24/04/2015
समानता का अधिकार (अनुछेद १४ -१८)
भारतीय संविधान में भारतीय नागरिको को कुछ मुलभुत अधिकार प्रदान किये गये है। यह मुलभुत अधिकार आम से ले कर खास सभी को प्रदान किये गये है । इन मुलभुत अधिकारों की रक्षा भारतीय उच्च न्यायालय करता है तथा ये अधिकार किसी व्यक्ति से छीने नही जा सकते है । इनमे से एक अधिकार है समानता का अधिकार …………
अब मैं आता हु अपनी बात पर की क्या सच में समानता सभी को मिलती है ?????? जरा सोचिए की क्या आप को कभी असमानता का सामना नही करना पड़ा ???? क्या आपको हमेशा समानता ही मिली है???? आपके घर में, स्कूल में, समाज में, ऑफिस में, सड़क पर, मॉल में, मंदिर में, मस्जिद में, गुरूद्वारे में,चर्च में, बाजार में या फिर ऐसी कोई भी सार्वजनिक या निजी संपत्ति पर जिसका आप उपयोग करते हो???
सबसे पहले हम बात करते है घर की। भारत में आज भी कई इलाके ऐसे है जहा लड़कियों को लड़को से कमतर आकते है। घर में अगर लड़की पैदा होती है तो जश्न नही मनाया जाता, मिठाई नही बाटी जाती, ढोल नगाड़े नही बजाये जाते क्यों ?? अगर घर में एक लड़का और एक लड़की है तो लड़की को ज्यादा तवज्जो नही दी जाती क्यों?? लड़का अच्छे स्कूल में पढ़ता है और लड़की एक आम स्कूल में क्यों??
अब हम बात करते है भारतीय समाज की। भारतीय समाज में तीन वर्ग है एक अमीर वर्ग, दूसरा मध्यम वर्ग और तीसरा गरीब वर्ग या निचला वर्ग। भारत में अमीर और भी ज्यादा अमीर होते जा रहा है और गरीब सड़को पर आता जा रहा है, गरीबो के पास खाने के लिए खाना और पीने के लिए पानी नही है और सरकार उद्योगपतियो के लिए टैक्स में छूट दे रही है, क्या यहाँ समानता हुई ??????
सड़क पर अगर कोई विशिष्ट व्यक्ति आता है तो आम लोगो को रुकना पड़ता है। धार्मिक स्थानो पर वीआईपी दर्शन के लिए अलग लाइन होती है। शायद भगवान, खुदा, गॉड ने भी वीआईपी और आम लोगो को अलग अलग बनाया है ????? किसी भी धर्म के संत को टैक्स नही लगता है। न्यायलय में किसी खास व्यक्ति के केस की सुनवाई कितनी भी समय के लिए तल सकती है, किंतु आम इंसान की नही। सरकारी काम बिना किसी रिश्वत के नही होते है। सरकार जो मुआवजा देती है उसका पचास प्रतिशत ही पहुचता है।
हम सोचते है जैसा चल रहा है चलने दो, हमारा काम तो निकल रहा है न बस। इसी काम निकलने के चक्कर में एक दिन हम ही निकल जाते है और हमारा अस्तित्व समाप्त हो जाता है।
अरे बबुआ हम तनिक पगला गया है, हम अब्बभहि विचार किये की हम सब ये जो ऊपर बोलो है ना उ सबही रांग है। ई भारत देस में जो हम बोला है ना येच्च ही समानता है। जी हमका तनिक माफ़ी दे दीजिएगा, कोरट में केस नाही करियो। उ का है न हम थोड़ा पगला गया है, हमार दिमाक्वा एक जगह नाही है।
( ये विचार Team के है, अगर आपको इस पर कोई भी आपत्ति है तो आप हमे इनबॉक्स करके बता सकते है, हम आपकी आपत्ति पर उचित निर्णय लेंगे , धन्यवाद )
(*Parts of artwork have been borrowed from the internet, with due thanks to the owner of the photograph/art)