Abhyuday MP

Abhyuday MP अभ्युदय — संस्कृति प्रदेश की, पहचान हम सभी की।

23/09/2026

मध्य प्रदेश में एक ऐसा Dance है…
जहां लोग सिर्फ नाचते नहीं, बल्कि प्रकृति, खेती और Community Life को Celebrate करते हैं।

नाम है — करमा नृत्य।

Gond और Baiga जैसे आदिवासी समुदायों की परंपराओं से जुड़ा करमा नृत्य सिर्फ एक Folk Dance नहीं है।

इसमें Karam वृक्ष और उससे जुड़े अनुष्ठानों का खास महत्व माना जाता है।

कई जगह लोग पेड़ के आसपास गोल घेरा बनाकर, ढोल और पारंपरिक वाद्यों की ताल पर एक साथ नाचते हैं।

और इसकी सबसे दिलचस्प बात?

यहां कोई एक Main Character नहीं होता।

पूरा Community ही Dance Floor पर होता है।

मध्य प्रदेश के बैतूल सहित कई आदिवासी इलाकों में करमा नृत्य शादी और दूसरे सामाजिक अवसरों से भी जुड़ा दिखाई देता है, जहां गीत और नृत्य लोगों के बीच संवाद और Community Bonding का माध्यम बनते हैं।

आज हम Festivals में Friends के साथ Circle बनाकर Vibe करते हैं…

लेकिन करमा में यही Collective Celebration पीढ़ियों से चली आ रही है।

इसलिए अगली बार जब करमा नृत्य देखें…
सिर्फ Steps मत देखिए।

उस पेड़ को देखिए।
उस ताल को सुनिए।
और उस Community Connection को महसूस कीजिए।

क्योंकि यहां Dance सिर्फ Performance नहीं…
प्रकृति के साथ मिलकर Celebrate करने का तरीका है।

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#करमानृत्य

22/09/2026

आज कोई कहानी याद रखनी हो तो हम उसे Cloud, Drive या Phone में Save कर लेते हैं…

लेकिन जब किताबें और Internet नहीं थे, तब बुंदेलखंड अपनी History कैसे Save करता था? 🎙️

जवाब है — आल्हा।

आल्हा सिर्फ एक Folk Song नहीं, बल्कि Bundelkhand की एक समृद्ध Oral Epic Tradition है, जिसमें वीर योद्धाओं आल्हा और ऊदल की गाथाएं पीढ़ी-दर-पीढ़ी गाई जाती रही हैं।

इन कथाओं में युद्ध है, वीरता है, दोस्ती है, संघर्ष है और बदले की कहानियां भी हैं।

लेकिन सबसे दिलचस्प बात ये है कि इतनी लंबी गाथाएं सदियों तक बची कैसे रहीं?

क्योंकि इन्हें सिर्फ कागज़ पर नहीं…
आवाज़ में Save किया गया।

आल्हा गायक सिर्फ गीत नहीं गाता।
अपने सुर, लय और शब्दों से वह पूरी कहानी को फिर से जीवंत कर देता है।

आज हम Podcast और Audiobook में Stories सुनते हैं…
लेकिन Bundelkhand में आवाज़ सदियों से एक Living Archive की तरह काम करती रही है।

इसलिए अगली बार जब कहीं आल्हा गायन सुनें, तो उसे सिर्फ लोकगीत मत समझिए।

ये उस दौर का Story Archive है…
जहां किताबें कम थीं, लेकिन यादें कमजोर नहीं थीं।

ऐसी ही मध्य प्रदेश और भारत की अनसुनी परंपराओं को Decode करने के लिए जुड़े रहिए के साथ। 🔍

#आल्हा

22/09/2026

मध्य प्रदेश में Holi से पहले शुरू होता है एक ऐसा Festival… जहां रंग सिर्फ गुलाल के नहीं, बल्कि परंपरा, संगीत और आदिवासी संस्कृति के भी होते हैं। 🌈🥁

ये है — भगोरिया।

झाबुआ, अलीराजपुर, धार और आसपास के इलाकों में लगने वाले भगोरिया हाट, Bhil और Bhilala communities की जीवंत संस्कृति का बड़ा हिस्सा हैं।

यहां ढोल और मांदल की थाप है…
रंग-बिरंगे पारंपरिक कपड़े हैं…
Silver Jewellery की चमक है…
व्यापार है, मेल-मिलाप है और पूरा Community Celebration है।

लेकिन भगोरिया की कहानी यहीं खत्म नहीं होती।

लंबे समय से इसे युवाओं के मिलने-जुलने और साथी चुनने से जुड़ी स्थानीय परंपराओं के लिए भी जाना जाता रहा है। कुछ प्रचलित वर्णनों में गुलाल लगाकर पसंद जताने की परंपरा का भी उल्लेख मिलता है।

यानी आज Social Media और Dating Apps लोगों को connect करते हैं… लेकिन इस tribal culture में सदियों से अपना एक traditional social space मौजूद रहा है।

इसलिए भगोरिया को सिर्फ “Holi से पहले लगने वाला मेला” समझना इसकी कहानी का सिर्फ एक हिस्सा जानना है।

भगोरिया सिर्फ Festival नहीं… MP की Living Tribal Culture है।

तो अगली बार कोई पूछे —
“भगोरिया मतलब बस Holi?”

कहना…
नहीं भाई, इसकी कहानी Decode करनी पड़ेगी! 🔍

आपने कभी भगोरिया देखा है? 👇

#भगोरिया

16/09/2026

उज्जैन… जहां महाकाल की आस्था के साथ सदियों पुरानी ज्ञान और विचार की परंपरा भी जीवित है।

अब इसी नगरी के नवनिर्मित गीता भवन में देशभर के युवा एक नए वैचारिक मंथन के लिए जुटने जा रहे हैं—‘युवा धर्म संसद’।

17 से 19 सितंबर तक आयोजित इस संवाद में धर्म को केवल पूजा-पद्धति तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन, समाज, जिम्मेदारी और बदलते समय के सवालों के संदर्भ में समझने की कोशिश होगी।

और 18 सितंबर को सुबह 11 बजे RSS के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत इसी मंच से युवाओं से संवाद करेंगे।

सवाल सिर्फ यह नहीं कि मंच से क्या कहा जाएगा…
असली बात यह है कि आज का युवा क्या पूछना चाहता है?

क्या गीता भवन उज्जैन की प्राचीन विचार-मंथन परंपरा को 21वीं सदी में एक नया मंच देने जा रहा है?

देखिए Abhyuday की यह खास कहानी।

MadhyaPradesh AbhyudayMP UjjainNews

16/09/2026

मध्य प्रदेश में एक ऐसा महल है, जिसकी दीवारें सीधी नहीं… बल्कि बाहर की ओर झुकी हुई हैं। 😮

ये है मांडू का Hindola Mahal — यानी “झूलता हुआ महल”।

पहली नजर में इसकी करीब 77° पर झुकी massive walls सिर्फ एक architectural style लग सकती हैं, लेकिन इनके पीछे छिपी थी उस दौर की शानदार engineering.

इन sloping walls और massive buttresses ने ऊपर बने भारी arches और roof का pressure संभालने में मदद की।

यानी 600 साल पहले, बिना किसी computer simulation के, architects ने stone, weight, balance और structural support को इतनी precision से समझा कि Hindola Mahal आज भी खड़ा है।

इसके विशाल hall का इस्तेमाल संभवतः शाही audience hall के रूप में किया जाता था।

तो सवाल सिर्फ ये नहीं कि—
“Hindola Mahal झुका हुआ क्यों है?”

असल सवाल है—
“इतना झुकाकर भी इसे सदियों तक खड़ा कैसे रखा गया?”

क्योंकि मांडू में Architecture सिर्फ खूबसूरत नहीं था…
काफी Smart भी था।

MPHistory IndianArchitecture HeritageOfMP IncredibleIndia

14/09/2026

बालाघाट की Health Emergency के बीच सबसे बड़ा सवाल क्या है—स्वास्थ्य व्यवस्था या Viral Politics?

आदिवासी इलाकों में संक्रमण और मलेरिया के मामलों के बीच बच्चों की मौत की खबरों ने गंभीर चिंता पैदा की है। मामला इतना गंभीर हुआ कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने Health Department, Women & Child Development Department और Balaghat Collector से जवाब मांगा।

इसी दौरान CJP Founder Abhijit Dipke के बालाघाट दौरे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में आया। प्रभावित गांवों तक Social Media Influencers की मौजूदगी और उनकी Timing को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। क्या यह सिर्फ संयोग था, या दौरे की जानकारी पहले से साझा थी? हम कोई आरोप नहीं लगा रहे—सिर्फ सवाल पूछ रहे हैं।

इसके बाद Abhijit Dipke द्वारा “Satire” के रूप में शेयर किए गए कथित CM resignation letter पर भी बहस छिड़ी। सरकार की आलोचना करना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन जब किसी संवैधानिक पद से जुड़ा Letterhead और resignation-style presentation इस्तेमाल हो, तो सवाल यह भी है—क्या Satire इतना स्पष्ट होना चाहिए कि किसी तरह का भ्रम न पैदा हो?

बालाघाट के असली मुद्दे—आदिवासी परिवारों की स्थिति, स्वास्थ्य सेवाएं, बच्चों की मौत और प्रशासनिक जवाबदेही—कहीं Viral Content और Political Publicity के पीछे तो नहीं छूट रहे?

इसका जवाब जरूर मिलना चाहिए, Abhijit Bhai।

12/09/2026

अभी Theatre में ‘हनुमान अंश’ की चर्चा है…
और इसी बीच उज्जैन से हनुमान जी से जुड़ी एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया है। 🚩

सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत कंठाल चौराहे से छत्री चौक तक Road Widening का काम चल रहा है।

इसी दायरे में करीब 170 साल पुराना खड़े हनुमान जी का मंदिर भी आया।

मंदिर का Structure हटाया गया…
करीब 8 फीट ऊंची हनुमान जी की प्रतिमा को Shift करने के लिए Crane और Machines तक लगाई गईं…

लेकिन कई Attempts के बाद भी प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली।

अब श्रद्धालु इसे आस्था और चमत्कार से जोड़कर देख रहे हैं। 🙏

लेकिन सवाल है—

क्या इसके पीछे कोई Technical Challenge है?
या फिर ये आस्था से जुड़ी कोई ऐसी कहानी है, जिसे लोग आज भी महसूस करते हैं?

एक तरफ Theatre में हनुमान जी की कहानी…
और दूसरी तरफ उज्जैन में अपनी जगह पर खड़े हनुमान जी।

इसे आप संयोग कहिए…
या आस्था का संकेत।

आप क्या मानते हैं? Comment में बताइए।

11/09/2026

गंज बासौदा के नन्हे कलाकार सात्विक शर्मा ने अपनी प्रतिभा से बनाई खास पहचान

भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गंज बासौदा के बाल कलाकार सात्विक शर्मा से आत्मीय मुलाकात की।

सात्विक ने नीम करोली बाबा की कहानी पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ में शुभंकर का किरदार निभाकर अपने शानदार अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया है। इतनी कम उम्र में अभिनय के प्रति उनका समर्पण और प्रतिभा निश्चित रूप से प्रशंसनीय है। 🌟

🎥 देखिए सात्विक शर्मा की मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से खास मुलाकात।

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11/09/2026

आज Tattoo Fashion है… लेकिन कभी यही शरीर पर लिखी हुई Identity, Tradition और Life Story हुआ करती थी। ✨

मध्य प्रदेश की Baiga, Gond, Bharia और Sahariya जैसी जनजातीय communities में गोदना की परंपरा रही है।

हर design सिर्फ decoration नहीं था।
कहीं motifs प्रकृति से जुड़े थे, तो कहीं जीवन के अलग-अलग पड़ावों—यौवन, विवाह और मातृत्व—से।

Baiga परंपरा में तो यह विश्वास भी मिलता है कि शरीर पर बने ये गोदना ऐसे आभूषण हैं, जो मृत्यु के बाद भी व्यक्ति का साथ नहीं छोड़ते।

लेकिन बदलते समय के साथ ये परंपरा कई जगह धीरे-धीरे कम होती जा रही है।

इसलिए अगली बार किसी Tribal Tattoo को देखें, तो उसे सिर्फ Ink और Pattern मत समझिए…

वो एक Community की पहचान हो सकती है।
एक जीवन की कहानी।
और मध्य प्रदेश की Living Heritage।

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