02/02/2026
😭😭साध्वी प्रेम बाईसा की सं'दिग्ध मौ'त का मामला। चौथे दिन भी नहीं मिल पाया कोई सुराग।
साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत बनी मिस्ट्री
भास्कर को मिले कई तथ्य
सेवादार स्वीकार
रहा नाखूनों के रंग बदलने की बात
कथा वाचक साध्वी प्रेम बाईसा (23) की मौत शनिवार को चौथे दिन दिन भी पहेली ही बनी रही। अभी तक इंजेक्शन के रिएक्शन को उनकी मौत की वजह माना जा रहा है।
भास्कर ने तथ्य खंगाले तो सामने आया है कि मौत से पहले साध्वी के हाथ के नाखूनों का रंग नीला हो गया था। ऐसा ऑक्सीजन की कमी या जहर के कारण होता है। हालांकि, साध्वी को ऐसी कोई बीमारी नहीं थी, जिससे उनके शरीर में
चौथे दिन भी
नहीं मिल पाया कोई सुराग
ऑक्सीजन की कमी होती। आश्रम के सेवादार जहर की बात को भी झूठला रहे हैं, लेकिन अंतिम समय में साध्वी के पास मौजूद एक सेवादार सुरेश जरूर उनके नाखूनों का कलर बदलने की बात स्वीकार रहा है। अब जांच एजेंसियां उनकी मौजूदा यात्राओं, किन लोगों से मिली-कहां रुकी की जानकारी के साथ कॉल डिटेल खंगाल रही हैं। उनकी संपत्ति और आयकर से जुड़े दस्तावेजों को भी जांच रहे हैं। वहीं, इस मामले की जांच के लिए 11 सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया है।
मौत से पहले नीले पड़ गए थे नाखून... ऐसा ऑक्सीजन की कमी या जहर से ही संभव; यात्रा व संपत्ति दस्तावेज तक खंगाल रही एसआईटी
इंजेक्शन के बाद जोर-जोर से चीख रही थीं साध्वी... सांसें अटकने लगी थीं
साध्वी 27 जनवरी की रात को अजमेर से जोधपुर में पाल रोड आरती नगर स्थित आश्रम में आई थीं। दूसरे दिन सुबह उठी तो उनका गला खराब था। उन्होंने गला साफ करने के लिए गरारे किए और दोपहर में जुकाम खत्म करने
के लिए काढ़ा भी पिया। शाम करीब पांच बजे उन्होंने अपने सेवादार सुरेश को फोन कर कहा कि डॉक्टर (नर्सिंग कर्मी) आया है, गेट खोलना। उसने गेट खोला तो नर्सिंगकर्मी देवीसिंह थे। वे बाईसा के कमरे में गए। उस समय सुरेश वहां मौजूद नहीं था। पुलिस की पूछताछ में सुरेश ने बताया कि देवीसिंह ने शायद इंजेक्शन लगाया। वे एक-दो मिनट में वापस चले गए। उनके
सेवादार सुरेश
जाने के चार-पांच मिनट बाद ही वाईसा की जोर से चीख सुनाई दी। बाईसा के चिल्लाने पर सुरेश दौड़कर अपने कमरे से निकला तब तक वे आश्रम के मुख्यद्वार के पास आकर गिर गई। उनके पिता वीरमनाथ भी भागे। पिता ने कार स्टार्ट की और सुरेश ने साध्वी को उठाकर कार में लिटाया। रास्ते में उनकी सांसें अटकने लगी तो सुरेश ने सीपीआर देने का प्रयास भी किया। सुरेश के अनुसार बाईसा कह रही थी कि पापा मुझे न्याय दिला देना। सुरेश के अनुसार उनके हाथ के नाखून नीले नजर आ रहे थे। प्रेक्षा अस्पताल पहुंचे तो उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। वहां से सुरेश दूसरी कार में निकल गया और बाईसा की बॉडी के साथ ड्राइवर भोमाराम था। साध्वी के शव को बाड़मेर के बायतू में परेऊ मठ पर समाधि दी गई। यह उनका पैतृक गांव था।
नर्सिंगकर्मी के बैकग्राउंड की जांच होगी, अस्पताल से भी इलाज का रिकॉर्ड मांगेंगे
देवीसिंह, नर्सिंगकर्मी
साध्वी को इंजेक्शन लगाने वाला नर्सिंगकर्मी देवीसिंह मथुरादास माथुर राजकीय चिकित्सालय (एमडीएमएच) के सर्जिकल वार्ड दो में कंपाउंडर है।
पुलिस अब उसकी डिग्री व बैंक ग्राउंड की भी जांच करेगी। एसआईटी उनसे दी गई दवा, उसकी मात्रा और दवाएं कहां से लाने जैसे सवाल करेगी। कॉल डिटेल भी जांची जाएगी। पुलिस की पूछताछ में देवी सिंह ने बताया कि उसने डेक्सोना व डायनापार इंजेक्शन लगाए थे। इसके अलावा कोई दवा या इंजेक्शन नहीं दिया। मौत के वाद साध्वी के पिता ने इंजेक्शन से मौत होने का आरोप लगाया था। विशेषज्ञों के अनुसार डेक्सोना स्टेरॉयड है। हालांकि, बहुत ही ओवरडोज या कुछ मामलों में इससे मौत की आशंका होती है। शेष पेज 17
एक्सपर्ट : हृदय-दिमाग तक
ऑक्सीजन नहीं जाने देता जहर
भास्कर ने हाथ के नाखूनों का रंग नीला पड़ने के कारण जानने के लिए महात्मा गांधी अस्पताल के एक पूर्व अधीक्षक से बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि नाखूनों का रंग कुछ कारणों से बदलता है। ऑक्सीजन की कमी, निमोनिया, अस्थमा, सीओपीडी या फिर खराब पोस्चर या हृदय रोग के कारण।
सांस लेने में तकलीफ होने के पर भी ऑक्सीजन का स्तर गिरता रहता है और तत्काल उपचार नहीं मिलने पर जान का खतरा रहता है। इसके अलावा शरीर में जहर होने पर भी ऐसा होता है। जहर शरीर में पहुंचता है तो कार्बन मोनोऑक्साइड खून में हीमोग्लोबिन के साथ मिलकर ऑक्सीजन को शरीर के अंगों, विशेषकर दिमाग व हृदय तक पहुंचने से से रोकता है, जिससे नाखून नीले हो जाते हैं।