16/03/2026
शिवपुराण!
जब कामदेव (इच्छा और वासना के प्रतीक) ने शिवजी की समाधि भंग करने की कोशिश की, तो शिव ने अपना तीसरा नेत्र खोलकर उन्हें भस्म कर दिया। यह प्रसंग हमें जीवन के कुछ कड़े और जरूरी सबक सिखाता है - अनुशासन और इंद्रिय संयम! यह तो मात्र एक किस्सा है ऐसे कई अद्भुत स्पिरिचुअल कहानी का संग्रह है शिवमहापुराण जो हमें सिखाता है कि कैसे अपनी आंतरिक बुराइयों को जलाकर खुद को निखारा जाए और वहीँ कॉलोनी में हो रहे शिव महापुराण का आज मेरे भोले के शादी है जैसे गीतों पर डांस कर समापन कर दिया गया.
कथा पंडालों में हम घंटों बैठते हैं, लेकिन बाहर निकलते ही वही अहंकार, वही ईर्ष्या और वही क्रोध साथ ले आते हैं। हमने महादेव के दर्शन को केवल एक 'इवेंट' बना दिया है। रील बनाने और शोर मचाने के चक्कर में हम उस 'मौन' को खो रहे हैं जो शिव का असली स्वरूप है।
क्या हम अपने ग्रंथो को गहराई से समझ रहे हैं, या सिर्फ अपनी सुविधा के अनुसार उसका स्वरूप बिगाड़ रहे हैं? अगली बार जब किसी महापुराण का हिस्सा बनें, तो खुद से पूछें— क्या मेरे अंदर का कोई 'कामदेव' (बुराई) भस्म हुआ, या मैं सिर्फ शोर का हिस्सा बनकर लौट आया?
Send a message to learn more