23/04/2026
गरीबी में पाला था ,, मगर पढ़ने का बहुत जुनून था,, फटे कपड़ों में भी मुस्कुराह लेते थे,,, वो मिट्टी के घरों में सुकून बहुत था,,, घर कच्चा था पर लोग सच्चे थे,, अब समझ में आया जवानी से बचपन ही अच्छे थे। धामी ✍️
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