23/05/2026
उत्पादन चाहिए, चाहे मजदूर जले या मशीन
Bermo ki awaz
अमलो परियोजना में शॉवेल राख, सीसीएल प्रबंधन पर भड़का मजदूरों का गुस्सा
सीसीएल ढोरी क्षेत्र की अमलो (AADOCM) परियोजना में 20 मई 2026 को हुई आगजनी की घटना ने प्रबंधन की कथित लापरवाही की पोल खोलकर रख दी है। करोड़ों रुपए की शॉवेल संख्या-195 धू-धू कर जलती रही और सुरक्षा व्यवस्था तमाशबीन बनी रही। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर सीसीएल प्रबंधन हादसे का इंतजार करता है या सुरक्षा का भी कोई मतलब बचा है?
राष्ट्रीय कोयला मजदूर यूनियन (हिंद मजदूर सभा) के नेता सह सेफ्टी बोर्ड सदस्य महारुद्र कुमार सिंह ने इस घटना को “प्रबंधन की घोर लापरवाही और सुरक्षा नियमों की हत्या” करार दिया है। उन्होंने डीजीएमएस धनबाद को पत्र भेजकर उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि ढोरी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह भगवान भरोसे चल रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षा समिति की बैठकें सिर्फ कागजों में होती हैं, मजदूर प्रतिनिधियों के सुझावों को कूड़ेदान में फेंक दिया जाता है और अधिकारियों का पूरा ध्यान सिर्फ उत्पादन का आंकड़ा बढ़ाने पर रहता है। मजदूर जिए या मरे, मशीन जले या बचे इससे किसी को फर्क नहीं पड़ता।
महारुद्र सिंह ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में ढोरी क्षेत्र में लगातार हादसे हो रहे हैं, लेकिन हर बार मामले को दबाकर जिम्मेदार अधिकारियों को बचा लिया जाता है। SDOCM कल्याणी परियोजना की घटना में कर्मियों की जान चली गई, फिर भी सुरक्षा व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ। अब अमलो परियोजना में करोड़ों की मशीन जल गई, लेकिन सवाल वही है जिम्मेदार कौन?
उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यदि समय रहते सुरक्षा मानकों को लागू किया गया होता, तो आज यह स्थिति नहीं बनती। लेकिन यहां मजदूरों की जान से ज्यादा उत्पादन और आंकड़ों की राजनीति को महत्व दिया जा रहा है।
यूनियन ने DGMS, कोयला मंत्रालय, कोल इंडिया चेयरमैन, CCL CMD, CVO, PMO और झारखंड CMO तक शिकायत भेजते हुए दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। मजदूर संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में आंदोलन तेज किया जाएगा और प्रबंधन की लापरवाही की फैक्ट्री आ को पूरे देश के सामने उजागर किया जाएगा।