19/02/2026
Female Ge***al Mutilation-FGM
FGM (फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन) का अर्थ है बिना किसी चिकित्सीय आवश्यकता के, केवल सांस्कृतिक या धार्मिक मान्यताओं के कारण स्त्री के बाहरी जननांगों को आंशिक या पूर्ण रूप से काट देना या उन्हें क्षति पहुँचाना।
सरल शब्दों में, यह स्त्री के साथ की जाने वाली एक हिंसक और अप्राकृतिक काट-छाँट है, जिसका उद्देश्य उसकी यौन इच्छाओं को दबाना और उसे सामाजिक 'शुद्धता' के मापदंडों में बांधकर रखना है।
दुनिया हर साल 6 फरवरी को "महिला जननांग विकृति के प्रति शून्य सहनशीलता का अंतर्राष्ट्रीय दिवस" (International Day of Zero Tolerance for Female Ge***al Mutilation) के रूप में मनाती है।
महिला जननांग विकृति (Female Ge***al Mutilation - FGM), जिसे आमतौर पर 'खतना' (Khatna) या 'खाफ्ज' भी कहा जाता है, एक अत्यंत गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन है। यह बिना किसी चिकित्सकीय कारण के लड़कियों और महिलाओं के जननांगों को आंशिक या पूर्ण रूप से हटाने की एक हानिकारक प्रथा है।
विश्व स्तर पर FGM की स्थिति
2026 के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 23 करोड़ (230 million) से अधिक महिलाएं और लड़कियां इस प्रथा का शिकार हो चुकी हैं।
* प्रभावित क्षेत्र: यह मुख्य रूप से अफ्रीका के 30 देशों, मध्य पूर्व और एशिया के कुछ हिस्सों में प्रचलित है। सोमालिया और गिनी जैसे देशों में इसका प्रसार 90% से भी अधिक है।
* उम्र: ज्यादातर मामलों में, लड़कियों का खतना 5 साल की उम्र से पहले कर दिया जाता है।
* संयुक्त राष्ट्र का लक्ष्य: UN ने 'सतत विकास लक्ष्यों' (SDG) के तहत 2030 तक इस कुप्रथा को पूरी तरह खत्म करने का संकल्प लिया है।
भारत में FGM की स्थिति
भारत में यह प्रथा मुख्य रूप से गुप्त रूप से चलती है। सरकार ने लंबे समय तक इसके अस्तित्व को आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया था, लेकिन सामाजिक सर्वेक्षणों ने इसकी पुष्टि की है।
* दाऊदी बोहरा समुदाय: भारत में यह प्रथा मुख्य रूप से 'दाऊदी बोहरा' समुदाय में पाई जाती है। अनुमान के अनुसार, इस समुदाय की 75% से 85% महिलाएं इस प्रक्रिया से गुजरती हैं।
* मुख्य राज्य: यह मुख्य रूप से महाराष्ट्र (खासकर मुंबई), गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और केरल के कुछ हिस्सों में देखा जाता है।
* सामाजिक विरोध: 'साहियो' (Sahiyo) और 'वी स्पीक आउट' (WeSpeakOut) जैसे संगठन भारत में इस प्रथा के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहे हैं।
कानूनी स्थिति और चुनौतियां
* कोई विशेष कानून नहीं: भारत में अभी तक FGM को रोकने के लिए कोई अलग या समर्पित कानून नहीं है।
* वर्तमान कानून: हालांकि, इसे POCSO एक्ट (बच्चों का यौन अपराधों से संरक्षण) और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं के तहत "गंभीर चोट" मानकर मुकदमा चलाया जा सकता है।
* सुप्रीम कोर्ट: 2017 में इस प्रथा पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक याचिका दायर की गई थी। मामला वर्तमान में एक बड़ी संवैधानिक पीठ के पास है, जहाँ धार्मिक स्वतंत्रता बनाम व्यक्तिगत मानवाधिकारों पर बहस जारी है।
स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव
FGM के कारण महिलाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से भारी नुकसान होता है:
* तत्काल प्रभाव: अत्यधिक रक्तस्राव, असहनीय दर्द, संक्रमण (Infection) और कभी-कभी मृत्यु।
* दीर्घकालिक प्रभाव: मूत्र संबंधी समस्याएं, यौन समस्याएं, प्रसव (Childbirth) के समय गंभीर जटिलताएं और गहरा मानसिक सदमा (Trauma)।