग की स्थापना ही इस उद्देश्य से हुई है कि सरकार की योजनाओं का प्रचार प्रसार प्रभावी तरीके से किया जाए। जाहिर है अखबारों को विज्ञापन देकर जनता में सरकार की छवि गढ़ी जा सकती है। विपक्ष ने भले ही पूर्ववर्ती शिवराज सरकार को विज्ञापन वाली सरकार कहा लेकिन यह भी सच है कि उन्ही विज्ञापनों के जरिये किये गए प्रचार प्रसार की बदौलत भाजपा पिछले 28 वर्षों से मप्र की सत्ता पर काबिज है। सरकार कितना भी अच्छा काम करे जब तक अखबारों में उसका प्रचार प्रसार नहीं किया जाएगा लोगों को उसका पता कैसे चलेगा। दीपक सक्सेना ने जनसम्पर्क को आयुक्त की जगह किसी जिला कलेक्टर बनकर चलाने की मानसिकता को ज्यादा तवज्जो दी। विज्ञापनों के बजट में कटौती करने की सोच अपनाई। जिससे सरकार का प्रचार प्रसार घटने लगा उल्टा खूफिया तौर पर निगेटिव रिपोर्ट आने लगी। बताते हैं कि विज्ञापन की जगह इम्पेक्ट फीचर विज्ञापन छपवाने की बात अखबारों को नागवार लगी। लाइकिंग / डिस्लाईकिंग के चक्कर मे उनकी कार्यशैली पर सवाल उठने लगे। भाजपा संगठन के सुझावों को दीपक सक्सेना कम तरजीह देते थे इसकी शिकायत भी मुख्यमंत्री तक पहुंचाई गई। क्योंकि सत्ताधारी दल भाजपा संगठन में मीडिया प्रभारी के सुझाव जनसम्पर्क विभाग के लिए अहमियत रखते हैं। अंततः चारो ओर से मुख्यमंत्री को मिल रही नाराजगी को देखते हुए मुख्यमंत्री को नया जनसम्पर्क आयुक्त लाने को विवश होना पड़ा। बहरहाल, दीपक सक्सेना को उनकी साफ सुथरी छवि के कारण मुख्यमंत्री ने आबकारी आयुक्त बनाया है।
जबकि संदीप यादव को वन विभाग का प्रमुख सचिव बनाया गया है।
स्वास्थ्य विभाग की कमान एसीएस अशोक वर्णवाल संभालेंगे। सहकारिता क्षेत्र में अभिजीत अग्रवाल को मार्कफेड का प्रबंध संचालक नियुक्त किया गया है।
राजभवन से वापस बुलाए गए उमाशंकर भार्गव को कृषि विभाग में अहम जिम्मेदारी दी गई है, जिसे कृषि सुधार और उत्पादकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ऊर्जा क्षेत्र में अजय गुप्ता को जबलपुर विद्युत कंपनी का नया प्रबंध निदेशक बनाया गया है।
इसके अलावा, लंबे समय से रिक्त पड़े जिला पंचायतों के सीईओ पदों पर भी पदस्थापना की गई है, जिससे जमीनी स्तर पर विकास कार्यों में गति आने की उम्मीद है। सम्भव है अगले दिनों में प्रशासनिक फेरबदल की नई लिस्ट और आये।
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