27/01/2019
मैनें तो कुछ ही पन्ने लिखे है तुम्हारे बारे में,
तुम मुझपे पुरी किताब लिखो ।
लिखो कि कैसे शराब पी ।
लिखो कि कैसे वो वादे तोडे ।
लिखो कि कैसे यु अपने छोडे ।
लिखो कि कैसे चला था रतन ।
लिखो कि कैसे जला था रतन ।
लिखो कि कैसे वो चुप रहा ।
लिखो कि अंधेरा भी गुप रहा ।
मगर ये लिखने के वास्ते,
तुम्हे भी जलना पडेगा जाना ।
मेरी तरह जी कर मरना पडेगा जाना ।
मगर ये तुमसे कभी भी लेकिन
ना हो सका है ! ना हो सकेगा।
इसलिए जाना तुम छोडो सवाल सारे,
और बस अपना जवाब सुनो।
कौन हु मै?
कोई पुछेगा मेरा सजरा तो,
घर वालों का मुनिद हु मै ।
कभी लटका था जो सुली पर,
उस अल- हक का जुनुन हु मै ।
कभी दे दु जवाब सारे,
तो कभी सवालेबदुन हु मै ।
कभी चिखु भङक-भङक कर
तो कभी सरापा सुकुन हु मै।
कभी मै जीत लु जमाना सारा,
तो कभी हारा हुआ एक शक्श हु मै ।
कभी मै पढ लु किताबें सारी
तो कभी पढा लिखा सा अनपढ हु मै।
कभी पुज लु मै भगवान सारे
तो कभी एक नास्तिक हु मै ।
कभी हु मै पागल सा आशिक,
तो कभी एक समझदार हु मै ।
सुन लिया ना जाना कौन हु मै ।
अगर अभी भी शक है मुझ पर
की कौन हु मै !
तो जमाना कह रहा है सारा इस जमाने का बागी हु मै ।
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