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16/08/2026

प्रतिदिन विचार

16 08 2026 - राकेश दुबे



नया क्षेत्र : ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स



एआई के बाद अब फिजिकल एआई की दुनिया में युवाओं के लिए नए-नए अवसर खुल रहे हैं। ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स ऐसा ही तेजी से उभरता हुआ कैरियर क्षेत्र है, जिसमें मैकेनिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर साइंस, एआई और मशीन लर्निंग के विषय शामिल हैं। इस फील्ड के पेशेवरों के लिए स्वास्थ्य, रक्षा, उद्योग, शिक्षा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में अवसर बढ़ रहे हैं। इस बहुआयामी कार्यक्षेत्र में सफल होना है तो तकनीकी डिग्री के साथ प्रोग्रामिंग, रोबोटिक्स प्रोजेक्ट और व्यावहारिक कौशल विकसित करना आवश्यक है।

कल्पना कीजिए कि आपके सामने एक ऐसी मशीन खड़ी है जो न केवल आपकी बात समझती है, बल्कि इंसान की तरह चल सकती है, वस्तुओं को पहचान सकती है, निर्णय ले सकती है और अपने हाथों से कई तरह के काम भी कर सकती है। कुछ वर्ष पहले तक यह दृश्य केवल विज्ञान कथाओं और फिल्मों तक सीमित था, लेकिन आज यह तेजी से वास्तविकता का रूप ले रहा है। इसी तकनीक का नाम है—ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स।

ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स किसी एक विषय का नाम नहीं है। यह मैकेनिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, कंप्यूटर विज़न और कंट्रोल सिस्टम जैसी अनेक तकनीकों का संगम है। इस क्षेत्र में विभिन्न विषयों के विद्यार्थियों के लिए अवसर मौजूद हैं। एआई के बढ़ते प्रभाव के साथ अब ऐसी मशीनों के विकास पर तेजी से काम हो रहा है, जो केवल आदेशों का पालन न करें, बल्कि अपने आसपास के वातावरण को समझकर परिस्थितियों के अनुसार निर्णय भी ले सकें। स्वास्थ्य सेवाओं, उद्योगों, शिक्षा, रक्षा, आपदा प्रबंधन, अंतरिक्ष अनुसंधान और घरेलू कार्यों तक में इनकी उपयोगिता बढ़ती जा रही है। इसलिए ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स आज युवाओं के लिए उभरते हुए कैरियर क्षेत्रों में शामिल हो चुका है।

सामान्य औद्योगिक रोबोट किसी एक निश्चित कार्य के लिए बनाए जाते हैं, जबकि ह्यूमनॉइड रोबोट का स्वरूप और कार्यप्रणाली काफी हद तक मनुष्य जैसी होती है। इनमें कैमरे, सेंसर, मोटर, एक्ट्यूएटर और अत्याधुनिक नियंत्रण प्रणाली लगी होती है, जो इन्हें अपने आसपास के वातावरण का आकलन कर उचित प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाती है।

आने वाले वर्षों में उद्योगों और सेवाओं के अनेक क्षेत्रों में ऐसे विशेषज्ञों की मांग बढ़ने की संभावना है, जो बुद्धिमान रोबोट विकसित करने, उन्हें प्रोग्राम करने और वास्तविक परिस्थितियों में कार्य करने योग्य बनाने का कौशल रखते हों।

ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स में कैरियर बनाने के लिए 12वीं के बाद सही विषयों का चयन और मजबूत तकनीकी आधार सफलता की सीढ़ी माना जाता है। यदि विद्यार्थी ने 12वीं में भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित विषयों का अध्ययन किया है, तो उसके सामने इस क्षेत्र में प्रवेश के अनेक विकल्प होते हैं। वह मैकेनिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, मेकाट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अथवा रोबोटिक्स से जुड़े स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश ले सकता है।

अनेक उच्च शिक्षण संस्थानों ने बी.टेक. इन रोबोटिक्स, रोबोटिक्स एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मेकाट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग तथा ऑटोमेशन जैसे विशेष पाठ्यक्रम भी प्रारंभ किए हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी मूल इंजीनियरिंग शाखा में मजबूत आधार बनाकर बाद में रोबोटिक्स में विशेषज्ञता प्राप्त करना भी समान रूप से प्रभावी है। देश के अनेक प्रतिष्ठित संस्थान रोबोटिक्स और संबंधित क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT), भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) तथा कई प्रमुख निजी विश्वविद्यालयों में रोबोटिक्स, एआई, मेकाट्रॉनिक्स और एम्बेडेड सिस्टम्स से जुड़े पाठ्यक्रम एवं शोध की सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

स्नातक स्तर पर प्रवेश के लिए प्रायः जेईई मेन्स और जेईई एडवांस्ड जैसी परीक्षाएं महत्वपूर्ण होती हैं। कई निजी विश्वविद्यालय अपनी प्रवेश परीक्षा या मेरिट के आधार पर भी प्रवेश देते हैं।

केवल डिग्री प्राप्त कर लेना ही पर्याप्त नहीं है। रोबोटिक्स ऐसा क्षेत्र है जहाँ प्रयोगात्मक कार्य का विशेष महत्व है। पढ़ाई के साथ-साथ छोटे-छोटे रोबोट बनाना, इलेक्ट्रॉनिक किट्स पर कार्य करना, सेंसर और माइक्रोकंट्रोलर के प्रयोग करना तथा प्रोग्रामिंग का अभ्यास करना विद्यार्थियों को दूसरों से अलग पहचान दिलाता है। उद्योग ऐसे युवाओं को अधिक महत्व देता है, जो तकनीकी ज्ञान के साथ वास्तविक समस्याओं का समाधान करने की क्षमता भी रखते हों। अंग्रेज़ी भाषा, गणितीय सोच, समस्या समाधान की क्षमता और टीम के साथ काम करने की आदत भी जरूरी हैं। विद्यार्थियों को प्रोग्रामिंग पर अच्छी पकड़ बनानी चाहिए। एल्गोरिद्म विकसित करने में प़ॉयथान और C++ जैसी भाषाओं का व्यापक उपयोग होता है। कंप्यूटर विज़न, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का ज्ञान भी महत्वपूर्ण होता है। इसके साथ ही एम्बेडेड सिस्टम, माइक्रो कंट्रोलर, सेंसर, मोटर और नियंत्रण प्रणालियों की कार्यप्रणाली समझनी चाहिए। उच्च अध्ययन या शोध की योजना बनाने वाले विद्यार्थियों के लिए रोबोट ऑपरेटिंग सिस्टम का प्रारंभिक ज्ञान उपयोगी माना जाता है। रोबोटिक्स प्रतियोगिताएं, हैकाथॉन, तकनीकी कार्यशालाएं और इंटर्नशिप विद्यार्थियों को उद्योग की वास्तविक आवश्यकताओं से परिचित कराती हैं।

ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स अब प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रह गई है। दुनिया की अनेक प्रौद्योगिकी कंपनियां ऐसे रोबोट विकसित कर रही हैं, जो उद्योगों, अस्पतालों, गोदामों, कार्यालयों, होटलों, वृद्धजन देखभाल केंद्रों और आपदा प्रभावित क्षेत्रों में मनुष्य के सहयोगी के रूप में कार्य कर सकें। यही कारण है कि इस क्षेत्र में प्रशिक्षित विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है।

भारत भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, आटोमेशन और एडवांस्ड मैन्यूफेक्चरिंग को बढ़ावा मिलने से रोबोटिक्स इंजीनियरों, एम्बेडेड सिस्टम विशेषज्ञों, एआई डेवलपर्स, कंप्यूटर विज़न इंजीनियरों और नियंत्रण प्रणाली विशेषज्ञों के लिए नए अवसर विकसित हो रहे हैं। रक्षा, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य सेवाओं, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े उद्योगों में भी इस क्षेत्र की उपयोगिता लगातार बढ़ रही है। स्वदेशी तकनीक विकसित करने वाले अनेक नवाचार केंद्र और स्टार्टअप युवाओं को शोध, उत्पाद विकास और उद्यमिता के अवसर प्रदान कर रहे हैं।

रोजगार की दृष्टि से इस क्षेत्र में वेतन व्यक्ति की योग्यता, संस्थान, कौशल और अनुभव पर निर्भर करता है। यदि विद्यार्थी पढ़ाई के दौरान अच्छे प्रोजेक्ट, इंटर्नशिप और तकनीकी कौशल विकसित कर ले, तो उसके लिए देश और विदेश—दोनों स्थानों पर आकर्षक अवसर उपलब्ध हो सकते हैं। इस क्षेत्र में न्यूनतम वेतन 2 लाख रुपये से लेकर ढाई लाख रुपये तक है।

यदि आप अभी विद्यालय या महाविद्यालय में अध्ययन कर रहे हैं, तो आज से ही गणित, प्रोग्रामिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बुनियादी समझ विकसित करना प्रारंभ करें। छोटे—छोटे प्रोजेक्ट बनाइए, रोबोटिक्स प्रतियोगिताओं में भाग लीजिए, नई तकनीकों के बारे में पढ़िए और प्रयोग करने की आदत डालिए। यही अनुभव आगे चलकर आपकी सबसे बड़ी पूंजी बनेगा।

ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स केवल एक नया कैरियर नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीकी क्रांति का महत्वपूर्ण आधार बनती जा रही है। आने वाले वर्षों में ऐसे विशेषज्ञों की आवश्यकता बढ़ेगी, जो मशीनों को केवल काम करना ही नहीं, बल्कि परिस्थितियों को समझकर बुद्धिमानी से निर्णय लेना भी सिखा सकें। यदि किसी विद्यार्थी में जिज्ञासा, वैज्ञानिक सोच और नई तकनीकों के साथ आगे बढ़ने का उत्साह है, तो ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स उसके लिए एक उज्ज्वल और चुनौतीपूर्ण कैरियर सिद्ध हो सकता है।
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Theme:
"शांतिपूर्ण भविष्य का निर्माण: मानवाधिकारों, विकास और सुरक्षा के लिए प्रेस स्वतंत्रता को बढ़ावा देना"
(Shaping a Future at Peace: Promoting Press Freedom for Human Rights, Development, and Security)

इसकी शुरुआत 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा की गई थी ताकि प्रेस की आजादी के महत्व को समझाया जा सके।

प्रेस को लोकतंत्र का 'चौथा स्तंभ' (Fourth Estate) कहा जाता है, जो समाज के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करता है।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पत्रकारों को बिना किसी डर, सेंसरशिप या निगरानी के काम करने का सुरक्षित माहौल मिले, ताकि लोकतंत्र का यह चौथा स्तंभ मजबूती से खड़ा
रहे

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बोर्ड ऑफ ( मोहताज) पीस
अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने जिस ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (शांति बोर्ड) की स्थापना का प्रयास किया है, उसमें अभी तक वे 19 देश शामिल हुए हैं, जो अमरीका की चापलूसी करने को बाध्य हैं। अलग-अलग कारणों से अमरीका के मोहताज हैं। अमरीका ही उन्हें सुरक्षा की गारंटी देता है और वह ही आर्थिक मदद करता है। उन 19 में से 12 देश इस्लामिक हैं। उनमें पाकिस्तान ने भी ‘शांति बोर्ड’ की सदस्यता के लिए दस्तखत किए हैं। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने जब प्रारूप पर दस्तखत किए, तो सीडीएफ आसिम मुनीर भी सामने बैठे थे। अब इस फैसले के खिलाफ पाकिस्तान में ‘जेहाद’ के नारे बुलंद किए जा रहे हैं। इसके कुछ खास कारण हैं।
पाकिस्तान अभी तक इजरायल को एक देश के तौर पर मान्यता नहीं देता। वह फिलिस्तीन का समर्थक रहा है, लेकिन अब पाकिस्तान के 4000 फौजियों को गाजा क्षेत्र में इजरायल सेना के नेतृत्व में काम करना पड़ेगा। ट्रिगर इजरायल के हाथ में होगा और लडऩे-मरने वाले मुस्लिम फौजी होंगे। पाकिस्तान के मुस्लिम फौजियों को फिलिस्तीन, गाजा, हमास के मुसलमानों पर ही गोली चलानी पड़ेगी। जाहिर है कि मुसलमान ही मुसलमान का कत्ल करेगा! अहम और बुनियादी कारण यह है कि इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संसद को विश्वास में क्यों नहीं लिया? संसद की इजाजत के बिना इतना अहम फैसला कैसे ले लिया गया कि पाकिस्तान के 4000 फौजी गाजा में सक्रिय रहेंगे। उन्हें जो 1000 डॉलर प्रति का मेहनताना मिलेगा, वह 40 लाख डॉलर की राशि सीडीएफ आसिम मुनीर हासिल करेगा। फौजियों को जो देना होगा, वह हुकूमत तय करेगी। फौजी की मौत के बाद पर्याप्त मुआवजा और सम्मान राशि कितनी होगी और कौन देगा, यह अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। उस पर भी मुनीर की ‘डकैत निगाहें’ होंगी! पाकिस्तान में कट्टरपंथी जमात इसे ‘इस्लाम-विरोधी’ और ‘अल्लाह-विरोधी’ फैसला करार दे रही है।
खासकर सीडीएफ मुनीर के खिलाफ फतवे जारी किए जा रहे हैं। अवाम का मानना है कि शहबाज-मुनीर ने राष्ट्रपति टं्रप के सामने दंडवत आत्मसमर्पण कर दिया है, क्योंकि पाकिस्तान को पैसा चाहिए। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात जैसे मुस्लिम देशों ने पाकिस्तान को कर्ज देने से इंकार कर दिया है। चीन अपने उधार दिए गए कर्ज को वापस मांग रहा है। यदि आईएमएफ और विश्व बैंक से आर्थिक पैकेज की अपेक्षा करनी है,तो अमरीका ही एकमात्र सहारा है। राष्ट्रपति टं्रप के इशारे पर ही पाकिस्तान को नया कर्ज मिल सकता है। पाकिस्तान पर फिलहाल 130 अरब डॉलर के करीब का कर्ज है। पाकिस्तान के हरेक नागरिक पर औसतन 3,63,831 पाक रुपए का कर्ज है। करीब 60 फीसदी अवाम गरीबी-रेखा के नीचे जीने को विवश है। भारत से करीब 25 गुना अधिक महंगाई पाकिस्तान में है। अवाम में जेहाद के नारों के साथ ‘मुनीर की वर्दी उतारने’ के नारे भी गूंज रहे हैं। ‘तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान’ सरीखा संगठन भडक़ उठा है और आत्मघाती हमलों की धमकियां दे रहा है। फिलहाल ‘शांति बोर्ड’ की सदस्यता निशुल्क है, लेकिन स्थायी सदस्यता के लिए 1 अरब डॉलर की फीस अदा करनी होगी। भारत की मौजूदा मौद्रिक स्थिति के मुताबिक, यह राशि 9100 करोड़ रुपए से अधिक बनती है। पाकिस्तान को अधिक राशि का भुगतान करना पड़ेगा। ‘घर में नहीं दाने, अम्मा चली भुनाने’…भूखा-नंगा पाकिस्तान इतनी रकम कैसे दे पाएगा? यानी सब कुछ अस्थायी है अभी। यदि विश्व-व्यवस्था के संदर्भ में इस ‘शांति बोर्ड’ का विश्लेषण करें, तो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी और वीटोधारक सदस्य देशों में से सिर्फ अमरीका ही सदस्य है। रूस, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन समेत भारत, जर्मनी, इटली, कनाडा, नॉर्वे, डेनमार्क, स्वीडन, पराग्वे, स्लोवेनिया, तुर्किये, यूक्रेन आदि देश न तो बोर्ड से जुड़े हैं और न ही टं्रप के निमंत्रण का जवाब दे रहे हैं।

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27/01/2026

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