17/08/2021
जन से आशीर्वाद लेने ज्योतिरादित्य सिंधिया की यात्रा
भोपाल। भाजपा नेता और केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी मंगलवार को अपनी जन आर्शिवाद यात्रा शुरू की। देवास में मां चामुंडा के मंदिर में पूजा अर्चना के बाद शुरू हुई इस यात्रा का जगह-जगह भव्य स्वागत किया गया। देवास से शुरू हुई तीन दिनों की यात्रा शाजापुर, खरगौन और 19 अगस्त को वापस इंदौर पहुंचेगी। यात्रा के दौरान सिंधिया ने देवास जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी पलटवार करते हुए कहा है कि सिंधिया बाढ़ में अपना सबकुछ गंवा चुके ग्वालियर चंबल अंचल की जनता को उसके हाल पर छोड़कर इंदौर में अपनी राजनीति चमकाने में लगे हुए हैं, उन्हें और उनकी पार्टी को जनता से कोई सरोकार नहीं है।
जनता तक पीएम का संदेश पहुंचाना है - ज्योतिरादित्य
जनआशीर्वाद यात्रा की शुरूआत करते हुए सिंधिया ने मीडिया को भी एड्रेस किया। उन्होंने कांग्रेस को आड़े हाथ लिया और प्रदेश सरकार के विकासकार्यो की जानकारी दी। उन्होंने कहा आज प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश तेजी से विकास के रास्ते पर बढ़ रहा है और प्रदेश में सीएम शिवराज सिंह को केंद्र से हर तरह की मदद मिल रही है। इसलिए हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश देश और प्रदेश के कोने-कोने में फैलाने के लिए जनता का आशीर्वाद लेने निकले हैं।
कांग्रेस गिरगिट की तरह रंग बदलती है- सिंधिया
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि कांग्रेस गिरगिट की तरह रंग बदलती है और अफवाहें फैलाने का काम करती है। संसद चलने से रोककर प्रजातंत्र का गला घोंटा जा रहा है। कांग्रेस चाहती है कि देश में किसी का उत्थान न हो। विपक्ष और कांग्रेस पार्टी यह नहीं चाहते कि इस देश में अनुसचित जाती, जनजाती, महिला और पिछड़ा वर्ग आगे बढ़े। उन्होनें कहा कि जनता विपक्ष को 2014, 2019, और मध्यप्रदेश में हुए 28 विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में अपना संदेश दे चुकी है, लेकिन कांग्रेस इसे समझने को तैयार नहीं है। उन्होनेें कहा कि जब भी मेरा नाम आता है कांग्रेस को खुजली आती है, और ऐसा होना स्वाभाविक है। सिधिया ने कहा कि कांग्रेस की टीका टिप्पणीओं से मुझे कोई कठिनाई नहीं होती, में उनका स्वागत करता हूं। पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए सिंधिया ने कांग्रेस से सवाल किया कि जो प्रधानमंत्री ने किया, वो कांग्रेस ने 70 सालों में क्यों नहीं किया। आज भी वो किसी भी मुद्दे पर ट्वीट करती है, पूरी पार्टी सिर्फ ट्विटर तक सीमित हो गई है। इस दौरान उन्होंने अपने नागरिक उड्डयन मंत्री बनने के बाद मध्यप्रदेश को दी गई सौगातों का भी जिक्र किया।
कांग्रेस ने बताया ढ़ोंगियों की यात्रा
कांग्रेस ने भाजपा की यात्रा पॉलिटिक्स पर पलटवार करते हुए कहा है कि भाजपा आशीर्वाद यात्रा का ढोंग ना करें और प्रदेश की जनता से माफी मांगे। उसे आशीर्वाद यात्रा नहीं बल्कि क्षमा यात्रा निकालनी चाहिए। कांग्रेस प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता ने कहा कि बाढ़ से पहले से ही परेशान जनता को ठगने के लिए जनता के पैसे से मजमा लगाने से बेहतर है कि सरकार ईमानदारी से अपना काम करे और जनता को राहत पहुंचाए। भूपेंद्र गुप्ता ने कहा कि भाजपा को अपनी यात्रा के दौरान लोगों को यह भी बताना चाहिए कि कितने लोगों की दवा के अभाव में, ऑक्सीजन के अभाव में और बेड के अभाव में मौतें हुई हैं। उन्होंने मांग की कि भाजपा के नेता सिंधिया उन 32000 चयनित शिक्षकों के घर जा कर आशीर्वाद मांगे जिनके नाम पर उन्होंने सौदा करते हुए एक चलती हुई सरकार गिराई थी और अब सरकार में आते ही उनसे किनारा कर लिया।
पिछड़ा वर्ग के वोट बैंक को साधेंगे सिंधिया
जिस तरह से प्रदेश भाजपा के दिग्गज नेताओं को दरकिनार कर सिंधिया को आगे कर यात्राएं निकाले जाने की रणनीति तैयार की गई है, उसे देखते हुए यही कहा जा सकता है। पार्टी के बड़े नेता सिंधिया के साथ हैं। माना यह भी जा रहा है कि सिंधिया को आगे कर पीएम मोदी ने पिछड़ा वर्ग के बड़े वोट बैंक को साधने का जिम्मा 'महाराज' को दिया है। यही वजह है कि जन आशीर्वाद यात्रा में प्रदेश भाजपा के बड़े चेहरों को शामिल नहीं करते हुए ज्योदिरादित्य सिंधिया को बड़े चेहरे के तौर पर जगह दी गई है। यात्रा के जरिए ज्योदिरादित्य सिंधिया को उन क्षेत्रों में भेजने का प्लान तैयार किया गया है, जिनमें पिछड़ा वर्ग का अच्छा खासा वोट बैंक है।
प्रदेश की 52 फीसदी पिछड़ा वर्ग आबादी पर है फोकस
यात्रा के मार्ग और जिन क्षेत्रों से यात्रा निकलेगी उसे देखते हुए यह साफ कहा जा सकता है कि पिछड़ा वर्ग वोटर्स को बीजेपी के साथ बनाए रखने के इरादे से ही पार्टी हाईकमान ने सिंधिया को आगे किया है। यह आशीर्वाद भी उन्हीं क्षेत्रों में लेना है जहां पर पिछड़ा वर्ग वोट ज्यादा है। भाजपा इस बात को जानती है कि अगर उसे फिर से सत्ता में वापस आना है, तो उसे पिछड़ा वर्ग वोट बैंक की बहुत ज्यादा जरूरत है। सिंधिया पिछड़ा वर्ग हैं और इसी बात को देखते हुए पार्टी ने इसका फायदा उठाना शुरू कर दिया है। उनका चॉकलेटी चेहरा और महाराजा की छवि दोनों ही भीड़ जुटाई मानी जाती है। पार्टी का भी यही मानना है कि यह चेहरा जितना ज्यादा मैदान में दिखेगा, इसका जितना ज्यादा उपयोग होगा उसे वोट बैंक का उतना ही ज्यादा फायदा होगा। मध्य प्रदेश की 52 फ़ीसदी आबादी पर भाजपा का सारा फोकस है। हाल ही में केंद्र सरकार ने पिछड़ा वर्ग की सूची राज्यों को तैयार करने के अधिकार दे दिए हैं, जिसका बिल दोनों सदनों से पास हो गया है। यही वजह है कि पार्टी ने सिंधिया के चेहरे को लोगों के बीच पहुंचाने की तैयारी की है। इस जन आशीर्वाद यात्रा का फायदा पार्टी को उन क्षेत्रों में भी होगा, जहां लोकसभा और विधानसभा के उप चुनाव होने हैं।
चुनाव हारे, अब मजबूत नेता
ज्योतिरादित्य सिंधिया गुना से सांसद रह चुके हैं, हालांकि वे पिछला लोकसभा चुनाव हार गए थे। शायद यही वजह है कि वे खुद भी अपनी जमीन मजबूत करने में जुट गए हैं। जानकारों की माने तो सिंधिया पिछड़े वर्ग से आते हैं। मौजूदा दौर में पार्टी का पूरा फोकस पिछड़ा वर्ग वोट बैंक पर है। इसे देखते हुए यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि 2023 में होने वाले प्रदेश विधानसभा के चुनावों की कमान सिंधिया को मिल सकती है। गौरतलब है कि शिवराज सिंह भी पिछड़े वर्ग से आते हैं, लेकिन 2018 के चुनावों से पहले एससी,एसटी एक्ट पर मचे बवाल और चौहान के बयानों से पार्टी को ग्वालियर चम्बल में काफी सीटों का नुकसान उठाना पड़ा था। इसलिए ग्वालियर-चंबल संभाग को लेकर भाजपा काफी सतर्क है। पिछली बार आरक्षण से सुलगे ग्वालियर-चंबल में पार्टी को 13 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा था, ग्वालियर चम्बल दोनों संभागों के 8 जिलों की 34 विधानसभा सीटों से 2013 में भाजपा के पास 20 सीटें थी, जबकि 2018 के चुनाव में उसके महज 7 विधायक रह गए। 2018 के चुनावों कांग्रेस ने यहां बाजी मारी और उसके विधायकों की संख्या 12 से बढ़कर 26 विधायक हो गई। उपचुनावों में भाजपा यहां से सिंधिया समर्थकों से ही उम्मीद थी। ग्वालियर-चंबल की 16 सीटों पर उपचुनाव हुए जिसमें भाजपा को 16 में से 9 सीटें ही मिली, जबकि दूसरी जगहों की सभी 28 सीटों में भाजपा ने 19 पर कब्जा किया। वहीं कांग्रेस के खाते में सिर्फ 9 सीटें आईं। यही वजह है कि पिछड़ा वर्ग वोट बैंक को पार्टी के साथ जोड़े रखने और भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए पार्टी सिंधिया पर दांव लगाने को तैयार दिखती है। जिसका लिटमस टेस्ट आगामी उपचुनाव में हो सकता है।