12/06/2026
तुम्हारे और मेरे बीच संभावनाएं अनंत थी, हम साथ हो सकते थे, या हम दूर हो सकते थे, या हो सकता है कि हम साथ न होते पर अंजान नहीं बनते यूँ हमेशा के लिए..ऐसा भी हो सकता था कि कभी मन किया तो मैं तुमसे तुम्हारा, या तुम मुझसे मेरा हाल ही जान लेतीं..या हम बस साल की किसी एक तारीख पर मिलते, साल भर की बातें करते और फिर अंजान हो जाते, ऐसा भी हो सकता था कि हम हर सप्ताह मिलते, या फिर कभी नहीं मिलते पर यूँ अलग न होते कि एक दूसरे के बारे में आजीवन कोई खबर ही न हो..
अनंत संभावनाओं के बीच एक संभावना को चुन कर जो हमने एक दूसरे पर अत्याचार किया है, क्या तुम्हें ये ठीक लगता है..? मुझे तो लगता है जैसे हमने बस अलग हो जाने की संभावना को सच में तब्दील करने के खातिर बाकी बची हुई सभी संभावनाओं की निर्मम हत्या कर दी..कम से कम हमारे बीच इतना तो रिश्ता बचाया जाना जाना चाहिए था कि अगर कभी इत्तेफ़ाक से हम किसी राह पर आमने सामने हो जायें तो हम मुस्कुरा सकें एक दूसरे को देख कर.. परंतु हमने ये तय कर लिया था कि ऐसा कभी होगा ही नहीं, यहाँ पर हमने "इत्तेफ़ाक़" जैसी संभावना का भी गला घोंट दिया..
हमने सब कुछ असंभव मान कर अलग हो जाना चुना। अलग हो जाना कोई बड़ी बात नहीं, परंतु एक दूसरे से यूँ अंजान हो जाना कि हमें कभी ये भी पता नहीं चलेगा कि हम ज़िंदा हैं या मर गए, ये सरासर ज़्यादती थी हमारे प्रेम के लिए.. मैंने सारी सीमाएं लांघी थी कभी तुम्हारे लिए तो तुमने भी अपनी जिंदगी को ताक पर रखकर मुझसे प्रेम किया था..क्या हमारा प्रेम इसी लायक था..? ऐसा अंत होना कितना दुखदाई है, वो भी तब जब हमारे पास थी अनंत संभावनाएं, बावजूद इसके हमने एक दूसरे से अंजान हो जाना चुनकर बाकी सभी संभावनाओं का गला घोंट दिया..??
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