12/09/2025
PART 1
"शिकारी और घायल भेड़िया"
एक बार की बात है, दूर किसी जंगल के किनारे एक इंसान रहता था।
उसका जीवन शांत, सुखद और सरल था।
ना कोई चिंता, ना कोई परेशानी।
वह शिकार करता, लकड़ियाँ लाता, खाना बनाता और मज़े से जीवन जीता।
हर दिन की तरह, एक दिन वह इंसान शिकार के लिए जंगल जा रहा था।
रास्ते में उसकी नजर एक गंभीर रूप से घायल भेड़िए पर पड़ी।
भेड़िया बहुत ही दर्द में था, खून बह रहा था और वो ज़मीन पर पड़ा कराह रहा था।
उसे देखकर शिकारी का दिल पसीज गया।
उसे उस जानवर पर दया आ गई।
वह भेड़िए को अपने घर ले आया, उसे खाना दिया और मरहम पट्टी की।
कुछ समय के बाद, भेड़िया धीरे-धीरे ठीक हो गया।
फिर वह रोज़ उस इंसान के साथ शिकार पर जाने लगा।
वह शिकारी की मदद करता, जंगल में साथ रहता और फिर दोनों साथ घर लौट आते।
लेकिन धीरे-धीरे, भेड़िए का स्वभाव बदलने लगा।
उसने शिकार पर जाना बंद कर दिया।
जब इंसान उससे कुछ कहता तो वो गुर्राने लगता और डराने की कोशिश करता।
अब वो आलसी और अकड़ू हो गया था।
शिकारी को उसका व्यवहार बिल्कुल पसंद नहीं आ रहा था।
फिर इंसान ने सोचा —
"अब बहुत हो गया... इसे घर से भगाना ही पड़ेगा।"
उसे याद आया कि हर जानवर आग से डरता है।
शाम होते ही वह जंगल से लकड़ियाँ लाया और एक मशाल (मासाल) तैयार की।
उसने योजना बनाई —
खाना खाने के बाद वह भेड़िए को आग दिखाकर घर से बाहर निकालेगा।
लेकिन जैसे ही वो खाना खाकर मशाल उठाने वाला था,
पीछे से एक रहस्यमयी आवाज़ आई —
“ए इंसान... सुन!”
शिकारी बुरी तरह घबरा गया।