09/06/2026
हिमाचल में बढ़ता नशा एक गहराती चिंता :अमर नाथ धीमान
#बिलासपुर
प्रसिद्ध शिक्षाविद, प्रमुख समाजसेवी एवं अध्यक्ष शांति सेवा समिति अमर नाथ धीमान ने कहा किदेवभूमि हिमाचल प्रदेश, अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। लेकिन, पिछले कुछ समय से एक भयावह चुनौती इस सुंदर राज्य को अपनी गिरफ्त में ले रही है – वह है नशे का बढ़ता प्रकोप। यह समस्या अब एक सामाजिक बुराई से कहीं बढ़कर एक गंभीर संकट का रूप ले चुकी है, जो हमारे युवाओं के भविष्य और राज्य की सामाजिक संरचना को खोखला कर रही है।
अमर नाथ धीमान ने कहा कि विकराल रूप लेता नशे का जाल व्यक्ति, समाज व राष्ट्र को खोखला कर रहा है,
पहले जहां चरस और अफीम जैसे पारंपरिक नशीले पदार्थों का प्रचलन सीमित था, वहीं अब 'चिट्टा' (हेरोइन) जैसे सिंथेटिक और अत्यधिक खतरनाक ड्रग्स ने अपने पैर पसार लिए हैं। राज्य के शहरी इलाकों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक, स्कूल और कॉलेज के छात्रों से लेकर दिहाड़ी मजदूरों तक, हर वर्ग इसकी चपेट में आता दिख रहा है। यह प्रवृत्ति न केवल व्यक्तियों को शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर कर रही है, बल्कि परिवारों में कलह, आर्थिक तंगी और सामाजिक विघटन का कारण भी बन रही है।
उन्होंने कहा कि इसके कारण और दुष्परिणाम समाज व राष्ट्र के लिए विध्वंसकारी हैं
नशे के बढ़ते चलन के कई कारण हैं। बेरोजगारी, आधुनिक जीवनशैली का दबाव, पारिवारिक विघटन, और आसानी से नशीले पदार्थों की उपलब्धता इसके प्रमुख कारक हैं। सोशल मीडिया और इंटरनेट के माध्यम से भी नशे से जुड़ी जानकारी और पदार्थों तक पहुंच आसान हो गई है।
इसके दुष्परिणाम बेहद भयावह हैं:
स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं: नशे के आदी लोग गंभीर बीमारियों जैसे हेपेटाइटिस, एचआईवी/एड्स और विभिन्न मानसिक विकारों से ग्रस्त हो रहे हैं।
अपराध में वृद्धि: नशे की लत को पूरा करने के लिए युवा चोरी, लूटपाट और अन्य आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त हो रहे हैं, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति भी प्रभावित हो रही है।
सामाजिक ताना-बाना प्रभावित: नशे के कारण परिवारों में टूटन आ रही है, और सामाजिक रिश्तों में गिरावट देखी जा रही है।
आर्थिक बोझ: नशे पर होने वाला खर्च व्यक्तियों और परिवारों को कर्ज के दलदल में धकेल रहा है, जिससे आर्थिक स्थिति और बदतर हो रही है।
समाधान की दिशा में सामूहिक प्रयास
इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए एक बहुआयामी और सामूहिक दृष्टिकोण अपनाना अनिवार्य है। केवल कानून प्रवर्तन एजेंसियों के दम पर इस चुनौती का सामना नहीं किया जा सकता।
जागरूकता अभियान: स्कूलों, कॉलेजों और ग्रामीण स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए। इन अभियानों में नशे के दुष्परिणामों और इसके चंगुल से निकलने के तरीकों के बारे में विस्तार से बताया जाना चाहिए।
पुलिस और प्रशासन की सख्ती: नशीले पदार्थों की तस्करी करने वालों और इसके सौदागरों पर नकेल कसने के लिए पुलिस और नारकोटिक्स विभाग को और अधिक सक्रिय होना होगा। सीमावर्ती क्षेत्रों पर कड़ी निगरानी और सूचना तंत्र को मजबूत करना भी आवश्यक है।
पुनर्वास और परामर्श केंद्र: नशे से ग्रस्त लोगों के लिए पर्याप्त संख्या में गुणवत्तापूर्ण पुनर्वास और परामर्श केंद्र स्थापित किए जाएं, जहां उन्हें उचित चिकित्सा और मानसिक सहायता मिल सके।
पारिवारिक और सामाजिक सहयोग: परिवारों को अपने बच्चों पर ध्यान देना चाहिए, उनसे खुलकर बात करनी चाहिए और उन्हें सही-गलत का फर्क समझाना चाहिए। समाज को भी नशे से प्रभावित लोगों को हेय दृष्टि से देखने के बजाय उन्हें स सहयोग और सहानुभूति प्रदान करनी चाहिए।
रोजगार के अवसर: युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए उन्हें रचनात्मक कार्यों और रोजगार के अवसरों से जोड़ना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अमर नाथ धीमान ने नशा मुक्त हिमाचल प्रदेश बनाने का संदेश देते हुए कहा कि इस नशे के चंगुल से मुक्त कराने के लिए हर नागरिक, विशेष रूप से बच्चों के माता-पिता, शिक्षक समाज, सोया से भी संस्थाएं तथा हर एक भारतीय नागरिक को को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। यह समय हाथ पर हाथ धरे बैठने का नहीं, बल्कि सक्रिय होकर इस बुराई के खिलाफ खड़े होने का है। तभी हम अपनी देवभूमि को सुरक्षित और समृद्ध भविष्य की ओर ले जा पाएंगे।