16/06/2026
दैनिक जनलोक मंथन
विशेष संवाददाता : लखन गुरु, भोपाल
चमकती बिल्डिंग, लेकिन मरीजों के परिजन बेहाल!
काटजू अस्पताल में व्यवस्था का संकट, भीषण गर्मी में घंटों गेट के बाहर खड़े रहने को मजबूर लोग
भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और सरकारी अस्पतालों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के बड़े-बड़े दावे करती है। करोड़ों रुपये खर्च कर अस्पतालों की इमारतों को नया स्वरूप दिया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आती है। राजधानी भोपाल के कैलाशनाथ काटजू (के.एन. काटजू) शासकीय अस्पताल में मरीजों से ज्यादा उनके परिजन परेशान दिखाई दे रहे हैं।
जनलोक मंथन की पड़ताल में सामने आया कि अस्पताल की बाहरी चमक-दमक के पीछे व्यवस्थाओं की गंभीर खामियां छिपी हुई हैं। मरीजों के परिजनों को न तो पर्याप्त जानकारी मिल रही है और न ही उन्हें अस्पताल प्रबंधन से अपेक्षित सहयोग मिल रहा है।
इलाज कराने पहुंचे तो खुली व्यवस्थाओं की पोल
भोपाल निवासी डॉ. लखन गुरु अपनी पत्नी नेहा रजक का उपचार कराने के लिए के.एन. काटजू अस्पताल पहुंचे। चिकित्सकीय आवश्यकता के चलते नेहा रजक को अस्पताल में भर्ती कर लिया गया, जहां उनका इलाज जारी है। लेकिन इलाज के दौरान अस्पताल की व्यवस्थाओं ने परिवार को परेशान कर दिया।
डॉ. लखन गुरु का कहना है कि अस्पताल में पुरुष परिजनों के प्रवेश पर लगभग पूर्ण प्रतिबंध जैसा माहौल है। सुरक्षा गार्डों की तैनाती इतनी सख्त है कि मरीज के परिवार के सदस्य अपने परिजन की स्थिति जानने तक के लिए अंदर नहीं जा सकते। ऐसे में मरीज की वास्तविक स्थिति क्या है, उसका उपचार कैसे चल रहा है और डॉक्टरों की क्या सलाह है, इसकी जानकारी समय पर नहीं मिल पाती।
डॉक्टर और परिजनों के बीच संवादहीनता
अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों की सबसे बड़ी शिकायत डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ के साथ संवाद की कमी है। कई परिजनों का कहना है कि मरीज की स्थिति और उपचार संबंधी जानकारी प्राप्त करने के लिए उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी अस्पताल में मरीज और चिकित्सक के बीच जितना महत्वपूर्ण संबंध होता है, उतना ही महत्वपूर्ण मरीज के परिजनों को समय-समय पर जानकारी देना भी होता है। लेकिन यहां यह व्यवस्था कमजोर नजर आती है।
45 डिग्री तापमान में सड़क पर इंतजार
इन दिनों भोपाल में भीषण गर्मी का दौर जारी है। तापमान 44 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। इसके बावजूद अस्पताल के बाहर मरीजों के परिजनों के लिए पर्याप्त छाया, प्रतीक्षालय, शीतल पेयजल या बैठने की समुचित व्यवस्था नहीं दिखाई देती।
मरीजों के परिजन घंटों अस्पताल के मुख्य द्वार के बाहर सड़क किनारे खड़े रहने को मजबूर हैं। कई बुजुर्ग और महिलाएं धूप में बैठकर अपने परिजनों की खबर का इंतजार करती नजर आती हैं। सवाल यह है कि जब सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की बात करती है, तो मरीजों के परिजनों के लिए बुनियादी सुविधाएं क्यों उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं?
करोड़ों की बिल्डिंग, लेकिन स्टाफ की कमी बरकरार
स्वास्थ्य विभाग के जानकारों का कहना है कि प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में भवन निर्माण और सौंदर्यीकरण पर तो विशेष ध्यान दिया जा रहा है, लेकिन डॉक्टरों, नर्सों और तकनीकी कर्मचारियों की कमी अब भी बड़ी समस्या बनी हुई है।
मरीजों और परिजनों का आरोप है कि अस्पतालों में मानव संसाधन की कमी का सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। नई इमारतें बनने से व्यवस्थाएं स्वतः बेहतर नहीं हो जातीं, जब तक पर्याप्त चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ और जनसंपर्क व्यवस्था उपलब्ध न हो।
बड़ा सवाल
- क्या अस्पतालों की सुंदर इमारतें ही बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था का प्रमाण हैं?
- मरीजों के परिजनों के लिए मानवीय सुविधाओं का अभाव क्यों?
- डॉक्टर और परिजनों के बीच संवाद व्यवस्था मजबूत क्यों नहीं की जा रही?
- भीषण गर्मी में अस्पताल परिसर के बाहर प्रतीक्षालय और शेड की व्यवस्था कब होगी?
- क्या स्वास्थ्य विभाग इस समस्या पर संज्ञान लेकर सुधारात्मक कदम उठाएगा?
जनलोक मंथन की मांग
जनहित को ध्यान में रखते हुए अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि मरीजों के परिजनों के लिए छायादार प्रतीक्षालय, पेयजल, बैठने की व्यवस्था तथा मरीज की स्थिति की नियमित जानकारी देने की पारदर्शी प्रणाली विकसित की जाए। आखिर इलाज सिर्फ मरीज का नहीं, बल्कि उसके पूरे परिवार की मानसिक और सामाजिक चिंता से भी जुड़ा होता है।
Jitu Patwari
Dr Mohan Yadav Collector Bhopal