25/02/2026
Kya sahi bola hai bhai
**एक वक्त था… जेब खाली थी, पर दिल भरा हुआ था।**
कभी खेतों में काम करते थे,
कभी गाँव की गलियों में हँसते थे।
धूप अपनी लगती थी,
और थकान भी सुकून देती थी।
शाम होते ही
पूरा परिवार एक साथ बैठ जाता था।
रोटी साधारण थी,
पर मन पूरा था।
आज सैलरी पहले से ज्यादा है,
पर चैन कम हो गया है।
घर बड़ा हो गया,
पर लोग बिखर गए।
पत्नी कहीं,
बच्चा कहीं,
माँ-बाप किसी और शहर में…
भाई भी जिम्मेदारियों में उलझ गया।
पहले कमाते कम थे,
पर साथ पूरा था।
आज कमाते ज्यादा हैं,
पर वक्त अधूरा है।
शायद पैसे बढ़ गए,
पर रिश्तों का समय घट गया।
पता नहीं वो गाँव वाली खुशी
फिर कभी मिलेगी भी या नहीं…
पर दिल आज भी वहीं अटका है —
जहाँ परिवार साथ था। 💔❤️🔥💛
सच बताइए… क्या आपको भी वो गाँव वाले दिन याद आते हैं? 💔