02/09/2026
बिक्रमगंज में अवैध बूचड़खानों पर चला प्रशासनिक चाबुक, लेकिन सत्ता में रहकर भी कार्रवाई में इतनी देरी क्यों?
रोहतास (बिक्रमगंज):-- रोहतास जिले के बिक्रमगंज शहर में लंबे समय से फल-फूल रहे अवैध बूचड़खानों के खिलाफ आखिरकार बुधवार को प्रशासन की नींद टूटी। अनुमंडल पदाधिकारी, स्थानीय पुलिस और नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी की संयुक्त टीम ने विभिन्न इलाकों में निरीक्षण कर अवैध बूचड़खानों को तत्काल बंद करने का कड़ा निर्देश दिया। इस प्रशासनिक कार्रवाई का स्थानीय जनता ने स्वागत किया है, लेकिन इस पूरी कवायद के पीछे कई ऐसे गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जो सत्ता व्यवस्था की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं।
यह कार्रवाई राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष और दिनारा से एनडीए (NDA) विधायक आलोक कुमार सिंह की पहल और दबाव के बाद हुई है। विधायक आलोक कुमार सिंह पिछले कई दिनों से इस मुद्दे पर मुखर थे और उन्होंने हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा सत्र में भी सदन के पटल पर इस मामले को जोरदार ढंग से उठाया था।
विधायक का कहना है, *"जनता की समस्याओं को सदन तक पहुंचाना और उनका समाधान कराना जनप्रतिनिधि का प्राथमिक दायित्व है। जनता की आवाज सदन तक और सदन की आवाज समाधान तक पहुंचाना ही हमारी प्राथमिकता है। बिक्रमगंज की जनता के हित, कानून व्यवस्था और स्वच्छ वातावरण के लिए हमारी लड़ाई जारी रहेगी।"
कार्रवाई तो हुई, लेकिन जनता के मन में गहरे सवाल
प्रशासनिक हड़कंप और विधायक की तत्परता के बीच स्थानीय लोग और राजनीतिक विश्लेषक अब सीधे सरकार और तंत्र से सवाल पूछ रहे हैं:
सत्ता में भागीदारी के बावजूद देरी क्यों? राज्य में एनडीए की सरकार है और दिनारा विधायक आलोक कुमार सिंह खुद सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा हैं। इसके बावजूद एक अवैध कारोबार को बंद कराने के लिए विधायक को बार-बार सदन से लेकर सड़कों तक गुहार क्यों लगानी पड़ी?
किसकी शह पर चल रहा था अवैध कारोबार?शहर के बीचों-बीच इतने समय से बिना अनुमति और स्वास्थ्य मानकों को दरकिनार कर अवैध बूचड़खाने चलाए जा रहे थे। क्या स्थानीय पुलिस, नगर परिषद और जिला प्रशासन को इसकी भनक नहीं थी, या फिर यह प्रशासनिक साठगांठ का नतीजा था?
समाधान या महज राजनीतिक स्टंट? स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक विधायक ने सदन में मुद्दा नहीं उठाया, तब तक अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि क्या यह प्रशासनिक सुस्ती थी या फिर चुनाव और राजनीतिक माहौल को देखते हुए रचा गया कोई प्रायोजित स्टंट?
बिक्रमगंज की जनता चाहती है कि अवैध बूचड़खानों को सिर्फ कागजों या निर्देशों तक ही बंद न रखा जाए, बल्कि धरातल पर इन्हें स्थायी रूप से सील किया जाए। अब देखना यह होगा कि बुधवार को शुरू हुई यह प्रशासनिक सख्ती आने वाले दिनों में कितनी टिक पाती है, या फिर कुछ दिनों बाद मामला ठंडा पड़ते ही यह अवैध कारोबार दोबारा पैर पसार लेगा।