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09/06/2026
आप सभी सतर्क रहें।ये सभी चैन स्नेचर है, इनके बारे कुछ पता चलने पर  थाना को सूचित करिए ये लोग गोमिया चौक , स्वांग , हजारी...
07/06/2026

आप सभी सतर्क रहें।
ये सभी चैन स्नेचर है, इनके बारे कुछ पता चलने पर थाना को सूचित करिए
ये लोग गोमिया चौक , स्वांग , हजारी मोड़, स्वांग आसपास आकर रेकी करते है। बैंक से पैसा निकालने, गला का चैन, मौके पर छीन लेते है। पहचान करिए ,साथ साथ सतर्क भी रहिए।
थाना प्रभारी गोमिया

गोमिया प्रखण्ड के गोमिया- तेनुघाट मुख्य पथ अंतर्गत साड़म बाजार बस स्टैंड और सरस्वती शिशु मंदिर, साड़म पर डाॅ राममनोहर लो...
03/06/2026

गोमिया प्रखण्ड के गोमिया- तेनुघाट मुख्य पथ अंतर्गत साड़म बाजार बस स्टैंड और सरस्वती शिशु मंदिर, साड़म पर डाॅ राममनोहर लोहिया ट्रस्ट के सचिव सह झारखंड उच्च न्यायालय के अधिवक्ता श्याम कुमार डे( मुन्ना डे)के सौजन्य से विगत 27 अप्रैल 2026 से चल रही प्याऊ के व्यवस्था के बीच मंगलवार को मुन्ना डे ने अपने जन्मदिवस पर सहयोगियों की मदद से राहगीरों को मिठाई और पानी पिला कर जन्मदिन की शुभकामनाएं प्राप्त किए| ट्रस्ट के सदस्य सुखदेव डे और अजीत नारायण प्रसाद ने संयुक्त रुप से मिठाई बांटने का शुभारंभ किए|दोनों ने कहा कि मुन्ना डे का कार्य करने का अंदाज कुछ अलग ही है, वे जनसमस्याओं पर तुरंत संज्ञान लेते हैं|इस क्रम में राजेश प्रसाद, महावीर दे, संजय कुमार सिंह, कन्हाईलाल तिवारी, कमल नारायण प्रसाद, जनार्दन डे, सुशील डे,भोला ठाकुर, अजमुल खलीफा, खालिद मुर्तजा, मुस्तफा,रमण कुमार,क्षेत्रवासी सहित दुकानदार लोग उपस्थित थे|

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03/06/2026

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टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर हमले में आई चोट के इलाज और सुरक्षा हेतु झारखंड भेजने का स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने क...
31/05/2026

टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर हमले में आई चोट के इलाज और सुरक्षा हेतु झारखंड भेजने का स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने किया आग्रह

“गोमिया की राजनीति में बदल रहा सामाजिक समीकरण: छत्रुराम-माधवलाल युग के बाद समर्थकों की विरासत साधने की जंग”37 वर्षों तक ...
28/05/2026

“गोमिया की राजनीति में बदल रहा सामाजिक समीकरण: छत्रुराम-माधवलाल युग के बाद समर्थकों की विरासत साधने की जंग”

37 वर्षों तक दो ध्रुवों में बंटी रही गोमिया की राजनीति, अब 'लंबोदर' और 'योगेंद्र' अपने-अपने तरीके से पुराने जनाधार को साधने में जुटे

गोमिया विधानसभा क्षेत्र की राजनीति वर्ष 1977 से 2014 तक मुख्य रूप से दो बड़े राजनीतिक चेहरों-छत्रुराम महतो और माधवलाल सिंह के इर्द-गिर्द घूमती रही।करीब 37 वर्षों तक यही दोनों नेता गोमिया की राजनीतिक धुरी बने रहे और क्षेत्र की सामाजिक-राजनीतिक दिशा तय करते रहे। लेकिन वर्ष 2014 का विधानसभा चुनाव गोमिया की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत लेकर आया, जब योगेंद्र प्रसाद महतो ने माधवलाल सिंह को पराजित कर उस लंबे राजनीतिक किले को ढहा दिया, जो दशकों से कायम था। इसके बाद 2019 में लंबोदर महतो ने गोमिया की सत्ता पर कब्जा जमाया, जबकि 2024 में योगेंद्र महतो ने पुनः वापसी करते हुए क्षेत्र की राजनीति को फिर नई दिशा दे दी।

दो नेताओं के निधन के बाद बदली राजनीतिक सक्रियता : सहानुभूति और संवेदना की राजनीति के जरिए समर्थकों को साधने की कोशिश:

गोमिया की राजनीति में एक दिलचस्प समानता उस समय देखने को मिली, जब दोनों पुराने दिग्गज नेताओं के निधन के बाद नए नेताओं ने उनके समर्थकों के बीच अपनी सक्रियता बढ़ाई। छत्रुराम महतो के निधन के बाद लंबोदर महतो लगातार उनके परिवार, समर्थकों और सामाजिक आधार के बीच सक्रिय दिखे। उन्होंने सहानुभूति, संवेदना और सामाजिक जुड़ाव के जरिए उस राजनीतिक विरासत को साधने की कोशिश की, जिसे कभी छत्रुराम महतो प्रतिनिधित्व करते थे।

वहीं दूसरी ओर माधवलाल सिंह के निधन के बाद योगेंद्र महतो भी लगातार उनके समर्थकों, पुराने कार्यकर्ताओं और सामाजिक समूहों के बीच सक्रिय दिखाई दिए। राजनीतिक जानकार इसे गोमिया की पुरानी राजनीतिक विरासत को अपने पक्ष में करने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं।

गोमिया में सामाजिक समीकरणों की नई लड़ाई : कुड़मि बनाम बहु-सामाजिक समर्थन की पुरानी धुरी अब नए रूप में सामने

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, छत्रुराम महतो का मुख्य जनाधार कुड़मि समुदाय और भाजपा समर्थक वर्ग माना जाता था। वहीं माधवलाल सिंह की पकड़ उच्च वर्गों के साथ-साथ आदिवासी, पिछड़ा, दलित और अन्य कई समुदायों में भी मजबूत मानी जाती थी। अब यही सामाजिक समीकरण नई राजनीतिक रणनीतियों का आधार बनता दिखाई दे रहा है।

लंबोदर महतो की रणनीति :

लंबोदर महतो वर्तमान में एनडीए और आजसू के साथ मिलकर कुड़मि समुदाय तथा पारंपरिक भाजपा समर्थकों को गोलबंद करने में जुटे दिखाई दे रहे हैं।
वे छत्रुराम महतो की सामाजिक-राजनीतिक विरासत को अपने पक्ष में मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं।

योगेंद्र महतो की नई सामाजिक राजनीति :

दूसरी ओर योगेंद्र प्रसाद महतो अब केवल पारंपरिक कुड़मि समर्थन तक सीमित नहीं रहना चाहते। राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए वे आदिवासी, मुस्लिम, दलित, पिछड़ा वर्ग और उच्च वर्ग के मतदाताओं के बीच अपनी पैठ मजबूत करने में लगे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आजसू की बढ़ती सक्रियता और जयराम महतो की राजनीतिक एंट्री ने कुड़मि वोट बैंक में नया विभाजन पैदा किया है, जिसका असर झामुमो पर भी पड़ा है
इसी कड़ी में JLKM से चुनाव मैदान में उतरी पूजा महतो ने भी पिछले विधानसभा चुनाव में उल्लेखनीय प्रदर्शन कर राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दिया। उन्होंने केवल कुड़मि समाज ही नहीं, बल्कि अन्य समाज के युवाओं के बीच भी अच्छी पकड़ बनाई। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, युवा मतदाताओं में बढ़ती स्वीकार्यता का ही परिणाम था कि पूजा महतो चुनाव में तत्कालीन निर्वतमान विधायक लंबोदर महतो को पीछे छोड़ दूसरे स्थान पर रहीं, जबकि आजसू पार्टी के लंबोदर महतो तीसरे पायदान पर खिसक गए।
विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव परिणाम ने यह संकेत दिया कि गोमिया की राजनीति अब केवल पारंपरिक जातीय और दलगत समीकरणों तक सीमित नहीं रही, बल्कि युवा नेतृत्व, क्षेत्रीय पहचान और नए राजनीतिक विकल्पों की ओर भी मतदाताओं का झुकाव बढ़ रहा है। इसी वजह से अब योगेंद्र महतो बहु-सामाजिक समर्थन की राजनीति पर ज्यादा जोर देते दिखाई दे रहे हैं, जबकि दूसरी ओर लंबोदर महतो अपने पारंपरिक संगठनात्मक और सामाजिक आधार को पुनः मजबूत करने में जुटे हैं।

उच्च वर्ग और वैश्य समाज अब भी चुनौती :

हालांकि गोमिया समेत झारखंड के कई इलाकों में झामुमो की ओर उच्च वर्ग और वैश्य समाज का झुकाव परंपरागत रूप से सीमित माना जाता रहा है। फिर भी बदलते राजनीतिक समीकरणों और स्थानीय नेतृत्व की सक्रियता के कारण भविष्य में क्या नया सामाजिक गठजोड़ बनता है, इस पर राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं।
आगे की राजनीति पर सबकी नजर :
गोमिया विधानसभा क्षेत्र में अब लड़ाई केवल दलों की नहीं, बल्कि सामाजिक विरासत, पुराने जनाधार और नए समीकरणों की भी बन चुकी है।
एक ओर लंबोदर महतो छत्रुराम महतो की राजनीतिक विरासत को मजबूत करने की कोशिश में हैं, तो दूसरी ओर योगेंद्र महतो माधवलाल सिंह के बहु-सामाजिक समर्थन आधार को अपने पक्ष में जोड़ने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

वहीं JLKM और नए युवा नेतृत्व की सक्रियता ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि गोमिया की राजनीति अब त्रिकोणीय सामाजिक और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा की ओर बढ़ चुकी है। अब आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि गोमिया की जनता किस सामाजिक और राजनीतिक धुरी पर अपना भरोसा जताती है।

 #पिण्ड्राजोरा_थाना क्षेत्र के कांड्रा निवासी,  #बैंक_ऑफ_बड़ौदा गोमिया शाखा कर्मी की संदिग्ध मौ*त, बंद कमरे से मिला श*व....
27/05/2026

#पिण्ड्राजोरा_थाना क्षेत्र के कांड्रा निवासी, #बैंक_ऑफ_बड़ौदा गोमिया शाखा कर्मी की संदिग्ध मौ*त, बंद कमरे से मिला श*व. परिजनों ने जताई ह*त्या की आशंका, पुलिस हर पहलू की कर रही जांच

गोमिया स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा में कार्यरत ग्राहक सेवा सहायक 38 वर्षीय विनय कुमार सिंह चौधरी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाने से इलाके में सनसनी फैल गई। मंगलवार को उनका शव गोमिया रेलवे स्टेशन रोड स्थित किराए के मकान के बंद कमरे से बरामद किया गया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अनुमंडलीय अस्पताल तेनुघाट भेज दिया है।

मृ*तक विनय कुमार सिंह चौधरी #पिण्ड्राजोरा_थाना क्षेत्र के #कांड्रा_गांव निवासी जयदेव सिंह के पुत्र थे और गोमिया स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा में ग्राहक सेवा सहायक के पद पर कार्यरत थे।

समय पर बैंक नहीं पहुंचने पर बढ़ी चिंता

जानकारी के अनुसार मंगलवार को विनय कुमार सिंह चौधरी निर्धारित समय पर बैंक नहीं पहुंचे। बैंक शाखा प्रबंधक डालचंद कुमार महतो सहित अन्य कर्मियों ने कई बार उन्हें फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। बताया गया कि बैंक कैश की चाबी भी विनय कुमार सिंह चौधरी के पास ही रहती थी, जिससे बैंक कर्मियों की चिंता और बढ़ गई।

इसके बाद बैंक के एक कर्मचारी को उनके आवास भेजा गया, जहां कमरे का दरवाजा अंदर से बंद मिला। काफी आवाज लगाने के बावजूद अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर शाखा प्रबंधक अन्य कर्मचारियों के साथ मौके पर पहुंचे।

दरवाजा खुलते ही सामने आया दर्दनाक दृश्य

अनहोनी की आशंका के बीच जब कमरे के दरवाजे को धक्का दिया गया तो दरवाजा खुल गया। अंदर विनय कुमार सिंह चौधरी बेड पर मृत अवस्था में पड़े मिले। घटना की सूचना तत्काल मकान मालिक और गोमिया थाना पुलिस को दी गई।

सूचना मिलते ही गोमिया थाना प्रभारी प्रफुल्ल महतो, एसआई अखिलेश कुमार एवं एसआई अरुण कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू कर दी।

परिजनों ने जताई हत्या की आशंका

घटना की जानकारी मिलते ही मृतक के भाई सुख सागर सिंह चौधरी और रमेश कुमार सिंह चौधरी समेत अन्य परिजन मौके पर पहुंचे। परिजनों ने मौत को संदिग्ध बताते हुए हत्या की आशंका जताई है।

परिजनों का कहना है कि कमरे की स्थिति और शव की हालत सामान्य मौत की ओर इशारा नहीं करती। उन्होंने पुलिस से मामले की निष्पक्ष एवं गंभीर जांच कर दोषियों का पता लगाने की मांग की है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद होगा खुलासा

बेरमो एसडीपीओ रविंद्र कुमार ने बताया कि पुलिस मामले के हर पहलू की जांच कर रही है। आसपास के लोगों, मकान मालिक और बैंक कर्मियों से पूछताछ की जा रही है। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा।

किस राज्य में कितनी तारीख को पहुंचेगा मानसून
23/05/2026

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आज हमारे अभिभावक, झारखंड के पूर्व मंत्री, गोमियां के पूर्व विधायक, गरीबों के मसीहा .. गोमियां के जनताओं के शुभचिंतक.. स्...
23/05/2026

आज हमारे अभिभावक, झारखंड के पूर्व मंत्री, गोमियां के पूर्व विधायक, गरीबों के मसीहा .. गोमियां के जनताओं के शुभचिंतक.. स्व माधवलाल सिंह जी (बाबा) का आज शोक संदेश कार्ड मिला.. जिनके लिए उनके परिवार को बहुत बहुत धन्यवाद।
बाबा को भावपूर्ण श्रद्धांजलि 💐 💐
शत शत नमन 🙏 🙏 आप सब भी जरूर आइएगा।

CJP तो बना ली लेकिन 'कॉकरोच' चुनाव चिन्ह्न मिलना मुश्किल, जानें चुनाव आयोग के नियम कॉकरोच जनता पार्टी सोशल मीडिया पर तेज...
22/05/2026

CJP तो बना ली लेकिन 'कॉकरोच' चुनाव चिन्ह्न मिलना मुश्किल, जानें चुनाव आयोग के नियम

कॉकरोच जनता पार्टी सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गई है. चुनाव लड़ने के लिए पार्टी को पहले चुनाव आयोग में रजिस्ट्रेशन कराना होगा. सबसे बड़ी चुनौती इसके चुनाव चिन्ह को लेकर है, क्योंकि ECI के नियम नए पशु-आधारित प्रतीक की अनुमति नहीं देते.

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