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11/08/2026

झंडूता के विधायक जीतराम कटवाल ने मछुआरों को क्लोज सीजन के दौरान दी जा रही राहत राशि को ऊंट के मुंह में जीरे के समान करार दिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री 12 अगस्त को झंडूता विधानसभा क्षेत्र में आ रहे हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार वह मत्स्य आखेट पर दो माह के प्रतिबंध के एवज में मछुआरों को 3500-3500 रुपये देंगे, लेकिन यह राहत नाकाफी है। उन्हें कम से कम 10-10 हजार रुपये की राहत राशि दी जानी चाहिए। मछुआरों की कई अन्य समस्याएं भी हैं। उनके समाधान के लिए भी प्रदेश सरकार को कदम उठाना चाहिए।
मंगलवार को झंडूता क्षेत्र में अपने आवास में पत्रकारों से बातचीत में जीतराम कटवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। इसे पूरा करने के लिए विकास की रफ्तार बढ़ाने के साथ ही हर वर्ग के हितों की रक्षा का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है। इसी कड़ी में केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मछुआरों के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। इस योजना में तालाब निर्माण व मत्स्य उत्पादन जैसे कुल 28 कंपोनेंट शामिल हैं। नाव या बोट जैसी जल परिवहन की सुविधा के लिए सब्सिडी का प्रावधान है। अनुसूचित जाति, जनजाति व महिला वर्ग के मछुआरों को 30 हजार रुपये सब्सिडी दी जा रही है। अहम बात यह है कि यह योजना 90ः10 के अनुपात में है। इसमें 90 फीसदी पैसा केंद्र सरकार देती है। राज्यों को केवल 10 फीसदी राशि वहन करनी पड़ती है। मछुआरों की आर्थिकी मजबूत करने में यह योजना बेहद कारगर साबित हो रही है। अहम बात यह है कि केंद्र की योजना प्रति मछुआरा है, जबकि प्रदेश सरकार की स्कीम परिवार आधारित है। ऐसे में प्रदेश की इस योजना से उन मछुआरा परिवारों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है, जिनके एक से अधिक सदस्य इस व्यवसाय से रोजी-रोटी कमा रहे हैं।
जीतराम कटवाल ने कहा कि बुधवार को झंडूता आगमन पर मुख्यमंत्री का स्वागत है, लेकिन 2 माह की राहत के तौर पर मछुआरों को केवल 3500-3500 रुपये देनेे को स्वागतयोग्य नहीं कहा जा सकता। हिमाचल में मछुआरों की संख्या लाखों में नहीं, बल्कि केवल कुछ हजार है। ऐसे में मुख्यमंत्री को मछुआरों को कम से कम 10-10 हजार रुपये देने की पहल करनी चाहिए। मछुआरांे की कई अन्य समस्याएं भी हैं। बाहर से आयात की जाने वाली मछली से उनका रोजगार प्रभावित होे रहा है। सोसायटियों में भाई-भतीजावाद भी ज्यादातर मछुआरों को उनके हक से वंचित रख रहा है। हिमाचल में गोविंद सागर, पौंग, कोलडैम व चमेरा जैसे कई जलाशय हैं। इसके चलते मत्स्य उत्पादन के लिए परिस्थितियां पूरी तरह से अनुकूल हैं। मत्स्य उत्पादन से जुड़े गरीब किसानों को जागरूक करके छोटे उद्यमों के लिए उनकी मदद करने की भी अत्याधिक जरूरत है। इन पहलुओं को ध्यान में रखते हुए केंद्र की तर्ज पर प्रदेश सरकार को भी एक अच्छी योजना बनानी चाहिए, ताकि मछुआरों को सही मायनों में राहत मिल सके।

 #एम्स बिलासपुर के डॉक्टरों ने रचा इतिहास, दो टुकड़ों में कटे हाथ को सफल ऑपरेशन से जोड़ा #बिलासपुर (हिमाचल प्रदेश)। एम्स...
10/08/2026

#एम्स बिलासपुर के डॉक्टरों ने रचा इतिहास, दो टुकड़ों में कटे हाथ को सफल ऑपरेशन से जोड़ा

#बिलासपुर (हिमाचल प्रदेश)। एम्स बिलासपुर के चिकित्सकों ने जटिल माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। चिकित्सकों की विशेषज्ञ टीम ने दो टुकड़ों में कटे हुए हाथ को सफल ऑपरेशन के माध्यम से जोड़ दिया।
बताया जा रहा है कि गंभीर रूप से घायल मरीज को कटे हुए हाथ के साथ अस्पताल लाया गया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सकों ने तत्काल उपचार शुरू किया और अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक एवं विशेषज्ञता का इस्तेमाल करते हुए ऑपरेशन किया।
सर्जरी के दौरान रक्त वाहिकाओं, नसों और अन्य महत्वपूर्ण ऊतकों को बेहद सावधानीपूर्वक जोड़ने का कार्य किया गया। चिकित्सकों के अथक प्रयासों के बाद ऑपरेशन सफल रहा और कटे हुए हाथ को पुनः जोड़ने में कामयाबी मिली।
एम्स बिलासपुर के चिकित्सकों की इस उपलब्धि से हिमाचल प्रदेश में जटिल चिकित्सा उपचार की सुविधाओं को लेकर लोगों का विश्वास और मजबूत हुआ है। चिकित्सा विशेषज्ञों ने इसे टीमवर्क, आधुनिक तकनीक और समय पर उपचार का बेहतरीन उदाहरण बताया है।

10/08/2026

#सावन में विश्वकर्मा मंदिर में हुआ रुद्र पूजा का आयोजन

#बिलासपुर में आर्ट ऑफ लिविंग के सौजन्य से सावन माह के पावन अवसर पर विश्वकर्मा मंदिर में रुद्र पूजा का आयोजन श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ किया गया। इस अवसर पर अभय शर्मा ने विधिवत रुद्र पूजा संपन्न करवाई, जिसमें श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया। सावन के पवित्र महीने में आयोजित इस पूजा से मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा।
अभय शर्मा ने कहा कि “रुद्र पूजा भगवान शिव की आराधना का एक अत्यंत पवित्र माध्यम है। रुद्र पूजा के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर की नकारात्मकता को दूर कर मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति की अनुभूति करता है। सावन माह में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व माना गया है और रुद्र पूजा के माध्यम से हम प्रकृति, समाज और अपने जीवन में सुख-शांति एवं मंगल की कामना करते हैं।”

10/08/2026

#बिलासपुर में 12 अगस्त को मछुआरा सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है, जिसमें प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करेंगे। यह जानकारी मत्स्य निदेशालय के निदेशक ओमकांत ठाकुर ने दी। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में प्रदेश के मछुआरों से जुड़े विभिन्न मुद्दों, उनकी समस्याओं तथा मत्स्य क्षेत्र के विकास और सरकार की योजनाओं पर चर्चा की जाएगी।

10/08/2026

बिलासपुर में नशे के सौदागरों पर पुलिस की ‘सर्जिकल स्ट्राइक

10/08/2026

हर हर भोले #शिव डाक कांवड़ हरिद्वार से बिलासपुर की ओर आते शिव भगत

       #स्वतंत्रता दिवस  #ऑफर       Grab it Today
10/08/2026



#स्वतंत्रता दिवस #ऑफर

Grab it Today

 #नाग  #पंचमी  #विशेष ''नमोस्तु सर्पेभ्यो ये के च पृथ्वीमनु। येऽ अंतरिक्षे ये दिवितेभ्य: सर्पेभ्यो नम:।।
10/08/2026

#नाग #पंचमी #विशेष

''नमोस्तु सर्पेभ्यो ये के च पृथ्वीमनु। येऽ अंतरिक्षे ये दिवितेभ्य: सर्पेभ्यो नम:।।

09/08/2026

’’जन सूचना’’
सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर “मैहला” नामक स्थान के पास पहाड़ी से पत्थर गिरने के कारण बंद किया गया मार्ग अब यातायात के लिए पुनः खोल दिया गया है।

#बिलासपुर पुलिस

दियोली कार्प फार्म की बड़ी कामयाबी, मत्स्य बीज में आत्मनिर्भरता की राह पर हिमाचलवर्षों पुरानी ‘एयर बबल’ बीमारी पर शत-प्र...
09/08/2026

दियोली कार्प फार्म की बड़ी कामयाबी, मत्स्य बीज में आत्मनिर्भरता की राह पर हिमाचल

वर्षों पुरानी ‘एयर बबल’ बीमारी पर शत-प्रतिशत काबू, अब स्थानीय स्तर पर तैयार होगा स्वस्थ और गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज

#ऊना, 9 अगस्त. वर्षों से इंडियन मेजर कार्प के प्रजनन में एक ऐसी समस्या सामने आ रही थी, जिसमें तैयार होने वाले 95 से 98 प्रतिशत तक स्पॉन नष्ट हो जाते थे। ‘एयर बबल’ बीमारी के कारण दियोली कार्प फार्म में स्वस्थ मत्स्य बीज तैयार करना बड़ी चुनौती बना हुआ था। अब इस बीमारी पर शत-प्रतिशत नियंत्रण हासिल कर लिया गया है। सीफा, भुवनेश्वर के वैज्ञानिक सहयोग, विशेष फीड, तकनीकी प्रशिक्षण और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप जल गुणवत्ता प्रबंधन में किए गए सुधारों से मिली इस सफलता ने हिमाचल में स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज तैयार करने की नई संभावना पैदा की है।

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू का प्रदेश में ब्लू इकोनॉमी को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने पर जोर है। उनके नेतृत्व में प्रदेश सरकार किसानों और मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने तथा स्थानीय संसाधनों की क्षमता मजबूत करने पर जोर दे रही है। दियोली कार्प फार्म में वर्षों पुरानी तकनीकी चुनौती का समाधान इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मत्स्य विभाग ऊना के सहायक निदेशक विवेक शर्मा ने बताया कि इस वर्ष विभाग करीब एक करोड़ स्पॉन तैयार कर 8 से 10 लाख स्वस्थ अंगुलिकाएं विकसित करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि इस सफलता का असर दियोली तक सीमित नहीं रहेगा। तैयार अंगुलिकाओं का उपयोग गोविंद सागर और पौंग डैम सहित प्रदेश के प्रमुख जलाशयों में मत्स्य संवर्धन के लिए किया जाएगा। स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध होने से बाहरी राज्यों पर निर्भरता कम होगी और इसका लाभ आगे चलकर मत्स्य पालकों तथा जलाशयों पर निर्भर मछुआरों तक पहुंचेगा।

*पहले 100 में से 95 से 98 स्पॉन हो जाते थे नष्ट*

विवेक शर्मा ने बताया कि इंडियन मेजर कार्प के प्रजनन में ‘एयर बबल’ की समस्या लंबे समय से बड़ी चुनौती थी। स्पॉन तैयार होने के बाद उनमें एक विशेष शारीरिक समस्या उत्पन्न होती थी, जिससे 95 से 98 प्रतिशत तक स्पॉन नष्ट हो जाते थे। इसका सीधा असर स्वस्थ अंगुलिकाओं के उत्पादन पर पड़ता था। यानी बड़ी संख्या में स्पॉन तैयार करने के बावजूद उनका बहुत छोटा हिस्सा ही आगे विकसित हो पाता था।

*वैज्ञानिक सहयोग से तलाशा गया समाधान*

उन्होंने बताया कि समस्या के समाधान के लिए मत्स्य विभाग ने सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेशवाटर एक्वाकल्चर (सीफा), भुवनेश्वर के साथ तकनीकी सहयोग के लिए एमओयू किया। वैज्ञानिकों की सलाह पर विशेष ‘सीफा ब्रूड फीड’ का प्रयोग शुरू किया गया। विभागीय अधिकारियों को भुवनेश्वर में आधुनिक प्रजनन तकनीकों और जल गुणवत्ता प्रबंधन का प्रशिक्षण भी दिया गया।
इसके बावजूद समस्या का पूर्ण समाधान नहीं हो पा रहा था। इस वर्ष विभाग ने दियोली की स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पानी की गुणवत्ता से जुड़े विभिन्न मानकों में आवश्यक बदलाव किए। इन तकनीकी सुधारों के बाद ‘एयर बबल’ की समस्या पर शत-प्रतिशत नियंत्रण हासिल करने और स्वस्थ स्पॉन तैयार करने में सफलता मिली।

अब विभाग इस सफलता को बड़े पैमाने पर उत्पादन में बदलने की तैयारी में है। इस वर्ष करीब एक करोड़ स्पॉन तैयार करने और उनमें से 8 से 10 लाख स्वस्थ अंगुलिकाएं विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। स्थानीय स्तर पर स्वस्थ और गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उपलब्ध होने से प्रदेश के मत्स्य पालकों को लाभ मिलेगा और बाहर से बीज मंगाने पर निर्भरता में कमी आएगी।

#दियोली से निकलेगा बीज, पहुंचेगा प्रदेश के जलाशयों तक

दियोली कार्प फार्म में मुख्य रूप से छह प्रमुख प्रजातियों का संवर्धन एवं प्रजनन किया जाता है। इनमें कॉमन कार्प, अमूर कार्प, कोई कार्प और इंडियन मेजर कार्प (आईएमसी) प्रमुख हैं। पिछले 10–15 वर्षों से फार्म में कॉमन कार्प और अमूर कार्प का प्रजनन अत्यंत सफलतापूर्वक किया जा रहा है। फार्म में सामान्य तौर पर प्रतिवर्ष करीब दो करोड़ स्पॉन तैयार किए जाते हैं। तैयार मत्स्य बीज स्थानीय किसानों और मत्स्य पालकों को उपलब्ध कराया जाता है, जबकि शेष मत्स्य बीज का उपयोग प्रदेश के प्रमुख जलाशयों में मत्स्य संवर्धन के लिए किया जाता है।

इस वर्ष तैयार की जाने वाली स्वस्थ अंगुलिकाओं को गोविंद सागर, पौंग डैम सहित प्रदेश के प्रमुख जलाशयों में स्टॉक किया जाएगा। इससे इन जलाशयों में मत्स्य संवर्धन को बढ़ावा देने का आधार और मजबूत होगा।

*बाहर से बीज मंगाने की जरूरत होगी कम*

विवेक शर्मा ने बताया कि हिमाचल अब तक मत्स्य बीज की उपलब्धता के मामले में बाहरी राज्यों पर निर्भर रहा है। गोविंद सागर और पौंग डैम जैसे बड़े जलाशयों के लिए हर साल दूसरे राज्यों से मत्स्य बीज मंगवाना पड़ता था, जिससे सरकारी खजाने पर वित्तीय बोझ पड़ता था। अब दियोली कार्प फार्म में स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उपलब्ध होने से बाहरी राज्यों पर निर्भरता कम होगी। इससे प्रदेश में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और मत्स्य बीज पर होने वाले सरकारी व्यय में भी कमी आएगी।

तैयार की जाने वाली स्वस्थ अंगुलिकाओं को गोविंद सागर, पौंग डैम सहित प्रदेश के प्रमुख जलाशयों में स्टॉक किया जाएगा। इससे जलाशयों में मछली के उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय मछुआरों को बेहतर पकड़ मिलने की संभावना बढ़ेगी। इसका सीधा लाभ उनकी आय और आजीविका पर पड़ेगा।

मत्स्य विभाग की इस सफलता से प्रदेश स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उत्पादन में स्वावलंबी बनने की दिशा में आगे बढ़ने के साथ ही इससे मत्स्य पालकों और जलाशयों पर निर्भर मछुआरों के आर्थिक उत्थान का मार्ग भी मजबूत होगा।

वर्षों पुरानी समस्या पर शत-प्रतिशत नियंत्रण हासिल करने के बाद अब विभाग का फोकस इस सफलता को लगातार बनाए रखने और निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप स्वस्थ अंगुलिकाओं का उत्पादन करने पर है। 8 से 10 लाख स्वस्थ अंगुलिकाओं का लक्ष्य हासिल होने पर प्रदेश में स्थानीय मत्स्य बीज उत्पादन की क्षमता को नई मजबूती मिलेगी।

दियोली में शुरू हुआ यह बदलाव अब फार्म की सीमाओं से आगे बढ़कर प्रदेश के जलाशयों तक पहुंचने की तैयारी में है। स्वस्थ मत्स्य बीज से मत्स्य संवर्धन मजबूत होगा और इसकी पूरी श्रृंखला का अंतिम लाभ हिमाचल के मछुआरों की आजीविका तक पहुंचेगा।

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